
Vipralabdha - -
Original price was: ₹199.₹181Current price is: ₹181. (-9%)

₹199 Original price was: ₹199.₹181Current price is: ₹181. (-9%)
Vipralabdha
महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं। अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़नेवाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ।
इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे। प्रस्तुत संग्रह में ‘दो स्मृति-चिह्न’, ‘विप्रलब्धा’, ‘शायद’, ‘ज्येष्ठा’, ‘शपथ’, ‘घंटा’, ‘के’ एवं ’पुष्पहार’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है। कलात्मक कौशल के साथ रची गई ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
| Weight | 200 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 17 × 2 cm |
| Format | पेपरबैक |
| Language | हिंदी |
| Number of Pages | 135 |
Vipralabdha
Vipralabdha
Sorry, no reviews match your current selections
महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं। अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़नेवाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ।
इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे। प्रस्तुत संग्रह में ‘दो स्मृति-चिह्न’, ‘विप्रलब्धा’, ‘शायद’, ‘ज्येष्ठा’, ‘शपथ’, ‘घंटा’, ‘के’ एवं ’पुष्पहार’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है। कलात्मक कौशल के साथ रची गई ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
| Weight | 200 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 17 × 2 cm |
| Format | पेपरबैक |
| Language | हिंदी |
| Number of Pages | 135 |
Vipralabdha
Designed and Managed by Sahaj Takneek
Reviews
There are no reviews yet