दिल्ली के एक आलीशान होटल में एक अजीबोगरीब हत्या… और उसके सबूत इशारा करते हैं रूम नम्बर 1504 की ओर।
मामले की जाँच की जिम्मेदारी है आईपीएस अधिकारी सिद्धांत ठाकुर पर, एक बेहद कड़क, कर्तव्यनिष्ठ और सिद्धांतों पर अडिग पुलिस अधिकारी। लेकिन हत्या के सुरागों के साथ-साथ उसके सामने यह कौन है , जो अनजाने ही उसके अतीत के बंद दरवाज़ों को फिर से खोल रहा है।
जैसे-जैसे हत्या की गुत्थियाँ सुलझती जाती हैं, वैसे-वैसे सिद्धांत के अपने जीवन की उलझी हुई गाँठें भी खुलने लगती हैं। अतीत और वर्तमान की परतें एक-एक कर हटती हैं, और हर नया सच उसे एक ऐसी हकीकत के सामने खड़ा कर देता है, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
क्या यह रहस्य और रोमांच की चादर में लिपटी एक प्रेम कहानी है… या प्रेम की चाशनी में छिपी एक कत्ल की साज़िश?
Book “Room no 1504” written in such a way ,ke break dene ka mun hi nahi karta, way of writing,language, expression,related wd past life in every chapter, suspense & d depth of luv between husband & wife ,ke husband ka touch after 6 yrs.bhi pehchaan rahi hai wen she herself is not in senses, toooo gud, bahut enjoy kiya ye book padte hue,God Bless Mam Suchanda de & she must keep on writing & writing in her coming life……vl wait for her next book & vl read def.her books written earlier…….