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Pani Kera Budbuda | पानी केरा बुदबुदा
टॉप मिस्ट्री राइटर
सुरेन्द्र मोहन पाठक
की आत्मकथा का चौथा खंड
उपन्यास से ज्यादा रोचक।
हर वाकया जैसे आपकी अपनी आपबीती।
लुगदी पॉकेट बुक्स के विलुप्त व्यवसाय
के कई स्याह सफेद वाकये।
लेखक के उस दौर के पाठकों से
आपका सीधा डायलॉग।
ये खंड पढ़ते वक्त लेखक कभी आप को
सुनील लगेगा, कभी सुधीर लगेगा
तो कभी विमल लगेगा।
एक अद्भुत अहसास।
आदि से अंत तक रोचक आत्मकथा खंड–4
साहित्य विमर्श प्रकाशन
की संग्रहणीय प्रस्तुति
सितारों से आगे जहाँ और भी हैं,
अभी इश्क के इम्तिहाँ और भी हैं;
तू शाहीन है परवाज़ है काम तेरा,
तिरे सामने आसमाँ और भी हैं।
| Weight | 450 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 17 × 3 cm |
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