एक रहस्यमयी आवाज… दो वीभत्स हत्याएँ… और ऐसा कातिल, जो अपने पीछे कोई निशान नहीं छोड़ता।
बीजापुर के एक प्रिंटिंग प्रेस से शुरू हुई चोरी देखते ही देखते खौफनाक हत्याओं की श्रृंखला में बदल जाती है। दूसरी ओर अजयदुर्ग की महारानी कई दिनों से रात में सुनाई देने वाली एक रहस्यमयी आवाज से आतंकित हैं।
क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है? कौन है रहस्यमयी नरोत्तम नागर? और क्यों हर सुराग मौत की ओर बढ़ता जा रहा है?
मेजर बलवंत जब इस उलझी हुई गुत्थी को सुलझाने मैदान में उतरते हैं, तो हर कदम पर एक नया रहस्य सामने आता है। लेकिन इस मामले में सबसे बड़ा सवाल है—आखिर किसका मुँह सिला हुआ है और कौन सच बोलने से डर रहा है?
‘सिले हुए होंठ’ रहस्य, रोमांच, साजिश और अप्रत्याशित खुलासों से भरपूर एक तेज-रफ्तार जासूसी उपन्यास है, जो अंत तक पाठक के अनुमान को चुनौती देता है।
एक रहस्यमयी आवाज… दो वीभत्स हत्याएँ… और ऐसा कातिल, जो अपने पीछे कोई निशान नहीं छोड़ता।
बीजापुर के एक प्रिंटिंग प्रेस से शुरू हुई चोरी देखते ही देखते खौफनाक हत्याओं की श्रृंखला में बदल जाती है। दूसरी ओर अजयदुर्ग की महारानी कई दिनों से रात में सुनाई देने वाली एक रहस्यमयी आवाज से आतंकित हैं।
क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है? कौन है रहस्यमयी नरोत्तम नागर? और क्यों हर सुराग मौत की ओर बढ़ता जा रहा है?
मेजर बलवंत जब इस उलझी हुई गुत्थी को सुलझाने मैदान में उतरते हैं, तो हर कदम पर एक नया रहस्य सामने आता है। लेकिन इस मामले में सबसे बड़ा सवाल है—आखिर किसका मुँह सिला हुआ है और कौन सच बोलने से डर रहा है?
‘सिले हुए होंठ’ रहस्य, रोमांच, साजिश और अप्रत्याशित खुलासों से भरपूर एक तेज-रफ्तार जासूसी उपन्यास है, जो अंत तक पाठक के अनुमान को चुनौती देता है।
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