
Shadi Vaali Raat - -
Original price was: ₹240.00.₹216.00Current price is: ₹216.00. (-10%)

₹240.00 Original price was: ₹240.00.₹216.00Current price is: ₹216.00. (-10%)
Shadi Vaali Raat
विक्रम पंडित शुभांकर डी के साथ अपने बरसो पुराने कॉलेज टाइम के एक दोस्त की बहन की शादी में गोरखपुर आए थे। रात में सब कुछ ठीक था। चारों तरफ खुशियां ही खुशियां थी। उन दोनों ने भी खूब एन्जॉय किया। पर अगली सुबह दोस्त गायब! ढूंढा तो घर से एक डेढ़ किलोमीटर दूर जंगल में स्थित खंडहर में उसकी लाश मिली। कातिल ने बड़ी बेरहमी से कत्ल किया था। उसके हाथ पैर तक तोड़ डाले थे। सर पर इतने वार किए थे कि सर के आस पास ढेर सारा खून जमा था। ऐसा लगता था कि कातिल ने चैलेंज किया हो। वह चाहता तो लाश जला सकता था कहीं छुपा सकता था पर उसने ऐसा बिल्कुल नहीं किया था। अब विक्रम पंडित के कंधों पर अपने दोस्त के कातिल को पकड़ कर सजा दिलाने की भारी जिम्मेदारी आन पड़ी थी। ऐसी सिचुएशन में वह भाग नहीं सकता था क्योंकि उसका उसूल था जंग के मैदान में दुश्मन को और बुरे वक्त में दोस्त को कभी पीठ नहीं दिखाता। अंजाम चाहे कुछ भी हो। और सबसे बड़ी दिक्कत थी कि विक्रम पंडित के पास इस मिस्ट्री को हल करने के लिए सिर्फ चार दिन थे। और केस ऐसा जटिल कि उसे ईश्वर याद आ गए।
| Weight | 200 g |
|---|---|
| Dimensions | 25 × 13 × 2 cm |
| Format | पेपरबैक |
| Language | हिंदी |
| Number of Pages | 188 |
Shadi Vaali Raat
Shadi Vaali Raat
Sorry, no reviews match your current selections
विक्रम पंडित शुभांकर डी के साथ अपने बरसो पुराने कॉलेज टाइम के एक दोस्त की बहन की शादी में गोरखपुर आए थे। रात में सब कुछ ठीक था। चारों तरफ खुशियां ही खुशियां थी। उन दोनों ने भी खूब एन्जॉय किया। पर अगली सुबह दोस्त गायब! ढूंढा तो घर से एक डेढ़ किलोमीटर दूर जंगल में स्थित खंडहर में उसकी लाश मिली। कातिल ने बड़ी बेरहमी से कत्ल किया था। उसके हाथ पैर तक तोड़ डाले थे। सर पर इतने वार किए थे कि सर के आस पास ढेर सारा खून जमा था। ऐसा लगता था कि कातिल ने चैलेंज किया हो। वह चाहता तो लाश जला सकता था कहीं छुपा सकता था पर उसने ऐसा बिल्कुल नहीं किया था। अब विक्रम पंडित के कंधों पर अपने दोस्त के कातिल को पकड़ कर सजा दिलाने की भारी जिम्मेदारी आन पड़ी थी। ऐसी सिचुएशन में वह भाग नहीं सकता था क्योंकि उसका उसूल था जंग के मैदान में दुश्मन को और बुरे वक्त में दोस्त को कभी पीठ नहीं दिखाता। अंजाम चाहे कुछ भी हो। और सबसे बड़ी दिक्कत थी कि विक्रम पंडित के पास इस मिस्ट्री को हल करने के लिए सिर्फ चार दिन थे। और केस ऐसा जटिल कि उसे ईश्वर याद आ गए।
| Weight | 200 g |
|---|---|
| Dimensions | 25 × 13 × 2 cm |
| Format | पेपरबैक |
| Language | हिंदी |
| Number of Pages | 188 |
Shadi Vaali Raat
Designed and Managed by Sahaj Takneek
Reviews
There are no reviews yet