Description
Shirt Ka Teesra Button | शर्ट का तीसरा बटन – मानव कौल – मैं अपने घर में थी जब मैंने ‘अपराध और दंड’ पढ़ी थी और घर छोड़ते ही मैंने ‘चित्रलेखा’ पढ़ना शुरू किया था। बहुत कोशिश के बाद भी मैं ‘अपराध और दंड’ को छोड़ नहीं पाई। मैंने उसे अपने बैग में रख लिया। बीच-बीच में ‘चित्रलेखा’ पढ़ते हुए मैं ‘अपराध और दंड’ के कुछ हिस्सों को टटोलने लगती। और तब कुछ अलग पढ़ने का मन करता, और लगता कि काश अगर चित्रलेखा एक ख़त रस्कोलनिकोव को लिख दे तो मैं इस वक़्त उस ख़त को पढ़ना चाहूँगी। मैं उस पुल पर देर तक टहलना चाहती थी जिससे ये दो अलग दुनिया जुड़ सकती थीं। (उपन्यास की भूमिका से)

मानव कौल को मैंने दूसरी बार पढ़ा है, इससे पहले ‘ ठीक तुम्हारे पीछे ‘ पढ़ी थी। इस किताब के बारे में एक लाइन में कहूँ तो ये एक ऐसी किताब है जो हर एक किशोर स्वयं की ही कथा लगेगी।। किशोरावस्था में प्रवेश करने पर कैसे मानसिक कठिनाइयों एवं उथल पुथल से गुज़र न परता है, ये किताब बखूबी बताती है। किताब के प्रारम्भ में सब कुछ काफी मजेदार और मनोरंजक होता है लेकिन धीरे धीरे ये किताब अपने मूल भाव पर पहुँचती जाती है यानी अपने शीर्षक ” शर्ट का तीसरा बटन ” पर ॥