Description
वो कांच की तरह नाजुक थी ……….तोड़ दी गई वो फूलों की तरह कोमल थी………मसल दी गई वो जिस पर बेइंतिहा विश्वास करती थी…….उसी ने उसे धोखा दिया वो जो परम भाग्यशाली थी , उसका भाग्य ही उसका दुर्भाग्य बन गया। क्या हुआ जब वो सुबह की पहली किरण सी लड़की एक यौनकुंठित हत्यारे के हत्थे चढ़ गई । फिर जन्म लिया तो फिर वही हत्यारा उसकी प्रतीक्षा में था। जन्म दर जिसका भाग्य ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन था। दो जन्मों में फैली दहशत भरी प्रेमगाथा

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