Description
Uljhan Buljhan Pyar कभी-कभी आँखों के सामने अचानक कुछ ऐसा घटित हो जाता है जो सोचने पर मजबूर कर देता है कि ऐसा आखिर हुआ क्यों? ये प्रश्न केवल मस्तिष्क में ही नहीं उठता, बल्कि कहीं न कहीं समाज और उसके बनाये रिश्तों को भी कटघरे में खड़ा कर देता है, और निर्देशित करता है कि जो है उसके बारे में पुनः सोच और व्यवहार, कर्तव्यों के निर्धारण से पहले व्यक्तियों और परिस्थितियों को भी परिभाषित करो, वरना कोई भी घुटता और पीड़ा महसूस करता हृदय विद्रोही होकर अपने रिश्तों को नकार देगा।
उलझन बुलझन प्यार की कहानी ऐसे ही एक कठोर, मगर नग्न यथार्थ का भावनात्मक और संवेदनशील तानाबाना है जिसमें रिश्तों के मध्य प्रेम और विद्रोह का उलझाव केवल जीवन को ही जटिल नहीं बनाता, बल्कि कटुताएँ बढ़ाकर जीवन में रेतीली शुष्कता भी पैदा कर देता है। कभी-कभी विश्वासों से उपजी धारणाओं के कारण भी लोग शुष्कता ओढ़ लेते हैं, किंतु भीतर रची बसी भावनाओं की नमी से भी इनकार नहीं किया जा सकता इसलिए इसमें कुछ ऐसे ही भावनात्मक और मानसिक परिवर्तनों की झलक भी दिखाई देती है।

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