Description
निम्फ़ोमैनियाक मूल रूप से सन् 1982 में साधना पॉकेट बुक्स, दिल्ली से प्रकाशित हुआ था। मेरे सुधी पाठक, खासतौर से सुधीर, दि ओनली वन, कोहली के शैदाई पाठक, अब भी इस उपन्यास को याद करते हैं और अक्सर इसके पुनर्प्रकाशन के लिए पुरइसरार मुझे लिखते हैं। अब जब ‘साहित्य विमर्श’ से मेरे किसी उपन्यास के पुनर्प्रकाशन की बात चली तो सर्वसम्मति से मुझे इसी उपन्यास का नाम सुझाया गया। लिहाजा उपन्यास का नया संस्करण प्रकाशित हुआ।

This novel was among my first novels. About 40 year ago
Today I found it as intresting as any new novels I’m eagerly waiting for more reprints like. 9 july ki raat. Meena murder case. Asafal abhiyaan khaali vaar
‘निम्फ़ोमैनियाक’ में उपन्यास के अलावा प्रारम्भ में कई देशों के अजीबो-गरीब कानून पढ़कर भी अच्छा लगा। पहले 100 पृष्ठ ठीक-ठीक …. मतलब एक कत्ल और सामान्य सी पुलिसिया तफ्तीश, अगले सौ पृष्ठ एक सामान्य जासूसी उपन्यास जैसा ही तथा अन्तिम 23 पृष्ठ उम्मीद से कहीं बढ़कर बेहतर।
सुधीर की शैदाइयों के लिए खास पेशकश…. बरसो से अनुपलब्ध उपन्यास आपके पेशे नजर है।
सुधीर की प्रारंभिक और निजी जिंदगी को बताता यह उपन्यास एक ऐसा उपन्यास है जो आज भी अपनी चमक बरकरार रखे हुए है।
सनसनीखेज कथानक और जबरदस्त सस्पेंस