एक मासूम-सी मुलाकात… एक रहस्यमयी युवती… और ऐसा संदेश, जो सीधे मौत का बुलावा बन जाता है।
स्वतंत्रता सेनानी रघुनाथ शास्त्री की ट्रेन में राजश्री नाम की एक युवती से अचानक मुलाकात होती है। वह उनसे सिर्फ एक मदद माँगती है—एक नारी को उसके कैद से मुक्त कराने की। लेकिन अगले ही दिन राजश्री शास्त्री जी के घर मृत पाई जाती है।
मरने से पहले वह केवल दो शब्द छोड़ जाती है— “नरेन्द्र का ख्याल रखिए…”
अब सवालों की एक लंबी कतार है।
राजश्री कौन थी? नरेन्द्र कौन है? उसका हत्यारा कौन था? और क्यों हर सुराग मेजर बलवंत को मौत की ओर ले जा रहा है?
मेजर बलवंत जब इस रहस्यमयी हत्या की तह तक पहुँचते हैं, तो उन्हें एक ऐसी साजिश का सामना करना पड़ता है, जिसमें सच और झूठ की सीमाएँ मिट जाती हैं।
‘मौत का बुलावा’ रहस्य, रोमांच और अप्रत्याशित मोड़ों से भरपूर एक ऐसी कहानी है, जिसका असली रहस्य आखिरी पन्नों तक छिपा रहता है।
एक मासूम-सी मुलाकात… एक रहस्यमयी युवती… और ऐसा संदेश, जो सीधे मौत का बुलावा बन जाता है।
स्वतंत्रता सेनानी रघुनाथ शास्त्री की ट्रेन में राजश्री नाम की एक युवती से अचानक मुलाकात होती है। वह उनसे सिर्फ एक मदद माँगती है—एक नारी को उसके कैद से मुक्त कराने की। लेकिन अगले ही दिन राजश्री शास्त्री जी के घर मृत पाई जाती है।
मरने से पहले वह केवल दो शब्द छोड़ जाती है— “नरेन्द्र का ख्याल रखिए…”
अब सवालों की एक लंबी कतार है।
राजश्री कौन थी? नरेन्द्र कौन है? उसका हत्यारा कौन था? और क्यों हर सुराग मेजर बलवंत को मौत की ओर ले जा रहा है?
मेजर बलवंत जब इस रहस्यमयी हत्या की तह तक पहुँचते हैं, तो उन्हें एक ऐसी साजिश का सामना करना पड़ता है, जिसमें सच और झूठ की सीमाएँ मिट जाती हैं।
‘मौत का बुलावा’ रहस्य, रोमांच और अप्रत्याशित मोड़ों से भरपूर एक ऐसी कहानी है, जिसका असली रहस्य आखिरी पन्नों तक छिपा रहता है।
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