Description
Take 3 | टेक 3
गुजश्ता ज़िंदगी के तजुर्बों ने उसे नेक, आबिद और दीनदार शख्स से बदलकर आज एक मक्कार, चालबाज़ और फरेबी शख्स में तब्दील कर दिया था। फिर अपने किए उन्हीं गुनाहों से आजिज़ आकर जब उसने गुनाह के उस कंबल को छोड़ना चाहा, गुनाहों के उस कंबल ने उसे न छोड़ा। वो ज़िंदगी बदलना चाहता था, लेकिन ज़िंदगी अब उसे बदल रही थी।
एक ईमानदार गुनहगार शख्स की ज़िंदगी का तीसरा अध्याय, उसकी तेज रफ्तार ज़िंदगी का Take 3

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