
Maya Mari Na Man Mara - Amit Tiwari-
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Maya Mari Na Man Mara
इस पुस्तक को तीन भागों, “चदरिया झीनी रे”, “सुनो भाई साधो” और “माया का सुख चार दिन“ में विभाजित किया गया है। सम्बन्ध सुखदायक होते हैं लेकिन सुख यदि अकेले आ जाये तो वो सुख नहीं होता । सुख की पूर्णता ही दुःख से है। दोनों का समान रूप से रसास्वादन लेने के उपरान्त ही अनुभव को पूर्ण कहा जा सकता है। मैंने प्रथम भाग में उन दुखों को देखने कि कोशिश की है जो सुख या सुख कि उम्मीद से जन्म लेते हैं। सम्बन्ध के अवलोकन में सम्बन्ध कि गहराई, नजदीकी और जीवन पर उसका प्रभाव मायने रखता है। कोशिश की है कि जहाँ जहाँ मुझसे चूक हुई है या मेरी वृत्तियों ने मुझे जिन बेईमानियों कि तरफ धकेला उनका मैं आंकलन कर पाऊं और उसकी पूरी जिम्मेदारी स्वयं ले पाऊं। जैसे को तैसा देखने भर कि कोशिश ही जिम्मेदारी का पहला कदम है। मैं उस कोशिश में खरा उतरना चाहता हूँ। इस भाग में मैं एक प्रेम सम्बन्ध से लेकर वैवाहिक सम्बन्ध तक से उभरे मनोभावों का अवलोकन करने कि कोशिश की है। यह प्रश्न उठ सकता है कि, ऐसा करना जरुरी क्यूँ है? फिर इसके उत्तर में एक और प्रश्न मुस्कान लिए खड़ा होता है कि ऐसा न करना क्या खुद को छुपा लेना नहीं है ? खुद को उघाड़ देना ही तो मेरा होना है। मैं मेरे होने से कैसे बच सकता हूँ। इसीलिए तो मेरे होने को मैं इस किताब के दूसरे और तीसरे भाग तक ले गया; जहाँ मैं हर उस, चीज, जगह, पशु, पक्षी, कीट, पतंगे और इंसान से सम्बन्ध बनाता हुआ पाता हूँ जिनसे मैं सामाजिक रूप से उस सम्बन्ध के लिए कोई नाम नहीं दे सकता।
| Format | पेपरबैक |
|---|---|
| Language | हिंदी |
Maya Mari Na Man Mara
Maya Mari Na Man Mara
| 5 star | 67 | 67% |
| 4 star | 33 | 33% |
| 3 star | 0% | |
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इस पुस्तक को तीन भागों, “चदरिया झीनी रे”, “सुनो भाई साधो” और “माया का सुख चार दिन“ में विभाजित किया गया है। सम्बन्ध सुखदायक होते हैं लेकिन सुख यदि अकेले आ जाये तो वो सुख नहीं होता । सुख की पूर्णता ही दुःख से है। दोनों का समान रूप से रसास्वादन लेने के उपरान्त ही अनुभव को पूर्ण कहा जा सकता है। मैंने प्रथम भाग में उन दुखों को देखने कि कोशिश की है जो सुख या सुख कि उम्मीद से जन्म लेते हैं। सम्बन्ध के अवलोकन में सम्बन्ध कि गहराई, नजदीकी और जीवन पर उसका प्रभाव मायने रखता है। कोशिश की है कि जहाँ जहाँ मुझसे चूक हुई है या मेरी वृत्तियों ने मुझे जिन बेईमानियों कि तरफ धकेला उनका मैं आंकलन कर पाऊं और उसकी पूरी जिम्मेदारी स्वयं ले पाऊं। जैसे को तैसा देखने भर कि कोशिश ही जिम्मेदारी का पहला कदम है। मैं उस कोशिश में खरा उतरना चाहता हूँ। इस भाग में मैं एक प्रेम सम्बन्ध से लेकर वैवाहिक सम्बन्ध तक से उभरे मनोभावों का अवलोकन करने कि कोशिश की है। यह प्रश्न उठ सकता है कि, ऐसा करना जरुरी क्यूँ है? फिर इसके उत्तर में एक और प्रश्न मुस्कान लिए खड़ा होता है कि ऐसा न करना क्या खुद को छुपा लेना नहीं है ? खुद को उघाड़ देना ही तो मेरा होना है। मैं मेरे होने से कैसे बच सकता हूँ। इसीलिए तो मेरे होने को मैं इस किताब के दूसरे और तीसरे भाग तक ले गया; जहाँ मैं हर उस, चीज, जगह, पशु, पक्षी, कीट, पतंगे और इंसान से सम्बन्ध बनाता हुआ पाता हूँ जिनसे मैं सामाजिक रूप से उस सम्बन्ध के लिए कोई नाम नहीं दे सकता।
| Format | पेपरबैक |
|---|---|
| Language | हिंदी |
Maya Mari Na Man Mara

It was great experience buying the book from this site and the customer service is also great. What impressed me the most was that you personal interest to ensure that my product was delivered to me. when it became apparent that my product won’t be delivered on time due to the laziness of the delivery service then you ensured delivery of another copy to me within two days. I would definitely recommend it to others. Thank-you.
सत्या व्यास जी वैसे तो प्रेम, सामाजिक लेखन करते हैं पर पहली बार थ्रिलर उपन्यास लिखा और क्या खूब लिखा। एक लाइन में कहूं तो कमाल लिखा है। मुझ जैसे नए थ्रिलर लेखक को भी बहुत कुछ सीखने को मिला। सर को अनुराग कुमार जीनियस की ओर से बहुत बहुत शुभकामनाएं।
Customer service and delivery both are good
बढ़िया है वैसे, बस अगर किसी का नम्बर ना लगे तो whatsapp पर भी काल कर लें एक बार …
As it was my first order from the site so obviously I was expecting a early or on time delivery but the product delivered late, yes but it’s a good thing that I got notified via mail. Will shop more . Thanks