‘तुम बिन’ एक मार्मिक मनोवैज्ञानिक उपन्यास है, जिसमें छोटे शहर के मध्यवर्गीय संस्कारों से लेकर दिल्ली के विश्वविद्यालयी जीवन तक का विस्तृत संसार खुलता है।
सुदामा की स्मृतियों, प्रेम, अपमान और आत्म-संघर्ष से गुजरती यह कथा उमा के साथ बिताए उन क्षणों तक पहुँचती है, जो उसके भीतर वर्षों से दबे उद्दत भावों को उजागर कर देते हैं। इन भावों में करुणा है, संकोच है, आकर्षण है, सामाजिक भय है और गहरा द्वंद्व भी।
यह केवल एक असफल प्रेम-कथा नहीं, बल्कि मित्रता, विश्वास, नैतिकता और पुरुष-मन की जटिल परतों का संवेदनशील आख्यान है। साहित्यिक संवेदनाओं और स्मृति की चमक से भरपूर यह उपन्यास प्रेम के ओझल हो जाने के बाद भी उसके बचे रहने की कथा है।
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