Description
Gardish Mein Hoon (गर्दिश में हूँ) – इस पुस्तक का उद्देश्य काल्पनिक पात्रों और कहानियों के माध्यम से इस युवा लेखक द्वारा यह बताना है कि हम बच्चों के लड़कपन और आपराधिक नियत में विभक्तिकरण करना शुरू करें। कभी-कभी हम समाज में कुछ ऐसा होते देखते हैं जो हम जानते हैं गलत है, मगर चुपचाप उसपर आखें मूँद लेते हैं। मगर एक लेखक से ऐसा नहीं हो पाता, वो उस पर आखें नहीं मूँद पाता और कहानी पिरो देता है। यहाँ युवा लेखक आयुष वेदांत ने एक ऐसी ही सच्चाई कहानी के रूप में कही है, जिसको कहने में अक्सर लोग घबराते हैं।
अपराध और अपराधी बनने ,बनाने में समाज का बहुत बड़ा योगदान होता है। इस पुस्तक मे विभिन्न काल्पनिक चरित्र और घटनाओं के माध्यम से दिखाया गया है कि कैसे एक साधारण लड़के को अपराधी बनाया जा सकता है। “लड़का है तो किया ही होगा” के सिद्धांत पर चलने वाला समाज कैसे एक आरोप पर लड़के को कठघरे में खड़ा कर देता है, इसका आत्मकथात्मक शैली में लेखक ने वर्णन किया है। इस पुस्तक को पढ़ कर आप अपने दिल के करीब पाएंगे क्योंकि यह वो कहानी है जो देखी सुनी सभी ने पर कहा कुछ नहीं।

बहुत उम्दा 👌
ऑनलाइन दुनिया ही अजीब है। अपने आस-पड़ोस, गाँव, देहात, रिश्तेदारी, दोस्ती यारी, चौक, मोहल्ले या फिर संसार के किसी भी कोने में किसी भी प्रकार के आदमी से अगर आपकी तू-तू मैं-मैं हुई हो, तो हो सकता है कि किसी खास मौके पर या वेमौके ही आपकी सुलह हो जाए, लेकिन ऑनलाइन दुनिया में सुलह एक असंभव सा वाक्य है। यहाँ की दोस्ती की कोई गारंटी नहीं लेकिन यहाँ की दुश्मनी एकदम मजबूत और गाढ़ी होती है, साल गुजर जाते लेकिन दुश्मनी जस के तस रहती है। समय-समय पर आप कोई पोस्ट करके, या किसी पोस्ट का स्क्रीनशॉट लगाकर और कुछ नहीं तो किसी और के पोस्ट पर अपने दुश्मन के ऊपर कोई विशेष टिप्पणी देकर इस दुश्मनी की आग में घी डालने का काम करते हैं।
#गर्दिश_में_हूँ….
Ayush Vedant