Description
Palatwar | पलटवार
“मेरा नाम विमल है” – विमल बोला – “मैं मोहन बाबू का भाई हूँ। विमल बाबू।”
“हूँ” – मुग्धा बोली – “तुम खास मेरे से मिलने आए हो?”
“हाँ।”
“क्यों”
“मोहन बाबू की मौत की रू में मैं समझता हूँ कि डकैती के माल में उसका हिस्सा मुझे मिलना चाहिए।”
“ओहो! तो ये कहो न कि तुम मुंगेरीलाल हो और हसीन सपने देख रहे हो।”
“क्या मतलब?”
“कौन सा हिस्सा? कैसा हिस्सा? यहाँ किसके पास रखा है हिस्सा? यहाँ किसी डकैती से किसी का कोई वास्ता नहीं।”
“ये दाई से पेट छुपाने वाली बात है।”
“कोई बहुत पहुँचे हुए आदमी जान पड़ते हो।”
क्या वो पहुँचा हुआ आदमी – विमल – असल में कहीं पहुँच पाया?
क्या वो चाचा भतीजी का विश्वास जीत पाया?

Reviews
There are no reviews yet