Description
मैं हूँ छुटकू और ये मेरी कहानी है! मैं आजकल के नए ज़माने का कुत्ता हूँ, तब भी इन लोगों ने मेरा नाम ‘सैंडी’, ‘चार्ली’ या ‘जैकी’ न रखकर ‘छुटकू’ रख दिया। इस घर के लोगों को नाम रखने का बिलकुल सेंस नहीं है। बड़कऊ-छुटकऊ, बड़ू-छोटू, बड़ेवाले-छोटेवाले, लम्बेवाले-नाटेवाले, ये सभी नाम इस ख़ानदान में मिल जाएँगे इसलिए इनसे और किसी नाम की आशा करना भी बेकार है। ख़ैर, आइये इन सब बातों से दूर, चलते हैं मेरी एक रोमांचक यात्रा पर…


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