# Kitab Lelo > A House of Used & New Books ## Posts - [रूम नंबर 1504 का राज](https://kitablelo.com/room-no-1504-excerpts/): एक हत्या की गुत्थी के पीछे, एक पुरानी मुलाकात की कहानी… — ग्यारह वर्ष पहले की बात है — सरदार बल्लभ भाई पटेल नैशनल पुलिस अकादमी, हैदराबाद। आईपीएस ऑफिसर की ट्रेनिंग के सख्त ग्यारह महीने। अनुशासन की शृंखला में बंधी दिनचर्या जो उन्हें आने वाले जीवन के लिए प्रशिक्षित करती है। सुबह 4:30 बजे के […] ## Pages - [Publishers List](https://kitablelo.com/publishers-list/) - [Authors List](https://kitablelo.com/authors-list/) - [Shop](https://kitablelo.com/shop/) - [Sahaj Reader](https://kitablelo.com/sahaj-reader/): [sahaj_reader] - [About Us](https://kitablelo.com/about-us/) - [Contact Us](https://kitablelo.com/contact-us/) - [Shipping & Delivery Policy](https://kitablelo.com/shipping-delivery-policy/) - [Terms & Condition](https://kitablelo.com/terms-condition/) - [Wishlist](https://kitablelo.com/wishlist/) - [Refund and Returns Policy](https://kitablelo.com/refund_returns/):   Overview Our refund and returns policy lasts 24 Hours. 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An anonymized string created from your email address (also called a hash) may be provided […] ## Products - [Iss Paar Main](https://kitablelo.com/iss-paar-main-rupali-nagar/): Iss Paar Main इस पार मैं - पता नही क्यों सारे भराव के बावजूद कुछ खाली-खाली-सा हमेशा साथ ही रहा मेरे। जो तमाम कोश़िश़ों के बाद भी ख़न-ख़न करने से बाज़ नही आता है। इस ख़ालीपन की आवाज़ से बेतरहा ख़ौफ आता रहा है मुझे।उससे पार पाने के लिये मैं उससे ही बातें करने लगती हूँ। शायद उसे पलटकर डराने के लिहाज़ से या शायद अपने डर से पिंड छुड़ाने की बाबत, और यहीं मैं अपनी कमजोर नस उसे थमा देती हूँ। - [Googly](https://kitablelo.com/googly-gyanesh-sahoo/): Googly गुगली - स्कूल के आखिरी और कॉलेज के शुरुआती वर्षों का यादगार और अलमस्त समय! जब स्कूल के अनुशासन से छूटे और जवानी की दहलीज़ पर खड़े छात्र अपनी आज़ादी और महत्वाकांक्षाओं की उड़ान को परखने लगते हैं। जीवन के कठोर यथार्थ से बेपरवाह ये समां होता है दोस्त बनाने का, सपने देखने का। भिलाई के एक स्कूल में पढ़ने वाले कुछ दोस्तों की ऐसी ही कहानी है गुगली। दोस्त जो एक दूसरे पर जान छिड़कते हैं और आजीवन दोस्ती की कसमें खाते हैं। सब क्रिकेट के दीवाने हैं और इनका कैलेंडर एक टैस्ट मैच से दूसरे टैस्ट मैच तक चलता है। दोस्ती और क्रिकेट के बीच पहला-पहला प्यार भी अंकुरित होता है। दोस्तों की प्रगाढ़ मित्रता, क्रिकेट के लिए जुनून, जीवन और कैरियर की जद्दोजहद, सच्चे प्यार को शिद्दत से पाने की प्रबल इच्छा को लेखक ने बहुत खूबसूरती से उकेरा है। - [Aako Baako](https://kitablelo.com/aako-baako-divya-prakash-dubey/): Aako Baako । आको-बाको - दो दोस्त, जो ढूँढ़ने चले हैं कि कविता आख़िर कहाँ से आती है। एक छोटे शहर की सुपर मॉम, जो रोज़ टीवी पर आने का सपना देखती है। भोपाल की वो लड़की, जो अब भी अपने मुंबई के पेन फ़्रेंड को हाथ से लिखी चिट्ठियाँ भेजती है। एक मॉडल, जिसका एक गाना हिट होने के बाद सब कुछ फ़्लॉप हो गया। देहरादून में रहने वाला डाकिया, जो शहर का सबसे अच्छा ऐक्टर है। लखनऊ की पुरानी हवेली में रहने वाले ज़िंदा लोग, जिनको लोगों ने भूत मानकर छोड़ दिया है। द्रौपदी, जिसने पाँच भाइयों में बँटने से मना कर दिया था। गौतम बुद्ध, जो अगर घर लौट गए होते तो क्या होता! दिव्य प्रकाश दुबे की ये 16 कहानियाँ, अलग-अलग शहरों में रहने वाले आम और ख़ास दोनों तरह के लोगों को नए शेड में दिखाने की कोशिश करती हैं। वे लोग, जो अपनी आधी-अधूरी हसरतों के साथ भी पूरे हैं। - [Ibne Batooti](https://kitablelo.com/ibne-batooti-divya-prakash-dubey/): Ibne Batooti - होता तो यह है कि बच्चे जब बड़े हो जाते है तो उनके माँ-बाप उनकी शादी कराते हैं लेकिन इस कहानी में थोड़ा-सा उल्टा है, या यूँ कह लीजिए कि पूरी कहानी ही उल्टी है। राघव अवस्थी के मन में एक बार एक उड़ता हुआ ख़याल आया कि अपनी सिंगल मम्मी के लिए एक बढ़िया-सा टिकाऊ बॉयफ्रेंड या पति खोजा जाए। राघव को यह काम जितना आसान लग रहा था, असल में वह उतना ही मुश्किल निकला। इब्नेबतूती आज की कहानी होते हुए भी एक खोए हुए, ठहरे हुए समय की कहानी है। एक लापता हुए रिश्ते की कहानी है। कुछ सुंदर शब्द कभी किसी शब्दकोश में जगह नहीं बना पाते। कुछ सुंदर लोग किसी कहानी का हिस्सा नहीं हो पाते। कुछ बातें किसी जगह दर्ज नहीं हो पातीं। कुछ रास्ते मंज़िल नहीं हो पाते। इब्नेबतूती-उन सभी अधूरी चीज़ों, चिट्ठियों, बातों, मुलाक़ातों, भावनाओं, विचारों, लोगों की कहानी है।. - [Theek Tumhare Peechhe](https://kitablelo.com/theek-tumhare-peechhe-manav-kaul/): Theek Tumhare Peechhe | ठीक तुम्हारे पीछे - मानव कौल द्वारा रचित के बहु-चर्चित कहानी संग्रह है। ठीक तुम्हारे पीछे एक ऐसा कहानी संग्रह है जिसमें हर वर्ग के लिए कहानियां मौजूद हैं. इस किताब की कहानियाँ  कुछ अलग सोचने पर मजबूर कर देती हैं.   - [Karta Ne Karm Se](https://kitablelo.com/karta-ne-karm-se-manav-kaul/): Karta Ne Karm Se । कर्ता ने कर्म से - हम जितने होते हैं वो हमें हमसे कहीं ज़्यादा दिखाती है। कभी एक गुथे पड़े जीवन को कलात्मक कर देती है तो कभी उसके कारण हमें डामर की सड़क के नीचे पगडंडियों का धड़कना सुनाई देने लगता है। वह कविता ही है जो छल को जीवन में पिरोती है और हमें पहली बार अपने ही भीतर बैठा वह व्यक्ति नज़र आता है जो समय और जगह से परे, किसी समानांतर चले आ रहे संसार का हिस्सा है। कविता वो पुल बन जाती है जिसमें हम बहुत आराम से दोनों संसार में विचरण करने लगते हैं। हमें अपनी ही दृष्टि पर यक़ीन नहीं होता, हम अपने ही नीरस संसार को अब इतने अलग और सूक्ष्म तरीक़े से देखने लगते हैं कि हर बात हमारा मनोरंजन करती नज़र आने लगती है। —मानव कौल (कर्ता ने कर्म से) - [Online Dating Approx 25:35](https://kitablelo.com/online-dating-approx-2535-rupali-nagar/): Online Dating Approx 25:35 - ऑनलाइन डेटिंग के बारे में कुछ कहें तो पहला कहना ज़रूरी होगा कि  हरेक की जिंदगी में ऐसा कुछ होना ही चाहिए कि वो जिंदगी का हिस्सा बेशक न बन पाये पर एक खुशनुमा एहसास की तरह ताउम्र साथ रह जाये। यह किताब भी उसी एक हसीन लम्हे के बारे में है जहाँ हठात दो किरदारों को एक मौज तोहफे में मिली, एक खूबसूरत खुशबूदार परफ्यूम की बोतल के रूप में, जिसे खोलते ही उनकी जिंदगानियाँ उस मादक महक से ऐसी सराबोर हुईं कि वे सुधबुध खोकर उसमें डूबने-उतराने लगे। दो जिंदगियाँ ऑनलाइन होकर रह गईं, बस यहीं से यह किताब लाइन पर आई। पढ़ते हुए अगर आखिर में आप एक लंबी साँस खींचकर इस महक को काफी देर तक के लिये अपने अंदर महफूज़ रखना चाह रहे हैं या अपनी यादों के संदूक से पुरानी परफ्यूम की शीशी निकालकर एक बार फिर उसे सूँघकर उसकी महक को महसूस करना चाह रहे हैं तो समझिये इस किताब को लिखने का लेखिका का मकसद पूरा हुआ। लेखिका की दुआ है कि हैरी-सोणियो की तरह आपके हिस्से में भी कोई परफ्यूम की शीशी जरूर आए, कुछ देर के लिये सही पर आपको भी चारों ओर बिखरे बदबूदार माहौल से निजात तो मिले - [Ulti Ganga](https://kitablelo.com/ulti-ganga-praveen-kumar-jha/): Ulti Ganga | उल्टी गंगा - चटपटे किस्सों की बयार है। प्रवीण झा किस्सागोई में कितने माहिर हैं, ये साहित्य जगत में किसी भी पढ़ने वाले से छुपा नहीं है। - [Tumne To Kaha Tha](https://kitablelo.com/tumne-to-kaha-tha/): Tumne To Kaha Tha | तुमने तो कहा था - तुमने कहा तो था प्यार, दोस्ती, कुर्बानी, शादी और परिवार के बीच उलझे गौतम, तनुश्री, रौनक और सौम्या की कहानी है। इनमें कौन क्या चुनता है? - [Dumchhalla](https://kitablelo.com/dumchhalla/): Dumchhalla "दुमछल्ला": जिंदगी भी बस ऐसी ही है जब इंसान अंदर से टूटता है तो वो अपनी बात समझाने के तरीके ढूँढने लगता है । और जब अंदर भावनाओं का ज्वार उठ रहा हो और सुनने वाला कोई न हो, तो वो खुद के लिए फैसलें लेता है । बेशक वो समाज की मान्यताओं में सही न हो लेकिन वो फिर भी अपने हक़ में फैसलें लेता है । यह कहानी है जागी आँखों से देखें जाने वाले सपनों की, उन अहसासों की, जिन्हें हम जीना चाहते हैं लेकिन जी नहीं पाते । उन अहसासों की जो जन्म तो लेते हैं लेकिन कुछ समय बाद सिकुड़ जातें हैं । दुमछल्ला कहानी है भावनाओं से भरे 6 लोगों की, जिनमें प्यार, विश्वास, अपनापन तो है लेकिन एक-दूसरे को आज़ादी देने की हिम्मत नहीं है । किसी की एक गलती उन सभी की जिंदगी को उस मोड़ तक ले जाती है, जहाँ से कुछ भी ठीक कर पाना न नहीं था । दखल किसने, किसकी जिंदगी में दिया था, कह पाना मुश्किल है । नादानी, नासमझी या अपरिपक्वता, चाहे जो भी नाम दें लेकिन सवाल तो बस आज़ादी से ही जुड़ा था । - [Shor... Antarman Ka Kolahal](https://kitablelo.com/shor-antarman-ka-kolahal/): Shor... Antarman Ka Kolahal - शोर ... अंतर्मन का कोलाहल या कहें की शून्यता, बाहर की अव्यवस्थित व्यवस्था से अलग, चिंतित मन का व्यथित लेकिन व्यवस्थित सुर है जो किसी भी इंसान को जीने की वजह भी देता है और जीने का उद्देश्य भी लेकिन आख़िर यह शोर पनपता ही क्यूँ है? कौन सही है, कौन गलत? कौन आज़ाद है, कौन क़ैद? अजीब सवालों के ऐसे बवंडर में ज़िंदगी उलझ जाती है कि हर कदम पर चौराहा आ जाता है। जब आस-पास देखते हैं तो लोग अपने लगते हैं लेकिन जब उनका हाथ पकड़ने की कोशिश करो तो ऐसा लगता है कि हाथ किसी ख्वाब से होकर गुजरा हो, एकदम खाली। उदास दिल बहुत कुछ करने की इज़ाज़त नहीं देता लेकिन वो ऐसे फैसले लेने को मजबूर कर देता है जो आप कभी लेना नहीं चाहते थे। यह कहानी कुछ ऐसे ही परिवारों की है जो साथ तो हैं लेकिन अपने बच्चों को समझने में नाकाम हो रहे हैं और कुछ बच्चे अपने माँ-बाप की परवरिश पर ही सवाल उठा रहे हैं। जिनको अपना समझकर जिम्मेदारी सौपीं वही विश्वासघात कर रहे हैं और कुछ कामयाबी के लिये कुछ भी कर गुजरने के लिये तैयार हैं। - [Andheron Ka Sangatarash](https://kitablelo.com/andheron-ka-sangatarash/): Andheron Ka Sangatarash - कौन है अँधेरों का संगतराश? क्या है उसकी बनाई मूर्तियों की खासियत? रहस्य और रोमांच से भरपूर एक पैरा नॉर्मल थ्रिलर। - [Jadugarni](https://kitablelo.com/jadugarni-surendra-mohan-pathak/): Jadugarni -अनुपमा अपने नाम को सार्थक करती थी। उसकी कोई उपमा नहीं थी। उसके बारे में सिर्फ ये कह देना काफी नहीं था कि वो इंतहाई खूबसूरत थी। वो मोनालिसा थी, क्लोपेट्रा थी, वीनस थी। वो जादूगरनी थी। वो किसी को तोता बनाकर पिंजरे में बंद कर सकती थी। मक्खी बना कर दीवार से चिपका सकती थी। अनुपम सौन्दर्य की मालकिन अनुपमा। जब इस अनुपम सौन्दर्य की जुगलबंदी उसके खतरनाक दिमाग से हुई तो जैसे कहर बरपा हो गया। क्या कोई उसके जादू से बच पाया?  ‘सुनील सीरीज’ का यादगार उपन्यास! सुरेन्द्र मोहन पाठक की करिश्माई लेखनी पूरे जलाल पर। साहित्य विमर्श प्रकाशन की गौरवशाली प्रस्तुति। - [Shirt Ka Teesra Button](https://kitablelo.com/shirt-ka-teesra-button-manav-kaul/): Shirt Ka Teesra Button  में तीन कहानियाँ एक-दूसरे से गुँथी हुई हैं। राज़ील और उसके दोस्तों की कहानी, राज़ील और ग़ज़ल के प्यार की कहानी और राजिल की माँ आशा की कहानी। - [Nain Banjare](https://kitablelo.com/nain-banjare/): Nain Banjare - बेसिम्त ज़िंदगी की धूप में प्यार के घने साए की ज़रूरत को वही समझ सकता है जो तपते सहरा में पानी की तलाश में भटक रहा हो। खो चुके प्यार की तलाश में बेचैन रूहें भटकने को मजबूर हो ही जाती हैं। उनके नैन बंजारे बने भटकते रहते हैं इधर-उधर। दिन कहीं और रात कहीं। ज़ाहिर है, प्यार की ज़मीन जब बंजर हो जाती है तो अक्सर नैन बंजारे रेगिस्तानों में भटकने लगते हैं। कहानियों के इस संग्रह नैन बंजारे में भी एक तलाश है और उस तलाश के दौरान रास्ते में मिले कुछ पड़ावों की शक्ल में कहानियाँ हैं। इन कहानियों की बुनियाद में दादा-दादी के ‘खिस्से’ ज़रूर हैं, लेकिन इनकी इमारत नई है। - [Lapujhanna](https://kitablelo.com/lapujhanna-ashok-pandey/): Lapujhanna - 1970 के दशक के उत्तरार्ध में, उत्तर भारत के एक छोटे-से क़स्बे रामनगर में बिताए गए एक बचपन का वृत्तांत है लपूझन्ना। नौ-दस साल के बच्चे की निगाह से देखी गई ज़िंदगी अपने इतने सारे देखे-अदेखे रंगों के साथ सामने आती है कि पढ़ने वाला गहरे-मीठे नॉस्टैल्जिया में डूबने-उतराने लगता है। बचपन के निश्चल खेलों, जल्लाद मास्टरों, गुलाबी रिबन पहनने वाली लड़कियों, मेले-ठेलों, पतंगबाज़ी और फ़ुटबॉल के क़िस्सों से भरपूर लपूझन्ना  भाषा और स्मृति के बीच एक अदृश्य पुल का निर्माण करने की कोशिश है। सबसे ऊपर यह उपन्यास आम आदमी के जीवन और उसकी क्षुद्रता का महिमागान है जिसके बारे में हमारे समय के बड़े कवि संजय चतुर्वेदी कहते हैं—‘रामनगर की इन कथाओं में लपूझन्ना कोई चरित्र नहीं मिलेगा। समाधि लगाकर देखिए तो लपूझन्ना कैवल्य भाव है - सैर में सैर है छोटा सा एक रामनगर और टेसन पै टिकस दिल के बराबर हैगा क़ौम-ए-आदम के लफंटर जो हिंयां रैते हैं उनके इंसान में इंसान का ग्लैमर हैगा।’ - [Ghar Wapasi](https://kitablelo.com/ghar-wapasi-ajeet-bharti/): Ghar Wapsi - घर वापसी उन विस्थापित लोगों की कहानी है जो बेहतर भविष्य के लक्ष्य का पीछा करते हुए, अपने समाज से दूर होने के बावजूद, वहाँ से पूरी तरह निकल नहीं पाते। यह कहानी बिहार-उत्तर प्रदेश आदि के गाँवों, छोटे शहरों से शिक्षा और नौकरी की तलाश में निकले युवाओं के आंतरिक और बाह्य संघर्ष की कहानी है। अपने जड़ों की एक चिंता से जूझते हुए कि मगर वो वहीं होते, तो शायद कुछ बदलाव ले आते। एक अंतर्द्वंद्व कि अपने नए परिवार, जिसमें पत्नी-बच्चे और उनका भविष्य है, को ताकूँ, या पुराने परिवार को, जिसमें माँ-बाप से लेकर समाज की भी एक वृहद् भूमिका होती है, लगातार चलता रहता है। समाज भी एक परिवार होता है, वो भी एक माँ-बाप का जोड़ा है जो आप में निवेश करता है। 'मुझे क्या बनना है' के उत्तर का पीछा करते हुए मुख्य पात्र आज के समय में एक बेहतर स्थिति में ज़रूर है लेकिन वो परिस्थितिजन्य 'बेहतरी' है। रिश्तों की गहराई और संवेदनाओं के एक वेग में घर वापसी के पात्र बहते हैं। पिता-पुत्र, पति-पत्नी, अल्पवयस्क प्रेमी-प्रेमिका, दोस्ती जैसे वैयक्तिक रिश्तों से लेकर समाज और व्यक्ति के आपसी रिश्तों की कहानी है घर वापसी। कहानी के मुख्य पात्र रवि के अवचेतन में उसी का एक हिस्सा नोचता है, खरोंचता है, चिल्लाता है.. लेकिन उसके चेतन का विस्तार, उसके वर्तमान की चमक उस छटपटाहट को बेआवाज़ बनाकर दबा देते हैं। रवि अपनी अपूर्णताओं को जीते हुए, उनसे लड़ते हुए, बचपन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर का पीछा करता रहता है कि उसे क्या बनना है। अपने वर्तमान में सामाजिक दृष्टि से 'सफल' रवि का अपने अवचेतन के सामने आने पर, खुद को लंबे रास्ते के दो छोरों को तौलते हुए पाना, और तय करना कि घर लौटूँ, या घर को लौट जाऊँ, ही घर वापसी की आत्मा है। - [Dragon's Game](https://kitablelo.com/dragons-game-ranvijay/): ड्रैगन्स गेम | Dragons Game -  जबसे इस धरा पर जीव हैं, इतिहास साक्षी है तभी से ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’ सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली सिद्धांत के रूप में लागू है। बस ‘लाठी’ और ‘भैंस’ के स्वरूप बदलते रहे हैं। वर्तमान समय में विश्व में कीमती संसाधनों पर अधिकार करने की लड़ाई जारी है। शीत युद्ध, तेल के लिए खाड़ी देशों की लड़ाई इत्यादि इसके उदाहरण हैं। पराधीनता का स्तर अब भौतिक नहीं, आर्थिक और वैचारिक हो गया है। ‘लाठी’ के रूप में है टेक्नोलॉजी और अर्थशक्ति। क्रियान्वयन का तरीका हो गया है जासूसी और गुप्त ऑपरेशन। मई, 1998 में भारत ने परमाणु विस्फोट कर सारे विश्व को स्तब्ध कर दिया था। इस घटना से सबसे ज्यादा जो बौखलाया, वह था- चीन। इसके पहले तक भूमंडल के 200 के लगभग देशों में केवल 5 सुपर पॉवर थे, अब भारत छठा हो गया था। इतना ही नहीं, एशिया के लगभग 50 देशों में अब तक केवल चीन ही सुपर पॉवर था, अब भारत भी हो गया था। 20वीं सदी के अंत तक, विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में तमाम यूरोपीय राष्ट्रों को भारी अंतर से पछाड़कर, चीन दूसरे नंबर पर आ गया था। उसके आगे अब एक ही अजेय दुर्ग बचा था, ‘अमेरिका’, जिसके पीछे वह अपनी सारी टेक्नोलॉजी और ख़ुफ़िया शक्ति लगा चुका था। अंतर कम करने के 2 तरीके होते हैं—पहला, स्वयं तेजी से बढ़ना, दूसरा, विरोधी को रोक लेना या पीछे धकेल देना। वह दोनों ही तरीके आजमा रहा था। अंतरराष्ट्रीय भू-राजनैतिक समीकरण में प्रत्यक्ष से ज्यादा खम-पेंच परोक्ष लड़ाए जाते हैं। उनका क्रियान्वयन आसान तथा किफायती होता है और उनके परिणाम भी बहुत आकर्षक होते हैं। परमाणु विस्फोट के तुरंत बाद ही चीन चेता और उसने अपना वर्चस्व बचाने के लिए छद्म रूप से भारत में ऑपरेशन आरंभ कर दिया। उसे भारत को पीछे धकेलना था। इस काम के लिए उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी ने 4 प्रशिक्षित अफ़सर भारत में प्लांट किए, जो अगले 2 दशकों तक किस तरह सांस्कृतिक, वैचारिक, राजनैतिक, धार्मिक, विज्ञान, टेक्नोलॉजी और रक्षा के कैनवास पर फैलकर, इन्हें अंदर ही अंदर कमजोर करके राष्ट्र को कमजोर करते हैं और अंत में किस तरह पकड़े जाते हैं, यह कहानी है ड्रैगन्स गेम की। - [Chandpur Ki Chanda](https://kitablelo.com/chandpur-ki-chanda-atul-kumar-ray/): चाँदपुर की चंदा - Chandpur Ki Chanda - कुछ साल पहले पिंकी और मंटू का प्रेम-पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और ऐसे वायरल हुआ कि उसे शेयर करने वालों में हाईस्कूल-इंटरमीडिएट के छात्र भी थे और यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर भी। लेकिन उस छोटे से प्रेम-पत्र के पीछे की बड़ी कहानी क्या थी, यह किसी को नहीं मालूम। क्या था उन दो प्रेमियों का संघर्ष? चाँदपुर की चंदा क्या उस मंटू और पिंकी की रोमांटिक प्रेम-कहानी भर है? नहीं, यह उपन्यास बस एक खूबसूरत, मर्मस्पर्शी वायरल प्रेम-कहानी भर नहीं है, बल्कि यह हमारे समय और हमारे समाज के कई कड़वे सवालों से टकराते हुए, हमारी ग्रामीण संस्कृति की विलुप्त होती वो झाँकी है, जो पन्ने-दर-पन्ने एक ऐसे महावृत्तांत का रूप धारण कर लेती है जिसमें हम डूबते चले जाते हैं और हँसते, गाते, रोते और मुस्कुराते हुए महसूस करते हैं। यह कहानी न सिर्फ़ हमारे अपने गाँव, गली और मोहल्ले की है, बल्कि यह कहानी हमारे समय और समाज की सबसे जरूरी कहानी भी है। - [Aughad](https://kitablelo.com/aughad-nilotpal-mrinal/): Aughad - भारतीय ग्रामीण जीवन और परिवेश की जटिलता पर लिखा गया उपन्यास है जिसमें अपने समय के भारतीय ग्रामीण-कस्बाई समाज और राजनीति की गहरी पड़ताल की गई है। एक युवा लेखक द्वारा इसमें उन पहलुओं पर बहुत बेबाकी से कलम चलाया गया है जिन पर पिछले दशक के लेखन में युवाओं की ओर से कम ही लिखा गया। औघड़ नई सदी के गाँव को नई पीढ़ी के नजरिये से देखने का गहरा प्रयास है। महानगरों में निवासते हुए ग्रामीण जीवन की ऊपरी सतह को उभारने और भदेस का छौंका मारकर लिखने की चालू शैली से अलग, यह गाँव पर गाँव में रहकर, गाँव का होकर लिखा गया उपन्यास है। ग्रामीण जीवन की कई परतों की तह उघाड़ता यह उपन्यास पाठकों के समक्ष कई विमर्श भी प्रस्तुत करता है। इस उपन्यास में भारतीय ग्राम्य व्यवस्था के सामाजिक-राजनैतिक ढाँचे की विसंगतियों को बेहद साहसिक तरीके से उजागर किया गया है। औघड़ धार्मिक पाखंड, जात-पात, छुआछूत, महिला की दशा, राजनीति, अपराध और प्रसाशन के त्रियक गठजोड़, सामाजिक व्यवस्था की सड़न, संस्कृति की टूटन, ग्रामीण मध्य वर्ग की चेतना के उलझन इत्यादि विषयों से गुरेज करने के बजाय, इनपर बहुत ठहरकर विचारता और प्रचार करता चलता है। व्यंग्य और गंभीर संवेदना के संतुलन को साधने की अपनी चिर-परिचित शैली में नीलोत्पल मृणाल ने इस उपन्यास को लिखते हुए हिंदी साहित्य की चलती आ रही सामाजिक सरोकार वाली लेखन को थोड़ा और आगे बढ़ाया है। - [Antima](https://kitablelo.com/antima-manav-kaul/): Antima | अंतिमा - कभी लगता था कि लंबी यात्राओं के लिए मेरे पैरों को अभी कई और साल का संयम चाहिए। वह एक उम्र होगी जिसमें किसी लंबी यात्रा पर निकला जाएगा। इसलिए अब तक मैं छोटी यात्राएँ ही करता रहा था। यूँ किन्हीं छोटी यात्राओं के बीच मैं भटक गया था और मुझे लगने लगा था कि यह छोटी यात्रा मेरे भटकने की वजह से एक लंबी यात्रा में तब्दील हो सकती है। पर इस उत्सुकता के आते ही अगले मोड़ पर ही मुझे उस यात्रा के अंत का रास्ता मिल जाता और मैं फिर उपन्यास के बजाय एक कहानी लेकर घर आ जाता। हर कहानी, उपन्यास हो जाने का सपना अपने भीतर पाले रहती है। तभी इस महामारी ने सारे बाहर को रोक दिया और सारा भीतर बिखरने लगा। हम तैयार नहीं थे और किसी भी तरह की तैयारी काम नहीं आ रही थी। जब हमारे, एक तरीक़े के इंतज़ार ने दम तोड़ दिया और इस महामारी को हमने जीने का हिस्सा मान लिया तब मैंने ख़ुद को संयम के दरवाज़े के सामने खड़ा पाया। इस बार भटकने के सारे रास्ते बंद थे। इस बार छोटी यात्रा में लंबी यात्रा का छलावा भी नहीं था। इस बार भीतर घने जंगल का विस्तार था और उस जंगल में हिरन के दिखते रहने का सुख था। मैंने बिना झिझके संयम का दरवाज़ा खटखटाया और ‘अंतिमा’ ने अपने खंडहर का दरवाज़ा मेरे लिए खोल दिया। - [Baghi Baliya](https://kitablelo.com/baghi-baliya-satya-vyas/): Baghi Baliya | बाग़ी बलिया - संजय को स्टूडेंट यूनियन का इलेक्शन जीतना है और रफ़ीक़ को उज़्मा का दिल। झुन्नू भइया के आशीर्वाद बिना कोई प्रत्याशी पिछले दस सालों से चुनाव नहीं जीता और झुन्नू भइया का आशीर्वाद संजय के साथ नहीं है। शहर की खोजी निगाहों के बीच ही रफ़ीक़ को उज़्मा से मिलना है और शहर प्रेमियों पर मेहरबान नहीं है। डॉक साब कौन हैं जो कहते हैं कि संजय मरहट्टा है और इस मरहट्टे का जन्म राज करने को नहीं राजनीति करने को हुआ है? शहर बलिया, जो देने पर आए तो तीनों लोक दान कर देता है और लेने पर उतारू हो तो... हँसते-हँसते रो देना चाहते हों तो पढ़ें—बाग़ी बलिया... - [Bankissa-Story-of-Kingfisher](https://kitablelo.com/bankissa-story-of-kingfisher/): Bankissa-Story-of-Kingfisher | बनकिस्सा-स्टोरीज ऑफ किंगफिशर - इंसानों को सिखाने वाली जानवरों की कहानियाँ। पंचतंत्र की परंपरा का आधुनिक आख्यान  - [Laal Chowk](https://kitablelo.com/laal-chowk/): लाल चौक (Laal Chowk) - बीते कुछ समय से शेष भारत के लोगों के लिए कश्मीर राष्ट्रवाद के ‘उत्प्रेरक’ के तौर पर काम आने लगा है। ‘दूध माँगोगे तो खीर देंगे, कश्मीर माँगोगे तो चीर देंगे’ जैसे फ़िल्मी डायलॉग के ज़रिए जम्मू-कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के भूगोल, इतिहास और संस्कृति-सभ्यता की बाइनरी में रखते हुए ‘पाने-खोने’ के विमर्शों में उलझाकर रख दिया गया है। इन सबके बीच कश्मीरियत भी है, जिस पर बात कम होती है। जम्मू-कश्मीर के लोग हैं, उनके मानवाधिकार, उनके नागरिक अधिकार हैं, तमाम गंभीर, मौखिक और कथित क़ानूनी आरोप झेलते घाटी के युवा हैं, जो अपना भविष्य अंधकार में पाते हैं। एक बड़ी आबादी है जिसके दिमाग़ पर एक युद्धरत कश्मीर की छाप जमती चली जा रही है। कश्मीर में सेना है, आफ़्स्पा है, निगरानी और तलाशी के अंतहीन सिलसिले हैं। भय है, दमन है, साहस भी है, प्रतिरोध भी है। ये चीज़ें आम जनमानस की ‘प्रमाणपत्रीय’ निर्णय लेने वाली चेतना में विचार या फ़ैसले के लिए जगह नहीं पातीं। ‘लाल चौक’ उन्हीं अनकहे और ‘साज़िशन’ अंधकार में धकेले जा रहे तथ्यों पर रोशनी डालती है, जो सिर्फ़ तथ्य भर नहीं हैं, कथ्य भर नहीं हैं, बल्कि एक बड़ी आबादी का जीवन हैं और जिन्हें दशकों से जिया जा रहा है। - [Uff Kolkata](https://kitablelo.com/uff-kolkata-satya-vyas/): Uff Kolkata  हिंदी भाषा की पहली हॉरर कॉमेडी कही जा सकती है। इस लिहाज़ से यह एक पहल भी है। कोलकाता के बाहरी भाग में फैले एक विश्वविद्यालय का हॉस्टल, उपन्यास के मुख्य किरदारों की ग़लती से अभिशप्त हो जाता है। एक आत्मा जो अब हॉस्टल में है, बच्चों को परेशान करती है पर मारती नहीं। इन्हीं पसोपेश, डर, बचने के इंतज़ामात से जो हास्य उत्पन्न होता है, वही इस कहानी का मूल है। कहानी ख़त्म होते-होते हतप्रभ कर देने वाला मोड़ लेती है, जिसके लिए आप सत्य व्यास और उनकी कहानियों को जानते हैं। - [Chaurasi](https://kitablelo.com/chaurasi-satya-vyas/): Chaurasi | चौरासी सन 1984 के सिख दंगों से प्रभावित एक प्रेम कहानी है। यह कथा नायक ऋषि के एक सिख परिवार को दंगों से बचाते हुए स्वयं दंगाई हो जाने की कहानी है। यह अमानवीय मूल्यों पर मानवीय मूल्यों के विजय की कहानी है। यह टूटती परिस्थियों मे भी प्रेम के जीवित रहने की कहानी है। यह उस शहर की व्यथा भी है जो दंगों के कारण विस्थापन का दर्द सीने में लिए रहती है। यह वक़्त का एक दस्तावेज़ है। - [Dilli Darbaar](https://kitablelo.com/dilli-darbaar-satya-vyas/): दिल्ली दरबार- Dilli Darbaar is the story of a young, jovial, techno-geek called Rahul Mishra, and his journey from being a careless flirt to a responsible man. Rahul moves from a small town to Delhi for better future prospects, and this brings about changes in his life and lifestyle to which he must adapt. His mantra in life is 'there is always a shortcut to success' - which he ironically proves right through his own eccentric ways. Dilli Darbaar is also about Paridhi, a typical East Delhi girl, and her path, as well as Rahul's, to finding the meaning of love, trust, friendship and life. - [Chalta Firta Pret](https://kitablelo.com/chalta-firta-pret/): Chalta Firta Pret -बहुत वक़्त से सोच रहा था कि अपनी कहानियों में मृत्यु के इर्द-गिर्द का संसार बुनूँ। ख़त्म कितना हुआ है और कितना बचाकर रख पाया हूँ, इसका लेखा- जोखा कई साल खा चुका था। लिखना कभी पूरा नहीं होता... कुछ वक़्त बाद बस आपको मान लेना होता है कि यह घर अपनी सारी कहानियों के कमरे लिए पूरा है और उसे त्यागने का वक़्त आ चुका है। त्यागने के ठीक पहले, जब अंतिम बार आप उस घर को पलटकर देखते हैं तो वो मृत्यु के बजाय जीवन से भरा हुआ दिखता है। मृत्यु की तरफ़ बढता हुआ, उसके सामने समर्पित-सा और मृत्यु के बाद ख़ाली पड़े गलियारे की नमी-सा जीवन, जिसमें चलते-फिरते प्रेत-सा कोई टहलता हुआ दिखाई देने लगता है और आप पलट जाते हैं। —मानव कौल. - [Hamsafar Everest](https://kitablelo.com/hamsafar-everest/): Hamsafar Everest -'हमसफ़र एवरेस्ट’ एक यात्रा-वृत्तांत है, एवरेस्ट बेस कैंप के साथ-साथ गोक्यो झीलों का भी। नेपाल में भारतीयों के लिए किसी वीज़ा-पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं होती, तब भी वह है तो विदेश ही। अलग करेंसी, अलग टाइम-ज़ोन, अलग नेटवर्क, अलग भाषा, अलग खान-पान। इन सबके बीच एक भारतीय दंपत्ति ने किस तरह तालमेल बैठाया, यह पढ़ना आपको रोमांचक अवश्य लगेगा। अपनी मोटरसाइकिल से सीमा पार करना, सड़क ही समाप्त हो जाने तक मोटरसाइकिल चलाते रहना, फिर इसे एक गुमनाम-सी जगह पर छोड़कर एक लंबी पदयात्रा यानी ट्रैकिंग करना। परंपरागत रूप से यात्री काठमांडू से लुकला तक हवाई-जहाज से जाते हैं, लेकिन लेखक ने थल-मार्ग चुना। और थल-मार्ग भी ऐसा जिसके बारे में ज्यादातर ट्रैकर्स को नहीं पता होता। लेखक और उनकी पत्नी (सहयात्री) को भी नहीं पता था, लेकिन नियति को जो मंज़ूर था, होता चला गया। और रोमांचक बनता गया। हिंदी में एवरेस्ट चोटी के वृत्तांतों की कुछ पुस्तकें उपलब्ध हैं, लेकिन ख़ासकर बेस कैंप ट्रैक से संबंधित कोई किताब नहीं है। हर साल दुनिया भर से हज़ारों ट्रैकर्स एवरेस्ट बेस कैंप जाते हैं। भारत से भी बहुत जाते हैं। जाने से पहले प्रत्येक ट्रैकर के मन में बहुत सारे प्रश्न आते हैं, बहुत सारी बातें आती हैं, जो प्रायः अनुत्तरित ही रह जाते हैं। यह किताब ऐसे यात्रियों की प्रत्येक जिज्ञासा का समाधान करती है। - [Ladka Hua Hai](https://kitablelo.com/ladka-hua-hai/): Ladka Hua Hai | लड़का हुआ है - कुछ पूर्वनिर्धारित परिभाषाओं से जनित विरोधाभास से हम सभी को परिचित कराने का एक प्रयास है । कई कहानियां सत्य में घटित हुईं हैं तो कई अनुभवों का आत्मसातीकरण है । अगर आपने इन्हें महसूस न भी किया हो तो भी कही न कही सुना ज़रूर होगा । ये पुस्तक कहानियों का एक संग्रह है जिसमें की छद्म नारीवाद के चलते वर्तमान सामाजिक ताने बाने पर हो रहे कुठाराघात के कारण हो रहे परिवारों के विघटन से परत दर परत परिचित कराती है । पुस्तक की हर कथा का संदेश अपने आप में व्यापक है और हम सभी को सोचने पर मजबूर कर देता है कि जिसे हम सभी अमोघ मान रहें हैं; वह वास्तव में वैसा है भी या नहीं । - [Meghna- Ek Albeli Si Paheli](https://kitablelo.com/meghna-ek-albeli-si-paheli/): Meghna Ek Albeli Si Paheli - ‘राजधानी’ जिसके नाम में ही ‘राज़’ चिपका है, उसका रहस्यमयी होना लाज़िमी है। ऊपर से देश की राजधानी दिल्ली जिसके सीने में धौंकते हैं असंख्य दिल धकधक-धकधक। इन्हीं में एक दिल है ‘मेघना’। रोज़ी-रोटी की जुगत में उसके पिता को ठौर दिया दिल्ली ने। घुटने तक झालरदार फ्रॉक लहराती मेघना छुटपन में बहन-नैना, माँ-योगिता और अपनी गुड़ियों संग दिल्ली के दिल पर क़ाबिज़ हो गई। अभाग्य से पिता गुज़रे तो माँ ने बेटियों की सरपरस्ती में अकेले जवानी खपा दी। चुनौतियाँ उसे विरासत में मिलीं और साथ मिले झउवा भर के छल, पीठ पर वार। डिग्रियाँ बटोरकर उसने कैरियर की लगाम थामी ही थी कि यहीं एक हादसे के दौरान उसकी मुलाक़ात हुई मयंक से। मेघना को देखते ही उसके दिल की सारी घंटियाँ एक साथ झनझना उठीं। तभी दूसरा हादसा हुआ। औरों को बचाते हुए उसकी हथेलियाँ झुलस गईं और वो पहुँच गई सीधे कटघरे में। फिर शुरू पुलिस, अदालत और उनके कारनामे जिसे उपन्यास ने बारीकी से उजागर किया है। चक्रव्यूह में घिरी मेघना को यहाँ तक़दीर मिलवाती है अभिमन्यु से। क्या अभिमन्यु मेघना को चक्रव्यूह से निकाल पाएगा? क्या मयंक उसके सूने जीवन को स पाएगा? या मेघना सब दरकिनार कर चुन लेगी तनहाइयाँ? जानने के लिए पढ़िए... - [Danav](https://kitablelo.com/danav/): दानव | Danav इंसान के आस्तिक और नास्तिक होने की तहक़ीक़ात करती है। ये किताब इन सवालों के जवाब ढूँढती है कि वाक़ई क्या ईश्वर है? क्यूँकि किसी मानने वाले से पूछो तो आस्था को सीधी ठेस पहुँचती है, न मानने वाले से पूछो तो वो हँस पड़ता है। सवालों के जवाब दोनों में से कोई नहीं देता। पर तथ्य कुछ तो होगा। वैसे हमें पता होने न होने से उसके अस्तित्व को कोई फर्क नहीं पड़ता। तथ्य कई बार हवाओं की तरह होते हैं। वो हमारे सामने होते हैं, पर हम उन्हें देख नहीं पाते, महसूस ज़रूर कर लेते हैं। आलोक को अनंत श्री के परिवार ने बचपन से पाला था। आख़िरकार वो अनाथ जो था। उस परिवार की परवरिश को लेकर आलोक कृतज्ञ भाव से इस क़दर लदा रहता कि उस परिवार की सेवा ही उसके लिए सब कुछ हो जाती। उस परवरिश ने उसे सब कुछ दिया भी था- नाम, इज़्ज़त, शोहरत और इन सबसे बढ़कर शिवानी। शिवानी, जो उसे ख़ुद के जान से भी ज़्यादा प्यारी थी। परिस्थितियाँ तब विकट रूप लेती हैं, जब एक साज़िश होती है। चाहे अनचाहे आलोक और शिवानी उस साज़िश का हिस्सा हो जाते हैं। एक दूसरे पे मर मिटने की हद तक प्यार करने वाले आलोक और शिवानी इन बदली परिस्थितियों में एक दूसरे के आमने-सामने हो जाते हैं। आख़िर क्या है वो साज़िश? किसने की? क्या उस साज़िश से आलोक और शिवानी कभी उबर सकेंगे? पढ़िए दानव! - [Dil Ki Khidki Mein Tanga Turkey](https://kitablelo.com/dil-ki-khidki-mein-tanga-turkey/): Dil Ki Khidki Mein Tanga Turkey Turkey Travelogue अपनी पहली साँस से लेकर अंतिम साँस तक यूँ तो हर कोई अपनी एक नियत जीवन यात्रा से गुजरता है। चाहे वो उतार-चढ़ाव वाली हो, घुमावदार हो या सीधी सपाट। इस मायने में हर इंसान सैलानी ठहरा। लेकिन ताज्जुब ये कि अंतिम पड़ाव तक पहुँच जाने पर भी उनमें से अधिकतर ये जान नहीं पाते कि वो एक सुहाने सफ़र का हिस्सा थे। वे बस चलते चले जाते हैं, ऐसे जैसे चलता रहता है कोल्हू का बैल कोई। इस चलने में तेल तो बनता रहता है, पता पर उनको चलता नहीं, ना ही उनकी देह के काम आ पाता है। दुनिया मगर इन जैसों के काँधों पर बैठ नहीं चलती। अपने धुर विगत इतिहास से लेकर अब तक, वो चलती-बढ़ती रही है उन खोजी-मनमौजी घुमंतु लोगों की बदौलत जो दूर-दूर तक ना जाने किस अनंत की तलाश में अथक रास्ते नापते रहे हैं। हमारे पुरखों की उन यात्राओं से ही हमारी दुनिया का ये वर्तमान नक्शा उजागर हुआ है। मेरी यह यात्रा भी उनके नक्शे-कदम पर चलकर उनकी यात्रा को एक कदम और आगे बढ़ाने की एक कोशिश थी। इस यात्रा वृत्तांत में दुनिया के इसी नक्शे पर ठीक दिल की जगह बसे देश तुर्की का बखान है। मैं उम्मीद करती हूँ ग्लोब का ये अनूठा दिल मेरे दिल की खिड़की में टँगकर विंडचाइम की मीठी ध्वनि की तरह आपका दिल लुभाएगा। - [Mohpash](https://kitablelo.com/mohpash/): अभिनेता देवानंद साहब अपनी किताब “रोमांसिग विथ लाइफ” में लिखते हैं कि “जीवन का सफर कैसा भी रहा हो, उसमें नाकामियां हों या उपलब्धियां, ये कुछ खास मायने नहीं रखता। सफर जारी रहा और हमने कितनी शिद्दत से मंजिल की तरफ कदम बढ़ाए, ये महत्वपूर्ण बात है।” मोहपाश आपको जीवन के उतार -चढ़ाव के ऐसे अनुभवों से राब्ता करायेगा कि आप हैरान हो जाएंगे। इसमें पाने, हासिल करने की होड़ नहीं है बल्कि जीवन में गुंथे मोह के धागों को आत्मसम्मान के साथ बचाये रहने की जुगत है। नारी की शक्ति सिर्फ उसके शरीर की बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी सोच में है। कहते हैं कि पूरी दुनिया की औरतों की कोई जाति नहीं होती है, उनकी सिर्फ एक जाति होती है - औरत। यानी पूरी दुनिया में वो औरत ही रहती है चाहे वो नेपाल की तराई की एक छोटी सी दुकान चलाकर जीवनयापन करने वाली औरत हो या देश की राजधानी दिल्ली में रह रही आधुनकि परिवेश की स्त्री हो, उन सभी की सामाजिक बेड़ियां और संघर्ष कमोबेश एक जैसे ही हैं। भुजाली लेकर पहाड़ों पर भेड़ियों और नरपिशाचों से जूझती स्त्री का संघर्ष, सिख दंगों में उजड़ी दिल्ली में इज्जत से जीवनयापन करने की जद्दोजहद की कहानी कहती है, यह उपन्यास। एक युवती के आत्मसम्मान से जीने की जद्दोजहद और हक की लड़ाई जिसमें उसके सामने सब ऐसे लोग ही हैं जिनसे वो मोहपाश के धागे से जुड़ी है। सभी को एक दूसरे से मोह-नेह का रिश्ता है लेकिन जीवन के कुरुक्षेत्र से सज्ज है ये मोहपाश का चक्रव्यूह। कौन बच कर निकल पाता है - इससे जीत कर या सब कुछ हारकर? - [Kubdi Budhiya Ki Haveli](https://kitablelo.com/kubdi-budhiya-ki-haveli/): Kubdi Budhiya Ki Haveli | कुबड़ी बुढ़िया की हवेली - एक पुरानी हवेली जिसका घंटा कभी-कभी अँधेरी रातों में अपने आप बजने लगता था। राजू, मुन्नी और भोला को लगता था कि कहानियों में पढ़ी गयी ज्यादातर पुरानी हवेलियों की तरह इस हवेली में भी कोई न कोई गुप्त रास्ता अवश्य है। गुप्त रास्ते की तलाश में तीनों बच्चे पहुँच गये एक रोमांचक और खतरनाक रहस्य की तह तक। क्या था कुबड़ी बुढ़िया की हवेली का रहस्य जिसके कारण तीनों बच्चों की जान पर बन आई। अपराध कथा लेखन के बेताज बादशाह सुरेन्द्र मोहन पाठक की कलम से खास तौर पर बच्चों के लिए लिखा गया रोमांचक उपन्यास। - [Potli Kisse Kahaniyon Ki](https://kitablelo.com/potli-kisse-kahaniyon-ki/): Potli Kisse Kahaniyon Ki 'पोटली किस्से कहानियों की' में कुल सोलह बाल कहानियाँ संकलित हैं जो बारह वर्ष तक के बच्चों को ध्यान में रख कर लिखी गई हैं। सभी कहानियाँ वर्तमान परिवेश के बाल जीवन से जुड़ी हैं जो बच्चों को ले जाएँगी कल्पनाओं के, अनुभवों के खुले आसमान में... एक अनदेखी दुनिया में, ऐसे अनजाने दोस्तों के बीच जो हमेशा से उनके आसपास ही थे। इन कहानियों की भाषा सहज एंव सरल है। इनमें मस्ती है, हास्य है, रोमांच है, संवेदनाएँ हैं, सामाजिक मूल्य और जागरूकता भी है। किसी भी कहानी में शिक्षाओं को जबरन थोपा नहीं गया है मगर बच्चों की संवेदनाएँ उभारने का प्रयास अवश्य किया गया है। - [Sundarban Mein Saat Saal](https://kitablelo.com/sundarban-mein-saat-saal/): Sundarban Mein Saat Saal| सुंदरबन में सात साल - मेरी राय में, ऐसी रचनाएँ परीकथा या डिटेक्टिव कहानियों के मुकाबले हितकर होती हैं, क्योंकि इन्हें पढ़ने से मन में साहस का संचार होता है और कुछ ज्ञान लाभ भी होता है। साहसिक अभियान या विपत्तिसंकुल घटनावलियों के लिए अफ्रीका या चाँद पर जाने की जरूरत मैं नहीं देखता, हमारे आस-पास जो है, उन्हीं का वर्णन वास्तविकता के नजदीक होता है और यह स्वाभाविक भी जान पड़ता है। सुन्दरबन एक रहस्यमयी स्थान है, निसर्गशोभा नदियाँ, समुद्र, नाना प्रकार की वनस्पतियाँ, जीव-जन्तु, संकट की आशंका- सब यहाँ मौजूद हैं। इन सबके वर्णन एवं चित्रांकन ने आपकी पुस्तक को चित्ताकर्षक बना डाला है। जिनके लिए इसे लिखा गया है, वे पढ़कर बहुत खुश होंगे- इसमें कोई सन्देह नहीं है। - -राजशेखर बसु (बांग्ला लेखक) - [Billi Aur Moosarani | बिल्ली और मूसारानी](https://kitablelo.com/billi-aur-moosarani-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/): Billi Aur Moosarani बाल कथा साहित्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिवानी (17 अक्तूबर 1923-21 मार्च 2003) हिन्दी की जानी-मानी लेखिका हैं। उनका पूरा नाम था गौरा पंत। उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक उपन्यास, कहानियां और यात्रा-वृत्तांत लिखे। हिन्दी साहित्य में उनके योगदान के लिए 1982 में उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया। बच्चों के लिए 'सूखा गुलाब', 'स्वामीभक्त चूहा', 'राधिका सुन्दरी', 'बिल्ली और मूसारानी' उनकी लोकप्रिय पुस्तकें हैं - [Kaisa Kutta Hai](https://kitablelo.com/kaisa-kutta-hai/): 'कैसा कुत्ता है!' | 'Kaisa Kutta Hai' घुमक्कड़ कलाकार, गायक और कवि राहगीर की कविताओं का पहला संकलन है। इस संग्रह में राहगीर के लोकप्रिय गीतों के साथ बहुत-से ऐसे गीत और कविताएँ शामिल हैं, जो अभी तक न कहीं प्रकाशित हुए हैं और न ही प्रस्तुत। - [Durgapur Junction](https://kitablelo.com/%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8/): पश्चिम बंगाल के पश्चिमी बर्धमान जिले के अंतर्गत दुर्गापुर एक सुनियोजित और खूबसूरत शहर है। इस शहर के इतिहास पर प्रकाश डालें तो पता चलता है कि शहरी बसावट से पहले यहां का अधिकांश क्षेत्र घने जंगलों का घर हुआ करता था। शहरीकरण की प्रक्रिया के बाद भी यह शहर आज भी प्रकृति के काफी नजदीक है। सुनियोजित तरीके से बसाए गए दुर्गापुर शहर को लेखक अभिलाष दत्ता ने अपने नजर से देखा और उस शहर को जिया है। प्रकृति पसंद अभिलाष ने छः दोस्तों की कहानी का सहारा लेकर दुर्गापुर की सुंदरता को पाठकों के सामने रखा है। यह किताब दुर्गापुर के सम्मान में लिखा गया है। - [Betal Aur Shahzadi](https://kitablelo.com/betal-aur-shahzadi/): Betal Aur Shahzadi | बेताल और शहज़ादी - शहजादी शबनम महल से भागी अपनी शादी से बचने के लिए और फँस गयी जादू और तंत्र-मंत्र की ऐसी दुनिया में जिससे उसका जीते जी निकलना मुश्किल था। एक तांत्रिक के हाथों की कठपुतली बनकर शहजादी ने क्या-क्या कारनामे किये? क्या वह वापस अपनी दुनिया में लौट पाई? अपराध कथा लेखन के शहंशाह सुरेन्द्र मोहन पाठक द्वारा लिखा गया यह बाल उपन्यास 'बेताल और शहजादी' पाठकों को कल्पना की एक अनोखी दुनिया में लेकर जाता है, जहाँ मायावी शक्तियों के जाल में फँसी है शहजादी शबनम और उस जाल को तोड़ कर शहजादी को वापस अपनी दुनिया में ले जाने के लिए कृतसंकल्प है उसका मित्र अनिल। - [Agnipakhi](https://kitablelo.com/agnipakhi/): "अरे आय एम् सीरियस। तुमने मुझे ऐसे धक्का न दिया होता तो मैं छलाँग लगाना कैसे सीखती? इसलिए थैंक यू!" - कहानी 'कॉन्टैक्ट्स' से "वो ही क्यों, हर स्त्री अग्निपाखी है। पूरा आसमान उसका है। उसकी उड़ान या आसमान तय करने का हक़ किसी को नहीं। किसी को भी नहीं।" - कहानी 'अग्निपाखी' से धनक के सातों रंगों से बनी, सबसे अनोखी, भारतीय स्त्रियों पर लिखी आठ कहानियाँ संजोये आपके समक्ष प्रस्तुत है कहानी संग्रह 'अग्निपाखी'। आठ अलग-अलग कहानियों में अपनी ज़िंदगी जीतीं, अलग-अलग चुनौतियों का सामना करतीं 'अग्निपाखी' की नायिकाएँ स्नेही, संवेदनशील बेटी, बहन, प्रेमिका, पत्नी, माँ और बहू हैं, पर इनके साथ वे ज्वालजयी स्त्रियाँ हैं, जिनकी अपनी पहचान है, जिनका अपना आसमान है। भारतीय स्त्री के अग्नि तत्व को समर्पित, 'अग्निपाखी'। - [Right Time to Kill](https://kitablelo.com/right-time-to-kill/): अभिनेत्री सोनाली सिंह राजपूत ने पाँच सालों बाद दिल्ली में कदम क्या रखा, जैसे हंगामा बरपा हो गया। बंगले में घुसते ही गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस और मीडिया दोनों को शक था कि सोनाली का कत्ल उसके चाचा उदय सिंह राजपूत ने किया है, क्योंकि पांच साल पहले उसने अपनी भतीजी को खुलेआम जान से मारने की धमकी दी थी। लिहाजा कहानी परत-दर-परत उलझती जा रही थी। एक तरफ इंस्पेक्टर गरिमा देशपांडे कातिल की तलाश में जी जान से जुटी हुई थी, तो वहीं दूसरी तरफ भारत न्यूज की इंवेस्टिगेशन टीम पुलिस से पहले हत्यारे का पता लगाने के लिए दृढसंकल्प थी। जबकि कातिल था कि एक के बाद एक लाशें बिछाता जा रहा था। - [Deewali Ki Raat -Hard Bound](https://kitablelo.com/deewali-ki-raat-hard-bound/): हसीना को मुसीबत में ना देख पाने की अपनी आदत से मजबूर सुनील ने उस दीवाली की रात को जब एक हसीना की मदद की और उसे अपने फ्लैट में पनाह दी तो वो अंजान हसीना अपने पीछे उसके लिये एक लाश छोड़ गयी। एक ऐसे इंसान की लाश जिसको सुनील पूरे शहर में बड़े खतरनाक इरादों के साथ ढूँढता फिर रहा था और आलाएकत्ल था सुनील का ही खंजर। ऐसे में कौन मानता कि कातिल सुनील नहीं था? एक ही बैठक में पठनीय रोमांचक मर्डर मिस्ट्री, जिसमें सुनील की जान जाते-जाते बची। सुनील और रूपा की अनूठी जुगलबंदी! Deewali ki Raat - [Nymphomaniac](https://kitablelo.com/nymphomaniac/) - [Swaha: Hasrat, Daulat aur Hasil](https://kitablelo.com/swaha-3/): Swaha-3 जिसे चाहा उसे खो दिया। जहां भी कदम पड़े तबाही और बर्बादी का मंजर आम हो गया। इंसानियत हैवानियत में बदल गई, सबकुछ एक ही झटके में स्वाहा हो गया। अपने प्रारब्ध से जूझता ऐसा बदकिस्मत शख्स दुनिया में बस एक ही हो सकता था और वह था सिद्धांत सूर्यवंशी। जो एक ऐसे रास्ते पर चल पड़ा था जिसकी कोई मंजिल नहीं थी। - [Chand Ka Pahad](https://kitablelo.com/chand-ka-pahad/): Chand Ka Pahad - चाँद का पहाड़ गाथा है 1909 के एक भारतीय किशोर शंकर रायचौधरी की, जो साहसिक जीवन जीना चाहता था। संयोगवश वह जा पहुँचता है अफ्रीका, जिसे उन दिनों 'अन्ध महादेश' कहा जाता था, यानि जिसके अधिकांश हिस्सों तक मनुष्य के चरण अभी नहीं पहुँचे थे! वहाँ संयोगवश ही उसकी मुलाकात पुर्तगाली स्वर्णान्वेषी दियेगो अलवरेज से हो जाती है। दोनों मध्य अफ्रीका की दुर्लंघ्य रिख्टर्सवेल्ड पर्वतश्रेणी में स्थित पीले हीरे की खान की खोज में निकल पड़ते हैं, जिसके बारे में मान्यता थी कि एक भयानक दैत्य 'बुनिप' उसकी रक्षा करता है! कैसा रहा यह अभियान? क़्या वे सफल हो सके? महान बांग्ला लेखक बिभूतिभूषण बन्द्योपाध्याय की रहस्य-रोमांच से भरपूर अमर रचना 'चाँदेर पाहार' (1937) का हिन्दी अनुवाद है चाँद का पहाड़, जिसे कि बाल-किशोरों के लिए 'अवश्य पढ़ें' की श्रेणी में रखा जा सकता है। - [Adi Padi Dadi](https://kitablelo.com/adi-padi-dadi/): Adi Padi Dadi - कहानियों के मैदान में लड़कों की दादागिरी ही क्यों चले। ऐसी कौन सी शैतानी है जो लड़कियाँ नहीं कर सकतीं? मस्ती के कौन से मैदान में लड़कियाँ अपनी धाक नहीं जमा सकतीं? वैसे समझने की बात यह भी है कि लड़कियों की टीम में दादी-नानी, माँ-मौसी, चाची-मामी सब आती हैं। तभी तो 'आदी पादी दादी' की कहानियों में मुख्य भूमिका निभाई है लड़कियों ने। और दादी, नानी, माँ, मौसी, चाची-मामी, दीदी, छुटकी सब की सब लड़कियाँ ही तो हैं। हाँ, कहीं-कहीं लड़कों को भी भूमिका या रोल दिए गए हैं लेकिन वे सहायक भूमिकाओं में हैं जिन्हें फिल्मी भाषा में कहा जाता है एक्स्ट्रा हाऽऽहा-हीऽहीऽहीऽहीऽ!!!! वैसे लड़कियों की दुनिया की इन कहानियों को पढ़ कर लड़कों को भी पूरा मजा आएगा, क्योंकि इन कहानियों की हीरो या हीरोइनें उनकी भी तो दादी-नानी, माँ-मौसी, चाची-मामी, दीदी या प्यारी बहन हैं। तो शुरू कर दो पढ़ना.. - [Tum Tak](https://kitablelo.com/tum-tak/): मोहब्बत की मीठी हूक है-तुम तक। एक ख़लिश है। मोहब्बत ग़ुलामी है या इंक़लाब, जो भी है, मगर है ख़ूबसूरत। कॉलेज और हॉस्टल के दिनों में Long Distance Romantic Relationship की धीमी आँच पर सुलगते दो दिलों की ख़ुशनुमा कहानी है यह। आपके दिल में इश्क़ की तिश्नगी को एक मर्तबा फिर से जगा देगी यह किताब। Let’s fall in love again. 180 मिनट का अधिकतम समय लगेगा इस पुस्तक को पूरा पढ़ने में। यह आपके फ्लाइट, ट्रेन और रोड के सफ़र की बेहतरीन हमसफ़र बन सकती है। Perfect to read while travelling. किताब में प्रेम से लबरेज़ कुछ लम्हे आपको मुँह में रक्खे रसीले रसगुल्ले से लगेंगे, तो कभी मोतीचूर के लड्डू की तरह मुँह तक पहुँचने से पहले ही आपके हाथों में बिखर जायेंगे और आपके हिस्से आएगा एक मीठा मलाल। लेखिका का दावा है कि यह किताब प्यार की एक पुकार है जिसे अगर आप थाम लेंगे, तो मायूस नहीं होंगे। यह किताब शब्दों के फ्रेम से झाँकते हर्षा के धड़कते दिल की सेल्फी है। इसमें पलाश की ख़ूबसूरती और तपिश है। पलाश की बेरुख़ी हर्षा के दिल में एक हठीली ख़्वाहिश जगा देती थी। हर्षा का प्यार अगर काजू की बर्फी था तो उसका हठ बर्फी पर सजा चांदी का वरक़। हठ कि तुम्हें तो पाकर ही रहूँगी। - [Sambhal Aye Dil](https://kitablelo.com/sambhal-aye-dil/): ऑनलाइन फ़्लर्टिंग ऑफ़्लाइन जीवन में कैसी कैसी गुलाटियाँ खिला सकती है इसका छोटा सा सर्कस है ये किताब-सँभल ऐ दिल। सुधा ने मधु की तरफ़ पैनी निग़ाहों से देखते हुए कहा- "मैं उस लड़की से मिलना चाहती थी, जो समीर की ज़िंदगी में मेरी जगह लेना चाहती है।" मधु ने बेबाक़ी से कहा- "प्यार तो प्यार होता है। शादी से पहले हो या शादी के बाद। प्यार तो एक एहसास है उसे नियम नहीं बाँध सकते। नियम इंसान के क्रियाकलाप को बांधने के लिए होते हैं। तुमने शादी के नियम का इस्तेमाल करके समीर के तन को बाँध लिया, पर महसूस करने से रोकना समाज के किसी नियम के बस में नहीं। प्यार करती हो ना समीर से? ख़ुश देखना चाहती हो ना उसको? मेरी वजह से वो ख़ुश रहता है सुधा। बी थैंकफुल। इंस्टेड ऑफ़ एट्टीट्यूड शो सम ग्रैटीट्यूड।" समीर को नफ़रत हो रही है सुधा इस दोगलेपन से। एक तरफ कहती है प्यार करती है मुझसे और दूसरी तरफ मेरी ख़ुशी देखी नहीं जाती इससे। क्या समीर सुधा के पास लौटेगा? बिंदास और बेबाक़ मधु के आकर्षण से बाहर आ पाएगा? जवाब जानने के लिए प्रतीक्षा कीजिए साहित्य विमर्श के अगले सेट की - [Talash](https://kitablelo.com/talash/): तलाश के आलेख समाज की गहराई से जुड़े हुए हैं। बहुआयामी भारतीय समाज से लेकर वैश्विक पटल पर समाज के ताने-बाने को रेखांकित करने वाले लेख और संस्मरण बहुत रोचक हैं। एक रचनात्मक विचारक और प्रबुद्ध लेखक के रूप में, वह बोधगम्य वास्तविकता से अवगत कराते हैं और अपने विषयों की गहरी जड़ों को दृढ़ स्पष्टता और निष्पक्षता के साथ जाँचते हैं। पाठकों को पुस्तक बहुत आकर्षक लगेगी और उद्वेलित करेगी। लेख आश्चर्यजनक रूप से कई अपरिचित तथ्यों को सामने लाती है। यह भारत में आदिवासियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, ईसाई धर्म और यात्रा वृतांत पर कई नई अंतदृष्टि और अनुभव साझा करती है। - [Swaha-2](https://kitablelo.com/swaha-2/): Swaha-2 - श्यामली के कत्ल से शुरू हुई सिद्धांत की बद्किस्मती उसका पीछा छोड़ने को तैयार नहीं थी। दिल के भीतर दहकती बदले की आग उसके जुर्म की फेहरिश्त में निरंतर इजाफा करती जा रही थी। वह भटक रहा था, एक-एक कर के दुश्मनों का सफाया करता जा रहा था, मगर जब मंजिल पर पहुँचा तो ये देखकर हैरान रह गया कि प्रतिशोध के दावानल को बुझाने हेतु जितने भी गुनाह किये थे उनका हासिल एक ही झटके में जलकर स्वाहा हो गया। - [Murder in Room Number 108](https://kitablelo.com/murder-in-room-number-108/): सुधीर सिंघल निहायत घटिया, बदनीयत! सूरत से कामदेव सरीखा ऐसा नौजवान था, जो पैसों की खातिर किसी भी हद तक जा सकता था। अधेड़ उम्र की औरतों को अपने प्रेमजाल में फाँस सकता था, नौजवान लड़कियों की कमाई पर ऐश कर सकता था। वह कइयों की जिंदगी में उथल-पुथल मचाये था, तो कइयों को बर्बादी के कगार पर भी पहुँचा चुका था। ऐसे फसादी शख्स के साथ जो न हो जाता, वही कम था। द वाचमैन सीरीज की नयी पेशकश - [Eight](https://kitablelo.com/eight-rajeev-roshan/): ऐट (Eight)-रोशन आनंद, भारत का एक नामचीन अपराध कथा लेखक था, जिसे उलझी हुई कहानियाँ खोजने और लिखने का शौक था। ये शौक कई बार उसे मौत के मुहाने पर लाकर भी खड़ा कर देता था। दिल्ली के थाना क्षेत्र के अधीन घटे ओपन एंड शट केस में ज्यों ही उसने अपनी दखल बनाई, सिलसिलेवार तरीके से हत्याओं का एक दौर-सा चल पड़ा, जिसका रहस्य अंक ‘8’ से सम्बंधित था… प्रकृति ने अपराध करने का ठेका किसी खास श्रेणी को नहीं दिया और न ही इसे श्रेणीबद्ध किया कि अमुक श्रेणी का इंसान अपराध नहीं कर सकते। लेकिन हम श्रेणियाँ बना ही लेते हैं……. - [Baat Banechar](https://kitablelo.com/baat-banechar/): “उस जीवन पर क्या गर्व करना जिसमें गिनाने के लिए वर्षों की संख्या के सिवा कुछ न हो। बदलाव में जिंदगी है, ठहराव में नहीं।” - बात बनेचर बात बनेचर वो किताब है कि जब इसका पहला पन्ना खोलो तो ऐसा लगता है मानों जंगल के प्रवेश द्वार पर खड़े हो और पंछियों की, पशुओं की आवाज़ें अंदर बुला रही हों। एक बार इसकी कोई भी कहानी पढ़ने की देर नहीं है कि ख़ुद कहाँ बैठे हैं, कितनी देर से पढ़ रहे हैं, ये भी याद नहीं रहता। - [Chhap Tilak Sab Chheeni](https://kitablelo.com/chhap-tilak-sab-chheeni/): Chhap Tilak Sab Chheeni -वह कहानियाँ… जो स्त्री-मन की अंधेरी गलियों से हो कर गुजरीं, जीवन की आपाधापी में गुम होते-होते रह गईं और मानवीय प्रेम और करूणा के उजालों की तलाश में सतत विचरती रहीं। मानव-मन अपने अनगढ़ स्वरुप में कितना लुभावना हो सकता है, कितना करुणामय.... इस किताब की कहानियों के किरदार, यही छटा बिखेरते हैं। ख़ास कर स्त्री पात्र। पीड़ा में भी अलौकिक सौन्दर्य है। इन कहानियों के आत्मा, इसी सौन्दर्य से गर्वोन्नत है। - [Aankh Ki Chori](https://kitablelo.com/aankh-ki-chori/): Aankh Ki Chori|आँख की चोरी अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा शिल्पी कृश्न चंदर की सरस लेखनी से उपजा उपन्यास है आँख की चोरी (Aankh Ki Chori), जिसमें व्यंग्य, विद्रूप, किस्सागोई तथा रोमानियत का सम्मिश्रण है, जो पाठक को अभिभूत कर देता है। इसमें एक प्रेमकथा तो चलती ही है, साथ ही प्राचीन मूर्तियों की चोरी के गिरोह की सनसनीखेज कहानी भी पाठक को बांधे रखती है। - [Mere Priya Aatman](https://kitablelo.com/mere-priya-aatman/): Mere Priya Aatman - Rajneesh Ke Jeewan Par Ek Nayi Drishti । मेरे प्रिय आत्मन् - रजनीश के जीवन पर एक नयी दृष्टि रजनीश अमेरिका क्यों गए थे? वो स्त्री कौन थी जो छाया की तरह हमेशा उनके साथ रहती थी? उनके पूर्वजन्म की माँ और प्रेमिका उन्हें इस जन्म में कैसे मिलीं? उन्होंने ख़ुद को भगवान क्यों कहा और फिर यह उपाधि क्यों त्याग दी? अपनी दो सेक्रेटरियों लक्ष्मी और शीला के बीच वर्चस्व की लड़ाई का नुक़सान उन्होंने कैसे उठाया? वे इस्लाम पर कभी खुलकर क्यों नहीं बोले? उन्होंने किन 12 आध्यात्मिक नक्षत्रों की सूची बनाई थी? उन्होंने त्रिगुणों की साधना कैसे की? वे सेक्स के विरोधी थे या समर्थक? वे अमीरों के गुरु क्यों कहलाते थे? बंबई में उन्होंने 80 हज़ार लोगों पर सामूहिक शक्तिपात का प्रयोग कैसे किया था? क्या सच में ही गौतम बुद्ध की आत्मा ने उनकी देह में आश्रय लिया था? अब ओशो कहलाने वाले रजनीश पर केंद्रित यह किताब उपरोक्त तमाम सवालों के जवाब खोजने के साथ ही उनसे जुड़े बीसियों अन्य संदर्भों की भी पड़ताल करती है और उनके व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों का जायज़ा लेती है। लेखक ने स्वयं रजनीशप्रेमी होने के बावजूद वस्तुनिष्ठता के साथ उनसे जुड़े अनेक संदर्भों का अवलोकन किया है और उन पर एक ताज़ा, प्रासंगिक और ज़रूरी विवेचना प्रस्तुत की है, जो इस विवादास्पद किंतु विलक्षण गुरु के बारे में एक नई समझ बनाती है। इस किताब को पढ़ने के बाद आप रजनीश को पहले की तरह नहीं देख सकेंगे। - [Khaali Makaan](https://kitablelo.com/khaali-makaan/): Khaali Makaan | खाली मकान - सुनील को ग्लैमर ब्वॉय की उपाधि देकर, उसकी आशातीत सफलता में पक्षपात का हवाला देकर इन्स्पेक्टर प्रभूदयाल ने एक केस की स्वतंत्र रूप से तहकीकात करने की माँग कर डाली। परिणामस्वरूप उसके सामने थी डबल मर्डर की एक पेचीदा, मकड़ी के जाले की तरह उलझी हुई दास्तान, जो उसके लिये स्वयं उसके सृजनकर्ता का चैलेन्ज थी। - [Biwi Ka Hatyara](https://kitablelo.com/biwi-ka-hatyara/): Biwi Ka Hatyara | बीवी का हत्यारा-  कहा जाता है कि आस्था प्रमाणों पर आधारित विश्वास नहीं अपितु अबाध समर्पण का नाम ही आस्था है । लेकिन रवि कुमार, पेशे से पुलिस इन्स्पेक्टर, जिसे कि सबूतों को जांचने, हर बात पर शक करने की ट्रेनिंग हासिल थी, ऐसी अबाध समर्पण की भावना कहां से लाता! पुलिस इंस्पेक्टर रवि शर्मा अपनी ट्रेनिंग से सबक लेता है, भरोसा न करने का; और उसका यह सबक ही उस पर भारी पड़ जाता है। और वह मर्डर जैसे संगीन जुर्म की थाह पाते-पाते अपने सोचे ऐसे जाल में फँसता है कि ख़ुद पहुँच गया फाँसी के तख्ते तक! क्यों और कैसे जानने के लिए पढ़ें, बीवी का हत्यारा (Biwi Ka Hatyara)। - [Main Aparadhi Janm Ka](https://kitablelo.com/main-aparadhi-janm-ka/): Main Aparadhi Janm Ka- Vimal Series -वो मर्द नहीं जो डर जाए, माहौल के ख़ूनी मंज़र से, उस हाल में जीना लाज़िम है, जिस हाल में जीना मुश्किल है। “वक्त बड़े-बड़े ग़म भुला देता है,” ऐसा न हो तो जीना जहन्नुम बन जाए; हर कोई जीते-जी मर जाए; फिर न भूल कि तू सोहल है; वो सोहल है; जिसका नाम सुनकर दुश्मन काँप जाते हैं; तू सामने पड़ जाए; तो कलेजा थाम लेते हैं; कि अगली बार; दिल पता नहीं धड़केगा या नहीं। - [Jake Bairi Sanmukh Jeeve](https://kitablelo.com/jake-bairi-sanmukh-jeeve/): Jake Bairi Sanmukh Jeeve - Vimal Series -'मैं वाहेगुरु जी का खालसा हूं। मैं गुरां दा सिंह हूं। मैं बादलों की तरह गरजूंगा और उतनी ही बुलंद आवाज में अपना क़हर दुश्मनों पर नाजिल करूंगा। मेरी ललकार बैरियों का वजूद थरथरा देगी। मेरी चीत्कार शोले बनकर उनकी औकात पर बरसेगी।'' - [Qahar](https://kitablelo.com/qahar/): Qahar- Vimal Series -विमल का संकल्प था कि दिल्ली जाकर बीवी और बच्चे के साथ एक साधारण गृहस्थ बन कर रहेगा; अपने हाहाकारी अतीत को पूरी तरह से भुला देगा । हमेशा के लिए भूल जायेगा कि गुज़श्ता ज़िन्दगी तक़दीर के खंजर से वक़्त की दीवार पर खूंरेज अलफ़ाज़ में उकेरी थी । तूफान से पहले की शांति कॆ एक रोज़ ऐसा अंधड़ उठा कि वो उसके साथ तिनके की तरह उड़ता चला गया और जब होश आया तो ख़ुद को वहाँ पाया जहाँ न होने का उसका संकल्प था।. - [Swaha : Mahabharat Aadhaarit Pauranik Rahasya Gaatha Khand 5](https://kitablelo.com/swaha-mahabharat-aadhaarit-pauranik-rahasya-gaatha-khand-5/): महाभारत आधारित पौराणिक रहस्य गाथा का यह पाँचवाँ और अंतिम चरण है। चिरंजीवियों और मुमुक्षुओं के बीच युगों पुराने युद्ध को समाप्त करने की सनक में जयंत साक्षी का सामना करते हुए रोहन की वसीयत के उस अंतिम सच तक पहुँच गया जिसमें श्रीमंत परिवार और उसकी मुक्ति थी। लेकिन उसकी मुक्ति में सिर्फ साक्षी ही आखिरी बाधा नहीं था। - [Agnihotra : Mahabharat Aadhaarit Pauranik Rahasya Gaatha Khand 4](https://kitablelo.com/agnihotra-mahabharat-aadhaarit-pauranik-rahasya-gaatha-khand-4/): विश्वास और उम्मीद की डोर थामे श्रीमंत परिवार जयंत के साथ रोहन की वसीयत का सच खोजने के लिए अपना सब कुछ दाँव पर लगा चुका था, किंतु जिस यात्रा के पग-पग पर छल हो उसमें किसका सच भरोसे योग्य था? मुमुक्षुओं और चिरंजीवियों के टकराव का अंत करने और छल की गहरी परतों में दबे पुरातन सत्य तक पहुँचने के लिए जयंत और श्रीमंत परिवार को क्या कीमत चुकानी होगी? - [Aahuti: Mahabharat Aadhaarit Pauranik Rahasya Gaatha Khand 3](https://kitablelo.com/aahuti-mahabharat-aadhaarit-pauranik-rahasya-gaatha-khand-3/): महाभारत आधारित पौराणिक रहस्य गाथा का यह तीसरा चरण है। डॉ. वर्मा और जयंत के साथ रोहन की वसीयत और मुमुक्षुओं के पुरातन सत्य की जड़ें खँगालता और अपने अस्तित्व के लिए जूझता श्रीमंत परिवार उस मोड़ पर आ पहुँचा जब रोहन का सत्य उनके जीवन का सबसे बड़ा झूठ बन गया। वे सदियों पुराने मूक इतिहास के खाली पन्नों से जीवित हुए पुरातन सत्य से दूर थे, किंतु कोई इस दिव्य यज्ञ में उनकी आहुति देने की तैयारी कर चुका था।. - [Stuti: Mahabharat Aadhaarit Pauranik Rahasya Gaatha Khand 2](https://kitablelo.com/stuti-mahabharat-aadhaarit-pauranik-rahasya-gaatha-khand-2/): महाभारत आधारित पौराणिक रहस्य गाथा का यह दूसरा चरण है। रोहन की वसीयत और उससे जुड़ी रोंगटे खड़े करने वाली वस्तुओं की गुत्थी में उलझे श्रीमंत परिवार को उस रहस्यमय यज्ञ के दर्शन हुए जिसे अदृश्य मुमुक्षुओं ने कुरुक्षेत्र में महाविनाश के उत्सव से दूर अपने त्याग, समर्पण और निष्ठा से श्रीकृष्ण के आदेश पर मानवता के चरणों में समर्पित किया था। किन्तु द्वापरयुग के गर्भ में पोषित वह दिव्य यज्ञ कलयुग में श्रीमंत परिवार के जीवन और मानवता के भविष्य का निर्णायक कैसे बना? उससे रोहन की वसीयत का क्या जुड़ाव था?. - [Aahwan: Mahabharat Aadhaarit Pauranik Rahasya Gaatha Khand 1](https://kitablelo.com/aahwan-mahabharat-aadhaarit-pauranik-rahasya-gaatha-khand-1/): Aahwan विचित्र लाशें, रहस्यमय संकेत, मेडीकल रिपोर्ट, कुछ पुराने यंत्र, अधूरी पांडुलिपियाँ, दिल दहलाने वाली हत्याओं का अंतहीन सिलसिला, उन्हें जोड़ने वाली एक साधारण वसीयत, और एक पुरातन सत्य जो इतिहास से सदैव लुप्त रहा। श्रीमंत परिवार के साथ अपने दोस्त रोहन की मौत की जाँच करने में जुटे इंस्पेक्टर जयंत और उसके साथी डॉ. मजूमदार, रोहन की साधारण वसीयत की जड़ें खंगाल रहे थे तो दूसरी तरफ़ नेशनल लैब के डायरेक्टर डॉ. वर्मा अपने अनेक एजेंटों की जान पर भारी पड़ रही अजीब वस्तुओं की गुत्थी में उलझे हुए थे जिसके तार रोहन से जुड़ रहे थे। कौन जानता था कि वह मुमुक्षुओं और चिरंजीवियों के सदियों पुराने उस रक्तरंजित युद्ध में घिरते जा रहे थे जो समाप्त होने पर भी अनवरत जारी था और उस रहस्यमय सत्य का रक्षक था जो सदैव से इतिहास से दूर रहने को शापित था। मूक इतिहास की सदियों पुरानी परतों में दबा सत्य प्रत्यक्ष होने के लिए उचित पात्र की प्रतीक्षा में था। एक साधारण वसीयत से आरंभ श्रीमंत परिवार और इंस्पेक्टर जयंत का सफ़र उस मोड़ पर पहुँच गया जब जीवन से अधिक कुछ और महत्वपूर्ण हो गया। मुमुक्षुओं और चिरंजीवी के टकराव के बीच पिसते श्रीमंत परिवार को रोहन की वसीयत के सत्य को खोजते हुए उस पुरातन वचन की रक्षा करनी थी जिससे पूरी मानवता का भविष्य जुड़ा था। - [Gang of Four](https://kitablelo.com/gang-of-four/): जब नाम साहिल हो तो गिर गिर के संभलना पड़ता है तो मर मर के जीना पड़ता है कदम लड़खड़ाते हों तो भी मजबूती से पैरों पर खड़ा होना पड़ता है नीलम की मौत ने उसके वजूद का पुर्जा-पुर्जा बिखेर दिया था, तो भी अपनी व्यक्तिगत त्रासदी से उबरना लाजिमी था। विमल सीरीज का सनसनीखेज शाहकार 'मैं अपराधी जनम का' का दूसरा और आखिरी खंड - [Dhappa Zindagi](https://kitablelo.com/dhappa-zindagi/): Dhappa Zindagi | धप्पा ज़िंदगी अरविन्द यादव की लिखी कहानियों का संग्रह है। अनायरा टेल्स के बाद यह उनकी दूसरी किताब है। - [Lalla Lalla Lori](https://kitablelo.com/lalla-lalla-lori/): शैतान सिंह को नींद नहीं आती। हल्के-हल्के ब्लैक आउट्स हैं जिनके सहारे उसकी ज़िंदगी चल रही है। दवा, एक्सरसाइज़, मेडिटेशन कुछ काम नहीं करता। आँखें सुर्ख़ लाल रहती हैं। वह एक सिक्योरिटी गार्ड है और नींद आने की वजह से उसके पास वक़्त भी अधिक है। वक़्त बिताने के लिए वह डबल ड्यूटी करने लगता है। रात की ड्यूटी एक सुनसान बंगलो पर है और दिन की ड्यूटी एक हॉस्पिटल में। एक दिन वो हॉस्पिटल में नोटिस करता है कि वहाँ एक ही गाँव से ढेर सारे कोमा के पेशेंट आए हुए हैं और आते ही जा रहे हैं। वो सारे कोमा के पेशेंट एक दिन एक साथ अपने बिस्तर पर बैठ जाते हैं और देर तक कुछ बड़बड़ाते हैं और फिर कोमा में चले जाते हैं। वहाँ के डॉक्टरों से शैतान सिंह को पता चलता है कि वो सब लोग कोमा में नहीं, नींद में हैं। शैतान सिंह को भी नींद चाहिए। वो नींद की खोज में उन लोगों के गाँव चला जाता है, जहाँ उन लोगों की नींद से पहले उसका सामना गाँव में मौजूद दूसरी रहस्यमयी चीज़ों से होता है। - [Paanch Din](https://kitablelo.com/paanch-din-surendra-mohan-pathak/): Paanch Din (Sudhir Kohli Series) तीन हादसे! दो दावेदार! मोरवाल स्टेट में दो हफ़्ते में तीन जानलेवा हमलों की बुनियाद बनती है और इत्तफ़ाक़ से तीनों बार हादसों का निशाना बच निकलता है। लेकिन ये हैरानी की बात नहीं थी, हैरानी की बात थी कि एस्टेट के दो बाशिंदे दावा कर रहे थे कि उन हादसों की ओट में उनकी जान लेने की कोशिश की गयी थी, अब चौथी कोशिश कभी भी हो सकती थी और इस बार शायद शिकार का साथ इत्तफ़ाक़ न देता। फिर एक जना पीडी सुधीर कोहली की शरण में पहुँच गया। पाँच दिन फ़िलॉस्फ़र-डिटेक्टिव सुधीर कोहली का सबसे विकट केस आदि से अंत तक रोचक। एक ही बैठक में पठनीय। टॉप मिस्ट्री राइटर सुरेन्द्र मोहन पाठक का नवीनतम उपन्यास - [Devaki](https://kitablelo.com/devaki-anagha-joglekar/): Devki | देवकी: कंस की लाडली बहन देवकी, वसुदेव की प्रिय पत्नी देवकी, श्री कृष्ण की माँ देवकी! तो क्या देवकी मात्र रिश्तों से ही जानी जाएँगी? क्या उनका अपना कोई वजूद नहीं? क्या सत्य ही वटवृक्ष की छाया में अन्य पौधे पनप नहीं पाते? जिस स्त्री के गर्भ से साक्षात विष्णु के अवतार ने जन्म लिया, उस स्त्री का उल्लेख मात्र दो पंक्तियों में समेटना क्या न्यायोचित होगा? देवकी का बचपन चचेरे भाई कंस की छाया में बीता, फिर कारावास की मुश्किलों ने उन्हें एक सशक्त माँ और निर्भय स्त्री के रूप में उभारा। लेकिन फिर भी देवकी का जीवन अपने पुत्र की प्रतीक्षा में ही रीतता रहा। कान्हा को समय ही न मिला अपनी जन्मदात्री माँ के पास लंबे समय तक रुकने का। ऐसी प्रतीक्षारत माँ के दुखों की गाथा है 'देवकी', जो अंततः कृष्ण और बलराम की मृत्यु का दुख न सह सकी और अपने पति के शव के साथ खुद भी सती हो गई। यह पुस्तक आपको देवकी के जन्म से लेकर अंत तक की यात्रा में साथ ले चलेगी। - [Dhurandhar](https://kitablelo.com/dhurandhar/): अप्रैल 2021, ऑस्ट्रेलिया में लॉकडाउन के चलते इंटरनेशनल बॉर्डर बंद थे। मेरे पापा इंडिया में अस्पताल में भर्ती थे और मैं यहाँ मेल्बर्न में छटपटा रही थी कि उनसे किस विधि मिलना हो। एक अभागे दिन खबर मिली कि अब उनसे कभी भी मिलना ना हो सकेगा। वो चार दिन अस्पताल में रहने के बाद अपनी पीड़ा से और इस जीवन से छूट गए। देश से बाहर होने के कारण मुझे बारहा लगता है कि मैं उनसे मिल ना सकी। उनके अंतिम दर्शन ना कर सकी। रह-रह कर मुझे इस बात ने भी उद्विग्न करना शुरू कर दिया कि पापा ने उस नैराश्य से भरे निरे एकांत में कैसा महसूस किया होगा? कैसा क़हर टूटा होगा ये जानकर कि अब किसी के अन्तिम दर्शन ना हो सकेंगे? कैसे इस पीड़ा को पार किया होगा उन्होंने कि वो अपनी अंतिम इच्छा, अंतिम आदेश और आख़िरी आशीष किसी तक नहीं पहुँचा सकेंगे? इन्हीं सब सवालों के ज़वाब ढूँढने और अपने पापा को तलाशने की तड़पन, तरसन, चाहना और वेदना की यात्रा में ये कहानी बन पड़ी है। ये मेरा प्रयास मात्र है अपने पापा को समझने का। अपने पापा को अपने ही मन में ढूँढ लेने और प्रतिष्ठित कर लेने की कोशिश है यह कहानी। - [Itne Bhi Door Nahin They](https://kitablelo.com/itne-bhi-door-nahin-they/): युद्ध की गहरी कंदरा में,लालसाओं के डोलाइन के पीछे,राजनीति के चूना पत्थरों से निर्मित कठोर शैल के अनगढ़ आवरण में बरसों से बंद, अपनी प्राकृतिक और कलात्मक कांति से दीप्त नाजुक मोती सा ये सुंदर देश वियतनाम, अपनी स्निग्ध आभा की छटा दुनिया के समक्ष उस तरह नहीं बिखेर पाया जिसका वो हकदार था। सीप में बंद पड़े इस अनादृत नायाब मोती को हौले से सीप से बाहर निकाल अपनी हथेली पर रख उसकी एक झलक सबको दिखाने की चाहना का नाम ही है ये यात्रा वृत्तांत! हाँ मैं स्वीकार करती हूँ मैं ही पहले पास नहीं आई तुम्हारे, इसलिए हमारे बीच दूरियाँ बनी रही। मैंने ही आने में बहुत देर कर दी वरना… इतने भी दूर नहीं थे तुम! - [Titali](https://kitablelo.com/titali-manav-kaul/): Titali | तितली नई बात कहने की तलाश में किसी भी कहानी के पहले एक लंबी गहरी चुप होती है। हम उसे सन्नाटा नहीं कह सकते हैं। कोरे पन्ने और भीतर पल रहे संसार के बीच संवादों का जमघट लगा होता है। बहुत देर से चली आ रही चुप में संघर्ष नई बात कहने के आश्चर्य का चल रहा होता है। इस चुप और शांत दिख रहे तालाब के भीतर पूरी दुनिया हरकत कर रही होती है। नया कहने में कुछ नए शब्द मुँह से निकलते हैं, पर उन शब्दों में जिए हुए का वज़न कम नज़र आता है। कुछ भी नया कहाँ से आता है? हमारे जिए हुए से ही। पर हमारे जिए हुए की भी एक सीमा है। हमारे जिए हुए के तालाब का दायरा छोटा होता है शायद इसीलिए किसी भी क़िस्म के नए अनुभव का टपकना कभी हमारे कहे में बड़े वृत्त नहीं बना पाता है। (इसी किताब से) - [Qitraah](https://kitablelo.com/qitraah-sushma-gupta/): Qitraah | क़ितराह गृहयुद्ध में तबाह सीरिया वहाँ की स्त्रियों के लिए भयावह यातनाघर बन गया। चोटिल देह और आत्मा लिए भारतीय मूल की एक सीरियाई लड़की भारत आती है। यहाँ उसकी मुलाक़ात भारतीय सेना के उस ऑफ़िसर से होती है, जो आतंकवाद से लड़ने में अपना बहुत-कुछ गँवा चुका है। जीवन के सियाह रंगों से भरे ये दो लोग एक लंबी यात्रा पर निकल पड़ते हैं। ‘क़ितराह’ यात्रा में घटित होता गल्प है। वह पहले लड़की और लड़के के जीवन में ‘घट’ चुका है, जो इन दोनों को इस क्रूर ‘घटे’ की गली के अंत तक छोड़ आया है। वहाँ से वापस अकेले लौटने का साहस उनके पास नहीं है। यह उपन्यास पाठकों को भी पात्रों के साथ यात्रा पर ले जाता है जिसे पढ़ते हुए वो अपने भीतर उन अनजाने, भुला दिए गए सपनों की ओर लौटने लगते हैं, लेखक की सुंदर भाषा और दृष्टि का आश्वासन ख़ुद के कंधों पर लिए। पर जब तक जीवन शेष है, घटित-अघटित सब कुछ लौटकर दस्तक देता ही है, बार-बार... - [Shadow](https://kitablelo.com/shadow-jayanti-ranganathan/): शैडो | Shadow मयंक ने कभी सोचा न था कि एक दिन उसके नए लिखे जा रहे उपन्यास का एक किरदार उसके सामने आ खड़ा होगा और उस कहानी की हीरोइन काव्या की तलाश उसे दिल्ली से वायनाड ले जाएगी। कौन है यह काव्या, जो उसके आज और बीते कल पर भारी पड़ रही है? गर्लफ़्रेंड पूर्वा, पड़ोस में रहने वाली क्रेज़ी उमा, प्यार से भरी मारिया के साथ एक अनजाने-अनदेखे और अनकहे सफ़र पर निकल पड़ा है मयंक। क्या काव्या इन सबके बीच की कोई कड़ी है? सस्पेंस, थ्रिल और एडवेंचर से भरपूर नॉवेल ‘शैडो’ में मिलेगा इन सबका जवाब। - [Chaal Pe Chaal](https://kitablelo.com/chaal-pe-chaal/): Chaal Pe Chaal-छः माह से खाली बैठे प्राइवेट डिटेक्टिव डेविड फेनर को जब उस खूबसूरत युवती के आने की खबर मिली तो उसे लगा था कि शायद अब उसे कोई केस मिलेगा। वह कहाँ जानता था कि वह औरत अपने साथ मुसीबतों और रहस्यों का ऐसा झंझावत लेकर आएगी कि उसका अपनी जान बचाना दूभर हो जाएगा। अब हर चाल पे उसे ऐसी चाल चलनी पड़ेगी जो उसे मौत से दूर और सच्चाई के करीब लेकर आएगा। लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा था… वह हर चाल पर मौत के नजदीक और सच्चाई से दूर जाता जा रहा था… सुप्रसिद्ध क्राइम लेखक जेम्स हेडली चेइज़ के उपन्यास The Doll's Bad News का विकास नैनवाल द्वारा किया उत्कृष्ट हिन्दी अनुवाद - [A Thousand Scars: Book1-The Hunter](https://kitablelo.com/a-thousand-scars-book1-the-hunter/): A Thousand Scars: Book1-The Hunter - Kalki Sen is kidnapped. The kidnapper calls her mother, taunting her but promising to release Kalki. However, Kalki is finally found only as a mutilated and decomposed corpse in the Rabindra Sarobar Lake. Kalki’s ex-boyfriend Amit becomes the prime suspect of the Kolkata Police. However, it soon emerges that Kalki is not the only victim of the kidnapper. Is a sadistic serial killer on the loose in the streets of Kolkata? ACP Das of the Kolkata Police is convinced the other kidnappings are just a smokescreen set up by Amit. Amit’s mother, Gargi Ghosh, turns to Vikram Rana to prove her son’s innocence. Sexual perversion, vicious violence, and intuitive intelligence – the devastating makeup of a psychopath masquerading as a normal person who, to the outside world, leads an unremarkable, inoffensive life. Who is the cunning killer who finds ultimate gratification in torturing and killing young women? Is it Amit? And if Amit is not the killer, can Vikram Rana save him when ACP Das is after his blood? - [Maya Mari Na Man Mara](https://kitablelo.com/maya-mari-na-man-mara/): इस पुस्तक को तीन भागों, “चदरिया झीनी रे”, “सुनो भाई साधो” और “माया का सुख चार दिन“ में विभाजित किया गया है। सम्बन्ध सुखदायक होते हैं लेकिन सुख यदि अकेले आ जाये तो वो सुख नहीं होता । सुख की पूर्णता ही दुःख से है। दोनों का समान रूप से रसास्वादन लेने के उपरान्त ही अनुभव को पूर्ण कहा जा सकता है। मैंने प्रथम भाग में उन दुखों को देखने कि कोशिश की है जो सुख या सुख कि उम्मीद से जन्म लेते हैं। सम्बन्ध के अवलोकन में सम्बन्ध कि गहराई, नजदीकी और जीवन पर उसका प्रभाव मायने रखता है। कोशिश की है कि जहाँ जहाँ मुझसे चूक हुई है या मेरी वृत्तियों ने मुझे जिन बेईमानियों कि तरफ धकेला उनका मैं आंकलन कर पाऊं और उसकी पूरी जिम्मेदारी स्वयं ले पाऊं। जैसे को तैसा देखने भर कि कोशिश ही जिम्मेदारी का पहला कदम है। मैं उस कोशिश में खरा उतरना चाहता हूँ। इस भाग में मैं एक प्रेम सम्बन्ध से लेकर वैवाहिक सम्बन्ध तक से उभरे मनोभावों का अवलोकन करने कि कोशिश की है। यह प्रश्न उठ सकता है कि, ऐसा करना जरुरी क्यूँ है? फिर इसके उत्तर में एक और प्रश्न मुस्कान लिए खड़ा होता है कि ऐसा न करना क्या खुद को छुपा लेना नहीं है ? खुद को उघाड़ देना ही तो मेरा होना है। मैं मेरे होने से कैसे बच सकता हूँ। इसीलिए तो मेरे होने को मैं इस किताब के दूसरे और तीसरे भाग तक ले गया; जहाँ मैं हर उस, चीज, जगह, पशु, पक्षी, कीट, पतंगे और इंसान से सम्बन्ध बनाता हुआ पाता हूँ जिनसे मैं सामाजिक रूप से उस सम्बन्ध के लिए कोई नाम नहीं दे सकता। - [Samrajya](https://kitablelo.com/samrajya/): Samrajya यह महागाथा है एक ऐसे सामान्य युवक की, जो विपरीत परिस्थितियों में अपनी दुर्द्धर्ष इच्छाशक्ति एवं अदम्य साहस से एक ऐसे असम्भाव्य नायक के रूप में उभरता है जो विदेशी आक्रान्ता की दासता से पीड़ित अपने देश को केवल मुक्ति ही नहीं प्रदान करता, अपितु छोटे छोटे राज्यों में विभाजित आर्यावर्त को संगठित कर देश को स्थिरता भी प्रदान करता है। यह महागाथा है एक ऐसे आचार्य की, जो अपनी तीक्ष्ण बुद्धि से स्वकेन्द्रित एवं स्वार्थी राजाओं का उन्मूलन कर एक राष्ट्र – “अखण्ड भारतवर्ष” के सिद्धान्त को प्रतिपादित करता है। ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित यह काल्पनिक उपन्यास, पाठकों को युवा चन्द्रगुप्त मौर्य एवं उसके आचार्य विष्णुगुप्त के जीवनकाल की रोमांचक यात्रा पर ले चलता है, और उस समय एवं परिस्थिति के अनुसार होने वाली घटनाओं का मनोरंजक प्रस्तुतिकरण करता है। - [Yatharth](https://kitablelo.com/yatharth/): यथार्थ यानी एक ऐसा सत्य जिसे झुठलाया नहीं जा सकता। एक ऐसा सत्य जिसे सामने देखकर भी अनदेखा कर दिया जाता है। यथार्थ एक प्रश्न है- “ऐसा कैसे हो सकता है?” कल्पनातीत किंतु सत्य। सामाजिक विसंगतियों में उलझे मानवीय जीवन के सत्य को उजागर करती हुई पुस्तक ‘यथार्थ’ आज आपके समक्ष हैं। जब मैंने इसे लिखना शुरू किया तो मेरा मन बहुत ही विचलित था क्योंकि मेरी दृष्टि में सभ्य समाज की परिभाषा बदल रही थी। अब इसे सामाजिक मूल्यों का पतन कहूँ या आधुनिक समाज का अवतरण, चारों ओर एक प्रश्न चिन्ह घूमता हुआ प्रतीत होने लगा और इसी से जन्म हुआ ‘यथार्थ’ का। - [Koyle Ki Lakeer](https://kitablelo.com/koyle-ki-lakeer/): KOYLE KI LAKEER | कोयले की लकीर -कई बार पता नहीं होता है कि कौन सी घटना आपके आने वाले जीवन को नयी दिशा देगी, नया रूप देगी, बचपन की घटनाएं तो बचपन की बातें समझ कर अक्सर दिल के एक कोने में संभाल कर रख दी जाती हैं, बस, किसी अनमोल धरोहर की तरह। - [Khule Rakhna Darvaze](https://kitablelo.com/khule-rakhna-darvaze/): Khule Rakhna Darvaze | खुले रखना दरवाज़े - इस संग्रह में मानवीय संवेदनाओं और भावनाओं से ओतप्रोत 15 कहानियाँ हैं। इसमें से बहुत सी कहानियों ने अलग अलग कहानी प्रतियोगिताओं में पुरस्कार प्राप्त किया। इनमें से ज्यादातर कहानियाँ राष्ट्रीय स्तर की अलग अलग पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुकी हैं जिन्हें पाठको का भरपूर प्यार मिला। अब ये सभी कहानियाँ आपके सामने एक संकलन में प्रस्तुत हैं। - [Fatal Fallout](https://kitablelo.com/fatal-fallout/): Fatal Fallout - When love is an obsession, rejection is fatal … Beautiful model and aspiring actress Gauri is found dead on the highway from a gunshot wound. The jewelry she had been wearing and other valuables are missing. Is it a case of a robbery gone wrong? Or is it premeditated murder? Gauri’s friends and family hold her boyfriend Akash responsible for the death. Gauri had recently broken up with him because of his abusive behavior. Did the fallout of the breakup turn fatal for her? Did Akash decide that if he couldn’t have her, nobody else would either? Moreover, why did the film director Madhav hire detective Vikram Rana to investigate her death? Is it because he loved her, or because he wanted to point the needle of suspicion away from himself? Adding to the puzzle, is the corrupt police inspector Phani Kuma sabotaging the case for his own devious motives? The media, meanwhile, is sensationalizing the case, and pressure is mounting on ACP Gopi Reddy to resolve the case at the earliest. Ace detective Vikram Rana swings into action to untangle a complex web of sex, lies, and DNA to get to the truth. - [Behind the Scenes](https://kitablelo.com/behind-the-scenes/): Fading superstar of the Bengali film industry Ryan Gomez is poisoned to death while shooting for a film in the pretty hill town of Darjeeling. Sheila Dhar, the film’s beautiful female lead with whom Ryan had recently broken his engagement is the chief suspect. Sheila attempts suicide and is shifted to a hospital in Kolkata for treatment. The CID, Kolkata, takes over the investigation and the film crew is allowed to move back to the “City of Joy”.Though revenge for the broken engagement seems the obvious motive for the murder, there are several others who had reason to wish Ryan dead. Powerful film producer Rustom, the love of whose life ended up becoming Ryan’s first wife. Screenplay writer Allan, who was in danger of being fired from the production house thanks to a public tiff with Ryan. Acclaimed film director Paddy, who was in love with Sheila. Sheila’s mother, Jaya, who was strongly opposed to her marrying Ryan. The family of Ryan’s first wife, who bear a deep grudge against him. There are suspects galore, but the murderer has not reckoned with the tenacity of Vikram Rana. - [A Season for Dying](https://kitablelo.com/a-season-for-dying/): A Season for Dying : Note from a killer “This is Prakash writing. I am the murderer of Padma Manepally. I am attaching photos of her dead body taken in her apartment today to prove that I am indeed the killer. Old ladies make nice soft targets. I think I will wipe out an old lady next. …Catch me if you can.” 1st April, 11:30 am Charminar: A housewife is strangled to death. 15th April 5:30 am Begumpet: A reputed doctor is bludgeoned to death near Begumpet Station while out on her morning walk. A ruthless killer is on the loose. He has openly challenged the Hyderabad Police to catch him. The reputation of the Hyderabad Police is in tatters. The psychopath is roaming freely across Hyderabad killing indiscriminately. Or is there a method in this madness? Who are these victims and why they have been selected by the murderer? He ropes in good friend Vikram Rana to help him. As Gopi Reddy admits, 'Random killers are the hardest criminals to catch.' But to Vikram Rana something about these brutal incidences does not ring true and these crimes seem to be related…. Will Vikram and ACP Reddy be able to prevent another murder in this race against time before this monster strikes again? - [Vikram Rana Investigates](https://kitablelo.com/vikram-rana-investigates/): Vikram Rana Murder Mysteries set in Hyderabad……The Mysterious Affair of the Lohia MansionWhen the glamourous socialite Richa Lohia is poisoned in her mansion in Jubilee Hills, her brother-in-law hires his mate, ex-cop Vikram Rana, to solve this murder. This is Vikram’s first case and he, along with Inspector Gopi Reddy, must solve the case even if they face opposition from the richest and powerful family in Hyderabad, who would stop at nothing to defend themselves.The Sonia Sinha CaseWhen property developer Krishna Dhavala is stabbed to death in Necklace Road, everyone suspects Mrs. Dhavala to be the murderer of her alcoholic and abusive husband. But is that really the case? Vikram Rana and Inspector Reddy have a tough time uncovering the murderer and Vikram himself almost dies trying to solve this case. Experience the mystery along with the duo as they fight their way through the maze of lies, deceit and greed. - [Meri Jaan Ke Dushman](https://kitablelo.com/meri-jaan-ke-dushman/): “मैं अनायास बैंक डकैती का गवाह बन गया। मैं पाँच डाकुओं में से एक की शिनाख्त कर बैठा और उसे फांसी दिलवाने की वजह बना। नतीजतन बाकी के चार डाकू मेरी जान के दुश्मन बन गए। जान बचाने के लिए मुझे अपनी बैंक की नौकरी छोड़नी पड़ी, शहरबदर होना पड़ा। फिर चार साल बाद . . .” टॉप मिस्ट्री राइटर सुरेन्द्र मोहन पाठक की चमत्कारी लेखनी की यादगार दस्तावेज - [Chuppi](https://kitablelo.com/chuppi/): अधूरेपन में कसक होती है। अधूरेपन में वास्तविकता का प्रतिबिंब नज़र आता है। लेकिन ज़िंदगी की हर कमी के बारे में ये कथन सदा सत्य साबित नहीं होता। हमारे जीवन की कुछ कमियाँ हमारे व्यक्तित्व को स्वतंत्र आकार लेने ही नहीं देतीं। हम कुंठाग्रस्त हो जाते हैं। हमारे मन में असुरक्षा की भावना घर कर जाती है। तनाव और गहरे अवसाद की ओर हमारे क़दम बढ़ने लगते हैं। उस कमी को पूरा करने के लिए हम कोई भी हद पार करने को हमेशा तैयार रहते हैं। और जो पहले से हमारे पास है, उसको भी दांव पर लगाने से हम नहीं चूकते। यही नहीं, जब कभी हमारा ये अधूरापन पूर्ण हो जाता है और हमें वो चीज़ मिल जाती है, जिसकी आस में हम अब तक जी रहे होते हैं, तब हम उस चीज़ के प्रति बहुत अधिक संवेदनशील हो जाते है और उसे सदा पास रखने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। ऐसी ही परिस्थितियों में फँसे, दो किरदारों की कहानी है 'चुप्पी'। एक टीवी नेटवर्क का सीईओ गौतम सिकंद और साइकोलॉजिस्ट तारा मिले तो थे, एक दूसरे के पूरक बनकर, मगर किस्मत को उनके लिए कुछ और ही मंज़ूर था। प्रेम, परवाह, त्याग और समर्पण, सबकुछ था, इन दोनों के रिश्ते में। फिर भी इन्हें एक दूसरे से दूर होना पड़ा। क्यों होना पड़ा, ये जानने के लिए आपको इसे पढ़ना होगा। उम्मीद है कि आपको मेरा ये दूसरा उपन्यास पसंद आएगा। इसको भी आपका उतना ही प्रेम मिलेगा, जितना मेरे पहले उपन्यास 'जुहू चौपाटी' को मिला था। - साधना जैन - [Moongate](https://kitablelo.com/moongate/): मूनगेट पूनम अहमद की चार उपन्यासिकाओ का संकलन है। यहाँ स्त्रियाँ नैतिकता की सफेद स्याह गलियों को छोड़ धूसर क्षेत्रों में विचरण करती दिखती हैं। मोही, वो झूठी, मूनगेट और अमोदिनी में आप ऐसी स्त्रियों से वाकिफ होंगे जो अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए हर वह कदम उठाने के लिए तैयार हैं जिसकी जरूरत है। सही गलत की महीन रेखाओं पर वह अपनी डगर चलती हैं। उनकी मंजिल क्या है और वह अपनी मंजिल पा पाती हैं या नहीं ये तो आप इन रचनाओं को पढ़कर ही जान पाएँगे - [1931 Desh Ya Prem?](https://kitablelo.com/1931-desh-ya-prem/): 1931 के दौर की इंक़लाबी पृष्टभूमि पर आधारित उपन्यास - [Bhor Uske Hisse Ki](https://kitablelo.com/bhor-uske-hisse-ki-ranvijay/): Bhor Uske Hisse Ki | भोर उसके हिस्से की - तीन स्त्रियों की यात्रा- एक नया आसमान छूने को... वर्जनाओं, मर्यादाओं को पहचानने को ... उनसे जूझने को Bhor Uske Hisse Ki | भोर उसके हिस्से की -जब तक जामवंत ने हनुमान को अहसास नहीं दिलाया था कि तुम समुद्र लाँघ सकते हो, तब तक उनका रावण की नगरी लंका तक जाना असम्भव था। इसी तरह कई बार हमारे मन के अवचेतन के जड़ों, बन्धनों, जंजीरों को तोड़ने के लिए एक बल की ज़रूरत होती है, जो होता तो हमारे अन्दर ही है पर उसे किसी बाहरी जामवंत की प्रेरणा चाहिए होती है। तीस से छत्तीस वर्ष के वय की तीन नौकरी पेशा स्त्रियाँ हैं, जो अपना रूटीन जीवन जी रही हैं। वे काम के सिलसिले में एक दूसरे से मिलती हैं और गहरी दोस्त बन जाती हैं। व्यवसायों की पुरुष प्रधान दुनिया में वे पहले से ही खुद को अकेली महसूस करती रही थीं। अपने आस-पास के संसार, पुरुषों और समाज के अदृश्य बन्धनों से उनमें एक क्षोभ है। उनमें से ही एक स्त्री द्वारा, नितांत मजाक में विदेश का ओनली लेडीज ट्रिप प्रस्तावित किया जाता है। बात की बात में वे उस पर सहमत हो जाती हैं। इस यात्रा पर वे पहली बार स्वयं से मिलती हैं। अपनी क्षमताओं, सीमाओं और वर्जनाओं से उनकी मुलाकात होती है। यह यात्रा मिलाती है उन्हें उस स्वतंत्र महिला से जो अपने डर, शर्म, लाज, लिहाज, परिधान, उपेक्षा, परिहास से इतनी आगे निकल जाना चाहती है कि उसे यह सब दिखना ही बंद हो जाए। - [Jhoothi Aurat -Hard Bound](https://kitablelo.com/jhoothi-aurat-hard-bound/): एक प्रतिष्ठित परिवार की सदस्या एक ऐसी महिला की कहानी जो कदम कदम पर झूठ बोलती थी जिसे अपने हितैषी और मददगार सुनील से भी झूठ बोलने से कोई गुरेज नहीं था जिसकी बाबत जिद करने लगी थी कि उसने जिस शख्स को गोली चलने के बाद मौकाएवारदात से भागते देखा था वो सुनील था। झूठी औरत नया, परिवर्धित संस्करण! मूल कथानक से बिल्कुल जुदा! जिसे लेखक ने शुरू से आखिर तक फिर से लिखा। - [Oye Master Ke Launde](https://kitablelo.com/oye-master-ke-launde/): ओए मास्टर के लौंडे - मेरे लिए इसे लिखना ऐसा था जैसे किसी होम्योपैथ को अपनी हिस्ट्री देना, जो कहता है, ‘शुरु से शुरु करो’ और धीरे धीरे वो आपको भीतर तक कुरेद डालता है। वहाँ गहरी अंदरूनी तहों में दबी-छिपी मिलती हैं कुछ कथाएँ, कुछ व्यथाएँ, कुछ परिचित-अपरिचित लोग, कुछ घटनाएँ। इसे लिखने की यात्रा में वे सब मेरे सामने ज़िंदा हो उठे। कुछ ने तो शिकायत भी की, ‘इत्ते दिनों बाद याद आई हमारी!’ और मैं ख़ुद पर शर्मिंदा हो उठी। - दीप्ति मित्तल - [Joker Ke Do Aagey Joker](https://kitablelo.com/joker-ke-do-aagey-joker/): Joker Ke Do Aagey Joker | जोकर के दो आगे जोकर- JOKER -  जोकर के दो पीछे जोकर, बोलो कितने जोकर?” – इस पहेली के साथ जोकर ने एक बार फिर हिंदुस्तान की सरजमीं पर कदम रखे और पहुंचा मुंबई की सेंट्रल जेल के अंदर एक खास मिशन के लिये एक खास पार्टनर की तलाश में । - [Dil Hai Chhota Sa](https://kitablelo.com/dil-hai-chhota-sa/): Dil Hai Chhota Sa | दिल-है-छोटा-सा - नितांत आरंभ में… आपको मिलेगी चित्रा। चुलबुली और चित्ताकर्षक। अपने छोटे-छोटे बालों को, माथे से झटकती हुई। ऐसे ही वो झटक लेगी शशांक का दिल। फिर कशमकश, दुनियादारी, संयोग-वियोग से होते हुए मोहब्बत सबकुछ लुटाकर भी अंत में ख़ाली हाथ रह जाती है - [Meri Priya Kahaniyan - Shivani](https://kitablelo.com/meri-priya-kahaniyan-shivani/): Shivani - Meri Priya Kahaniyan (मेरी प्रिय कहानियाँ) - शिवानी नारी जीवन व उसके मन की पर्तों को गहराई से उद्घाटित करने वाली विषयवस्तु के कारण हिन्दी की महिला कथाकारों में अपना विशिष्ट स्थान रखती हैं। उनकी कहानियों की संख्या लगभग 100 के आसपास होगी। कहानियों की मुख्य पात्र भी स्त्रियाँ ही हैं। विषयवस्तु की दृष्टि से उनकी कहानियाँ संवेदना की गहराई में जाकर समाज के यथार्थ को सामने लाती हैं। उनकी कहानियाँ पाठकों का मनोरंजन तो करती ही हैं साथ ही उन्हें झकझोरती भी हैं। - [Gandhi Ki Sundarta](https://kitablelo.com/gandhi-ki-sundarta/): Gandhi Ki Sundarta - महात्मा गाँधी पर एक नई समझ समय की ज़रूरत है। हमें लगता है कि हम गाँधीजी को जानते हैं, जबकि वैसा है नहीं। हालात तब और जटिल हो जाते हैं, जब हम देखते हैं कि विपरीत लक्ष्यों को लेकर चलने वाली विचारधाराएँ गाँधी-विचार की खंडित व्याख्याएँ करते हुए उन्हें अपने हितपोषण के लिए अपहृत करती हैं। आज हम देखते हैं कि यत्र-तत्र गाँधीजी को लेकर सतही सूचनाओं का घटाटोप है, किंतु एक उजली और धारदार समझ उससे नहीं बन पाती है। यह पुस्तक इस अभाव की पूर्ति करती है। इसे आप गाँधी-विचार में प्रवेश की प्राथमिकी भी कह सकते हैं। यह गाँधीजी से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर यथेष्ट गम्भीरता, प्रामाणिकता और सुस्पष्टता से व्याख्यान करती है और हमारे सामने उनके उचित परिप्रेक्ष्यों को प्रकट करती है। यह एक महात्मा के भीतर के मानुष को प्रकाशित करने का उद्यम भी है। इस छोटी-सी पुस्तक में गाँधीजी को समझने की सिलसिलेवार कुंजियाँ निहित हैं। - [Prem Kabootar](https://kitablelo.com/prem-kabootar-manav-kaul/): Prem Kabootar (प्रेम कबूतर) मैं नास्तिक हूँ। कठिन वक़्त में यह मेरी कहानियाँ ही थी जिन्होंने मुझे सहारा दिया है। मैं बचा रह गया अपने लिखने के कारण। मैं हर बार तेज़ धूप में भागकर इस बरगद की छाँव में अपना आसरा पा लेता। इसे भगोड़ापन भी कह सकते हैं, पर यह एक अजीब दुनिया है जो मुझे बेहद आकर्षित करती रही है। इस दुनिया में मुझे अधिकतर हारे हुए पात्र बहुत आकर्षित करते रहे हैं। हारे हुए पात्रों के भीतर एक नाटकीय संसार छिपा हुआ होता जबकि जीत की कहानियाँ मुझे हमेशा बहुत उबा देने वाली लगती हैं। जब भी मैंने अपना कोई लिखा पूरा किया है उसकी मस्ती मेरी चाल में बहुत समय तक बनी रही है। अगर हम प्रेम पर बात करें तो मैंने उसे पाया अपने जीवन में है पर उसे समझा अपने लिखे में है। -मानव कौल - [October Junction](https://kitablelo.com/october-junction-divya-prakash-dubey/): October Junction | अक्टूबर जंक्शन - दिव्य प्रकाश दुबे की चौथी किताब है जो बेस्ट seller रह चुकी है। इस किताब की प्रस्तावना में लिखा है - हमारे पर हर कहानी को सुनाने के दो वर्जन होते हैं, एक दूसरों को सुनाने के लिए और दूसरा खुद को समझाने के लिए। जिस दिन कहानी के दोनों वर्जन एक हो जाते हैं उस दिन लेखक अपनी किताब के पहले पन्ने पर लिख देता है - "इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं, इसका जीवित या मृत व्यक्ति से कोई लेना-देना नहीं है" ये एक अदना सा झूठ पूरी कहानी को सच्चा बना देता है। - [Masala Chay](https://kitablelo.com/masala-chay-divya-prakash-dubey/): Masala Chay मसाला चाय - दिव्य प्रकाश दुबे का बहुचर्चित कहानी संग्रह है. - [Uljhan Buljhan Pyar](https://kitablelo.com/uljhan-buljhan-pyar/): Uljhan Buljhan Pyar उलझन बुलझन प्यार -रिश्तों में इतनी सामर्थ्य नहीं होती कि वे प्रेम की परिभाषा गढ़ सकें, जबकि प्रेम कुछ भी गढ़ सकता है। अंकुरण, प्रेम का स्वभाव है जो परिस्थितियों के अनुकूल होते ही उग आता है, परंतु ये उसकी तक़दीर है कि वह दीवारों पर उगे पौधों की तरह सूख जायेगा या फिर किसी मैदान में बढ़कर विशाल वृक्ष की तरह फूलेगा फलेगा। परिणाम की चिंता से दूर प्रेम धारा के विपरीत किसी अपवाद की तरह मिल ही जाता है। उलझन बुलझन प्यार की कहानी ऐसे ही किसी अपवाद की कहानी है, साथ ही प्रेम की कोमलता और रिश्तों के कठोर यथार्थ का तार्किक विश्लेषण भी करती है। - [Yaar Jadugar | यार जादूगर](https://kitablelo.com/yaar-jadugar-nilotpal-mrinal/): Yaar Jadugar | यार जादूगर - हिंदी साहित्य की मुख्य धारा के उपन्यासों में विषय-वस्तु के लिहाज से एकदम नया और चौंकाने वाली कहानी है। कल्पना की जमीन पर बोया गया ऐसा यथार्थ जो मानवीय संबंधों और उसके मनोविज्ञान पर दार्शनिकता की गाँठ खोलता रेशा-रेशा उघाड़ते हुए एक प्राकृतिक शाश्वत सत्य के समीप पहुँच पूर्ण होता है। यार जादूगर मृत्यु का महोत्सव है और जीवन का लोक संगीत भी, जो मृत्यु की अनिवार्यता को स्वीकार कर जीवन की सार्थकता को मलंग हो स्वीकार करने की कोशिश है। - [Banaras Talkies](https://kitablelo.com/banaras-talkies-satya-vyas/): Banaras Talkies | बनारस टॉकीज -A perfect college. Three imperfect students. A caring hostel. Three careless mates. Three decisive years. Three ignorant souls. A bomb blast and A close shave. Welcome to life through the gate of BHU. - [Calendar Par Latki Tareekhen](https://kitablelo.com/calendar-par-latki-tareekhen/): कैलेंडर पर लटकी तारीखें - दिव्या शर्मा (Calendar Par Latki Tareekhen- Divya Sharma) हर तारीख की अपनी एक कथा है। जो लिखी गई हैं यथार्थ के धरातल पर कल्पनाओं के रंगों को समेट कर। यह रंग हमारे अपने हैं जिनमें शामिल है हमारी पूरी ज़िन्दगी। जिन्दगी जो समंदर की तरह होती है, वह समंदर दिल की गहरी गुफा में बह रहा है लेकिन "इस नमकीन... समंदर में भी ज्वार-भाटा आते हैं.... तब उस अंधेरी गुफा में ....भी ...शोर मचने लगता है ..।" इसी ज़िन्दगी के उतार चढावों को, इसके सुख और दुःख के रंगों को समेटकर लाया है यह लघुकथा संग्रह जो कहीं-न-कहीं आपको अपने होने का एहसास दिलाएगा।   - [Jhoothi Aurat](https://kitablelo.com/jhoothi-aurat/): एक प्रतिष्ठित परिवार की सदस्या एक ऐसी महिला की कहानी जो कदम कदम पर झूठ बोलती थी जिसे अपने हितैषी और मददगार सुनील से भी झूठ बोलने से कोई गुरेज नहीं था जिसकी बाबत जिद करने लगी थी कि उसने जिस शख्स को गोली चलने के बाद मौकाएवारदात से भागते देखा था वो सुनील था। झूठी औरत नया, परिवर्धित संस्करण! मूल कथानक से बिल्कुल जुदा! जिसे लेखक ने शुरू से आखिर तक फिर से लिखा। - [Haraami](https://kitablelo.com/haraami/): Haraami - बाबा अलाव के पास खाँसता था। साथ ही सूखे-झुर्रीदार घुटनों पर ठुड्डी टिकाये, दुविधा और ख़ुशी के भँवर में डूबता-उतरता, आग कुरेदने लगता, एक बाप के लिए सौभाग्य का उत्सव उसके पुत्र के विवाह का अवसर होता है। दूसरा सुख मिलता है जब पुत्र के घर में कुल-वंश का खेवनहार आये। इन दोनों ख़ुशियों के योग से बड़ा, दर्द से छाती चाक करने वाला एक दुःख भी है। और वह है एक बाप के सामने पुत्र तथा पौत्र का मरण। मूँज की रस्सी से कफ़न-काठी का बिस्तर उसके सामने ही कसा जाता है। अर्थी उठती है। अन्तिम यात्रा की तैयारी और प्रवास में ख़ुद शामिल होता हुआ वह श्मशान तक जाता है और फिर ज्वाला के पदन्यास को अपनी आँखों में और छाती पर महसूस करता हुआ, धूँ-धूँ कर जलती चिता के सामने हिन्दू धर्म के उस अवांछित सनातन पुण्य का भागी बन जाता है, जिसकी उसने कभी कामना ही नहीं की। बाबा के ललाट पर ये तीनों रेखाएँ थीं। - [Chedipe:Indian She-Vampire](https://kitablelo.com/chedi-peindian-she-vampire/): Chedipe:Indian She-Vampire: She has always been with us and will always be our haunting shadow. Chedipe entices, seduces, exploits and then kills. She traps men with beauty and repulses them with ugliness. Confronting her are a cunning English Captain, an Anglo-Iranian Anthropologist and an Indian Subedar. But can these desperados fight and defeat a supernatural being that has conquered death? This is the hidden history of an ancient Vampire, who terrorised the villagers of Hindustan, worried the fledgling Company Raj and interested the wily and merciless thugs in the 1800s. - [Dilli Se Karachi via Rawalpindi](https://kitablelo.com/dilli-se-karachi-via-rawalpindi/): Dilli Se Karachi via Rawalpindi पाकिस्तानी लेखिका साबुहा खान की आत्मकथा है जो दिल्ली से चलकर रावलपिंडी होते हुए कराची पहुँचती है। यह घटनाक्रम 1947 में भारत-पाकिस्तान बटवारे में की गदर के समय को दर्शाता है - [Jinhe Jurm-E-ishq Pe Naaz Tha](https://kitablelo.com/jinhe-jurm-e-ishq-pe-naaz-tha/): Jinhe Jurm-E-ishq Pe Naaz Tha | जिन्हें जुर्म-ए-इश्क पे नाज़ था यह उपन्यास 'Jinhe Jurm-E-ishq Pe Naaz Tha' हमारे चारों ओर पसरते जा रहे अंधकार को चीरकर एक प्रकाश-पुंज की तरह सामने आता है। निराशा के इस जानलेवा समय में पंकज सुबीर की यह कृति हमें हौसला और उम्मीद बँधाती है। इसे पाठ्यक्रमों में सम्मिलित किया जाना चाहिए और युवाओं तक निःशुल्क पहुँचाया जाना चाहिए। आज के पुस्तक और प्रेम विरोधी दौर में ऐसा कुछ किया जाना चाहिए कि 'जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था' उपन्यास घर-घर में पढ़ा जाए। हिन्दी के चर्चित लेखक पंकज सुबीर का तीसरा उपन्यास। पंकज सुबीर के पहले दोनो उपन्यास "ये वो सहर तो नहीं" और "अकाल में उत्सव" बहुत अधिक चर्चित रहे हैं। कई सारे सम्मान इन दोनो उपन्यासों पर प्राप्त हुए। और अब पंकज सुबीर का तीसरा उपन्याास "जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था" प्रकाशित होकर आया है। पंकज सुबीर अपनी अलग तरह की शैली तथा विशिष्ट भाषा के लिए पहचाने जाते हैं। यह उपन्यास भी उसी कड़ी में एक प्रयोग है। यह उपन्यास मानव सभ्यता के पिछले पाँच हज़ार वर्षों की कहानी कहता है। और तलाशने की कोशिश करता है कि आख़िर वो क्या है, जिसके कारण मानव सभ्यता पिछले पाँच हज़ार साल केवल लड़ाई और युद्ध में ही गँवा चुकी है। यह उपन्यास बहुत सूक्ष्मता के साथ पिछले पाँच हज़ार सालों की कहानी का अवलोकन करता है। पाठक को एक ऐसी दुनिया में ले जाता है, जहाँ वर्तमान और भविष्य के संकेत मिलते हैं। - [Nai Sadi Ka Katha Samay](https://kitablelo.com/nai-sadi-ka-katha-samay/): Nai Sadi Ka Katha Samay नई सदी का कथा समय पंकज सुबीर द्वारा संपादित आलोचनात्मक लेख संग्रह है - [Rekhayen Bolti Hain 2](https://kitablelo.com/rekhayen-bolti-hain-2/): Rekhayen Bolti Hain | रेखाएं बोलती हैं गीता श्री का चर्चित यात्रा वृतांत है। - [Rekhayen Bolti Hain](https://kitablelo.com/rekhayen-bolti-hain/): Rekhayen Bolti Hain | रेखाएं बोलती हैं गीता श्री का चर्चित यात्रा वृतांत है। - [Kuchh Idhar Zindagi, Kuchh Udhar Zindagi](https://kitablelo.com/kuchh-idhar-zindagi-kuchh-udhar-zindagi/): Kuchh Idhar Zindagi, Kuchh Udhar Zindagi कुछ इधर ज़िंदगी कुछ उधर ज़िंदगी गीता श्री का चर्चित यात्रा संस्मरण है। - [Warison Ki Zubani](https://kitablelo.com/warison-ki-zubani/): warison ki zubani वारिसों की ज़ुबानी गीता श्री द्वारा संपादित किया गया एक मशहूर उपन्यास है - [Deewali Ki Raat](https://kitablelo.com/deewali-ki-raat/): हसीना को मुसीबत में ना देख पाने की अपनी आदत से मजबूर सुनील ने उस दीवाली की रात को जब एक हसीना की मदद की और उसे अपने फ्लैट में पनाह दी तो वो अंजान हसीना अपने पीछे उसके लिये एक लाश छोड़ गयी। एक ऐसे इंसान की लाश जिसको सुनील पूरे शहर में बड़े खतरनाक इरादों के साथ ढूँढता फिर रहा था और आलाएकत्ल था सुनील का ही खंजर। ऐसे में कौन मानता कि कातिल सुनील नहीं था? एक ही बैठक में पठनीय रोमांचक मर्डर मिस्ट्री, जिसमें सुनील की जान जाते-जाते बची। सुनील और रूपा की अनूठी जुगलबंदी! Deewali ki Raat - [Saal Dar Saal](https://kitablelo.com/saal-dar-saal/): साल दर साल (Saal Dar Saal) परतंत्रता के बंधनों को काट कर स्वावलंबी होने की गाथा है। एक व्यक्ति की ही नहीं एक राष्ट्र की भी। छोटी छोटी घटनाओं से गुजरते हुए यह एहसाह नहीं होता कि कब एक व्यक्ति की आत्मकथा समूचे राष्ट्र की व्यथा कथा बन जाती है। साल दर साल (Saal Dar Saal) - डॉक्टर लक्ष्मणदत्त गौतम की आत्मकथा भर नहीं है। यह अपने युग का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। स्वाधीनता संग्राम,सांप्रदायिकता,विभाजन,विस्थापन आदि हर मुद्दे पर लेखक की तीक्ष्ण दृष्टि रही है और यह दृष्टि चीजों को ऊपर - ऊपर से देखने की बजाय भारतीय राजनीति के हर छद्म को उजागर कर उसके नग्न यथार्थ को सामने लाती है। - [Mandir Ka Rahasya](https://kitablelo.com/mandir-ka-rahasya/): Mandir Ka Rahasya | तरुण और वरुण दोनो भाई देहरादून गए तो थे अपने उमेश अंकल के साथ छुट्टियां बिताने, जो वहां फॉरेस्ट ऑफिसर थे। लेकिन उनका सामना हुआ अजीब ओ गरीब घटनाओं और लोगों से। खंडर हो गए मंदिर के अंदर कोई रहस्यमई दुनिया होगी, उन्होंने सोचा तक नहीं था। गांव में रहने वाले मेरू के साथ मिल कर वे किन किन रोमांचकारी मोड़ो से गुजरते हुए न सिर्फ रहस्य से पर्दा उठाते हैं वरन जंगल के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। क्या है मंदिर का रहस्य (Mandir Ka Rahasya) और क्या है प्रार्थना चक्र का राज़ जानने के लिए पढ़िए यह रोचक बाल उपन्यास। - [Chola Mati Ke Ram](https://kitablelo.com/chola-mati-ke-ram/): Chola Mati Ke Ram बस्तर के अघोषित युद्ध क्षेत्र में क्या होता है? क्या होता है जब एक नक्सली, एक पुलिसवाला और एक युवा छात्र आपस में किसी मुद्दे पर भिड़ जाते हैं शब्दों के भँवर में? जो बॉलीवुड की फिल्मों में या एसी कमरों में बैठ कर नॉवेल लिखते हैं बस्तर पर, क्या वैसा ही है बस्तर? बस्तर का हर आदिवासी 'बुधमन' है, ज़रूरत है उसे पहचानने की,उसकी तकलीफों को, पीड़ा को समझने की, उसे अपनाने की। बस्तर के प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर लिखी हुई किताब है "चोला माटी के राम" अनसुने लड़ाकों का अंतहीन युद्ध।  - [Kabhi Gaanv Kabhi College](https://kitablelo.com/kabhi-gaanv-kabhi-college/): Kabhi Gaanv Kabhi College कभी गाँव कभी कॉलेज - ये कहानी है ऊँची दुकान के फ़ीके पकवानों की, बड़े-बड़े नाम वालों की, पर छोटे दर्शन वालों की। कहानी में जब-जब कॉलेज का ज्वार चढ़ता है, गाँव में आते ही भाटा सिर पर फूट जाता है। कहानी के किरदार ऐसे कि प्रैक्टिकल होने के नाम पर ग़रीब आदमी की लंगोट भी खींच लें। कुछ कॉलेज के छात्र ऐसे हैं जिनकी जेबों तक से गाँव की मिट्टी की सुगंध आती है और कुछ ऐसे जो अच्छे शहरों की परवरिश से आकर इस ओखली में अपना सि‍र दे गए हैं। कहानी के हर छात्र का सपना आईएएस/आईपीएस बनने का नहीं है, कोई सरपंच भी बनना चाहता है तो कोई कॉलेज ख़त्म होने के पहले ही ब्याह का प्लेसमेंट चाहता है। कहानी में अर्श है और फ़र्श भी, आसमान भी है और खजूर भी। कहानी में गाँव में कॉलेज है या कॉलेज में गाँव, प्रेम जीतता है या पढ़ाई, दोस्ती जीतती है या लड़ाई– ये आपको तय करना है। - [Ek Desh Barah Duniya](https://kitablelo.com/ek-desh-barah-duniya/): Ek Desh barah Duniya - ‘‘जब मुख्यधारा की मीडिया में अदृश्य संकटग्रस्त क्षेत्रों की ज़मीनी सच्चाई वाले रिपोर्ताज लगभग गायब हो गए हैं तब इस पुस्तक का सम्बन्ध एक बड़ी जनसंख्या को छूते देश के इलाकों से है जिसमें शिरीष खरे ने विशेषकर गाँवों की त्रासदी, उम्मीद और उथल-पुथल की परत-दर-परत पड़ताल की है।’’ -हर्ष मंदर, सामाजिक कार्यकर्ता व लेखक ‘‘यह देश-देहात के मौजूदा और भावी संकटों से संबंधित नया तथा ज़रूरी दस्तावेज़ है।’’ आनंद पटवर्धन, डॉक्युमेंट्री फिल्मकार ‘‘इक्कीसवीं सदी के मेट्रो-बुलेट ट्रेन के भारत में विभिन्न प्रदेशों के वंचित जनों की ज़िन्दगियों के किस्से एक बिलकुल दूसरे ही हिन्दुस्तान को पेश करते हैं, हिन्दुस्तान जो स्थिर है, गतिहीन है और बिलकुल ठहरा हुआ है।’’ -रामशरण जोशी, वरिष्ठ पत्रकार पिछले दो दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय शिरीष खरे वंचित और पीड़ित समुदायों के पक्ष में लिखते रहे हैं। राजस्थान पत्रिका और तहलका में कार्य करते हुए इनकी करीब एक हज़ार रिपोर्ट प्रकाशित हुई हैं। भारतीय गाँवों पर उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के लिए वर्ष 2013 में ‘भारतीय प्रेस परिषद’ और वर्ष 2009, 2013 और 2020 में ‘संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष’ द्वारा लैंगिक संवेदनशीलता पर स्टोरीज़ के लिए ‘लाडली मीडिया अवार्ड’ सहित सात राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों से सम्मानित शिरीष खरे की अभी तक दो पुस्तकें 'तहक़ीकात' और 'उम्मीद की पाठशाला' प्रकाशित हो चुकी हैं। - [Kal Aaj Aur Kal](https://kitablelo.com/kal-aaj-aur-kal-girdhar-rathi/): Kal Aaj Aur Kal - हमारे समय में स्थिति कुछ ऐसी बन गयी है कि लेखक को विचार की ओर मुड़ना ही पड़ता है; सिर्फ़ रचना में नहीं बल्कि सीधे। राठी के विचार का विषय-वितान बहुत फैला हुआ है। उसमें सजगता, वस्तुनिष्ठता और आवेग के साथ अनेक मुद्दों और पहलुओं पर विचार किया गया है। — अशोक वाजपेयी - [Andekhe Pahad](https://kitablelo.com/andekhe-pahad-neeraj-musafir/): Andekhe Pahad | अनदेखे पहाड़ - नीरज मुसाफिर स्वभाव से घुमक्कड़ हैं। इन्हें देश के सुदूर और दुर्गम स्थानों पर यात्रा करने और अपने यात्रा-अनुभवों को लिपिबद्ध करने का शौक है। प्रस्तुत पुस्तक नीरज मुसाफिर की 5वीं पुस्तक है। इसमें इन्होंने उत्तराखंड के पहाड़ों में विभिन्न साहसिक यात्राओं व ट्रैकिंग के अनुभव लिखे हैं। 1. केदारनाथ (अप्रैल 2011), 2. पिंडारी ग्लेशियर (अक्टूबर 2011), 3. गौमुख-तपोवन (जून 2012), 4. रूपकुंड (अक्टूबर 2012), 5. हर की दून (अक्टूबर 2013), 6. डोडीताल (अप्रैल 2015), 7. रुद्रनाथ (सितंबर 2015), 8. नागटिब्बा (दिसंबर 2015), 9. पंचचूली बेसकैंप (जून 2017), 10. फूलों की घाटी व हेमकुंड साहिब (जुलाई 2017), 11. पँवालीकांठा बुग्याल (सितंबर 2017), 12. चौमासी के रास्ते केदारनाथ (अगस्त 2019 - [Pratyakshdarshi](https://kitablelo.com/pratyakshdarshi/): Pratyakshdarshi - यह उपन्यास सारी विपरीत स्थितियों के बीच अपनी जिजीविषा बनाए रखने वालों की आत्मीय कथा है। उपन्यास का समय-काल इस शहर के इतिहास का ऐसा दौर था जब यहां की मुख्य सड़कें पाताल रेल के गड्ढों और ज़मीन से खोदी गयी मिट्टी के पहाड़ों और उन कृत्रिम विपदाओं के बीच किसी तरह रास्ता बनाते आम नागरिकों से भरी थी; ‘लोडशेडिंग’ के चलते जहां रिहाइशी बस्तियों में घंटों या पहरों तक बिजली गायब रहती थी; उमस के मारे भीड़ भरी प्राइवेट बसों, ट्रामों और नीची छत वाली मिनी बसों में लटककर सफर करना मुहाल था और हुगली नदी से सटा शहर का गोदी वाला इलाका अपनी तस्करी गतिविधियों के लिए कुख्यात हो चुका था। युवकों में बेरोज़गारी अपने चरम तक पहुंच चुकी थी। जिस माझेरहाट (बीच के बाज़ार) का पुल अभी हाल ही में भरभराकर गिर गया, रेल पटरी के समानांतर उसके नीचे से गुज़रते हुए या उससे कुछ आगे ‘लेवेल क्रॉसिंग’ फाटक के खुलने का इंतज़ार करते हुए हमारा साबका हर रोज़ फेरीवालों के उस चमत्कृत संसार से होता था, जिसमें रुमालों, अंडरवियरों, अगरबत्तियों, फाउंटेन पेनों से लेकर ‘पुलपुल भाजा’ और बच्चों के खिलौनों तक कुछ भी खरीदा जा सकता था। इन फेरीवालों में बहुत से पढ़े लिखे और शिक्षा प्राप्त नौजवान भी थे जो किसी ढंग की नौकरी की तलाश में धीरे-धीरे अधेड़ और फिर बूढ़े हो गए थे। ज़िंदगी की मामूली चीज़ों के लिए संघर्ष करते इन तमाम चेहरों के बीच यह शहर आज भी उतना ही खस्ताहाल, उतना ही विपन्न, मगर उतना ही जीवंत, उतना ही ज़ि़ंदा है, जितना आज से चालीस वर्ष पहले, सत्तर-अस्सी के उस संक्रमण काल में था। - [Samay Seemant](https://kitablelo.com/samay-seemant/): Samay Seemant इसी विषम समाज में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते पात्रों की एक आत्मीय कथा है। चालिस-बयालीस वर्षों में ये स्थितियां काफी हद तक बदल जानी चाहिए थी। लेकिन ‘समय सीमांत’ का सच आज भी उसी तरह हमारे साथ चल रहा है जहां चंद मुठ्ठी भर लोग अथाह सम्पत्ति के स्वामी बन चुके हैं और नीचे के तबके की आधी जनसंख्या पहले से कहीं अधिक विपन्न और खस्ताहाल दिखाई देने लगी हैं। जनसंख्या के विस्फोट और कमरतोड़ महंगाई ने इस समस्या को और भी गम्भीर बना दिया हैं। समाज में फैली यह विषमता आज शहरों से लेकर गांव तक हर जगह दिखाई देने लगी है। - [Rukawat Ke liye Khed Hai](https://kitablelo.com/rukawat-ke-liye-khed-hai/): Rukawat Ke liye Khed Hai - ‘‘इससे भी अजीबोग़रीब क़िस्सा तेल का था...हमारे पूर्वजों को धरती में से एक ऐसा द्रव मिला था जो इसके भीतर वनस्पति के दबने से लाखों वर्षों में तैयार हुआ था... लेकिन लोगों ने इसे जला जलाकर दो सौ सालों में ही ख़त्म कर डाला था...जब तक तेल था तब तक मोटरकारें और हवाई जहाज़ बिजली की जगह इसी तेल से चलते थे...फिर जब यह ख़त्म हुआ तो इसे लेकर पता नहीं कितनी लड़ाइयाँ लड़ी गयीं...इस्राइल के इतिहासकार गोमिश ने माना है कि प्रकृति के विरुद्ध इंसान का यह जघन्य अपराध तारीख़ कभी माफ़ नहीं कर पाएगी...यह तेल लाखों औषधियों और बहुमूल्य पदार्थों को बनाने में काम आ सकता था...एक अन्य पर्यावरण विशेषज्ञ ने कहा कि यह कौम अगर वक़्त रहते कुछ ज़िम्मेदारी से पेश आयी होती तो आज इस ग्रह का तापमान कम से कम पाँच से दस डिग्री तक कम होता और हमें घर से निकलने से पहले अपनी त्वचा को बचाने के लिए इस इन्फ्रारेड प्रतिरोधक क्रीम को मलने की ज़रूरत न पड़ती... (इसी पुस्तक की कहानी ‘ख़्वाब इक दीवाने का’ से) - [Tareekh Mein Aurat](https://kitablelo.com/tareekh-mein-aurat/): Tareekh Mein Aurat - औरत ने कुदरत को सँवारकर रखने में अपनी हिस्सेदारी निभाई क्योंकि उसका जन्म ही सृजन के लिये हुआ था। उसने युद्ध नहीं रचे। उसे इसकी फ़ुरसत ही नहीं थी। तमाम तरह की विभीषिकाओं के बीच और उनके गुज़र जाने के बाद भी उसने जीवन के बीज बोए। इसके लिये उसे कभी किसी अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता नहीं रही। यह और बात है कि न जाने कब से पिलाई जाती रही त्याग, ममता और श्रद्धा की घुट्टियों ने उसके अस्तित्व को इस कदर बांधा कि वह आज तक इन्हीं छवियों में मुक्ति तलाशती आ रही है। बहुत मुमकिन है आपने इस किताब में आने वाली औरतों में से अनेक के नाम न सुने हों। जीवन की भयानक त्रासदियों से गुज़रकर वे टूटीं, गिरीं और फिर उठकर खड़ी हुईं। ज़रूरी नहीं कि उन्हें किसी के सामने ख़ुद को किसी तरह साबित ही करना था लेकिन उन्होंने ज़िंदगी चुनी। उनमें से एक-एक हमारे ही भीतर लुक-छुपकर बैठी है, हमारे-आपके आसपास की औरत है। इस औरत ने बड़े एहतियात से तमाम शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संघर्षों के बीच अपनी राह बनाई है। अशोक पाण्डे इसी औरत का हाथ थाम लेते हैं। —स्मिता कर्नाटक - [X Y Ka Z](https://kitablelo.com/x-y-ka-z/): X Y ka Z - कुछ अलग तरह का गद्य पढ़ने ​की खोज में लगे पाठकों की तलाश जिन लेखकों पर जाकर समाप्त होती है, उनमें एक नाम प्रभात रंजन है। कहानी और संस्मरण के बीच आवाजाही करता यह लेखक अपने पाठक को अपनी शैली के प्रवाह और भाषा की रवानगी के साथ बहाए ले जाता हैं। "जानकी पुल" यह नाम जैसे प्रभात रंजन का ही अब दूसरा नाम हो चुका है - पंकज सुबीर - [Trasadi](https://kitablelo.com/trasadi/): Trasadi - त्रासदी, कशिश क्रांति और कोरोना। यह किताब कोरोना काल में चल रही क्रांति के बीच पनपते प्रेम और प्रेम से उपजी कशिश को दर्शाती है। - [Something Sarpila](https://kitablelo.com/something-sarpila/): समथिंग सर्पीला Something Sarpila - बनकिस्सा और बात बनेचर की अपार सफलता के बाद लेखक सुनील लौटे हैं उस नायक को लेकर जिसे हमारी एकपक्षीय सोच ने खलनायक बना दिया है. यह स्नेक फोबिया को फिलिया में बदल देनेवाली किताब Something Sarpila है. अब साँप से वही डरेगा जो नहीं पढ़ेगा. - [Satya Gyan Shmashan](https://kitablelo.com/satya-gyan-shamshan/): Shamshan - यह पुस्तक जीवन के परम और अटल सत्य "मृत्यु" के उपरांत जहाँ मानव के भौगोलिक शरीर का अंत होता है जिसे हम Shamshan कहते हैं उस पर लिखा काव्य - सृजन है। जीवन पर्यन्त सिर्फ पाने की लालसा रखने वाले इंसान के जीवन - संघर्ष, मानव - मूल्य, भौतिकता - नैतिकता, राग - द्वेष, छल - प्रपंच, आशक्ति - विरक्ति के नए आयामों को प्रतिस्थापित करता हुआ यह काव्य - सृजन "Satya Gyan Shamshan" आप सभी को समर्पित है। - [Best Seller](https://kitablelo.com/best-seller/): Best Seller - जीतने की जद्दोजहद में लोग क्या और कितना हार जाते हैं ये सफर के आखरी पड़ाव में और मंज़िल पर पहुँचने से पहले पता चल जाता है। लेकिन कुछ लोग इसे नजरअंदाज करना ही नियति बना लेते हैं। Best seller की कहानी में सैकड़ों उतार चढ़ाव हैं। उनके साथ फिर वही होता है जो सादिक के साथ हुआ। आईना से प्यार और फिर शादी लेकिन इंटरनेशनल लेवल का Best seller बनने की उसकी ख्वाहिश अभी पूरी नहीं हो रही थी। हिंदी ऑथर के लिए आसान है? आईना के पापा, प्रभात शेखावत खुद इंटरनेशनल बेस्टसेलर हैं तो फिर रास्ता आसान हो, शायद! शैलेष और अंशुल केसरी, पब्लिशिंग इंडस्ट्री के दो ऐसे दिग्गज जो किसी ऑथर का साथ दें, तो सब मुमकिन है। फिर इनमें से कौन साथ देगा सादिक का? क्योंकि बेस्टसेलर बनना हर तरीके से फायदे का सौदा होता है! क्या ये कहानी वाकई सादिक की है या किसी ऐसे शख्स की है जिसने बेस्टसेलर बनने का सबसे अलग रास्ता चुना? पढ़िये और बताइए कि बेस्टसेलर कौन बना! - [Sugiya](https://kitablelo.com/sugiya/): Sugiya - आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप बहुत दुखी हों, उसी समय माँ का फ़ोन आया हो, आप अपने दिल की बात बता नहीं सकते और सामान्य दिन की तरह बात करने की कोशिश कर रहे हों, पर माँ ही कुछ ऐसा बोल जाए जो आपको सुनकर ढांढस भी मिले बिना उसके जाने? या कभी ऐसा हुआ हो कि आपने सहसा महसूस किया हो कि माँ की याद सिर्फ इसलिए नहीं आती कि वो अच्छा खाना बना सकती है, उसकी याद इसलिए आती है क्यूंकि आप अचानक ही उसको अपना सच्चा दोस्त मानने लगे हैं। क्यों? कब? कैसे? मालूम नहीं। यह Sugiya ऐसी ही कुछ भावनाओं का संग्रह है। थोड़ा प्यार है, सम्मान है, उनकी मेहनत को मान, खुद पर कुछ इल्ज़ाम हैं। और किलो भर का अफ़सोस है। यह किताब हर उस मां तक पहुंचे जिनसे सुकून की शायद परिभाषा निकली होगी । इसलिए नहीं कि उन्हें इन कविताओं की ज़रूरत है, बल्कि इसलिए कि इन कविताओं को उनकी ज़रूरत है। - [Never Go Back](https://kitablelo.com/never-go-back/): Never go back - एक मुश्किल सफर के बाद पूर्व मिलिट्री कॉप जैक रीचर वर्जीनिया पहुँचता है । उसकी मंजिल थी 110वीं मिलिट्री पुलिस जो उसकी पुरानी यूनिट का हेडक्वार्टर था और उसे अपने घर से भी ज्यादा अज़ीज़ था। रीचर के पास यहाँ वापस आने की कोई खास वजह नहीं थी सिवाय इसके कि उसे नयी कमांडिंग ऑफिसर, मेजर सुज़न टर्नर की आवाज़ फोन पर काफी अच्छी लगी थी। लेकिन वह जब तक यहाँ पहुँचा सुज़न गायब हो चुकी थी । उसे किसी भारी गड़बड़ की आशंका होने लगी । आगे जो हुआ उसकी रीचर ने उम्मीद नहीं की थी । सोलह साल पहले हुई हत्या के आरोप के बावजूद उसे दोबारा आर्मी जॉइन करने का मौका मिल रहा था । क्या रीचर को वापस आने का पछतावा होगा या किसी और को रीचर के वापस आने का ? प्रस्तुत उपन्यास पर 'नेवर गो बैक' नामक हॉलीवुड मूवी बन चुकी है जिसमें टॉम क्रूज ने जैक रीचर का किरदार निभाया था। - [Zero Period](https://kitablelo.com/zero-period/): Zero Period - अविनाश की कहानियाँ पढ़ना अपनी खोई हुई स्लैमबुक को फिर से पा लेने जैसा है। - दिव्य प्रकाश दुबे Zero Period, असल में दो दुनिया के बीच की एक विंडो, जो कुछ पैंतालीस मिनट से लेकर एक घंटे तक की होती थी। एक दुनिया जिसमें हम स्कूली बच्चे, किताबों के गोवर्धन पहाड़ के नीचे दबे ‘नर्ड-कृष्णा’ की तरह अपने यशोदा-वासुदेवों के सपनों की गुलामी काट रहे थे और दूसरी दुनिया जिसमें हम वृन्दावन में फ्लूट प्ले करते, मक्खन चटोरते, चिल मारते ‘माचो-माखनचोर’ थे। किताब में कोई ज्ञान दर्शन नहीं है, न किसी की ज़िन्दगी बदल जाएगी इसको पढ़ने के बाद। बस एक छोटे शहर की कहानी है जो एक बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है। किताब ख़त्म होते-होते, उम्मीद है कि आप उस बच्चे को देख, सुन और महसूस कर चुके होंगे; वैसे ही जैसे सपने में ब्लैक एंड वाइट फ्रेम में कुछ लोग दिखते हैं; जिन्हें लगता है कि कहीं देखा है; पिछले जन्म में या कभी किसी बाज़ार की भीड़ में। - [Dhanika](https://kitablelo.com/dhanika/): Dhanika - बच्चे को जन्म देते समय 206 हड्डियों के टूटने का दर्द सह लेने वाली औरत एक नाजुक ख्याल दरकने की पीड़ा क्यों बर्दाश्त नहीं कर पाती है? क्या रिश्ते निभाने का अर्थ रूहानी न होकर उम्मीदों और दुनियादारी की जिम्मेदारी का सही गणितीय संतुलन है? ऐसे आदिम सवालों के जवाब तलाशने Dhanika, प्रेमा, अर्चना, -संजय और वासु के जीवन सफर पर चलिए धनिका के साथ। ‘Dhanika’ कहानी उन रिश्तों की जो रह-रहकर पिछले 17 साल से मेरे जेहन में ख़दबद मचाए थे। उन चेहरों की जिन्हें मैं आखिरी साँस तक नहीं भूल सकती। उन त्रासदियाँ की जिनकी नमी पलकों से आजीवन विदा नहीं ले सकती। उन्हें सांत्वना देने, दुलार भर थपकने की कोशिश है—Dhanika। दो साल पहले जब इसे लिखना शुरू किया था तो आधी-आधी रात तक बरसों पहले गुजर चुके वे आत्मीय पल, वो हृदय विदारक हादसे, वो बिछड़े हुए लोग, वो मधुर मुलाकातें सबने सिलसिलेवार हो धीरे-धीरे एक उपन्यास का रूप ले लिया। सोचा नहीं था कि इन चरित्रों को विदा कर आपको सौंपते समय मन इतना लबालब हो जाएगा। हर चरित्र की अपनी मजबूरी। कौन सही, कौन गलत का निर्णय आप पर छोड़ा। अनगिनत काबिल लेखकों और असंख्य उम्दा किताबों के बीच इस उपन्यास की क्या महत्ता मुझे नहीं मालूम। अब समय है ‘धनिका’ संग आपके शरीक होने का ‘तिवारी-सदन’ के आँगन की मध्यमवर्गीय पारिवारिक चर्चाओं में, शिवनाथ घाट किनारे दो युवा मन के बीच दुनिया से छिपकर किए उन वादों को सुनने का जिन पर हालात की गाज गिरने के बाद कोई मोल न बचा। मंझधार में छूटे लोगों के संघर्ष और सफर को देखने का। डूबते हुए लोगों के तट पर पहुँच जाने के बाद की थकान को अपनी धमनियों में महसूस करने का। धनिका गूँज है हर इंसान के भीतर सहेजे खालीपन की। आपको बस उसी तरह सौंप रही हूँ जैसे कार्तिक की सर्द सुबह घाट किनारे बैठकर छोड़ देते है वो बहती धार में जलता दीपक महज इस आस के साथ की मेरी आवाज़ पहुँचेगी वहाँ जहाँ इसे सुनने प्रतीक्षा की जा रही है। - [Behaya](https://kitablelo.com/behaya/): Behaya - हमारे देश में शादी और प्यार पर फिल्मों की बड़ी छाप है। लेकिन असल ज़िन्दगी सुनहरे परदे की कहानियों से बहुत अलग होती है। कई बार राम-रावण अलग-अलग नहीं होते बल्कि वक़्त और हालात के साथ एक ही व्यक्ति किरदार बदलता रहता है। ‘Behaya’ कहानी है सिया और यश की कामयाब और खूबसूरत ज़िन्दगी की। यह कहानी है रूढ़िवादी सोच से उपजे शक़ और बंधनों की। यह कहानी है उत्पीड़न और डर के साये में जीने वाले मुस्कुराते और कामयाब चेहरों की। यह कहानी है समाज के सामने सशक्त दिखने वालों की मजबूरी और उदारता का जामा ओढ़े हैवानों की भी। बार-बार कहने पर, देखने पर भी जो बातें जीवनसाथी नहीं समझ पाते; कैसे वही दर्द और टीस एक अनजान व्यक्ति बस आवाज़ सुनकर समझ जाता है? कैसे मुस्कुराते चेहरे के पीछे की उदासी को वह पल भर में भाँप लेता है? आत्माओं के कनेक्शन से उपजे कुछ खूबसूरत रिश्ते समाज के बंधनों से परे होते हैं। ‘बेहया’ कहानी है सिया और अभिज्ञान के इसी अनकहे, अनजान और अनगढ़े रिश्ते की। - [Wah Ustad](https://kitablelo.com/wah-ustad-praveen-jha/): Waah ustad - ताल गया तो बाल गया सुर गया तो सर गया ऐसी होती है भारतीय शास्त्रीय संगीत के घरानों की परंपरा - जहाँ संगीत के हर एक पहलू पर इतना बारीकी से ध्यान दिया जाता है। वर्षों की कड़ी मेहनत और रियाज़ से ही बन पाता है कोई ऐसा गायक कि जिसे सुनकर श्रोता कह उठते हैं - वाह उस्ताद!! - [Main Se Maan Tak](https://kitablelo.com/main-se-maan-tak-ankita-jain/): Main se maan tak - माँ बनने के साथ शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर जो परिवर्तन होते हैं और अनुभूतियों में जो उतार-चढ़ाव आते हैं उनके बारे में बहुत अंतरंगता से Main se maan tak में बात की गयी है। - [Baheliye | बहेलिए](https://kitablelo.com/baheliye/): स्त्रियाँ जो मिटाना चाहती हैं अपने माथे पर लिखी मूर्खता किताबों में उनके नाम दर्ज चुटकुलों, और इस चलन को भी जो कहता है, ‘‘यह तुम्हारे मतलब की बात नहीं’’ मगर सिमट जाती हैं मिटाने में कपड़ों पर लगे दाग, चेहरों पर लगे दाग, और चुनरी में लगे दागों को, स्त्रियाँ, जो होना चाहती हैं खड़ी चैपालों, पान ठेलों और चाय की गुमटियों पर करना चाहती है - [Sookha Gulab](https://kitablelo.com/sookha-gulab/): Sookha Gulab बाल कथा साहित्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. शिवानी (17 अक्तूबर 1923-21 मार्च 2003) हिन्दी की जानी-मानी लेखिका हैं। उनका पूरा नाम था गौरा पंत। उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक उपन्यास, कहानियां और यात्रा-वृत्तांत लिखे। हिन्दी साहित्य में उनके योगदान के लिए 1982 में उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया। बच्चों के लिए 'सूखा गुलाब', 'स्वामीभक्त चूहा', 'राधिका सुन्दरी', 'बिल्ली और मूसारानी' उनकी लोकप्रिय पुस्तकें हैं - [Anupama Ganguly Ka Chautha Pyar](https://kitablelo.com/anupama-ganguly-ka-chautha-pyar/): Anupama Ganguly Ka Chautha Pyar - कुल नौ कहानियों का यह संग्रह अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार अपने आप में स्त्री-पुरुष संबंधों की जटिल सच्चाइयों को समेटे हुए है। ये फँतासियों और नाटकीयता से बहुत दूर अवसाद और कुंठाओं की सहज कहानियाँ हैं। यहाँ आपको पारंपरिक वर्जनाओं और उनसे उपजे अंतर्द्वंद से जूझते ऐसे बहुत से किरदार मिलेंगे जिन पर बंधनों को तोड़ देने का फ़ितूर है और उन्हें तोड़ देने का मलाल भी। ये सभी कहानियाँ एक-दूसरे से बिल्कुल जुदा हैं। कहानियों की भाषा सरस और प्रवाहमयी है। कहानीकारा ने बेबाक विषयों को बेहद शालीनता से बुना है। एकदम नए शिल्प और शैली की ये कहानियाँ अनायास ही पाठक के भीतर गहरे उतर जाती हैं। इन कहानियों का सबसे प्रबल पक्ष यह है कि सभी कहानियों में कहीं-न-कहीं आप ख़ुद से रू-ब-रू होंगे और कमज़ोरी यह कि ये कहानियाँ आपको बेचैन और बहुत बेचैन कर सकती हैं - [Innerline Pass](https://kitablelo.com/innerline-pass/): Innerline Pass इनरलाइन पास -18 दिनों में पूरी हुई इस क़रीब 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा के रोमांचक अनुभवों का एक गुलदस्ता है ‘इनरलाइन पास’ जो आपको ख़ूबसूरती और जोख़िमों के एकदम चरम तक लेकर जाता है। - [Mamma Ki Diary](https://kitablelo.com/mamma-ki-diary-anusingh-choudhary/): Mamma Ki Diary - मम्मा की डायरी अनुसिंह चौधरी लिखित और हिन्दयुग्म द्वारा प्रकाशित संस्मरण है। - [Neela Scarf](https://kitablelo.com/neela-scarf/): Neela Scarf नीला स्कार्फ -नीला स्कार्फ अनु सिंह चौधरी लिखित चर्चित व बेस्ट सेलिंग कहानी संग्रह है। हिन्द युग्म प्रकाशन से आई अनु सिंह चौधरी की इस किताब में 12 कहनियाँ हैं और हर एक कहानी अनूठी है। - [Fareb Ka Safar](https://kitablelo.com/fareb-ka-safar/): Fareb Ka Safar (फरेब का सफर) डिजिटल दौर में आपकी प्राइवेसी में दखल देकर कोई कैसे आपकी ज़िंदगी को प्रभावित कर सकता है, उसी की कहानी है । एक मेट्रो शहर की ऐसी कहानी जहाँ स्टार्टअप, पब कल्चर, डेटिंग, ओपन रिलेशनशिप की दुनिया है लेकिन यहाँ एक ऐसा शातिर इंसान है जिसने सबकी ज़िन्दगी को अपने मन-मुताबिक घुमाया, नचाया, और इस तरीके से इस्तेमाल किया कि सब एक दूसरे के लिए फरेबी बन गए । आपके करीब भी एक ऐसी चीज़ है जो आप पर हरपल नज़र रखे हुए है और आपकी हर जानकारी को कहीं इस्तेमाल कर रही है । पढ़िए “फ़रेब का सफ़र” और पहचानिए वो कौन है । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सहारे प्राइवेसी में दखल देने की थीम पर लिखा हुआ हिंदी का पहला उपन्यास है फ़रेब का सफ़र - [Gardish Mein Hoon](https://kitablelo.com/gardish-mein-hoon/): Gardish Mein Hoon  का उद्देश्य काल्पनिक पात्रों और कहानियों के माध्यम से इस युवा लेखक द्वारा यह बताना है कि हम बच्चों के लड़कपन और आपराधिक नियत में विभक्तिकरण करना शुरू करें। कभी-कभी हम समाज में कुछ ऐसा होते देखते हैं जो हम जानते हैं गलत है, मगर चुपचाप उसपर आखें मूँद लेते हैं। मगर एक लेखक से ऐसा नहीं हो पाता, वो उस पर आखें नहीं मूँद पाता और कहानी पिरो देता है - [Radhika Sundari](https://kitablelo.com/radhika-sundari-shivani/): Radhika Sundari बाल कथा साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है. शिवानी (17 अक्तूबर 1923-21 मार्च 2003) हिन्दी की जानी-मानी लेखिका हैं। उनका पूरा नाम था गौरा पंत। उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक उपन्यास, कहानियां और यात्रा-वृत्तांत लिखे। हिन्दी साहित्य में उनके योगदान के लिए 1982 में उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया। बच्चों के लिए 'सूखा गुलाब', 'स्वामीभक्त चूहा', 'राधिका सुन्दरी', 'बिल्ली और मूसारानी' उनकी लोकप्रिय पुस्तकें हैं - [Swamibhakth Chuha](https://kitablelo.com/swamibhakth-chuha-shivani/): Swamibhakth Chuha - एक बाल कथा साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है. शिवानी (17 अक्तूबर 1923-21 मार्च 2003) हिन्दी की जानी-मानी लेखिका हैं। उनका पूरा नाम था गौरा पंत। उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक उपन्यास, कहानियां और यात्रा-वृत्तांत लिखे। हिन्दी साहित्य में उनके योगदान के लिए 1982 में उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया। बच्चों के लिए 'सूखा गुलाब', 'स्वामीभक्त चूहा', 'राधिका सुन्दरी', 'बिल्ली और मूसारानी' उनकी लोकप्रिय पुस्तकें हैं। - [The Chirkuts](https://kitablelo.com/the-chirkuts/): The Chirkuts- हॉस्टल जीवन के चार दोस्तों के सुख-दुख, प्यार-मुहब्बत, सपनों-उपलब्धियों की कहानी है। यह दोस्ती का सेलिब्रेशन है। - [Rooh](https://kitablelo.com/rooh-manav-kaul/): Rooh रूह - मैं जब इस किताब को लिखने, अपनी पूरी नासमझी के साथ कश्मीर पहुँचा तो मुझे वहाँ सिर्फ़ सूखा पथरीला मैदान नज़र आया। जहाँ किसी भी तरह का लेखन संभव नहीं था। पर उन ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलते हुए मैंने जिस भी पत्थर को पलटाया उसके नीचे मुझे जीवन दिखा, नमी और प्रेम। मैं कहीं भी बचकर नहीं चला हूँ। जो जैसा है में, जैसा जीवन मैं देखना चाहता हूँ, उसे भी दर्ज करता चलता हूँ। कभी लगता है कि मैं पिता के बारे में लिखना चाहता था और कश्मीर लिख दिया और जब कश्मीर लिखने बैठा तो पिता दिखाई दिए। मेरी सारी यादें वहीं हैं जब हम चीज़ों को छू सकते थे। मैं छू सकता था, अपने पिता को, उनकी खुरदुरी दाढ़ी को, घर की खिड़की को, खिड़की से दिख रहे आसमान को, बुख़ारी को, काँगड़ी को। अब इस बदलती दुनिया में वो सारी पुरानी चीज़ें मेरे हाथों से छूटती जा रही हैं। उन छूटती चीज़ों के साथ-साथ मुझे लगता है मैं ख़ुद को भी खोता चला जा रहा हूँ। आजकल जो भी नई चीज़ें छूता हूँ वो अपने परायेपन की धूल के साथ आती हैं। मैं जितनी भी धूल झाड़ूँ, मुझे अपनापन उन्हीं पुरानी चीज़ों में नज़र आता है। लेकिन जब उनके बारे में लिखने बैठता हूँ तो यक़ीन नहीं होता कि वो मेरे इसी जनम का हिस्सा थीं। —रूह की भूमिका से - [Sharten Laagoo (Terms And Conditions Apply)](https://kitablelo.com/sharten-laagoo-terms-and-conditions-apply/): Sharten Laagoo (Terms And Conditions Apply) - आप कह सकते हैं कि 'शर्तें लागू' नई वाली हिंदी की पहली किताब है। इस किताब में आपके स्कूल में पढ़ने वाली वह लड़की है जिसके बारे में सब बातें बनाते थे। मोहल्ले के वह भइया हैं जो कुछ भी हो जाता था तो कहते थे टेंशन मत लो यार सब सही हो जाएगा। वे अंकल हैं जो कभी आपसे ख़ुश नही होते। ऐसे समझ लीजिए जैसे किसी ने आपकी डायरी लिख दी हो जिसमें कुछ सच हैं, कुछ यादें हैं, पहला प्यार है और आपकी कुछ ऐसी बातें जो केवल आपको ही पता हैं। इस किताब में शामिल सभी 14 कहानियाँ आपके आसपास की ही कहानियाँ हैं। - [Musafir Cafe](https://kitablelo.com/musafir-cafe/): Musafir Cafe | मुसाफिर Cafe  - हम सभी की जिंदगी में एक लिस्ट होती है। हमारे सपनों की लिस्ट, छोटी-मोटी खुशियों की लिस्ट। सुधा की जिंदगी में भी एक ऐसी ही लिस्ट थी। हम सभी अपनी सपनों की लिस्ट को पूरा करते-करते लाइफ गुज़ार देते हैं। जब सुधा अपनी लिस्ट पूरी करते हुए लाइफ़ की तरफ़ पहुँच रही थी तब तक चंदर 30 साल का होने तक वो सबकुछ कर चुका था जो कर लेना चाहिए था। तीन बार प्यार कर चुका था, एक बार वो सच्चा वाला, एक बार टाइम पास वाला और एक बार लिव-इन वाला। वो एक पर्फेक्ट लाइफ चाहता था। मुसाफिर Cafe कहानी है सुधा की, चंदर की, उन सारे लोगों की जो अपनी विश लिस्ट पूरी करते हुए perfect लाइफ खोजने के लिए भटक रहे हैं। - [kahaniyon-ke-dastkhat](https://kitablelo.com/kahaniyon-ke-dastkhat/): kahaniyon-ke-dastkhat कहानियों के दस्तखत - कुछ जगबीती, कुछ आपबीती और कुछ कपोल कल्पनाओं का समुच्चय है, जिन्हें कहानियों की शक्ल में रचा गया है। यह रोचक कहानियाँ हिंदी साहित्य के पन्नों पर सशक्त दस्तख़त हैं। सहज, सुघड़ शैली और निरंजनी भाषा से सजी इन 17 कहानियों का मिजाज एक दूसरे से अलहदा है। इनमें प्रेम और घृणा की पराकाष्ठा है, नीयत और नियति का असमंजस है, नैतिकता और अनैतिकता का डोलता तराज़ू भी है - [Fervent Confessions](https://kitablelo.com/fervent-confessions/): Fervent Confessions The first poem that I ever wrote was in middle school and it was about grief. Writing it felt almost cathartic. And for me, putting words to paper was much more satisfying than talking about my feelings. Because poetry gave me a creative outlet, where I could express myself without any judgement. And nothing was ever off limits. -Anushka Singh - [Khel Khel Mein](https://kitablelo.com/khel-khel-mein/): Khel Khel Mein | खेल खेल में  गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हो चुकी थीं। राहुल और जयति का मन इन छुट्टियों में कुछ रोमांचक करने का था। उनका साथ देने के लिए उनके फुफेरे भाई करन और रोहित भी उनके पास आ चुके थे। तभी इन चारों को पता चला कि उनके पड़ोस में रहने वाले एक वृद्ध दंपति किसी परेशानी में घिरे हैं। घर के बड़ों को भी समझ नहीं आ रहा था कि वो कैसे इस परेशानी से उस दंपति को उभारें। ऐसे में इन बच्चों ने दंपति की परेशानी हल करने की ठानी। आखिर वृद्ध दंपति किस परेशानी में थे? बच्चों ने इस परेशानी से उन्हें उभारने के लिए क्या योजना बनायी? क्या उनकी योजना सफल हुई? - [Bhoot Dost](https://kitablelo.com/bhoot-dost/): रतन और उसके माता-पिता जब अपने नये बड़े घर में आये तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। शहर के छोटे घरों में रहते हुए वो बहुत परेशान हो चुके थे लेकिन जब उन्हें ये बड़ा घर बहुत सस्ते दामों में रहने के लिए मिल गया तो उन्होंने झट से यहाँ रहने के लिए हामी भर दी। उन्होंने इस घर को लेकर कई सपने सँजोये थे जिसमें तब घड़ों पानी पड़ गया जब रतन की मम्मी शकुन को पड़ोसियों ने बताया कि उनके घर में भूत का वास है। रतन ने कभी भूत देखा न था। उसने भूत वाली बात सुनी तो उसे डर तो लगा लेकिन वह भूत देखने को आतुर भी हो गया? क्या असल में घर में भूत था? क्या रतन को भूत दिखा? आखिर कौन था ये भूत? क्या बन पाया वो रतन का भूत दोस्त? - [Adhnanga Fakeer](https://kitablelo.com/adhnanga-fakeer/): किसी भी ऐतिहासिक व्यक्ति का जीवन-चरित्र उसके सार्वजनिक और निजी जीवन के बीच का द्वंद्व है। हर व्यक्ति अपने कंट्रास्ट में जीता है। महात्मा गांधी भी इससे अछूते नहीं रहे। महात्मा गांधी के जीवन में विचित्र विरोधाभास था। अपने सार्वजनिक जीवन में महात्मा की छवि एक कठोर और सिद्धांत-प्रिय आदमी की थी। एक स्वभाव से जिद्दी आदमी जो अपनी बात मनवाने के लिए वह किसी भी क्षण अपने प्राण जोखिम में डाल सकता है। एक ऐसा आदमी जो मानता था कि विवाहितों को भी एक कोठरी में, एक चारपाई पर नहीं सोना चाहिए। वो खुद ऐसे प्रयोग के लिए तैयार हो गए जो दूसरों के लिए सवर्था वर्जित थे। आधा दर्जन से ज्यादा लड़कियों के साथ नग्नावस्था में सोने की बात महात्मा ने खुद अपने पत्रों में स्वीकार की है। तो फिर वे किस तरह का ब्रह्मचर्य का प्रयोग करना चाहते थे? उसका औचित्य क्या था? करीबी मित्रों की तीखी आलोचना के बाद वे ये प्रयोग रोक देते। लेकिन वे इसे फिर शुरू कर देते। आखिर ये प्रयोग क्या था? इससे क्या हासिल हुआ? 'अधनंगा फ़क़ीर' इन्हीं पहलुओं का मनोवैज्ञानिक धरातल पर पूरी तटस्थता और ईमानदारी से पड़ताल करती है। - [Prayashchit](https://kitablelo.com/prayashchit/): Prayashchit यह कहानी प्रमुखतः एक लड़का (छोटू) और एक महिला को ध्यान में रखकर लिखी गई है। यह कहानी मूलतः एक स्त्री को सामाजिक दृष्टि से मिलने वाली अवहेलना और एक नवयुवक के उस स्त्री के ओर आकर्षित होने की कहानी है। छोटू के बचपन और पढ़ाई-लिखाई के दिनों में दिलचस्प घटनाएँ भी घटित होती हैं जो बहती हुई कहानी के बीच में भाव बदलती रहती हैं। समाज के तानों से तंग आकर यह स्त्री भक्ति मार्ग चुनने को विवश हो जाती है, जहाँ उसे घोर सामाजिक तिरस्कार का सामना करना पड़ता है। इस कहानी में कहीं-कहीं हँसी-मज़ाक़ भी दिखाई देता है तो कहीं आँखों को भिगोने के क्षण भी आते हैं। कुल-मिलाकर यह कहानी कई दिशाओं में भ्रमण करते हुए अंतत एक यमुना के किनारे आकर उस लड़की की सूनी कलाइयों पर जाकर समाप्त हो जाती है। - [Gate Se Bahar Freud](https://kitablelo.com/gate-se-bahar-freud/): Gate Se Bahar Freud इस संग्रह की कहानियाँ हमारे मन के प्रश्नों का उत्तर खोजती नजर आती हैं। जैसे: क्या वाकई श्राप लगता है? या वास्तव में वरदान मिलते हैं? क्या दो तरफा मानवीय रिश्ते हमें कुछ सिखाते हैं? क्या प्यार में एक सार्वभौमिक सत्य की सुगंध, छुअन और अनुभूति स्वत: होती है? और जब होती है तो कायनात भी साथ देती है? क्या समय के साथ यथा स्थिति को स्वीकार लेना हमें हल्का बनाता है? या हमारा कनफ्यूजन बढ़ता है? कैसे किसी सर्व हिताय संदेश के प्रति जनमानस को जागरुक करने के लिए कहानी एक महत्वपूर्ण टूल हो जाती है? जीवन, पानी और प्रदूषण के अंतर्संबंध कहां तक जाते हैं? क्या पुत्र मोह माँ को भी बायस्ड करता है?अमूमन पत्नियों को ही टेकन फॉर ग्रांटेड क्यों लिया जाता है? ग्लानि को सुन लिया जाना कितना जरूरी है? समय के साथ रिश्तों में कैसा अवमूल्यन होता है? क्या अपनी बात को समझने की कोई कला होती है? किसी मानसिक द्वंद्व से उबरने पर कैसा लगता है? क्या प्राणायाम आसन और धर्म का आपस में कोई सम्बंध है? आज बुढ़ापे की आम त्रासदी क्या है और क्या उसका कुछ इलाज है? - [Pal Bhar Ki chhaanv](https://kitablelo.com/pal-bhar-ki-chhaanv/): Pal Bhar Ki chhaanv | पल भर की छाँव की विषय वस्तु ऐसी है कि एक बार जब आप इसे पढ़ना शुरू करते हैं तो फिर इसे समाप्त किये बिना रह ही नहीं सकते। यह एक उपन्यास ही नहीं एक ऐसा संस्मरणात्मक वृत्तांत भी है जो कि काल्पनिक होते हुए भी सत्य है। सत्य होते हुए भी काल्पनिक ! सब कुछ देखा, सुना, पढ़ा तथा अनुभव किया हुआ जैसा है। जिस पर प्राचीन काल से ही विश्वास किया जाता आ रहा है। ऐसी ही धारणा अन्य धर्मग्रंथों तथा जन साधारण की भी रही है तथा यह सब वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी तर्कसंगत प्रमाणित हो रहा है। इसी अवधारणा को परिलक्षित करते हुए इस उपन्यास की रचना की गई है। इसके रचनात्मक लेखन से पाठक को एक प्रकार के रचनात्मक भ्रम जाल में उलझा कर एक विश्वसनीय सत्य से अवगत करवाना है। इस की रचना का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत मनोरंजन के साथ परालौकिक विचारधारा से संबंधित विश्वसनीय तथ्यों से परिचय करवाना ही है। - [1931: An Untold Story](https://kitablelo.com/1931-an-untold-story/): 1931: An Untold Story is the English translation of the bestselling Hindi novel 1931: Desh Ya Prem. Set in the turbulent era of British India, this compelling narrative brings to life the hidden stories of unsung freedom fighters whose sacrifices were overshadowed by history. Through vivid storytelling, the book uncovers the small yet fierce battles fought in the shadows, in the streets and villages, as ordinary people resisted British oppression with extraordinary courage. These are the stories that didn’t make it into our textbooks but are no less crucial to India’s journey toward independence. 1931: An Untold Story is a gripping tribute to the forgotten heroes who gave their all for the love of their motherland. - [Baaz Basera: Bina Hatthe Ki Khukari](https://kitablelo.com/baaz-basera-bina-hatthe-ki-khukari/): Baaz Basera | बाज़ बसेरा बाज़ बसेरा अपने इतिहास के चलते बदनाम हो चला था। वहाँ अब तक जो भी रहा था त्रासदी उसके जीवन का हिस्सा बनी थी। वह खुद या अपने किसी नज़दीकी को गँवा बैठा था। क्या सच में ये त्रासदियाँ दुर्भाग्यवश हुई थीं या इनके पीछे कोई गहरा राज़ था? पाठकों द्वारा ‘अँधेरों का संगतराश’ की शृंखला को आगे बढ़ाने के अनुरोध पर जतिन जागीरदार शृंखला में अगला उपन्यास है ये ‘बाज़ बसेरा’ - [Jai Baba Feloonath](https://kitablelo.com/jai-baba-feloonath/): जय बाबा फेलूनाथ | Jai Baba Feloonath शरलक होम्स और जेम्स बॉण्ड की तरह ही सत्यजित राय के एक दुर्धर्ष पात्र हैं फेलूदा। जटिल से जटिल परिस्थितियों को परत-दर-परत खोलकर सच को सामने लाना उनका काम है। बांग्लाभाषी समाज की एक पूरी पीढ़ी फेलूदा के जासूसी कारनामों को पढ़-पढ़कर सयानी हुई है। आकर्षण कुछ ऐसा कि किशोरावस्था को पीछे छोड़ चुके प्रौढ़ पाठकों के बीच भी इसकी लोकप्रियता कम नहीं है। ‘जय बाबा फेलूनाथ’ सत्यजित राय के फेलूदा सीरीज़ का एक प्रतिनिधि उपन्यास है। आधुनिक हिन्दी साहित्य में रहस्य-रोमांच और जासूसी पर आधारित लेखन का श्रीगणेश भले ही हुआ हो, परवर्ती रचनाकारों की लिखी ऐसी मनमोहक कृतियाँ नहीं मिलतीं। सत्यजित राय की प्रस्तुत कृति का अनुवाद इस कमी को पूरा करने की दिशा में एक विनम्र प्रयास है जिस पर उनके द्वारा निर्मित फिल्म भी अत्यन्त लोकप्रियता हासिल कर चुकी है। - [Nachhattar](https://kitablelo.com/nachhattar/): Nachhattar | नछत्तर  कानपुर में अलमस्त जीवन जीता रवि पहले दिल्ली और फिर दिल्ली से लाहौर पहुँच चुका था। अलग देश में अलग सा एकाकी जीवन उसे जीना पड़ रहा था। पर फिर उसके जीवन में नूर आयी और उसे लगा जैसे उसके सूखे जीवन में बसंत आ गया हो। लेकिन होनी को तो कुछ और मंजूर था। उसका नछत्तर (Nachhattar) भी तो था जिसने उसके जीवन में कई कष्ट लिख दिये थे। 1992 में घटित उस घटना ने पूरे मुल्क को झकझोर दिया था। भारत में हुई उस घटना का असर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी दिखने लगा था। दोनों तरफ सांप्रयदायिक माहौल बिगड़ चुका था और दंगों की स्थिति आ गयी थी। रवि ने खुद को, नूर को और अपने परिवार इन दंगों के बीच पाया। रवि और नूर तो लाहौर में थे लेकिन उसका परिवार कानपुर में था। दोनों ही तरफ माहौल बिगड़ा हुआ था। ऐसे में रवि और उसके परिवार का क्या हुआ? रवि की प्रेम कहानी का क्या हुआ? क्या रवि अपने नछत्तर से लड़ कर अपनी खुशियां हासिल कर पाया? - [Kiski Raah Dekhen Hum](https://kitablelo.com/kiski-raah-dekhen-hum/): Kiski Raah Dekhen Hum "माधव ! मेरी बात ध्यान से सुनो। मैं आपको अपने जीवन की एक सब से बड़ी सच्चाई बताने जा रही हूँ।” क्षणभर चुप रहने के पश्चात राधिका ने कहना आरम्भ किया,"यह सच है माधव कि मैं आपको बहुत ही अधिक प्यार करती हूँ। जिस दिन मैं पहली बार आपसे मिली थी, तब से ही मैं आपको चाहने लगी थी, लेकिन जिस दिन मैं दुर्घटना में घायल हो गई थी और आपने मुझे अपना रक्त दिया था, तब से मानों मैंने अपना सर्वस्व ही आपके नाम कर दिया। प्यार का यह भी कैसा दीवानापन है कि राधिका अभी भी सबकी नज़रों से बचती हुई बालकनी में आकर सामने गेट की और ही निहार रही थी। यहां पर कम से कम वह तो नहीं ही था, जिसे वह अपनों परायों की भीड़ में ढूँढने का प्रयास कर रही थी। - [Bigde Bol](https://kitablelo.com/bigde-bol/): Bigde Bol | बिगड़े बोल जब किसी स्त्री का रुझान ज्ञान प्राप्ति की तरफ होता है तो अमूमन उसके शारीरिक उपकरणों में कोई नुक्स होता है।   फ्रीदरिक नित्शे राजनीति सृष्टि का दूसरा सब से पुराना व्यवसाय है। कभी कभी सोच के हैरानी होती है कि ये पहले सबसे पुराने व्यवसाय से कितना मिलता जुलता है!       रोनाल्ड रीगन ईश्वर ने मर्द क्यों बनाए? क्योंकि वाइब्रेटर लॉन की घास नहीं काट सकते।    मेडोना मेरा दूसरा पसंदीदा अंग मेरा दिमाग है।     वुडी एलन स्त्री सेक्स चाहती है तो वजह होनी चाहिए; पुरुष सेक्स चाहता है तो जगह होनी चाहिए।     बिली क्रिस्टल ज़िंदगी वैसे ही बहुत विकट है; फिर कोई पेट में ठोकर मार देता है – भीतर की तरफ से।   रीटा रडनर जो औरत अपने पति को हर जगह साथ ले कर जाती है उसे ऐसी बिल्ली के समान जानिए जो कि चूहे को मार डालने के बाद भी उसके साथ खेलती रहती है।     साक़ी मौत के बाद ज़िंदगी उतनी ही नामुमकिन है जितना कि शादी के बाद सेक्स।     मैडलिन काहन - [Super Don Hard Bound Collector's Edition](https://kitablelo.com/super-don-hardbound/): सुपर डॉन (Super Don) विमल त्रिकोणीय संघर्ष के हवाले दो सुपर डॉन एक दूसरे के खिलाफ विमल दोनों के खिलाफ नतीजा बड़ा खून-खराबा टॉप मिस्ट्री राइटर सुरेन्द्र मोहन पाठक की करिश्माई लेखनी फिर जलाल पर गैरमामूली किरदार, नाकाबिलेबर्दाश्त सस्पेंस करिश्माई वाकयात और चुंबकीय किरदारनिगारी की जुगलबंदी से पैदा होने वाले हैरतबरपा अहसास का नाम ‘विमल सीरीज’ है। SMPians के लिए विशेष तौर पर प्रकाशित संग्रहणीय हार्ड बाउन्ड संस्करण  - [Mahal](https://kitablelo.com/mahal-chandraprakash-pandey/): महल | Mahal कामरान हुसैन अव्वल दर्जे का मुसव्विर था लेकिन उसके हुनर पर एक बदनुमा दाग ये था कि कभी-कभी उसके बनाए हुए चित्र किसी की मौत का फरमान बन जाते थे। जिन बदकिस्मत लोगों की शक्लें उसके कैनवास पर नुमाया होती थीं, उनके साथ अगले ही रोज़ से अजीबोगरीब वाकयात होने लगते थे। उन्हें न समझ आने वाली आवाजें सुनाई देने लगती थीं और अंत में एक काला साया उन्हें लेकर किसी रहस्यमयी महल में चला जाता था। - [Swarg Ka Marg](https://kitablelo.com/swarg-ka-marg/): Swarg Ka Marg | स्वर्ग का मार्ग स्वर्ग का मार्ग निश्चित रूप से ही एक ऎसी रचना है, जिसे स्वर्ग का मार्ग कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी। इस पुस्तक के माध्यम से उन बातों के प्रति विचार विमर्श एवं विश्लेषण किया गया है, जिनसे कि इसके मार्ग का पता चल सके और जो कठिन भी नहीं है। वास्तव में स्वर्ग का मार्ग की अवधारणा मुख्य रूप से महाभारत काल की एक कथा से उत्पन्न होती है। इस कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण ने अपने भक्त युधिष्ठर को स्वर्ग जाने के लिए एक सीढ़ी प्रदान की थी, बल्कि स्वर्ग का मार्ग तक पहुँचने का उन्हें मार्गबताया था, जिससे कि स्वर्ग के द्वार तक जाया जा सकता था। स्वर्ग का मार्ग का आधार एक धार्मिक कथा है। इसे हिन्दू धर्म में महत्त्वपूर्ण माना जाता है और यह कथा धार्मिक महाकाव्यों, पुराणों और वेदों में भी वर्णित है। स्वर्ग का मार्ग की कहानी के अनुसार, यह एक ऐसा मार्ग है, जो मनुष्य को मृत्यु के पश्चात भगवान और अनन्त प्रसन्नता की प्राप्ति और मोक्ष की ओर ले जाता है। किन्तु सामयिक दृष्टि से इसे एक प्रेरणात्मक कथन एवं उदाहरण के रूप में भी लिया जा सकता है। - [Pratarak](https://kitablelo.com/pratarak/): Pratarak | प्रतारक हिंदी पल्प फिक्शन ने कभी अपने सुनहरे दौर में पाठको के दिलों में खास जगह बनाई थी। लेकिन समय के साथ , यह शैली धीरे-धीरे अपनी चमक खोती चली गई।सिनेमा और टीoवीo की चुनौती का सामना तो किताबों ने कर लिया , लेकिन मोबाइल युग की नई चुनौती ने इसे झकझोर कर रख दिया।और इन सब के बीच ,सेल्फ पब्लिशिंग के रूप में एक नई समस्या उभर आई , जो इस पहले से जर्जर हो चुकी विधा के लिए किसी ज़हर से कम नहीं थी। हालाँकि, सेल्फ पब्लिशिंग ने नए और प्रतिभाशाली लेखकों को साहित्यिक दुनिया में प्रवेश का रास्ता तो दिया , लेकिन उसी सरलता ने अयोग्य और कमजोर रचनाओं को भी साहित्यिक मंच पर ला खड़ा किया। इन साहित्यिक कलंकों ने पल्प फिक्शन की पहले से कमजोर गर्दन पर अपनी पकड़ और मजबूत कर दी। योग्य लेखक अपनी बेहतरीन रचनाओं को इस भीड़ में खोते देख रहे थे , पर कुछ कर नहीं पा रहे थे। तभी साहित्य की इस डूबती नाव को बचाने के लिए सरदार अमरजीत सिंह मजीठिया नामक साहसी योद्धा ने मोर्चा संभाला। कहावत हैं कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता , लेकिन अगर वह चना सरदार अमरजीत सिंह मजीठिया जैसा हो , तो परिणाम चौंकाने वाले होते हैं। सरदार साहब ने अकेले ही ऐसा तहलका मचाया कि पल्प फिक्शन की दुनिया हिल गई। इसी के साथ एक सिरफिरा क़ातिल भी अपनी कहानी लिखता रहता हैं। ‘प्रतारक’ इसी क्रांतिकारी सफर की कहानी हैं —कैसे सरदार अमरजीत सिंह मजीठिया ने साहित्यिक दुनिया में एक नया अध्याय लिखा और पल्प फिक्शन को नए जीवन की राह दिखाई। - [The Host](https://kitablelo.com/the-host/): The Host | द होस्ट  किसी भी क़ीमत पर फिल्मो में अपना मुक़ाम बनाने को आतुर एक नवोदित टीवी एक्ट्रेस। पल्प फिक्शन के सुनहरे दौर को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध एक नवोदित स्वयंभू लेखक। अपना सुनहरा दौर जी चुकी एक अभिनेत्री, जो अपना दौर गुजर जाने की हक़ीक़त मानने को तैयार नहीं थी। एक प्रतिभा का धनी युवा क्रिकेटर ,जो अपनी शराब की लत और अक्खड़ मिजाजी के चलते अपने कैरियर का सत्यानाश कर चुका था । एक चरित्रहीन फ़िल्म निर्माता । अपनी जवानी के अंतिम दौर में प्रविष्ट एक चर्चित अभिनेत्री का युवा प्रेमी। तिकड़मबाज़ी से जज बनने की आकांक्षी एक महिला वकील । और एक चोर, जो चोरी को आर्ट मानता था और ख़ुद को आर्टिस्ट । अपने अपने जीवन में संघर्षरत इन लोगो के जीवन में आता है एक बड़े रियल्टी शो ‘द होस्ट’ में प्रतिभागी बनने का मौक़ा, जिसे वो ऑफर की गई मोटी रक़म के सदके हाथों हाथ लपक लेते हैं। अनपेक्षित रूप से शो में दो ऐसे लोग भी शामिल हो जाते हैं, जो जीवित ही नहीं थे । कौन थे वे दो लोग? क्या चाहते थे ? उन्होंने क्यों बदल दिया था रियल्टी शो को मौत के खेल में? - [Prem Gali Ati Saankri](https://kitablelo.com/prem-gali-ati-saankri/): Prem Gali Ati Saankri | प्रेम गली अति साँकरी अर्जुन राणा जो पूजा मलिक के प्यार में आकंठ डूबा हुआ था गलती से अपनी बीती जिंदगी की किताब का वह पन्ना खोल बैठा जिस पन्ने की इबारत पर गुज़िश्ता सालो की बेरुखी ने धूल की मोटी परत बिछा दी थी। वह इबारत जो कभी उसकी जिंदगी हुआ करती थी , वह इबारत जिसे उसने बेवफाई की स्याही से लिखा मान कर भुला दिया था ……पर भुलाना इतना आसान कहां होता है। क्या हुआ जब एक सामान्य हत्या के केस ने अर्जुन को अपनी जिंदगी की किताब के इस बिसराए पन्ने को खोलकर पढ़ने पर मजबूर कर दिया । हकीकत से बावस्ता होते ही अर्जुन ने खुद को एक ऐसे दोराहे पर खड़े पाया जिसके दोनो रास्तों पर उसकी जिंदगी थी और फैसला मुश्किल था कि किधर जाएं। एक तरफ कत्ल दर कत्ल के इल्जामों में फंसती जा रही वो लड़की जिसका मददगार इस दुनिया में अर्जुन के सिवा और कोई था ही नहीं और दूसरी तरफ थी पूजा । किंतु किसी एक तरफ तो जाना ही था क्योंकि प्रेम गली अति सांकरी ता मे दो ना समाए । - [Dead End](https://kitablelo.com/dead-end/): Dead End | डेड एंड जुर्म की अंधी और पेचीदा गलियों में भटकते, मशक्कत करते और किसी मुकाम पर पहुँचने की जद्दो जहद उसे एक सामान्य परिवार के नवयुवक से इलाके का सबसे बड़ा बाहुबली होने का ख़िताब दिलवा तो देती है, मगर शायद वह भूल गया था कि इस सफ़र की कई कीमतें भी उसे ही चुकानी थीं। भूल गया था कि इस रास्ते पर आगे बढ़ते जाना ही है, और वापसी के हर रास्ते हर उठते क़दमों के साथ खुद ब खुद ध्वस्त होते जाते हैं। समझौतों, शह, मात, दोस्त, दुश्मन, घात-प्रतिघात के तराजू में निरंतर डोलती जिंदगी कब एक ऐसी गली में पहुँच जाती है, जिसके आगे फिर जाने का कोई रास्ता नहीं होता। राजवीर की जिन्दगी को जिसने डिप्टी बनने जैसी सामर्थ्य दी थी, वही उसका वाटर लू भी साबित हुआ। एक महत्वाकांक्षी युवक के उत्थान एवं पतन की रोमांचक कथा - [S-3](https://kitablelo.com/s-3/): S-3 तीन हमनाम, हमपेशा प्रगाढ़ मित्र जो मिल कर एक क्लब चलाते हैं, क्लब में एक लाइव हॉरर शो का आयोजन करते हैं, जिसके दौरान वो जाने अनजाने एक नकारात्मक शक्ति का आह्वान कर बैठते हैं और चौदह सौ साल से सोए काल के पृथ्वी पर आगमन का द्वार खोल देते हैं। काल जो शैतान का प्रधान सेवक है, शैतान की तरफ से ईश्वर की सत्ता के विरुद्ध युद्ध छेड़ देता है। और फिर होती है ऐसी तबाही, जो अकल्पनीय होती है, मुर्दे कब्रों से उठकर खड़े हो जाते हैं, ईश्वर के भक्त ईश्वर की भक्ति छोड़ काल के गुलाम बन जाते हैं। काल जिसकी सत्ता का एकमात्र सूत्र था ताकतवर लोग उसकी दासता स्वीकारें और समाज के कमजोर लाचार लोगो का सफाया कर दें, जिससे एक बेहद ताकतवर समाज का गठन हो जो उसके राज को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में स्थापित करने में अहम् भूमिका निभाए। सब कुछ काल के पक्ष में था, बस इस बात को छोड़कर कि जब से इस ब्रह्माण्ड की रचना हुई है, कभी भी बुराई अच्छाई से जीत नहीं पाई है। तो क्या इस बार भी?…………पर कैसे? - [Shesh Yatra](https://kitablelo.com/shesh-yatra/): Shesh Yatra | शेष यात्रा शेष यात्रा सुविख्यात कथा लेखिका उषा प्रियंवदा का महत्वपूर्ण उपन्यास है। हिंदी में उनका कथा साहित्य नारी जीवन की त्रासद स्थितियों का एक ऐसा बयान है जिसे शायद ही किसी सबूत की जरूरत हो। उनके नारी चरित्र स्वयं एक सबूत बनकर हमारे सामने आ खड़े हो जाते हैं। लेखिका ने ऐसे हर चरित्र के भावनाशील मनोजगत और आत्मद्वंद्व को बारीकी से पढ़ने-परखने का कार्य किया है और चाहा है कि वह साहस और संघर्ष से अपनी दारुण नियति को बदलने में कामयाब हो। शेष यात्रा की अनु लेखिका की इसी रचनात्मक सोच की निर्मिति है। पति द्वारा त्याग दिए जाने पर वह नारी की परंपरागत सामर्थ्यहीनता को अनुकरणीय रूप में तोड़ती है। वस्तुतः उच्च मध्यवर्गीय प्रवासी भारतीय समाज इस उपन्यास में अपने तमाम अंतर्विरोधों, व्यामोहों और कुंठाओं सहित मौजूद है। अनु, प्रणव, दिव्या और दीपांकर जैसे पात्रों का लेखिका ने जिंस अंतरंगता से चित्रण किया है उससे वे पाठकीय अनुभव का अविस्मरणीय अंग बन जाते हैं। - [Dhaai Chaal](https://kitablelo.com/dhaai-chaal/): ढाई चाल | Dhaai Chaal सत्ता की हिस्सेदारी के लिए कुछ तबकों के बीच ठनी वर्चस्व की लड़ाई, जिनकी तरफ देश की आम जनता बड़ी उम्मीदों से ताकती रहती है। एक बलात्कार को राजनीति की विसात बना देने वालों की कहानी, जिनसे लोग न्याय के लिए साथ की अपेक्षा रखते हैं। धर्म, जाति, मीडिया और राजनीति के नेक्सस की एक ऐसी आपराधिक कथा जो किसी काल्पनिक या दूर की दुनिया की बात नहीं; बल्कि हमारे आसपास रोज़ घट रही घटनाओं का कच्चा चिट्ठा है। छल, प्रपंच और निजी संबंधों के भीतर चल रहे राजनीतिक समीकरणों की एक ऐसी कथा जो चौंकाती तो है, लेकिन बेभरोसे की नहीं लगती। चाल उपन्यास इस समय की राजनीति की रोमांचक कथा है। राजनीति जो घर और रिश्तों में जड़ें पसार चुकी है, राजनीति जो हमारे समय का सबसे बड़ा मनोरंजन है, राजनीति जो कि अब थ्रिलर है। यही कारण है कि साजिश और सस्पेंस किताब के आखिरी पन्ने तक पाठक को साथ बनाए रखते हैं। - [Janata Store](https://kitablelo.com/janata-store/): जनता स्टोर | Janata Store दोस्ती, प्रेम, धोखा, राजनीतिक दाँव-पेंच के किस्से कहती जनता स्टोर एक शिक्षण-संस्थान के नए युवा की नई ज़ुबान और नई रफ़्तार में लिखी कहानी है। बड़े स्तर की राजनीति द्वारा छात्रशक्ति का दुरुपयोग, छात्रों के अपने जातिगत अहंकारों की लड़ाई, प्रेम त्रिकोण, छात्र-चुनाव, हिंसा, साज़‍िशें, हत्याएँ, बलात्कार जैसे इन सभी कहानियों के स्थायी चित्र बन गए हैं, वह सब इस उपन्यास में भी है और उसे इतने प्रामाणिक ढंग से चित्रित किया गया है कि ख़ुद ही हम यह सोचने पर बाध्य हो जाते हैं कि कहीं अस्मिताओं की पहचान और विचार के विकेन्द्रीकरण को हमने सोवियत संघ के विघटन के बाद जितनी उम्मीद से देखा था, कहीं वह कोई बहुत बड़ा भटकाव तो नहीं था? ते हैं। - [Valentine Baba](https://kitablelo.com/valentine-baba/): वैलेंटाइन बाबा | Valentine Baba बाकी बलिया का कडक लौंडा शिवेश वैलेंटाइन बाबा की मोहब्बत की मल्टी डाइमेंशनल कंपनी का फुल टाइम एंप्लॉयी है, जिसका एकमात्र धर्म है ‘काम’। ठीक इसके उलट है उसके बचपन का जिगरी यार, दिलदार, नाक की सीध में चलने वाला – मनीष, जिसकी सुबह है –सुजाता, जिसका शाम है – सुजाता। जो ठीक ठाक मॉडर्न है, थोड़ी स्टाइलिस्ट है, नई जबान में सेक्सी है, मस्ती की भाषा में बिंदास है, लेकिन बलिया की यह ठेठ देसी लड़की कलेजे से ऐसी मजबूत है कि अगर कोई उसे चिड़िया समझकर चारा चुराने की कोशिश करने आगे बढ़े तो उसके इरादे का वह कचूमर बनाकर रख देती है। सुजाता की रूपमेट है मोहिनी, जिसका दिल मोहब्बत के मीना बाजार से बुरी तरह बेजार हो चुका है। लव-सव-इश्क-विश्क की फिलॉसफ़ी को ठहाके में उड़ाती वह अक्सरहाँ कहने लगती है – जिसका जितना मोटा पर्स वह उतना बड़ा आशिक। चार नौजवान दिनों के हालात का बयान है वैलेंटाइन बाबा। - [Pairon Ki Hadtal](https://kitablelo.com/pairon-ki-hadtal/): बच्चों के लिए  कविताएँ - [Media Life : Drama Jhonk Ke, News Rok Ke](https://kitablelo.com/media-life-drama-jhonk-ke-news-rok-ke/): Media Life (मीडिया लाइफ) मीडिया लाइफ में जो कथा-सन्दर्भ है वो अपनी कल्पनाशीलता के बावजूद न्यूजरूम और कारोबारी मीडिया के उस चरित्र का खाका खींच पाने में पूरी तरह कामयाब है, जिनका समाज का बड़ा वर्ग आकलन तो करता है लेकिन अन्दरखाने की बातें इस तरह उनके सामने नहीं आ पातीं। उपन्यास में मीडिया और न्यूजरूम की अश्लीलता, फूहड़ता, बेशर्मी और अमानवीय पक्ष मजबूती से उभर आते हैं। भाषा का आकर्षण ऐसा है कि किताब कहीं भी बोझिल नहीं लगती। यह उपन्यास भविष्य के लिए अब एक सन्दर्भ की तरह है। —विनीत कुमार मीडिया लाइफ की शुरुआत काफी मजेदार है। पूरी कहानी मीडिया पर लिखे व्यंग्य को सार्थक करती है। किताब में चैनलों की प्रतिद्वंद्विता, खबरों की तोड़-मरोड़ आदि को बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है। कहानी विभिन्न परिस्थितियों में मीडिया द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीति और खबरों के मैनिपुलेशन को दर्शाती है। —नवीन चौधरी - [Himmat Jaunpuri](https://kitablelo.com/himmat-jaunpuri/): Himmat Jaunpuri | हिम्मत जौनपुरी हिम्मत जौनपुरी एक ऐसे निहत्थे किरदार की कहानी है जो जीवन-भर जीने का हक़ माँगता रहा, सपने बुनता रहा लेकिन आत्मा की बेचैनी और सपनों के संघर्ष में उलझकर रह गया। यह बम्बई के उस फ़िल्मी माहौल की कहानी भी है जिसकी भूल-भुलैया और चमक-दमक आदमी को भटका देती है और वह कहीं का नहीं रह जाता। राही मासूम रज़ा की सिद्ध शैली का ही कमाल है कि इसमें केवल सपनों या भूल-भुलैया का तिलस्म ही नहीं बल्कि उस समाज की भी कहानी कही गई है, जिसमें जमुना चाहकर भी अपनी असली ज़िन्दगी बसर नहीं कर पाती। एक तरफ़ इसमें व्यंग्यात्मक शैली में सामाजिक खोखलेपन को उजागर किया गया है तो दूसरी तरफ़ भावनाओं की उत्ताल लहरों की नक़्क़ाशी भी की गई है। राही मासूम रज़ा साहब ने हिम्मत जौनपुरी को माध्यम बनाकर एक सामान्य व्यक्ति के टूटने और बिखरने को जिस नए अन्दाज़ और तेवर के साथ लिखा है वह उनके अन्य उपन्यासों से बिल्कुल अलग है। - [Non Resident Bihari](https://kitablelo.com/non-resident-bihari/): Non Resident Bihari | नॉन रेजिडेंट बिहारी क्या होता है जब बिहार में किसी भी थोड़े सम्पन्न परिवार में बच्चे का जन्म होता है? उसके जन्मते ही उसके बिहार छूटने का दिन क्यों तय हो जाता है? जब सभी जानते हैं कि मूंछ की रेख उभरने से पहले उसको अनजान लोगों के बीच चले जाना है— तब भी क्यों उसको गोलू-मोलू-दुलारा बना के पाला जाता है? वही ‘दुलारा बच्चा’ जब आख़िरकार ट्रेन में बिठाकर बिहार से बाहर भेज दिया जाता है तब क्या होता है उसके साथ? सांस्कृतिक धक्के अलग लगते हैं, भावनात्मक अभाव का झटका अलग— इनसे कैसे उबरता है वह? क्यों तब उसको किसी दोस्त में माशूका और माशूका में सारे जहाँ का सुकून मिलने लगता है? ‘एनआरबी’ के नायक राहुल की इतनी भर कहानी है— एक तरफ यूपीएससी और दूसरी तरफ शालू. यूपीएससी उसकी जिंदगी है, शालू जैसे जिंदगी की ‘जिंदगी’. एक का छूटना साफ़ दिखने लगता है और दूसरी किनारे पर टंगी पतंग की तरह है. लेकिन इसमें हो जाता है लोचा। क्या? सवाल बहुतेरे हैं. जवाब आपके पास भी हो सकते हैं. लेकिन ‘नॉन रेजिडेंट बिहारी’ पढ़ कर देखिए— हर पन्ना आपको गुदगुदाते, चिकोटी काटते, याद-गली में भटकाते ले जाएगा एक दिलचस्प अनुभव की ओर. - [Rukogi Nahi Radhika](https://kitablelo.com/rukogi-nahi-radhika/): Rukogi Nahi Radhika | रुकोगी नहीं राधिका यह लघु उपन्यास प्रवासी भारतीयों की मानसिकता में गहरे उतरकर बड़ी संवेदनशीलता से परत-दर-परत उनके असमंजस को पकड़ने का सार्थक प्रयास है। ऐसे लोग, जो जानते हैं कि कुछ साल विदेश में रहने पर भारत में लौटना सम्भव नहीं होता, पर यह भी जानते हैं कि सुख न वहाँ था न यहाँ है। स्वदेश में अनिश्चितता और सारहीनता का एहसास, वापसी पर परिवार के बीच होनेवाले अनुभव, जैसे मुँह में ‘कड़वा-सा स्वाद’ छोड़ देते हैं। यह अनुभव विदेश में पहले ‘कल्चरल शॉक’ और स्वदेश में लौटने पर ‘रिवर्स कल्चरल शॉक’ से गुज़रती नायिका को कुछ ऐसा महसूस करने पर बाध्य कर देता है : ‘‘मेरा परिवार, मेरा परिवेश, मेरे जीवन की अर्थहीनता, और मैं स्वयं जो होती जा रही हूँ, एक भावनाहीन पुतली-सी।’’ पर यह उपन्यास सिर्फ़ अकेली स्त्री के अनुभवों की नहीं, आधुनिक समाज में बदलते रिश्तों की प्रकृति से तालमेल न बैठा पानेवाले अनेक व्यक्तियों और सम्बन्धों की बारीकी से पड़ताल करता है। एक असामान्य पिता की सामान्य सन्तानों के साथ असहज सम्बन्धों की कथा है रुकोगी नहीं राधिका। ऐसे लोग जिनके पारिवारिक सीमान्तों पर बाहरी पात्रों की सहज दस्तक इन रिश्तों को ऐसे आयाम देती है, जो ठेठ आधुनिक समाज की देन हैं। - [Pahighar](https://kitablelo.com/pahighar/): Pahighar | पाहीघर ‘पाहीघर’ अवध के एक गाँव, ख़ासकर एक परिवार के इर्द-गिर्द बुनी गई कथा के साथ-साथ सन् 1857 के उस तूफ़ान की इतिहास-कथा भी है जिसके थपेड़ों से अवध का मध्ययुगीन ढाँचा पूरी तरह चरमरा उठा। एक ओर इसमें तत्कालीन सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था का विवरण है तो दूसरी ओर अंग्रेज़ों के भारत में पैर जमाने के पीछे के कारणों पर लेखक की वस्तुपरक दृष्टि और पैनी सोच की भी झलक है। यह उपन्यास तत्कालीन समाज की विसंगतियों और अन्‍तर्द्वन्‍द्व का भी दर्पण है, जिसके कारण कल और आज में कोई तात्त्विक फ़र्क़ नहीं दिखता। साम्‍प्रदायिक और जातीय तनाव पैदा कर राजनीति करनेवाले तब भी थे और आज भी हैं, बस फ़र्क़ यह है कि उनके मुखौटे बदल गए हैं। उस वक़्त यह काम विदेशी करवाते थे और अब यही काम देशी चरित्र करा रहे हैं। वस्तुतः ‘पाहीघर’ की कथा एक बहुआयामी अनुभव की धरोहर की दस्तावेज़ है, जो अपनी अन्‍तर्धारा के व्यापक फैलाव के चलते किसी स्थान या काल विशेष की परिधि में बँधना अस्वीकार कर जाती है। - [Pipal Tole Ke Launde](https://kitablelo.com/pipal-tole-ke-launde/): Pipal Tole Ke Launde | पीपल टोले के लौंडे वह एक छोटे-से गाँव का छोटा-सा बैंक है। बस सौ-डेढ़ सौ खाते ही खुले होंगे वहाँ। लेकिन हर महीने की तीसरी तारीख़ को पास ही के एक हाइवे के तीन बड़े कारख़ानों से बहुत सारा पैसा आके यहाँ जमा होता है। सिर्फ़ तीन घंटों के लिए। और इन तीन घंटों में जो होता है उसके पीछे कुछ मील दूर बसे एक क़स्बे की बीस साल लम्बी दास्तान है। वह दास्तान जिसमें बलखाती, उबाल-भरी प्रेम कहानियाँ हैं। वह दास्तान जिसमें बदलती दुनिया के साथ भागते-हाँफते क़स्बाई सपनों का बेमानीपन है। वह दास्तान जहाँ ज़िन्दगी के ख़ालीपन को भरने के लिए रास्ते भी ऐसे चुने जाते हैं जो कहीं नहीं ले जाते। वह दास्तान पीपलटोले के उन तीन लड़कों की है जिनकी आँखों पे ज़िन्दगी ने ऐसा चश्मा चढ़ा दिया है कि उन्हें अपने चारों तरफ़ सब कुछ बस ग़लत होता दिखाई दे रहा है। आगे वही है जो लूट रहा है। तो हम भी क्यों ना लूटें? बैक डकैती की एक घटना को लेकर लिखी गई यह कहानी एक सत्य घटना पर आधारित है। उन प्रेम अजीब-सी प्रेम कहानियों में भी कल्पना कम है, यथार्थ ज़्यादा जो इसके साथ आप पढ़ेंगे। थोड़े सड़क छाप अन्दाज़ में रुहेलखंडी धज के साथ। - [Baadshahi Angoothi](https://kitablelo.com/baadshahi-angoothi/): Baadshahi Angoothi | बादशाही अँगूठी औरंगज़ेब तब बादशाह नहीं बना था, शहज़ादा ही था; जब उसे समरकन्द की एक लड़ाई पर भेजा गया। लड़ते हुए जब उसकी जान पर बन आई तो उसके सिपहसालार ने उसकी रक्षा की। इससे खुश होकर औरंगज़ेब ने उसे अपनी एक अँगूठी बख्श दी। सैकड़ों बरस बाद वही अँगूठी आगरा में उस सिपहसालार के खानदानवालों से प्यारेलाल नामक एक रईस ने ख़रीदी; और फिर वह उसे एक डॉक्टर को भेंट कर गया... स्वाभाविक है कि ऐसी बेशकीमती अँगूठी को हड़पने के लिए चोर-डाकू भी उसके पीछे लगे। लेकिन उससे पहले ही वह कुछ इस प्रकार गायब हुई, मानो जादू हो गया हो! और इसके बाद शुरू होती है उसे, बल्कि कहना चाहिए, उसे चुरानेवाले व्यक्ति को खोजने की रहस्यपूर्ण यात्रा। एक प्रकार से देखा जाए तो यह जासूसी उपन्यास है, लेकिन सत्यजित राय सरीखे लेखक और फिल्मकार की रचना-दृष्टि इतने से ही सन्तोष नहीं कर सकती। यही कारण है कि बादशाही अँगूठी के गायब होने और उसे गायब करनेवाले को खोजते हुए वे लखनऊ, हरिद्वार और ऋषिकेश की ऐतिहासिक यात्रा भी कराते हैं। कहना न होगा कि किशोर पाठकों को ध्यान में रखकर लिखा गया यह उपन्यास दिलचस्प भी है और ज्ञानवर्धक भी। - [Royal Bengal Rahasya](https://kitablelo.com/royal-bengal-rahasya/): Royal Bengal Rahasya | रॉयल बंगाल रहस्य महान फ़ि‍ल्मकार और अनूठे लेखक सत्यजित राय द्वारा रचित लोकप्रिय जासूस किरदार फेलूदा के सर्वाधिक प्रशेसित कारनामों में शुमार है। अमूमन शहरी परिवेश के रहस्यों को उजागर करते नजर आने वाले फेलूदा इस उपन्यास में एक निपट ग्रामीण इलाके में पहुँच जाते हैं, जहाँ आदमखोर बाघ की गुत्थी सुलझाने के लिए उन्हें जंगल में भी जाना पड़ता है। वहाँ बाघ तो मिलता है, पर वह आदमखोर नहीं होता। इसके साथ ही वहाँ एक ऐसा राज भी उजागर होता है, जिसका अनुमान फेलूदा को कतई नहीं था। और तब स्पष्ट होता है कि जानवरों के मिजाज को समझना उतना मुश्किल नहीं है, जितना इनसानों का! अपने रहस्य-रोमांच में आखिरी पंक्ति तक बाँधे रखने वाला उपन्यास! 'रॉयल बंगाल रहस्‍य' के लेखक सत्‍यजित राय का विशेषकर किशोरों के लिए लिखे गये साहित्‍य के क्षेत्र में न केवल भारत और उनकी मूल भाषा बांग्‍ला में बल्कि पूरी दुनिया में विशेष स्‍थान है। • 'रॉयल बंगाल रहस्‍य' के लेखक भारत के सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान 'भारतरत्‍न' के और फ़ि‍ल्‍म जगत का नोबेल पुरस्‍कार समझे जाने वाले 'विशेष ऑस्‍कर' से सम्‍मानित हैं। ऐसे सर्वमान्‍य रचनाकार की पुस्‍तकें होकर स्‍कूल और व्‍यक्तिगत संग्रह में होनी ही चाहिए। • रहस्‍य-रोमांच से भरा 'रायल बंगाल रहस्‍य' जबरदस्‍त कुतूहल पैदा करता है, स्‍वस्‍थ मनोरंजन करता है और भारतीय सभ्‍यता-संस्‍कृति के एक विशिष्‍ट पक्ष के बारे में पाठक का ज्ञान भी बढ़ाता है। • 'रायल बंगाल रहस्‍य' की रोमांचक कहानी बंगाल के सुदूर ग्रामीण अंचल के एक कुलीन परिवार के बहाने गुजरे दौर के रईस सामंतों के रहन-सहन के साथ-साथ वहाँ के वन क्षेत्र की विशेषताओं से भी परिचित कराती हैं। - [Master Anshuman](https://kitablelo.com/master-anshuman/): Master Anshuman | मास्टर अंशुमान मास्टर अंशुमान विश्वविख्यात फिल्म निर्देशक और अनूठे कथाकार सत्यजित राय की बेहद लोकप्रिय कथाकृति है। इसमें ऐसे एक किशोर–अंशुमान–की कहानी है जो एक फिल्म में अभिनय करने के लिए चुने जाने के बाद शूटिंग के लिए अजमेर जाता है। वहाँ उसकी मुलाकात फिल्मी दुनिया के ऐसे लोगों से होती है जो एक कहानी को परदे पर साकार करने में जुटे है। वह भी उनमें शामिल हो जाता है। दूसरी तरफ उसका सामना उन परिस्थितियों से होता है जिनमें, फिल्मी भूमिकाओं से परे, लोगों के असली चेहरे उजागर हो जाते हैं। गुमनाम रहते हुए, बन रही फिल्म के नायक के लिए जोखिम भरे कार्य करने वाले भलेमानस स्टंटमैन केष्टो दा और गुंडे की भूमिका निभाने वाले जगू दा जैसे लोगों को करीब से देखने के बाद अंशुमान के सामने एक बड़ी सचाई स्पष्ट होती है कि असल दुनिया किसी फिल्म की कहानी से कहीं अधिक पेचीदा है। शूटिंग के बहाने फिल्म निर्माण के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराती यह कहानी पाठक को उस समय रोमांच की नई राह पर ले जाती है, जब एक बेशकीमती मणि की चोरी के चपेटे में सारा शूटिंग दल आ जाता है। किशोर अंशुमान के मुख से कही गई यह कथा जितनी रोमांचक है उतनी ही प्रेरक भी। - [Phatikchand](https://kitablelo.com/phatikchand/): Phatikchand | फटिकचन्द फटिकचन्द महान फिल्मकार और बांग्ला साहित्य के अप्रतिम लेखक सत्यजित राय का अत्यन्त लोकप्रिय उपन्यास है। बांग्ला भाषा-भाषी समाज का शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जो अपने किशोरवय में इस उपन्यास से न गुजरा हो। कोलकाता के एक सम्पन्न परिवार के लड़के के अपहरण की कहानी उस वक्त नया मोड़ ले लेती है जब अपहर्ताओं की कार दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है और वे लड़के को सड़क किनारे बेहोश छोड़कर भाग जाते हैं। बाद में, होश में आने पर लड़के को कुछ याद नहीं आता—न घर का पता, न माता-पिता का नाम। दरअसल दुर्घटना में चोट लगने से उसकी याददाश्त चली जाती है। फिर तो अपने आसपास के हरेक शख्स से एकदम नए सिरे से परिचित होने वाले उस किशोर के सामने एक बिलकुल नई दुनिया खुलती है, जिसमें कोलकाता महानगर की झुग्गी बस्ती का अनदेखा संसार भी शामिल है। अन्तत: याददाश्त बहाल होने और सकुशल घर लौटने तक फटिकचन्द जो कुछ देखता-जानता है, वह उसको ही नहीं, इस उपन्यास के पाठक को भी हमेशा के याद रह जाता है। - [Cooper Compound](https://kitablelo.com/cooper-compound/): Cooper Compound | कूपर कम्पाउंड  विमल का विस्फोटक संसार-47  तुकाराम चेरीटेबल ट्रस्ट का वजूद एक बार फिर खतरे में। बड़े अन्डरवर्ल्ड डॉन की उस पर नजर। साफ धमकी जारी की: “बेचो! नहीं तो छीन लूँगा!” कूपर कम्पाउन्ड न बिका, न छिना, बल्कि एक बड़ी गैंग वार की बुनियाद बना। विमल फिर जान जोखिम के खेल में। कूपर कम्पाउन्ड टॉप मिस्ट्री राइटर सुरेन्द्र मोहन पाठक की चमत्कारी लेखनी फिर जलाल पर। साहित्य विमर्श प्रकाशन की गौरवशाली प्रस्तुति - [Super Don](https://kitablelo.com/super-don/) - [Izzat Looto Company](https://kitablelo.com/izzat-looto-company/): Izzat Looto Company अगर आप जिज्ञासा की मृगमरीचिका का पीछा कर नादानी के रेगिस्तान में भटक रहे बच्चों को, मानवीय दुर्बलता के तिलिस्म में फँसे लोगों को क़रीब से जानने के, उन्हें वापसी का पता देने के पक्षधर हैं तो यह कथा-संग्रह- इज़्ज़त लूटो कंपनी आपके लिये है। पर यदि आप नैतिकता के आग्रही हैं तो मेरा यह कथा-संग्रह आपके लिए हरगिज़ नहीं हैं, क्योंकि इसमें निहित मेरी कहानियों से आप चोटिल हो सकते हैं, बहुत चोटिल! भाषाई विन्यास और परिदृश्य के दृष्टिकोण से यदि मेरी इस किताब को देखा जाए तो मेरी किताब में निहित मेरी कहानियाँ आज की मॉडर्न हिंदी वाली ज़ुबान में आपका शहर के बोल्ड और बोहेमियन किरदारों से भी तार्रुफ़ करायेगी और आपको गाँव की कच्ची पगडंडियों से ले जाकर ठेठ गंवई किरदारों से भी मिलवाएगी। आप चाहे सुंदर सुभग तत्सममूल हिंदी के अनुरागी हों, चाहे तहज़ीबो-तमद्दुन से मालामाल उर्दू के मुरीद हों, या फिर अंग्रेज़ी की ड्योढ़ी पर खड़े होकर अंग्रेज़ीनुमा हिंदी का दामन पकड़ने वाले पाठक, आपको मेरी इस क़िताब में अपनी लज़्ज़त का बहुत कुछ मिलेगा। - [Tarkib](https://kitablelo.com/tarkib/): Tarkib | तरकीब एक अकेली लड़की बदला लेना चाहती है अपने उस सौतेले बाप से जिसने ना सिर्फ उसके बाप और माँ की हत्या की थी वरन उसके ऊपर भी जुल्म ढाया था और एक अरबपति बाप की इकलौती बेटी को दरबदर भटकने के लिए मजबूर कर दिया था। एक वकील, जिसे जीने के लिए कोई काम करने की जरूरत ही नहीं थी, मगर अपने बल बूते पर अपनी हैसियत बनाने का वो पुरजोर तमन्नाई था। एक साधारण से केस में हाथ डालने के बाद हालात जिस तेजी से करवट बदले, उसे पता ही नहीं चला। एक सांसद, माफिया, धन कुबेर व्यापारी, जिसकी ताकत का कोई ओर छोर नहीं। राजनीतिक पैंतरों में सिद्धहस्त सारे दाँव-पेंच अपनाकर सरकार को भी बैक फुट पर ले जाने वाला बाहुबली नेता, जिस पर पलटवार करने के लिए सरकार की ओर से नियुक्त एन०सी०बी० और आई० बी० की संयुक्त टीम के भी पसीने छूट जाते हैं। साझा मंजिल के लिए अलग-अलग रास्तों पर चले जब कई मुसाफिर एक ही पड़ाव पर आकर मिले, तो उनके सामने एक ही चुनौती थी किस तरह उस माफिया का अंत हो सके। और फिर निकाली गई एक -तरकीब.. - [Yaami](https://kitablelo.com/yaami/): Yaami | यामी महत्वाकांक्षा जब एक सीमा से आगे बढ़ जाती है, तो वो एक जिद, एक जुनून का रूप ले लेती है। ऐसी ही एक महत्वाकांक्षा की कहानी है-ईसा से 500 वर्ष पूर्व एक तांत्रिक तुफैल और उसकी शिष्या कूटनी माया की, जिन्होंने ईश्वरीय सृष्टि के समांतर एक सृष्टि निर्मित करने की महत्वाकांक्षा पाल ली थी। उनकी इस महत्वाकांक्षा में जाने अंजाने ही सहायक बन गई भोली भाली गंधर्व कन्या यामी। यामी-जो अपने प्रेम की तलाश में गंधर्व लोक से पृथ्वी पर आई थी। विधि के विधान ने माया, तुफैल और यामी को समय से 2500 साल आगे सन 2022 में ला फेंका। सन 2022 – जहाँ चाहे अनचाहे दो अन्य व्यक्ति भी माया, तुफैल और यामी के इस द्वंद का मोहरा बन गए -एक युवा आई०पी०एस० और दूसरे इस किताब के लेखक आलोक सिंह खुद। फिर क्या हुआ 2022 में ? कौन जीता ये जंग ? माया या यामी ? क्या यामी अपनी मोहब्बत की तलाश कर पाई ? तुफैल और माया समांतर सृष्टि की स्थापना के अपने उद्देश्य में कहाँ तक सफल हुए ? ऐसे ही अनेक प्रश्नों का उत्तर है यामी। - [Shathe Shathyam Samacharet](https://kitablelo.com/shathe-shathyam-samacharet/): SHATHE SHATHYAM SAMACHARET | शठे शाठयम समाचरेत् दुश्मन वापस आया था। और इस बार पूरी तैयारी और पहले से भी कहीं ज्यादा घातक होकर आया था। इस बार उसने ऐसा जाल बुना था, जिसके सफल होने का सीधा अर्थ था, भारतवर्ष के शरीर से कश्मीर एवं पंजाब रुपी दो भुजाओं का अलग हो जाना। साजिश के ताने-बाने इस कदर बुने गए थे कि कश्मीर में शुरू हुआ उन्नीस सौ सैंतालीस के बाद का पाकिस्तान का सबसे बड़ा षड़यंत्र। जिससे निपटने की जिम्मेदारी एक बार फिर रॉ के हाथों में थी, जिसमें असफल होने की कोई गुंजाइश नहीं थी और समय रहते उन्हें इस ऑपरेशन को कामयाब करके दिखाना था। - [Ateet](https://kitablelo.com/ateet/): Ateet | अतीत उसका प्यार उसके सामने था। ना परिवार, ना समाज, कोई भी उनके विरोध में नहीं था, लेकिन फिर भी उसका प्रेम पूर्णता को प्राप्त नहीं हो सकता था; क्योंकि  जिस क्षण वो अपने प्रेम को पाने का प्रयत्न करती, उसी क्षण उसकी मृत्यु निश्चित थी। उसकी भी और जिससे उसे प्यार था उसकी भी। यही तो होता आ रहा था उसके साथ कई जन्मों से। और इस रहस्य की कुंजी कहीं दूर अतीत में छुपी हुई थी। अब यदि उसे अपने प्रेम को पाना था, तो उसे अतीत में जाकर इस रहस्य को सुलझाना ही था। आधुनिक काल से साढ़े आठ सौ वर्ष पहले तक फैली एक भावनात्मक रोमांच गाथा। - [Lakadbaggha](https://kitablelo.com/lakadbaggha-satya-vyas-thriller/): Lakadbaggha | लकड़बग्घा  “एक और कविता सुनोगी?” पीछे से ही उसने पुकारा। लड़की पीछे नहीं मुड़ी। बस आगे जाते हुए ही उसने बीच की उँगली दिखा दी। वह अभी दो कदम ही आगे बढ़ी थी कि स्टील के चमचमाते हथौड़े का एक जोरदार वार उसकी दायीं कनपटी पर पड़ा और वह झूलकर बेजान पुतले की तरह बायीं ओर गिर गयी। हत्यारे ने सुप्रिया के सिर से निकलने वाली खून की पतली धार को बहते हुए देखा और उससे अपना पैर बचाते हुए आगे बढ़ गया। उसने बहुत ही करीने से हथौड़ा अपने बैग में रखते हुए कहा –“डिसरिस्पेक्ट ऑफ़ आर्ट एंड पोएट्री इस द फर्स्ट साइन ऑफ़ अ डेड सोसाइटी। तुम्हें जो करना है करो! बट नेवर डिसरिस्पेक्ट एन आर्टिस्ट। कविता सुनने में क्या जाता है? छोटी-सी तो कविता थी।” कहते हुए फिर उसकी आवाज कठोर हुई। उसने लाश की तरफ एक आखिरी निगाह डाली, आसपास की स्थिति जाँची और बुदबुदाया – “तुम्हें यंत्रणा दिए बिना मारना अपूर्ण कर देता मेरे हृदय के एक भाग को बहुत बेला निंद्रा से उठ बैठता कामना के ज्वर से तप्त किसी ऊँचाई पर ले जाकर तुम्हें धक्का देना कितना उत्तेजक होता और जो कोलाहल होता पश्चात् उसके उसमें कितना संगीत होता प्रेयसी” - [The Magician Who Bought Dreams](https://kitablelo.com/the-magician-who-bought-dreams/): Welcome to the world of Supernatural and Crypt - where nothing is what it seems! The latest story collection by Vikkram Dewan pulls you down in a world of dark tunnels and foggy alleys that lead to unknown worlds of strange beings and phenomena. Here you'll find a magician who buys people’s dreams before making them vanish. A mysterious radio that makes you listen to people talking to God. Find out how seductive the shape-shifting ‘Whore of Babylon’ can be? Or how a cursed wine glass can become a one-way portal to other worlds? Listen to the confessions of the first White Tantrik, in whose skewed world-view Black is White and Might is Right. - [Jogidham](https://kitablelo.com/jogidham/): Jogidham एक कत्ल और छह सस्पेक्ट्स, जो दो हिस्सों में बंटे हुए थे। पहली पार्टी में पांच लोग थे, जबकि दूसरी में महज एक, वह भी लड़की जिसका कहना था कि कत्ल उन पांचों ने मिलकर किया था। जबकि वह थे कि चींख चींख कर लड़की को कातिल करार दे रहे थे। नतीजा ये हुआ कि पुलिस ने सबको उठाकर हवालात में डाल दिया। अब उनके सामने सबसे बड़ा चैलेंज था इस बात का पता लगाना कि दोनों पक्षों में से सच कौन बोल रहा था। - [Shalimar- The Vulture is a Patient Bird-James Hadley Chase](https://kitablelo.com/shalimar-james-hadley-chase/): Shalimar | The Vulture is a Patient Bird | James Hadley Chase लाचार अपाहिज मैक्स काहलेनबर्ग वो दौलतमंद ‘गिद्ध’ था जो यूँ तो व्हीलचेयर का मोहताज़ था, लेकिन बावजूद इसके फितरतन फरेबी, मक्कार, शातिर और धोखेबाज ही नहीं था, बल्कि बदकार, नाशुक्रा, धूर्त, कमीना और परपीड़क भी था। ऐसे शख्स के कब्जे में वो मशहूर और आफ़ताबी अंगूठी थी जो कभी सीजर बोरगिया के कलेक्शन का हिस्सा थी, लेकिन अब जिसे कब्जाने के लिए मुकाबिल थी पेशेवर अपराधियों की वो टीम जिसका ट्रोजन हॉर्स थी एक खूबसूरत बेरहम दोशीजा। जेम्स हेडली चेज़ के बहुचर्चित उपन्यास  The Vulture is a Patient Bird […] - [Deja Vu](https://kitablelo.com/deja-vu/): Deja Vu | देजा वू  दारने सजवाण अपने रईस बाप की शाही आदतों में पली-बढ़ी वो इकलौती औलाद थी, जिसने पहले तो बाकायदा एक जिद के तहत अपनी मर्जी से, अपनी पसंद की कमसिन लड़की से शादी की और बाद में बेलिहाज़ एक दूसरी लड़की से प्यार की पींगें भी बढ़ा लीं। नतीजतन उसकी शादी में तो फच्चर पड़ा ही पड़ा लेकिन आगे जब उसने अपनी बीवी को दिए धोखे के बदले खुद धोखा खाया, तो वो बौखला उठा। इतना कि वो बदकिरदार, बदचलन, बद-अखलाक़ शख्स अपने पूर्वाभास को, अपने Deja Vu को भी अनदेखा कर गया। कँवल शर्मा का नए […] - [Crystal Lodge](https://kitablelo.com/crystal-lodge/): Crystal Lodge | क्रिस्टल लॉज सनसनीखेज कोर्टरूम ड्रामा अपराध लेखन के सम्राट का नया शाहकार मुकेश माथुर और नकुल बिहारी आनंद कोर्ट में आमने-सामने अभय सिंह राजपुरिया एक मुअज्जिज़, खानदानी, उम्रदराज शख्स जो अपने बेडरूम में मरा पड़ा पाया गया। कातिल उसके एक हालिया मुलाजिम लेकिन डिसमिस्ड नौजवान को ठहराया गया, गिरफ़्तारी के बाद जिसकी एक ही दुहाई थी; “मैंने कत्ल नहीं किया।” क्या वो बेगुनाह था? टॉप मिस्ट्री राइटर सुरेन्द्र मोहन पाठक का मुकेश माथुर सीरीज का नवीनतम उपन्यास - [10 June Ki Raat](https://kitablelo.com/10-june-ki-raat/): 10 June Ki Raat | 10 जून की रात एक ऐसी रात जो किसी जलजले से कम नहीं थी। जिसने कई लोगों को खून के आँसू रोने पर मजबूर कर दिया तो कइयों को काल कोठरी के भीतर पहुँचा दिया। और इतने भयंकर बवाल की मुख्तसर सी वजह ये बनी कि पुलिस ने एक डैड बॉडी की शिनाख्त के लिए विशाल सक्सेना उर्फ़ ‘पनौती’ को कॉल कर लिया। विशाल सक्सेना उर्फ़ ‘पनौती’ सीरीज का पहला उपन्यास! उपन्यास पर वेब सीरीज निर्माणाधीन - [Beat by Santosh Pathak](https://kitablelo.com/beat-by-santosh-pathak/): Beat | बीट  पंखे के हुक से उल्टी लटकती लाश, खून से भरे तगाड़ में जल कर बुझ चुकी आग, स्टील की प्लेट में रखा मकतूल का दिमाग, हड्डियों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर बनाए गए चार क्रॉस और उनके बीच मौजूद एक निर्दोष सा दिखाई देने वाला चुकंदर! क्या था ये सब? क्या हत्यारा पुलिस को कुछ बताने की कोशिश कर रहा था? या फिर सब धोखा था, पुलिस को भटकाने के लिए कातिल की नायाब चाल थी? सवाल बहुतेरे थे, जवाब कोई नहीं। कत्ल-दर-कत्ल मामला सुलझने की बजाय निरंतर उलझता चला जा रहा था। - [Take 3](https://kitablelo.com/take-3/): Take 3 | टेक 3 गुजश्ता ज़िंदगी के तजुर्बों ने उसे नेक, आबिद और दीनदार शख्स से बदलकर आज एक मक्कार, चालबाज़ और फरेबी शख्स में तब्दील कर दिया था। फिर अपने किए उन्हीं गुनाहों से आजिज़ आकर जब उसने गुनाह के उस कंबल को छोड़ना चाहा, गुनाहों के उस कंबल ने उसे न छोड़ा। वो ज़िंदगी बदलना चाहता था, लेकिन ज़िंदगी अब उसे बदल रही थी। एक ईमानदार गुनहगार शख्स की ज़िंदगी का तीसरा अध्याय, उसकी तेज रफ्तार ज़िंदगी का Take 3 - [Topaz by Kanwal Sharma](https://kitablelo.com/topaz-by-kanwal-sharma/): Topaz | टोपाज एक्स जेलबर्ड पीतांबर सचदेवानी किस्मत के मामले में वो शापित शख्स था जिसने जब जिस काम में हाथ डाला, हमेशा चोट ही खाई। जिसकी खासुलखास और एक्सएमपलरी बद किस्मत का तोड़ किसी झाड़-फूंक, गंडे-ताबीज वाले के पास न था और जो बार-बार पलटकर लगातार उस पर वार करती थी। यूँ ऐसी आउटस्टैंडिंग किस्मत को ढोते शख्स के निशाने पर था शाही खानदान का वो पीला-नग, जिसपर दावा दो जुदा पार्टियों का था, पीछे कोई तीसरा पड़ा था और जो हासिल था किसी चौथे को - [Asteen Ke Sanp | Double Role Combo](https://kitablelo.com/asteen-ke-sanp-double-role-combo/): Asteen Ke Sanp | आस्तीन के साँप  क्या वह वाकई पागल था? या आस्तीन के साँपों जैसे उसके लालची रिश्तेदारों द्वारा इसलिए पागल करार दे दिया गया था ताकि वे उसकी जायदाद हड़प सकते? शारदा क्या वाकई सेठ सुंदरदास की भतीजी थी या उसकी नौकरानी रुकमणी की बेटी थी और क्या बाकी रिश्तेदारों की तरह वह भी बुजुर्गवार की दौलत हथियाने की खातिर उनके साथ चिपकी हुई थी? बुजुर्गवार के माल की इस छीना झपटी में फिर कत्ल की नौबत कैसे आयी? साथ में सुनील सीरीज का एक रोमांचक उपन्यास Double Role - [Chembur Ka Data](https://kitablelo.com/chembur-ka-data/): Chembur Ka Data  मैं ही मुंसिफ़ हूँ, मैं ही मुजरिम हूँ; कोई सूरत नहीं रिहाई की। ये था विमल उर्फ़ सरदार सुरेन्द्र सिंह सोहल का खुद अपना आकलन लेकिन अपने मुरीदों के लिए वो था चैम्बूर का दाता विमल सीरीज का 39वाँ शाहकार  - [Khota Sikka - Jeet Singh](https://kitablelo.com/khota-sikka-jeet-singh-novel-by-surender-mohan-pathak/): Khota Sikka | खोटा सिक्का  "क्या हुआ नीचे?" - पुरसूमल ने पूछा। "एक आदमी लिफ्ट में जल गया" - जवाब मिला। "लिफ्ट में जल गया!" - पुरसूमल हैरानी से बोला - "कैसे जल गया? कोई बिजली का शॉर्ट सर्कट..." "नो सर, करेंसी नोट जलता था।" "क्या!" "ये ..तना बड़ा पहाड़ करेंसी नोट का लिफ्ट के भीतर। मिलियन्स ऑफ रूपीज। ऑल बर्निंग। एंड ए यंग मैन बर्निंग विद देम।" जलते नोटों में एक नौजवान जल रहा था - पुरसूमल का दिल हाहाकार कर उठा। जीता! यहाँ कोई सुष्मिता नहीं रहती। ये मिसेज चंगुलानी का घर है। आइन्दा भी याद रखना। बगूले की तरह वो लिफ्ट में दाखिल हुआ और उसने डाउन बटन दबाया। सुष्मिता से रुसवा, अपने आप से शर्मिंदा जीतसिंह का लिफ्ट में क्या अंजाम हुआ? - [Laal Nishan](https://kitablelo.com/laal-nishan/): Laal Nishan | लाल निशान मर्द वो कब है भँवर से जो उबर सकता नहीं हक ही जीने का नहीं उसको जो मर सकता नहीं ये था हरदिलअजीज सोहल की जिंदगी का अहमतरीन फलसफा - [Palatwar](https://kitablelo.com/palatwar/): Palatwar | पलटवार  “मेरा नाम विमल है” – विमल बोला – “मैं मोहन बाबू का भाई हूँ। विमल बाबू।” “हूँ” – मुग्धा बोली – “तुम खास मेरे से मिलने आए हो?” “हाँ।” “क्यों” “मोहन बाबू की मौत की रू में मैं समझता हूँ कि डकैती के माल में उसका हिस्सा मुझे मिलना चाहिए।” “ओहो! तो ये कहो न कि तुम मुंगेरीलाल हो और हसीन सपने देख रहे हो।” “क्या मतलब?” “कौन सा हिस्सा? कैसा हिस्सा? यहाँ किसके पास रखा है हिस्सा? यहाँ किसी डकैती से किसी का कोई वास्ता नहीं।” “ये दाई से पेट छुपाने वाली बात है।” “कोई बहुत पहुँचे […] - [Karmyoddha](https://kitablelo.com/karmyoddha/): एक अजनबी शहर में कदम रखते ही बतौर इश्तिहारी मुजरिम विमल का पहचान लिया जाना उसके लिए घातक सिद्ध हो सकता था। कैसे वो इस विकत स्थिति से पार पा सका? - [Zameer Ka Qaidi](https://kitablelo.com/zameer-ka-qaidi/): Zameer Ka Qaidi | ज़मीर का कैदी एक ठग! एक तालातोड़! दोनों सोहल से मुलाकात के तमन्नाई क्या वो दुश्मन की चाल के मोहरे थे? विमल का विस्फोटक संसार-36 - [One Shot](https://kitablelo.com/one-shot/): रोहन रात्रा एक बेगैरत, बदचलन और बदकिरदार शख्स था, जो जब एक सर्द स्याह रात शहर के हाईवे से मुर्दा बरामद हुआ तो उसका भाई कातिल की तलाश में अकेला ही निकल पड़ा। आखिरकार तो.. ये उसका सलीब था, जिसे उसने अकेले ही ढोना था - [Sada Nagara Kooch Ka- Vimal Series](https://kitablelo.com/sada-nagara-kooch-ka-vimal-series/): Sada Nagara Kooch Ka Vimal Series जिस धज से कोई मकतल से गया, वो शान सलामत रहती है; ये जान तो आनी जानी है, इस जान की कोई बात नहीं । कुछ ऐसी ही थी विमल की जिंदगी की भी कशमकश कि उसे चारों तरफ मौत नजर आती थी, सदा मौत का, इस जहान से कूच का, नगारा सुनाई देता था । क्या विमल निश्चित मौत से बच पाया ? - [Deewar Mein EK Khidki Rahti Thi](https://kitablelo.com/deewar-mein-ek-khidki-rahti-thi/): Deewar Mein Ek Khidki Rahti Thi | दीवार में एक खिड़की रहती थी  विनोद कुमार शुक्ल के इस उपन्यास में कोई महान घटना, कोई विराट संघर्ष, कोई युग-सत्य, कोई उद्देश्य या संदेश नहीं है क्योंकि इसमें वह जीवन, जो इस देश की वह ज़िंदगी है जिसे किसी अन्य उपयुक्त शब्द के अभाव में निम्न-मध्यवर्गीय कहा जाता है, इतने खालिस रूप में मौजूद है कि उन्हें किसी पिष्टकथ्य की ज़रूरत नहीं है। यहाँ खलनायक नहीं हैं किंतु मुख्य पात्रों के अस्तित्व की सादगी, उनकी निरीहता, उनके रहने, आने-जाने, जीवन-यापन के वे विरल ब्यौरे हैं जिनसे अपने-आप उस क्रूर प्रतिसंसार का एहसास हो जाता है जिसके कारण इस देश के बहुसंख्य लोगों का जीवन वैसा है जैसा कि है। विनोद कुमार शुक्ल इस जीवन में बहुत गहरे पैठकर दाम्पत्य, परिवार, आस-पड़ोस, काम करने की जगह, स्नेहिल ग़ैर-संबंधियों के साथ रिश्तों के ज़रिए एक इतनी अदम्य आस्था स्थापित करते हैं कि उसके आगे सारी अनुपस्थित मानव-विरोधी ताक़तें कुरूप ही नहीं, खोखली लगने लगती हैं। एक सुखदतम अचंभा यह है कि इस उपन्यास में अपने जल, चट्टान, पर्वत, वन, वृक्ष, पशुओं, पक्षियों, सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्र, हवा, रंग, गंध और ध्वनियों के साथ प्रकृति इतनी उपस्थित है जितनी फणीश्वरनाथ रेणु के गल्प के बाद कभी नहीं रही और जो यह समझते थे कि विनोद कुमार शुक्ल में मानव-स्नेहिलता कितनी भी हो, स्त्री-पुरुष प्रेम से वे परहेज़ करते हैं या क्योंकि वह उनके बूते से बाहर है, उनके लिए तो यह उपन्यास एक सदमा साबित होगा–प्रदर्शनवाद से बचते हुए इसमें उन्होंने ऐंद्रिकता, माँसलता, रति और शृंगार के ऐसे चित्र दिए हैं जो बग़ैर उत्तेजक हुए आत्मा को इस आदिम संबंध के सौंदर्य से समृद्ध कर देते हैं, और वे चस्पाँ किए हुए नहीं हैं बल्कि नितांत स्वाभाविक हैं–उनके बिना यह उपन्यास अधूरा, अविश्वसनीय, वंध्य होता। बल्कि आश्चर्य यह है कि उनकी कविता में यह शारीरिकता नहीं है। -विष्णु खरे - [Prem Ka Prameya](https://kitablelo.com/prem-ka-prameya/): लिखना मेरे लिए खुद को जानने की एक कोशिश भर है, लिखते लिखते खुद को जान पाऊँ तो शायद लिखना सफल हो तब तक ये यात्रा यूँ ही चलती रहेगी। पहली किताब हर लेखक के लिए बहुत खास होती है, मेरे लिए भी ये किताब उतनी ही खास है बस यूँ समझिये जितने संवाद मैंने मौन में किये हैं वो सब आप लोगों को सौंप रहा हूँ। प्रेम के बारे में बहुत कुछ लिखा और कहा गया है उम्मीद करता हूँ मेरे लिखे में भी आपको प्रेम की एक झलक दिखेगी और शायद आपको अपना जिया हुआ प्रेम स्मरण हो आये। शायद आप अपने "प्रेम का प्रमेय" सिद्ध कर पाएं इस किताब को पढ़ते हुए | - [Double Secret Agent](https://kitablelo.com/double-secret-agent/): डबल सीक्रेट एजेंट ( Double Secret Agent) लेखक: चंदर - [Chalte Purje](https://kitablelo.com/chalte-purje/): चलते पुर्जे (Chalte Purje) लेखक: चंदर - [Atom Bomb](https://kitablelo.com/atom-bomb/): एटम बम (Atom Bomb) लेखक: चंदर - [Afat Ke Parkale](https://kitablelo.com/afat-ke-parkale/): आफत के परकाले - [Top Ke Gole](https://kitablelo.com/top-ke-gole/): Top Ke Gole - [Bijli Ke Bete](https://kitablelo.com/bijli-ke-bete/): बिजली के बेटे - [Bhale Bhooton Ki Kahaniyan](https://kitablelo.com/bhale-bhooton-ki-kahaniyan/): मुझे यह जानकर ‘थोड़ी खुशी, थोड़ा गम’ हुआ है कि हमारे बारे में बच्चों के लिए कहानी की एक किताब लिखी जा रही है। उम्मीद है ये कहानियाँ झूठ-मूठ में बच्चों को डराने के लिए नहीं होंगी, बल्कि इन्सानों के साथ हमारा एक दोस्ताना रिश्ता बनाएँगी। हम बेवजह किसी से उलझते नहीं हैं। अरे भाई हमें भी तुम्हारी तरह कई चीजों से डर लगता है। कुछ चीजें अच्छी भी लगती हैं, जैसे कि गन्ने का रस। और ये बिलकुल झूठ है कि हम खून पीते हैं। अब इस लेखक की बात पर भी आँख मूँद कर भरोसा मत करना। आँख बंद कर लेने से तुम्हारे दिमाग में वही तस्वीर उभर आती है जो तम देखना चाहते हो। और यहाँ तो ‘न तुम हमें जानो, न हम तुम्हें जानें’ वाला मामला है। वैसे इन कहानियों को पढ़कर मुझे बहुत मजा आया। मैंने अपने कुछ साथियों को भी सुनाई, मगर कुछ भूत बड़े गुस्सा हो गए, और मुझसे लेखक का पता मााँगने लगे। मगर मैंने नहीं दिया, क्योंकि मुझे भूतों की सुरक्षा का डर था और लेखकों की ताकत को कभी कम नहीं समझना चाहिए, वे कुछ भी कर सकते हैं- अपनी कहानियों में। लेखक भाई से अभी तक मेरी मुलाकात नहीं हुई है। इन्होंने मिलने से मना कर दिया। सुना है लेखक काफी डरपोक है। मगर आप तो बहादुर हैं ना, तभी तो ये किताब खरीदी है। तो क्या मुझसे मिलना चाहोगे? अगर हाँ, तो रात को किताब पढ़ने के बाद अपने सिरहाने के नीचे रखकर सोना। अगर भत सच्ची-मुच्ची होते हैं तो मिलने आऊँगा किसी दिन। - [Sholabar](https://kitablelo.com/sholabar/): Sholabar : यह कोई शराब का बार नहीं, लाशों का अम्बार है, इस लम्बी दास्तान का आगाज़ कब, कहाँ, कैसे हुआ, उसी की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालने के लिए मैंने कहानी से चंद शब्द लिखने की आवश्यकता महसूस की। शोलाबार किसी इंसान का नाम तो हरगिज़ नहीं हो सकता, किन्तु उसका टाइटल हो सकता है। शोलाबार अर्थात आग बरसाने वाला (अग्निवर्षक)। अब अगर किसी माँ ने अपने बेटे का नाम शोलाबार रखा है, तो उसकी पृष्ठभूमि में आग बरसाने वाली दास्तान होगी। - [Catch 4](https://kitablelo.com/catch-4/): Catch 4 - "हमारा अहम ऑफिसर, एक कोमोडोर, जो इंडियन आर्म्ड फोर्सेस के फ्रन्ट लैंड इंस्टालेशन्स के बारे में बेहद कीमती जानकारियाँ रखता था, अब रेड आर्मी के कब्जे में था और मेरा मिशन था - ईदर फ्री हिम ऑर किल हिम, नो क्वेशचन्स आस्क्ड" - [Mamamian](https://kitablelo.com/mamamian/): Mamamiyan  मामामियां - क्लाइव थर्सटन एक मशहूर और स्थापित लेखक था, जिसकी बेमिसाल कामयाबी के पीछे उसकी वो बाकमाल कृति थी जिसे खुद उसने नहीं बल्कि किसी और ने लिखा, लिखकर मार गया और यूँ क्लाइव के लिए भारी सहूलियत कर गया। क्लाइव को लगता था कि उसका राज सुरक्षित है लेकिन फिर वो ईव से मिला- जो एक पहेली थी - [Madari](https://kitablelo.com/madari/): Madari|मदारी एक वैज्ञानिक, उसके रास्ते के रोड़े, प्रतिस्पर्धा, ईर्ष्या व दूसरी तमाम अड़चनों के अंबार के साथ साथ सरकारी तंत्र। वैज्ञानिक की पत्नी, अपने आप में पहेली। लेकिन एक दोस्त... सारे हालात, सारी अड़चनों को उँगलियों पर नाचने वाला मदारी। हर पल बदलता घटनाक्रम। चौंकाने परंतु सोचने पर मजबूर करने वाला अंत। - [Jersey Number Seven Ki Diary](https://kitablelo.com/jersey-number-seven-ki-diary/): Jersey Number Seven Ki Diary - लेंस से मोरों को देखते हुए उसे एकबारगी अहसास हुआ कि वह कितना बदल गयी है तीन-चार महीनों में। पहले मोरों की तरह धीमी लय में चलती थी, सकुचाती थी, वह सुनंदा कहाँ गयी! अब चंचलता बढ़ गयी है, इसीलिए नीचे वाली आंटी कह रही थी - ‘दुल्हनिया, सीढ़ी पर जल्दी-जल्दी चढ़ना-उतरना ठीक नहीं होता।’ वह शेखर से एकदम घुल-मिल गयी थी और अपने पंख खोलती चली जाती थी, मगर मोरों की मानिंद पंख समेटने की कला भूल गयी थी। - [Sharad Poonam Ki Raat](https://kitablelo.com/sharad-poonam-ki-raat/) - [Dubai Gang-Hard Bound](https://kitablelo.com/dubai-gang-hard-bound/): Dubai Gang | दुबई गैंग हालात की गर्दिश ने जीत सिंह का कभी पीछा न छोड़ा। इस बार बमय सामान एक पैसेंजर पकड़ा तो मंजिल पर पहुँचकर पैसेंजर गायब हो गया। सामान की वजह से थाने में हाजिरी भरनी पड़ी। वहाँ सामान का भेद खुला तो प्राण कांप गए। फिर उसके साथ बद् से बद्तर हुआ, बद्तरीन हुआ। ऐसा ही था जीत सिंह उर्फ जीता जो कभी कुछ न जीता फिर भी नाम जीता दुबई गैंग टॉप मिस्ट्री राइटर सुरेन्द्र मोहन पाठक का नवीनतम उपन्यास साहित्य विमर्श प्रकाशन की गौरवशाली प्रस्तुति - [Dubai Gang](https://kitablelo.com/dubai-gang-by-surendra-mohan-pathak/): Dubai Gang | दुबई गैंग हालात की गर्दिश ने जीत सिंह का कभी पीछा न छोड़ा। इस बार बमय सामान एक पैसेंजर पकड़ा तो मंजिल पर पहुँचकर पैसेंजर गायब हो गया। सामान की वजह से थाने में हाजिरी भरनी पड़ी। वहाँ सामान का भेद खुला तो प्राण कांप गए। फिर उसके साथ बद् से बद्तर हुआ, बद्तरीन हुआ। ऐसा ही था जीत सिंह उर्फ जीता जो कभी कुछ न जीता फिर भी नाम जीता दुबई गैंग टॉप मिस्ट्री राइटर सुरेन्द्र मोहन पाठक का नवीनतम उपन्यास साहित्य विमर्श प्रकाशन की गौरवशाली प्रस्तुति - [Kuchh Suljha Kuchh Unsuljha](https://kitablelo.com/kuchh-suljha-kuchh-unsuljha/): Kuchh Suljha Kuchh Unsuljha | कुछ सुलझा कुछ अनसुलझा बदला अगर ऐसे लिया जाए कि अंत तक व्यक्ति को इस बात का एहसास तक न हो और वह लगातार एक चक्रव्यूह में फँसता जाए... हत्या क्यों हुई, कैसे हुई, को सुलझाने में गुत्थी का और उलझना... दाँव पेंच, साजिश, कुछ कर गुजर जाने का जुनून, अबूझ पहेली और हर बदलते पृष्ठ के साथ बढ़ता रहस्य... उत्सुकता और हैरान करने वाला खुलासा... इन चार लंबी कहानियों में जहाँ आपको विभिन्न किरदारों से रूबरू होने का मौका मिलेगा, वहीं अनगिनत राज भी खुलेंगे। एक नई शैली में लिखीं रोमांचक कहानियाँ। - [Tara Ki Anokhi Yatra](https://kitablelo.com/tara-ki-anokhi-yatra/): दुष्ट बौने, ड्रैगन का जादू, आग उगलती चाबी, दो चांद, तैरते द्वीप, उड़ने वाला घोड़ा, बोलने वाली बिल्ली, और खतरनाक मधुमक्खियां... निकल पड़ी है तारा ऐसी ही एक चमत्कारिक दुनिया की यात्रा पर, जहां से वापस लौटना मुश्किल लग रहा है उसे। किस रोमांचकारी दुनिया में पहुंच जाती है तारा? तमाम बाधाओं को पार करने के बाद किस से मुलाकात होती है उसकी? जानने के लिए पढ़िए यह दिलचस्प बाल उपन्यास। - [Aham Asmat](https://kitablelo.com/aham-asmat/): Aham Asmat ‘अहम् अस्मत’ अस्मत की कहानी है। उस अस्मत की जो अपने समाज का प्रतिनिधित्व कर उसका आईना बनकर उभरी थी। लेकिन जैसे-जैसे वह आगे बढ़ती है उसके मन में उठते हुए सवालों के झंझावात उत्तरों की तलाश में उसे ऐसे मोड़ पर ला देते हैं, जहाँ पर उसके लोग और उसका समाज ही उसके खिलाफ होने लगता है। वह एक ऐसे दोराहे पर खड़ी खुद को पाती है, जहाँ उसे अपने लिए रास्ता चुनना है। या तो वो रास्ता जो उसे उसके अपनो से दूर कर देगा लेकिन सही होगा या फिर वो रास्ता जो उसे अपनों के करीब तो ले आएगा लेकिन अपने से दूर कर देगा। - [Shesh Panne](https://kitablelo.com/shesh-panne-by-anupama-naudiyal/): Shesh Panne - ‘शेष पन्ने’ अनुपमा नौडियाल की कहानियों का संग्रह है। यह आपके हमारे इर्द गिर्द मौजूद लोगों की कहानियाँ हैं। यहाँ टूटते पूर्वग्रह हैं, यहाँ ग्लानि से रिश्तों के बीच आती दूरियाँ हैं, गर्मी के दिनों में नाना-नानी के घर में बिताई छुट्टियों की यादें हैं और ऐसे जान-पहचान वालों और अजनबियों के किस्से हैं जो कि जान-पहचान और अजनबी होने की परिभाषा बदल देते हैं। - [Yaar Papa](https://kitablelo.com/yaar-papa/): Yaar Papa हारे हुए केस जीतना मनोज साल्वे की आदत ही नहीं शौक़ भी था। जब वह कोर्ट में दलील देने के लिए उठता तो जज भी अपनी कुर्सी पर पीठ सीधी करके बैठता। देश की लगभग सभी मैगज़ीन के कवर पर उसकी फ़ोटो आ चुकी थी। देश के सौ सबसे धारदार व्यक्तियों की सूची में उसका नाम पिछले दस साल से हिला नहीं था। देश का बड़े-से-बड़ा अभिनेता, नेता और बिज़नेसमैन सभी मनोज साल्वे के या तो दोस्त थे या होना चाहते थे। मनोज के बारे में कहा जाता था कि पिछले कुछ सालों में कोई भी उससे बड़ा वकील नहीं हुआ। ऐसे में जब लग रहा था कि मनोज के साथ कुछ ग़लत नहीं हो सकता है, ख़बर आती है कि मनोज की लॉ की डिग्री फ़ेक है। इस ख़बर को वह झुठला नहीं पाता। वो आदमी जो हर केस जीत सकता था, वह अपनी बेटी की नज़र में क्यों सबसे बुरा इंसान था? ऐसा क्या था कि उसकी बेटी साशा उससे बात नहीं कर रही थी? क्या मनोज अपनी पर्सनल लाइफ़, अपने करियर को फिर से पटरी पर ला पाएगा? - [Papaman](https://kitablelo.com/papaman/):  Papaman ‘पापामैन’ निखिल सचान की चौथी किताब है, जिसकी कहानी लोगों को इतनी पसंद आई कि किताब की रिलीज़ के पहले से ही इस कहानी पर फ़िल्म बनाने का काम शुरू हो चुका है। कहानी छुटकी और उसके पापामैन चंद्रप्रकाश गुप्ता की है, जो रेलवे में टिकट बनाते हैं। छुटकी IIT कानपुर में पढ़ती है, इनोवेटर है और आगे की पढ़ाई के लिए MIT, USA जाना चाहती है। वह बचपन से ही अतरंगी सपने देखती थी। उसे कभी एस्ट्रोनॉट बनना होता था, तो कभी br>मिस इंडिया तो कभी इंदिरा गाँधी। सब कुछ तो बन नहीं सकती थी, लेकिन चंद्रप्रकाश ने उसके सपनों को कभी बचकाना नहीं कहा। उन्होंने छुटकी को यह कभी नहीं बताया कि एक सपना ख़ुद चंद्रप्रकाश ने भी देखा था- बंबई जाकर सिंगर बनने का सपना, जिसे वह अपनी बेटी छुटकी के सपनों को पूरा करने की ज़िद में छिपा गए। चंद्रप्रकाश ने न जाने कितने लोगों को टिकट बनाकर रेल से अनके गंतव्य तक भेजा लेकिन अपने सपनों के शहर बंबई का टिकट कभी ख़ुद नहीं काट पाए। यह कहानी उन्हीं भूले-बिसरे सपनों को पूरा करने की कहानी है। यह कहानी एक पिता की है, एक पापामैन की है, जो अंदर से कोमल-सी माँ ही होते हैं, लेकिन पिता होने की ज़िम्मेदारी के चलते यह बात अपने बच्चों से छिपा जाते हैं। कहानी में कानपुर की ख़ालिस भौकाली है, कटियाबाजी और बकैती है, पिंटू और छुटकी की लवस्टोरी भी है। पिंटू it I में पढ़ता है लेकिन IIT में पढ़ने वाली छुटकी से प्यार कर बैठा है। उसका दोस्त अन्नू अवस्थी उसे कानपुर का रणवीर सिंह बताता है और अपने पिंटू भैया की लवस्टोरी को सफल मक़ाम तक पहुँचाना चाहता है।. - [Kotdwar : Dil Likhta Bhi Hai](https://kitablelo.com/kotdwar-dil-likhta-bhi-hai/): कोटद्वार पर लिखना कोटद्वार के अलावा, उस दौर पर लिखना भी था, जब ज़िंदा लोगों से ही नहीं निर्जीवों से भी गहरा रिश्ता हुआ करता था। जब सादगी थी, सड़कों के किनारे पेड़ हुआ करते थे। फल खरीदकर ही नहीं, पेड़ पर चोरी से चढ़ कर, पत्थर मारकर भी खा लिए जाते थे। रोज काफी लोगों से मिलना होता था। लोगों से उनके घर‌ के अंदर घंटों बातें हुआ करती थी, फिर घर की चौखट, ड्योढ़ी पर भी आधे घंटे और बातें हो जाया करती थीं। लड़कपन घर‌ के बाहर ही बीतता था। गर्मियों की छुट्टियाँ रिश्तेदारों के यहाँ कटती थीं, किसी हिल स्टेशन के होटल, रिसोर्ट में नहीं। फोटो खिंचवाते वक्त चेहरे पर असली भाव ही कायम रखते थे। न तो ज़िन्दगी में फ़िल्टर किया जाता था, और न ही फोटूओं में। - [Kshat Medini | क्षत मेदिनी](https://kitablelo.com/kshat-medini/): Kshat Medini | क्षत मेदिनी मैंने जब ज्योति की कहानियाँ पढ़ीं तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि ये कहानियाँ एक 28 साल की युवा लड़की की कलम से लिखी गई होंगी.. हर कहानी में बहुत गहराई और गंभीरता है.. एक और खास बात ये है कि ज्योति की हर कहानी में महिला जीवन की स्थितियों, परिस्थितियों, भावनाओं, विडंबनाओं, रिश्तों की उलझनों और उन्हें सुलझाने की कोशिशों का इतना भावपूर्ण और सजीव चित्रण है कि आप कहीं न कहीं किसी न किसी किरदार से जुड़ाव महसूस किए बिना नहीं रह पाएँगे... ~ऋचा अनिरुद्ध ( पत्रकार, एंकर ‘ज़िन्दगी विथ ऋचा’, फाउंडर ‘जमघट पाठशाला’) - [Main Hastakshar Hoon | मैं हस्ताक्षर हूँ](https://kitablelo.com/main-hastakshar-hoon/): विद्या गुप्ता की इन कहानियों में एक नयापन, एक ताजगी महसूस की जा सकती है। विषयों के चयन और उनके निर्वहन में उन्हें महारत हासिल है। अधिकतर कहानियाँ अनछुए पहलुओं पर लिखी गयी हैं। नारी मन की संवेदना एवं नारी जीवन में सहजता से प्रवेश कर जाने वाली विडंबनाएँ इन कहानियों का मुख्य स्वर है। ये कहानियाँ स्त्री जीवन के नए अध्याय खोल कर इस विमर्श को साहित्य में मजबूती से स्थापित करती हैं। - [Simsim । सिमसिम](https://kitablelo.com/simsim-geet-chaturvedi/): Simsim । सिमसिम 1947 के भारत-विभाजन के कारण बसरमल जेठाराम पुरस्वाणी नामक नौजवान की मातृभूमि सिंध, पाकिस्तान में ही छूट गई। और साथ ही छूट गई उसकी पहली मुहब्बत! उसे वापस पाने के लिए उसने अपने जीवन का सबसे ख़तरनाक दुस्साहस किया। एक दरवेश ने उससे कहा, “तुमने जो कुछ खोया है, वह तुम्हें किताबों में मिलेगा।” उसने मुंबई में एक लाइब्रेरी खोल ली। क्या उसे वे सब चीज़ें मिल पाईं? मुंबई का लैंड माफ़िया उसके पीछे पड़ा हुआ है। अपने घर वालों से परेशान एक नौजवान मैनेजमेंट छात्र उससे मित्रता करता है और एक काल्पनिक प्रेम-संबंध की रचना करता है। जाने कितने बरसों से चुप मंगण माँ एक गुड्डे को अपना बेटा समझ उसकी साज-संभाल करती है। एक बातूनी किताब की जिल्द इन सबके बीच आकर अपनी दारुण कथाएँ सुनाती है। इन सारे चरित्रों के बीच ‘सिमसिम’ नाम का एक दरवाज़ा है, जिसे खोलने का मंत्र किसी को नहीं पता। गीत चतुर्वेदी का यादगार उपन्यास ‘सिमसिम’ स्मृति, यथार्थ और कल्पना का एक मार्मिक आख्यान है। इसके अँग्रेज़ी अनुवाद को ‘पेन अमेरिका’ ने विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित ‘पेन/हैम ट्रांसलेशन ग्रांट अवार्ड’ किया है। - [Agyaatwaas । अज्ञातवास](https://kitablelo.com/agyaatwaas/): Agyaatwaas । अज्ञातवास जाने क्या आकर्षण था अथर्व में जो मंजुला जैसी सुदृढ़ और प्रखर युवती को अपनी ओर खींचे जा रहा था। शायद अथर्व से मिलकर मंजुला की तलाश मुकम्मल हो गई थी। पीली पड़ चुकी सफ़ेद प्यालियों में चाय की चुस्कियों के साथ, एक टपरीनुमा पार्टी ऑफ़ि‍स की छत तले मिस मंजुला गर्ग का प्यार परवान चढ़ता रहा। समाज के लिए एक आदर्श सोच रखने वाले अथर्व और उन्हें ज़मीनी स्तर पर पूरा करने का इरादा रखने वाली मंजुला का साथ परफेक्ट था। तभी तो आँख मूँद उसके पीछे-पीछे चल पड़ी थी वो। उसके सपने लड़कियों के आम सपनों से कुछ अलग थे। एक घिसी-पिटी परिपाटी में ही जीवन जी लेना मंजुला को स्वीकार्य नहीं था। अपने सुंदर, सुनहरे, सार्थक भविष्य की कल्पना में अथर्व को केंद्र मान चुकी थी, उसके हर कार्य में सहयोग करने और जी-जान लगा कर पूरा करने को ही जीवन का उद्देश्य बना लिया था मंजुला ने। भले ही उसे एक कठिन चुनाव करना पड़ा था, अपनी घनिष्ठतम स्वरा और अथर्व के बीच, पर उसने अथर्व का आदर्श साथ चुन लिया था। लेकिन कुदरत के भी संतुलन बनाए रखने के अपने अनोखे तरीक़े होते हैं। बरसों पहले की मंजुला और स्वरा में भी मानो रोल रिवर्सल हो गया था। अथर्व वर्मा, स्वरा श्रीवास्तव, डॉ अक्षय तथा सपनों और वास्तविकता के बीच एक सी-सॉ में बैठी मंजुला गर्ग की कहानी है अज्ञातवास।. - [Bangla Adventure for Teens: Three Novels Combo](https://kitablelo.com/bangla-adventure-for-teens-three-novels-combo/): Bangla Adventure for Teens: Three Novels Combo बिभूति भूषण बंदोपाध्याय द्वारा रचित तीन रोमांचक बांग्ला उपन्यासों का कॉम्बो है जिनका अनुवाद सुप्रसिद्ध अनुवादक जयदीप शेखर ने किया है। चाँद का पहाड़ सुंदरबन में सात साल वीरान टापू का खज़ाना - [Veeraan Tapu Ka Khazana | वीरान टापू का खज़ाना](https://kitablelo.com/veeraan-tapu-ka-khazana/): Veeraan Tapu Ka Khazana | वीरान टापू का खज़ाना - 1946 में प्रकाशित 'हीरे माणिक जले' का हिन्दी अनुवाद है। मुस्तफी वंश में काम करना बेइज्जती की बात मानी जाती थी। वह जमींदार जो होते थे। पर सुशील काम करना चाहता था। जब गाँव में उसे काम नहीं मिला, तो वो डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए कोलकाता आ गया। और यहाँ उसकी मुलाकात हुई एक खलासी जमातुल्ला से जिसने उसे एक मणि और एक टापू की ऐसी दास्तान सुनाई। जमातुल्ला की मानें तो उस टापू में ऐसा खजाना था जो किसी को भी अमीर... बहुत अमीर बना सकता था। पर वहाँ जाना इतना आसान न था। यह सुन सुशील अपने ममेरे भाई सनत और जमातुल्ला के साथ उस खजाने की खोज पर जाने को लालायित हो गया। पर उस खजाने तक पहुँचना आसान न था। उन्हें न केवल खतरनाक समुद्री यात्रा करनी थी, बल्कि ऐसे जलदस्युओं से भी खुद को बचाना था, जो खजाने की भनक पाकर उन्हें मार डालने में जरा भी नहीं हिचकिचाते। आखिर कैसी रही सुशील, सनत और जमातुल्ला की यात्रा? इस यात्रा पर उनके सामने क्या क्या मुसीबतें आईं? क्या उन्हें मिल पाया वीरान टापू का खजाना? खज़ाने की तलाश की यह कहानी रोमांचक होने के साथ-साथ मानवीय स्वभाव और सौहार्द की अनूठी दास्तान है। - [Chakravyuh by Nitish Sinha](https://kitablelo.com/chakravyuh-by-nitish-sinha/): विजय-अलफाँसे सीरीज - [Mahabharata Trilogy Box Set](https://kitablelo.com/mahabharata-trilogy-box-set/): Box Set of Mahabharata Trilogy- An Intense Thriller written by Santosh Pathak Mrigtrishna Chakravyooh Kurukshetra - [Kurukshetra-Mahabharata Trilogy-3](https://kitablelo.com/kurukshetra-mahabharata-trilogy-3/): युद्ध आरंभ हो चुका था, घात-प्रतिघात का खेल जोरों पर था। कुछ चेहरों से नकाब उतर चुके थे, तो कुछ के मुखौटे हटने अभी बाकी थे। एक तरफ एनआईए और आईबी जैसी एजेंसियाँ दुश्मन को नेस्तनाबूद करने की कवायद में जुटी हुई थीं, तो दूसरी तरफ विशाल, सतपाल, संजना और अवनी कमर कस के मैदान में कूद पड़े थे। बस किसी को ये नहीं मालूम था कि उनका मुकाबला किसके साथ चल रहा था। ऐसे में दुश्मन पर जीत हासिल कर पाना असंभव की हद तक कठिन काम बनकर रह गया.... महाभारत शृंखला की तीसरी और अंतिम कड़ी ‘कुरुक्षेत्र’ - [Chakravyooh-Mahabharata Trilogy-2](https://kitablelo.com/chakravyooh-mahabharata-trilogy-2/): हालात बद से बद्तर होते जा रहे थे। अपराधियों का हर कदम कामयाबी की नई गाथा लिख रहा था, तो वहीं सुरक्षा एजेंसियाँ निरंतर हार का मुँह देख रही थीं। पनौती और सतपाल उन दो पाटों के बीच पिस रहे थे। षड़्यंत्रकारी उनकी लाश गिराने को दृढ़संकल्पित थे तो एनआईए उनपर यकीन करने को तैयार नहीं थी। पनौती मामले की तह तक पहुँचने की जिद पकड़े बैठा था तो सतपाल किसी भी हाल में उसका साथ नहीं छोड़ना चाहता था। मगर उनकी राह आसान तो बिल्कुल भी नहीं थी, क्योंकि इस बार उन्हें किसी कातिल को नहीं खोजना था, बल्कि मुकाबला ऐसे लोगों से था जो देश के पीएम और प्रेसिडेंट को खत्म करने की धमकी जारी कर चुके थे। बात वहाँ तक भी सीमित रह जाती तो शायद दोनों के लिए कुछ कर गुजरना आसान हो जाता, मगर दुश्मन के चक्रव्यूह को बेध पाना उस वक्त मुश्किल हो उठा जब उसने संजना को अपना मोहरा बना लिया। फिर हालात ने कुछ ऐसी करवट बदली कि उन तीनों के साथ-साथ अवनी को भी उस दावानल में कूद जाना पड़ा, जो सबकुछ जलाकर भस्म कर देने वाली थी। अब या तो चारों मिलकर दुश्मन के चक्रव्यूह को तोड़ने में कामयाब हो जाते, या उसमें फँसकर अपनी जान गवाँ बैठते, क्योंकि मरो या मारो के अलावा उनके पास और कोई रास्ता नहीं बचा था। - [Mrigtrishna- Mahabharata Trilogy-1](https://kitablelo.com/mrigtrishna-mahabharata-trilogy-1/): देश पर आतंकी हमले का खतरा मंडरा रहा था। अलकायदा कमांडर सैफ अल अदल ने खुलेआम ये धमकी जारी की थी कि वह हिंदुस्तान की सड़कों को लाशों से पाट देगा। उसके निशाने पर देश की आम जनता तो थी ही, साथ ही वह कई दिग्गज नेताओं, पीएम और यहाँ तक कि प्रेसिडेंट को खत्म करने के मंसूबे बांधे बैठा था। मगर क्या वह सब उतना ही आसान था जितना कि किसी न्यूज चैनल को एक धमकी भरी वीडियो भेज देना? यह एक ऐसा मामला था, जिसका लोकल पुलिस से कोई लेना-देना नहीं था, क्योंकि एनआईए और आईबी जैसी एजेंसियाँ दुश्मन को नेस्तनाबूद करने के लिए कमर कस के मैदान में उतर चुकी थीं, बावजूद इसके पनौती की टाँग उसमें जा फँसी तो उसकी वजह बस इतनी थी कि वह और संजना सतपाल के बुलावे पर एक ऐसे समारोह में शिरकत करने पहुँच गये, जहाँ हमलावर पहले से अपना जाल बिछाये बैठे थे। - [Patang Udati Ladki](https://kitablelo.com/patang-udati-ladki/): एक स्त्री जब कविता लिखती है, तो वह मन की कविताएं लिखती है। मन की कविताएं, जहां उत्साह होता है, उमंग होती है और होती है, संप्रेषणीयता। ऐसी संप्रेषण जो अनायास सुनने वालों को, पढ़ने वालों को उस दुनिया में ले जाता है, जहां पर वह कविता संवेदना के साथ ठहरी हुई होती है, पाठको को बुलाती हुई। कंचन भारद्वाज की कविताएं ऐसी ही कविताएं हैं, जो दुनिया की बातें करती हुई इन बातों के बीच से ही दुनियादारी की बातें भी समझा जाती हैं। कविताओं में भी वे साहस को कहीं पीछे नहीं छूटने देतीं। स्त्री के नजरिए से बसंत को पढ़ना अद्भुत अनुभव देता है। बोलते हुए शब्दों का वसंत और कोरे कागज को कविता का प्रयोग बताता है कि कंचन की कविताओं में कल्पना का अतिरेक नहीं बल्कि उस आशय को पकड़ने की एकदम सटीक कोशिश है, जिसके लिए वह अतिरिक्त मेहनत भी नहीं करतीं। - आकांक्षा पारे (कथाकार) - [Koroya Phool](https://kitablelo.com/koroya-phool/): Koroya Phool : आज आदिवासी संस्कृति विलुप्त होने के कगार पर पहुँच गयी है। मुरिया जनजाति की घोटुल संस्कृति से लेकर उराँव जनजाति की अखड़ा संस्कृति तक सब विलुप्त हो रही है लिये मुख्य रूप से हम कथित सभ्य समाज के लोग ही जिम्मेदार हैं। इस पुस्तक में एक संस्मरण संस्मरण 'गोंगो' के नाम से है। वास्तव में कथित समाज ही वह लुटेरा गोंगो है, जो कभी नमक के व्यापारी के रूप में आदिवासियों से उनकी बेशकीमती चिरोंजी ले लेता है तो कभी आदिवासी क्षेत्रों में घुसपैठ कर चुके छोटे व्यवसायी के रूप में बसे लुटेरे। ये तो जोंक की भाँति लगातार खून चूस रहे हैं। आदिवासियों को सबसे अधिक खतरा तो उन उद्योगपतियों से है, जो कि उनके जल, जंगल और जमीन को हड़पने की नीयत से घुस जाते हैं। वे मुआवजे का लालच देकर आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल करने का प्रयास करते हैं। इस वजह से आदिवासी रूपी कोरोया फूल को अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़नी पड़ रही है। - [Hajara Aur Pitara Ke Mazedar Kisse](https://kitablelo.com/hajara-aur-pitara-ke-mazedar-kisse/): खजानपुर में ऐसा कौन है जो हजारा पिटारा को नहीं जानता। दोनों जिगरी दोस्त हैं और सबकी मदद को हमेशा तैयार रहते हैं। इनके पास हर मुसीबत को सुलझाने का तरीका है। किसी को कोई समस्या आयी तो उसे सुलझाने में पूरी जान लगा देते हैं। इस दौरान कई मजेदार हादसे भी इनके साथ हो जाते हैं। ‘हजारा पिटारा के मजेदार किस्से’ (Hajare Pitara Ke Mazedar Kisse) में लेखक डॉक्टर मोहम्मद अरशद खान (Dr. Mohammad Arshad Khan) इनके ऐसे ही पंद्रह किस्से लेकर प्रस्तुत हुए हैं जो आपके चेहरे पर मुस्कान ले आएँगे। - [Mister and Missus Dhurandhar](https://kitablelo.com/mister-and-missus-dhurandhar/): Mister and Missus Dhurandhar वह न्याय का रक्षक था, लेकिन अब अपराध की दुनिया का मोहरा बन चुका है। गोकुल—एक ईमानदार अफसर, जिसने अपनी ज़िंदगी अपराध के खात्मे के लिए समर्पित कर दी। लेकिन नियति का खेल देखिए, आज वह उसी शख्स का दामाद है, जिसे मिटाने की उसने कसम खाई थी! गुंजन—उसकी रहस्यमयी पत्नी। एक ऐसा बंधन, जिसे उसने कभी अपनाया नहीं, लेकिन अब वही उसके जमीर और जिगर के बीच एक अंतर्द्वंद्व बन चुकी है। पर असली खेल तो अब शुरू हुआ है। गुंजन की ख़ामोशी में एक ऐसा राज़ दफ्न है, जिसकी परछाइयाँ पूरे ड्रग साम्राज्य को निगल सकती हैं। क्या गोकुल इस मकड़जाल से बाहर निकल पाएगा, या यह खौफनाक साजिश उसे ही लील जाएगी? पढ़ें धुरंधर: सनक शिरोमणि का दूसरा भाग मिस्टर एण्ड मिसेज धुरंधर। - [Tafteesh](https://kitablelo.com/tafteesh-james-hadley-chase/): वैलेरी बर्नेट एक धनकुबेर की बेटी थी। उसने क्रिस बर्नेट से विवाह किया था जिस पर वह जान छिड़कती थी। मगर एक दुर्घटना ने उन दोनों का जीवन बदल दिया। दुर्घटना में क्रिस के सिर में लगी चोट ने उसे मानसिक रूप से अस्थिर कर दिया। फिर एक दिन वह चौबीस घंटों के लिए गायब हो गया। उसी दौरान एक होटल में एक युवती की नृशंस तरीके से हत्या हो जाती है। क्या उस हत्या से क्रिस का कोई संबंध था? या फिर वह केवल परिस्थितियों का शिकार था? क्या वैलेरी अपने पति के लिए कुछ कर पाई? क्या वाकई क्रिस निर्दोष था? विश्व प्रसिद्ध अपराध कथा लेखक जेम्स हेडली चेज़ (James Hadley Chase) के फ्रेंक टेरेल सीरीज़ के प्रथम एवं प्रसिद्ध उपन्यास ‘THE SOFT CENTRE’ का मूल ‘Corgi Edition’ से अविकल अनुवाद। - [The Burned Identity (Vikrant Gokhle Book 14)](https://kitablelo.com/the-burned-identity-vikrant-gokhle-book-14/): एडवोकेट आंनद सलूजा पांच दिनों बाद पटना से दिल्ली वापिस लौटा तो उसकी दुनिया बदल चुकी थी, बल्कि उजड़ चुकी थी। ये जानकर तो उसके पैरों तले जमीन ही खिसक गयी कि उसकी लाश का पोस्टमॉर्टम तक कराया जा चुका था। प्रत्यक्षतः उस मामले से मेरा कोई लेना देना नहीं था क्योंकि मेरी क्लाइंट अंतरा नाम की एक महिला थी जिसका पति शरद कपूर दस दिनों से गायब था, ना कि एडवोकेट आनंद सलूजा। मगर जल्दी ही मुझे दोनों मामले आपस में कनैक्टेड दिखाई देने लगे क्योंकि शरद कपूर और आनंद सलूजा ना सिर्फ एक ही पेशे में थे, बल्कि दोनों के बीच गहरी दोस्ती भी थी। पढ़ें संतोष पाठक का लिखा ताज़ा तरीन उपन्यास द बर्नड आइडेंटिटी (The Burned Identity)। - [Jasoos Babban Bihari](https://kitablelo.com/jasoos-babban-bihari/): जासूस बब्बन बिहारी का पहला कारनामा - [65 Lakh Ki Dakaiti](https://kitablelo.com/65-lakh-ki-dakaiti/): 65 Lakh Ki Dakaiti सात राज्यों में घोषित इश्तिहारी मुजरिम, फिर भी दुर-दुर करती ज़िंदगी! कई डकैतियों के लिए जिम्मेदार, फिर भी गुनाह के अंधड़ में खूँटे से उखड़ा! कई हत्याओं के लिए जिम्मेदार नृशंस हत्यारा, फिर भी खुद अपनी सलामती के लिए पनाह माँगता! अपनी सैलाब जैसी ज़िंदगी में ठहराव तलाशता ऐसा शख्स सृष्टि में एक ही हो सकता है: सरदार सुरेन्द्र सिंह सोहल उर्फ विमल पैंसठ लाख की डकैती विमल सीरीज का सदाबहार उपन्यास - [Tarai](https://kitablelo.com/tarai/): तराई- हमेशा पानी से भरे नदी -नौखान, पहाड़ी नालों से उफनती जल की धारा इस भूमि को सदा ही नम और उर्वर बनाये रखती है। खेतों में तीन फसलों का चक्र, नदी, नौखान और पहाड़ी नालों में इफरात मछलियाँ और जंगल की अथाह वन सम्पदा इस क्ष्रेत्र की थाती है। तराई में सभी के घर दो जून का चूल्हा जलने का जतन कुदरत कर ही देती है। तराई का यह हरा -भरा क्षेत्र थोड़ा सा गरीब तो माना जा सकता है मगर दरिद्र नहीं। नदी और जंगल सब कुछ देते हैं पर किसी का लालच तो पूरा नहीं कर सकते। जंगल की लकड़ी और नदी की बालू अब सरकार के हैं। सरकार के यानी सभी के और पूरी तरह किसी के नहीं। तराई की भूमि पर लिखना मेरे लिए एक ऋण था, क्योंकि सैंकड़ो साल पहले मेरे पूर्वजों ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए गुजरात के पाटन क्षेत्र से जब पलायन किया था तब उन्हे तराई की भूमि ने ही आसरा दिया था। मैंने तराई का अन्न -जल खाया -पिया तो उस पर लिखना लाजिमी था। इस उपन्यास के परिवेश और संसाधन भी इसके किरदार हैं और जिसमें सबसे प्रमुख है बालू। नदी की बालू का असीमित दोहन और इंसान के असीमित लालच से पैदा हुई हैं टकराव से रची -गुंथी तराई के किस्से और कहानियाँ। - [Aye Zindagi](https://kitablelo.com/aye-zindagi/): Aye Zindagi कहते हैं, ज़िंदगी तब सबसे दिलचस्प होती है जब वो आपकी सोच से कुछ अलग ही हो  , और यही हुआ तुहिना, उर्फ़ तनु के साथ। पढ़ी-लिखी, सधी-संभली, लेकिन अपने ही रंग-रूप को लेकर हमेशा झुंझलाने वाली तनु को सजना-सँवरना बोरियत लगता है। उसे पसंद है किताबों की खुशबू, बाइक की रफ्तार और बहस का रोमांच ! लेकिन जब उसकी ज़िंदगी में आता है अग्नि, एक सीधा-सादा सब्ज़ी वाला , तब सब कुछ गड़बड़ा जाता है .... या फिर सब सही हो जाता है  । “ऐ ज़िंदगी”  एक ताज़ा, मुस्कुराहट भरी कहानी खुद तनु कि जुबानी , जहाँ प्यार न तो फिल्मों जैसा है, न परियों जैसा, बस थोड़ा अनोखा, थोड़ा हक़ीक़त जैसा। - [Ek Hi Anjaam](https://kitablelo.com/ek-hi-anjaam/): शिवालिक इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर हरीभाई शाह पर बद्इन्तजामी और निजी स्वार्थों के लिये की गयी हेराफेरियों के दर्जनों इल्जाम थे। जो मुनाफा शिवालिक के कर्मचारियों में बँटना चाहिये था, उसे सीएमडी के होते-सोते दोनों हाथों से उड़ा रहे थे। लेकिन धोखेबाज, बेईमान, मतलबपरस्त आदमी का एक ही अंजाम होता है । क्या वो तानाशाह सीएमडी भी उसी अंजाम को पहुँचा! - [Rajan Iqbal Reborn Horror Series: Haunted Hotel](https://kitablelo.com/rajan-iqbal-haunted-hotel/): राजन इकबाल रिबोर्न हॉरर शृंखला.. जब शहर के एक नामी होटल के कमरे में युवा बिजनसमैन यश मेहता की लाश चेहरे पर अजीबोगरीब मुस्कान के साथ मिलती है तो सवाल उठता है: क्या यह किसी आत्मा का प्रकोप है या फिर कोई रची गई साजिश? होटल का कमरा नंबर 108 कुछ ऐसा था जहाँ पिछले बीस सालों में यह चौथी मौत थी। पिछली सभी मौत खुदखुशी के केस थे। जब राजन इकबाल इस केस की तह तक जाने की कोशिश करते हैं तो रहस्य की कई परतें खुलती हैं, सामने आते हैं झूठ, फरेब और छुपे हुए रिश्तों के राज़। हर सुराग किसी नई दिशा की ओर इशारा करता है, लेकिन सच तक पहुँचना आसान नहीं था । क्या यश की मौत वाकई किसी परालौकिक शक्ति का काम था, या इंसानी लालच और धोखे की कहानी? “हॉन्टेड होटल” एक रोमांचक हॉरर थ्रिलर है, जहाँ डर, रहस्य और साजिश एक-दूसरे से टकराते हैं–और अंत तक आते-आते, हर पाठक को चौंका देते हैं। - [Ek Sees Ka Manava Hard Bound](https://kitablelo.com/ek-sees-ka-manava-hb/): Ek Sees Ka Manava हार्डबाउन्ड संस्करण बाग-ए-बहिश्त से हुक्म-ए-सफर दिया था क्यों, कार-ए-जहाँ दराज है, अब मेरा इंतजार कर; रोज-ए-हिसाब जब मेरा पेश हो दफ़्तर-ए-अलम, आप भी शर्मसार हो, मुझ को भी शर्मसार कर। एक सीस का मानवा टॉप मिस्ट्री राइटर सुरेन्द्र मोहन पाठक की आत्मकथा का पांचवाँ और अंतिम खंड। लेखक की आत्मकथा के पूर्वप्रकाशित चार खंडों की जो पठनीयता स्थापित है, वो अब अपने चरम पर। साहित्य विमर्श प्रकाशन की संग्रहणीय प्रस्तुति - [Jadugar Aur Lalachi Shikari](https://kitablelo.com/jadugar-aur-lalachi-shikari/): Jadugar Aur Lalachi Shikari जंगल में शिकार करने गये दो शिकारी मित्रों रमेश और तिलक ने जादूगर रमानाथ को जादू के करतब करते देखा तो उनकी बाँछें खिल उठीं। उन्होंने तय कर किया कि वह कैसे भी करके जादूगर से जादुई चीज़ें हासिल करके रहेंगे। ऐसी जादुई चीज़ें जिनसे वो उस दौलत को पा लेंगे जिसकी हमेशा से उन्हें चाहत थी। क्या वो लालची शिकारी जादूगर से कोई जादुई चीज़ हासिल कर पाये? उनके लालच का क्या परिणाम निकला? - [Ishita Ki Soojhboojh](https://kitablelo.com/ishita-ki-soojhboojh/): Ishita Ki Soojhboojh - इशिता के दो ही शौक थे। घूमना और पढ़ना। आज वो बहुत खुश थी क्योंकि आज उसे अपने दोनों ही शौक पूरा करने का मौका मिलने वाला था। मामा के घर घूमने जाना और साथ ही, मेट्रो में किताब पढ़ना। पर वह कहाँ जानती थी कि आज का सफर कुछ अलग सा होने वाला था। कैसा रहा इशिता का ये सफर? जानने के लिए पढ़ें इशिता की सूझबूझ। - [Betiyan Sooraj Ki](https://kitablelo.com/betiyan-sooraj-ki/): Betiyan Sooraj Ki इस किताब में कुल पंद्रह कहानियाँ हैं जिनमें एक कहानी ‘बेटियाँ सूरज की’ है। कुल पंद्रह कहानियाँ हैं। हर कहानी दूसरे परिवेश से मिलवाती है। मनोरंजन करती है। बेहतर जीवन जीने की सलाह देती है। कहानियाँ चहकाती हैं। ऊर्जा से भर देती हैं। कहानियों का ताना-बाना ऐसा बुना है कि पढ़ते-पढ़ते सायास ही सकारात्मक नज़रिया साथ चलने लगता है। यह कहानियाँ निराशा और उदासी से बचाती हैं। कहानियाँ बोझिल नहीं लगती। कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि पढ़ने के लिए लिखी हैं। पढ़ते-पढ़ते लगता है कि आनंद के साथ जीने के लिए लिखी हैं। हर कहानी दूसरे परिवेश से मिलवाती है। मनोरंजन करती है। बेहतर जीवन जीने की सलाह देती है। कहानियाँ चहकाती हैं। ऊर्जा से भर देती हैं। कहानियों का ताना-बाना ऐसा बुना है कि पढ़ते-पढ़ते सायास ही सकारात्मक नज़रिया साथ चलने लगता है। यह कहानियाँ निराशा और उदासी से बचाती हैं। कहानियाँ बोझिल नहीं लगती। कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि पढ़ने के लिए लिखी हैं। पढ़ते-पढ़ते लगता है कि आनंद के साथ जीने के लिए लिखी हैं। - [Amarkant: Jeevan Aur Sahitya](https://kitablelo.com/amarkant-jeevan-aur-sahitya/): Amarkant: Jeevan Aur Sahitya | अमरकांत: जीवन और साहित्य अमरकांत का लेखन पाठक के समक्ष ज़िंदगी का बेलौस चित्र प्रस्तुत करता है पर, हिंदी साहित्यिक समाज द्वारा अभी भी उनको ढंग से समझा नहीं गया है। 'अमरकांत: जीवन और साहित्य' के प्रकाशन के पीछे उद्देश्य यही रहा है कि अमरकांत को सलीके से समझा जा सके। यह समझना केवल उनके साहित्य तक ही सीमित न रहे बल्कि उनके व्यक्तित्व के उन पहलुओं का भी हो जो अमरकांत को अमरकांत बनाते थे। इसीलिये इस पुस्तक में आलोचकों, लेखकों के अमरकांत पर लिखे लेखों के अलावा उनसे समय-समय पर लिये गए कुछ महत्वपूर्ण साक्षात्कार, उनसे जुड़े कुछ व्यक्तिगत संस्मरण और उनकी कुछ चर्चित कहानियों तथा उपन्यासों की समीक्षाओं समावेश किया गया है। उम्मीद है इससे जहाँ पाठकों को अमरकांत को सम्पूर्णता में समझने में मदद मिलेगी, वहीं उन पर शोध करने वाले छात्रों को भी सुविधा होगी। - [Phir Wahi Khauf](https://kitablelo.com/phir-wahi-khauf/): राजमहल के रहस्यमयी तहखाने में एक इतिहास सो रहा था लेकिन जब संस्कृति के पाँव वहाँ पड़े तो उस इतिहास के धरातल पर जमी वक्त के धूल की परतें यूँ हवा में उडीं कि वर्तमान के पटल पर दहशत का धुंधलका छा गया। - [The Last Hunt](https://kitablelo.com/the-last-hunt-santosh-pathak/): साउथ दिल्ली के संगम विहार इलाके में रहते चार दोस्तों में से तीन ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी, चौथे का गला काट दिया गया। चारों ने कथित तौर पर एक ही शख्स दिलबाग सिंह को कर्जा दिया था जो वापिस नहीं लौटा रहा था। तीन के सुसाईड नोट में ये बात दर्ज थी कि दिलबाग सिंह से तंग आकर अपनी जान दे रहे थे, जो कि पुलिस के लिए बहुत हैरानी की बात थी। उनका दिमाग कह रहा था कि चारों कत्ल के मामले थे, मगर कत्ल को कत्ल साबित करने लायक कोई एविडेंस उनके हाथ नहीं लगे थे। हत्यारा आजाद घूम रहा था और पुलिस रेत में मछलियां पकड़ रही थी। फिर अचानक ही एक ऐसी जानकारी उनके हाथ लगी जिसने केस का रुख ही बदलकर रख दिया। - [Vidhwansak](https://kitablelo.com/vidhwansak-by-santosh-pathak/): चार लड़कियों को फिल्मों में काम देने का झांसा देकर पटना से मुंबई पहुंचा दिया गया। चारों ही बेहद मामूली लड़कियां थीं इसलिए उनके गायब होने पर कोई बड़ा हंगामा होने की जरा भी आशंका नहीं थी। मगर हंगामा बरप कर रहा क्योंकि उनमें से एक का भाई जयशंकर शुक्ला फौजी था, ऐसा फौजी जिसे उसके साथी सनकी समझते थे। मुकाबला एक और सौ के बीच का था, मगर उन सौ लोगों के लिए शुक्ला विध्वंसक बन गया। ऐसा विध्वंसक जिसने उनकी सल्तनत को पूरी तरह बर्बाद कर दिया, मगर बहन के साथ घटित हुई घटना के सच से वह अभी भी कोसों दूर था। वह भटक रहा था, तड़प रहा था, मारा मारा फिर रहा था ये जानने के लिए कि उसकी बहन के साथ क्या हुआ था। फिर सामने आया एक ऐसा सच जिसने शुक्ला के साथ-साथ पुलिस के भी होश उड़ाकर रख दिये। - [Raktchakra: Raktdharaon Ka Shaap](https://kitablelo.com/raktchakra-raktdharaon-ka-shaap-abhinav-jain/): एक शापित खंजर… एक जागती आत्मा… और समय से परे चलता एक चक्र। लगभग 2500 वर्ष पहले, एक प्राचीन साम्राज्य में, प्रतिशोध और अहंकार की ज्वाला में सुलगती एक रानी ने अपनी अनियंत्रित महत्वाकांक्षाओं को एक भयावह रूप दे दिया। एक रहस्यमयी, प्राचीन खंजर के माध्यम से उसने उस रक्तचक्र की शुरुआत की, जिसने समस्त संसार को रक्तरंजित कर दिया। समय के साथ उसकी क्रूरता और शक्ति की कहानियाँ किंवदंतियाँ बन गईं, लेकिन वह खंजर और उससे जुड़ा अभिशाप अब भी एक अंधेरे में छिपा, जीवित है। आज, सदियों बाद, चित्रा और उसके मित्र एक रहस्यमयी खंडहर की खोज में अनजाने ही उस खंजर के शापित इतिहास के निकट पहुँच जाते हैं—जिससे जुड़ी है एक राजकुमार की रक्तशपथ, जिसने रानी की आत्मा को युगों से कैद कर रखा है। अब एक बार फिर चक्र सक्रिय हो रहा है। क्या यह रक्तचक्र फिर से संसार को निगलेगा? या इस बार कोई इसे तोड़ पाएगा? यह एक ऐसी कहानी है जो रहस्य, साहस और शाश्वत अंधकार को छूती है—जो समय की सीमाओं से परे आज भी धड़कता है। क्या आप तैयार हैं इस रक्तचक्र में प्रवेश करने के लिए? - [Khatak](https://kitablelo.com/khatak/): कहते हैं, हर पुरानी इमारत की एक कहानी होती है, उसकी भी थी। दुनिया से लड़कर एक हुए अमन और परी की नई दुनिया इतनी भयानक होगी, किसी ने सोचा भी नहीं था। ब्रिटिश काल के बंगले में आती खटक, निर्माण दोष की वजह से थी या किसी समस्या की आहट...? अच्छा होता अगर वक़्त रहते वे समझ पाते। हवस से भरी उस आत्मा का निशाना कौन है, अमन, परी, प्रोफेसर, एलेन या श्यामा? क्या करेंगे अगर आपका प्यार, आपके ही सामने किसी की वहशीपन का शिकार होने लगे, लेकिन न तो आप उसे देख सकें न रोक सकें? कौन है वह प्रेत? खटक का क्या है रहस्य? क्या है डेरादून से देहरादून का सफर? पढ़िए इस साल की सबसे खौफनाक कहानी... खटक! - [Bijli Ka Hunter](https://kitablelo.com/bijli-ka-hunter/): Bijli Ka Hunter बिजली का हंटर' एक रहस्यपूर्ण और एक्शन से भरपूर जासूसी उपन्यास है जिसमें भारतीय गुप्तचर संस्था स्वीप का निडर जासूस भोला शंकर एक खतरनाक गैंग से भिड़ता है जो आधुनिक वैज्ञानिक हथियारों और बिजली जैसी शक्ति वाले उपकरणों से अपराध करता है। इस गैंग की मुखिया एक रहस्यमयी महिला "बिजली' है, जिसके पास असाधारण ताकत है। कहानी में रोमांचक पीछा, चतुर चालें, और हैरतअंगेज घटनाएँ हैं। अंततः भोला शंकर अपने साहस और बुद्धिमत्ता से अपराधियों को मात देकर देश को विनाश से बचाता है - [Goli Aur Dhuan](https://kitablelo.com/goli-aur-dhuan/): Goli Aur Dhuan "गोली और धुआँ" 'भोला शंकर सीरीज़' का एक शानदार जासूसी उपन्यास है। कहानी बंबई के परमाणु अनुसंधान केंद्र से शुरू होती है, जहाँ रहस्यमय ढंग से वैज्ञानिक गायब हो रहे हैं। इसी बीच जीनियस वैज्ञानिक डॉ. गोली और उनकी सहायक नीता का अपहरण हो जाता है। केस सुलझाने का जिम्मा मिलता है जासूस भोला शंकर को, जो अपराध, विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय साज़िश के जाल में फँस जाता है। उपन्यास में वैज्ञानिक रहस्य, एक्शन, रोमांच और देशभक्ति का सुंदर मेल है, जो पाठक को अंत तक बाँधे रखता है - [Jaali Taksal](https://kitablelo.com/jaali-taksal-by-chandar/): Jaali Taksal "जाली टकसाल" एक रोमांचक जासूसी उपन्यास है, जिसमें भारत के सर्वश्रेष्ठ जासूस भोला शंकर और उसकी साथी सुभिता नकली नोटों के रहस्यमय गिरोह का पर्दाफाश करते हैं। एक मामूली दिखने वाली घटना से शुरू होकर कहानी धीरे-धीरे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र तक पहुँचती है, जिसमें जाली नोटों की तस्करी, गुप्त संस्थाएँ और खतरनाक अपराधी शामिल हैं। तेज़ घटनाक्रम, रहस्य और हास्य से भरपूर यह उपन्यास भारतीय समाज में फैल रहे आर्थिक अपराधों पर तीखा प्रहार करता है और अंत में देशभक्ति और सत्य की विजय को स्थापित करता है - [Aazad Qaidi](https://kitablelo.com/aazad-qaidi/): Aazad Qaidi अपने पैतृक गाँव में रिटायरमेंट की जिंदगी गुजार रहा जीवन सिंह, लोगों की नजर में एक देवता इंसान था, जिसका कोई दुश्मन नहीं था। लेकिन, बंद हवेली में जब उसकी लाश पाई गई तो घर में मौजूद सभी सदस्य शक के घेरे में आ गए। प्राइवेट इन्वेस्टिगेटर अक्षय जब इस केस की जाँच शुरू करता है तो उसे पता चलता है कि घर के सभी सदस्यों के पास जीवन सिंह की हत्या का कोई न कोई उद्देश्य ज़रूर था... एक साधारण सा दिखने वाला केस, जो हर गवाह के बयान के बाद उलझता चला गया। - [Pani Kera Budbuda](https://kitablelo.com/pani-kera-budbuda/): Pani Kera Budbuda | पानी केरा बुदबुदा टॉप मिस्ट्री राइटर सुरेन्द्र मोहन पाठक की आत्मकथा का चौथा खंड उपन्यास से ज्यादा रोचक। हर वाकया जैसे आपकी अपनी आपबीती। लुगदी पॉकेट बुक्स के विलुप्त व्यवसाय के कई स्याह सफेद वाकये। लेखक के उस दौर के पाठकों से आपका सीधा डायलॉग। ये खंड पढ़ते वक्त लेखक कभी आप को सुनील लगेगा, कभी सुधीर लगेगा तो कभी विमल लगेगा। एक अद्भुत अहसास। आदि से अंत तक रोचक आत्मकथा खंड–4 साहित्य विमर्श प्रकाशन की संग्रहणीय प्रस्तुति सितारों से आगे जहाँ और भी हैं, अभी इश्क के इम्तिहाँ और भी हैं; तू शाहीन है परवाज़ है काम तेरा, तिरे सामने आसमाँ और भी हैं। - [Koi Laut Aaya](https://kitablelo.com/koi-laut-aaya-chandraprakash-pandey/): नवलगढ़ से गायब हुए दर्जन भर बच्चों को लेकर एक अफवाह थी कि वे तब गायब हुए थे, जब उनके इलाके में किसी रुदाली का रोना सुनाई दिया था, मगर पुलिस जब उस अफवाह की सच्चाई और बच्चों की गुमशुदगी का रहस्य तलाशने निकली तो सालों पुराना वह वाकया बेनकाब हो गया, जो सभ्य होने का दावा करने वाले समाज के मुँह पर एक करारा तमाचा था।” - [Ghungroo](https://kitablelo.com/ghungroo/): घुंघरू अलौकिक रहस्यों और डरावनी सच्चाइयों का ऐसा संग्रह है, जो पाठकों को साधारण जीवन से उठाकर भय और रोमांच की गहराइयों में ले जाता है। लेखक संजीव जायसवाल ‘संजय’ ने हर कहानी में यथार्थ और कल्पना की सीमाओं को तोड़ते हुए पाठकों को सिहरन और रहस्य से भरी एक अनोखी दुनिया में पहुँचाया है। कभी आत्माओं और प्रतिशोध की दास्तान, कभी पायल की झंकार से गूँजता अलौकिक भय, तो कभी प्रेम और त्याग की मार्मिक झलक—हर कथा अपने भीतर एक अनदेखा रहस्य छुपाए हुए है। यह किताब केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि एक रोमांचक अनुभव है—जहाँ दिल दहलाने वाला […] - [Maut Ke Baad](https://kitablelo.com/maut-ke-baad-chandraprakash-pandey/): चौदहवीं शताब्दी की शुरूआत में वेटिकन सिटी स्थित ‘रोमन कैथोलिक चर्च’ के तत्कालीन पादरी और कैथोलिक सम्प्रदाय के सबसे बड़े मुखिया पोप ‘जॉन अष्टम’ की उस शाम जहर देकर हत्या कर दी गयी, जिस शाम उन्होंने बाइबिल के उस अध्याय को बदलने का आदेश जारी किया था, जो इस बात की गवाही देता था कि वेटिकन की धरती पर जीसस की बजाय शैतान की इबादत करने वाले लोग भी मौजूद थे। पोप की हत्या किसी धार्मिक अथवा राजनीतिक नहीं बल्कि एक शैतानी साजिश का परिणाम थी, ईसाइयत जब-तक इस नतीजे पर पहुंची, तब-तक बहुत देर हो चुकी थी और डेनियल ने […] - [Kailas Mein Golmaal](https://kitablelo.com/kailas-mein-golmaal-satyajit-ray/): महान फ़ि‍ल्‍मकार और अनूठे कथाकार सत्यजित राय के चर्चित जासूस किरदार फेलूदा का एक लोमहर्षक कारनामा है— ‘कैलास में गोलमाल’। इस बहुचर्चित उपन्यास में फेलूदा का सामना होता है प्राचीन मूर्तियों की तस्करी करनेवालों से। भुवनेश्वर के एक प्रसिद्ध मन्दिर से यक्षिणी की मूर्ति के मस्तक गायब होने की घटना से शुरू हुआ यह मामला उस वक्त बेहद पेचीदा हो जाता है, जब सम्भावित तस्कर वस्तुतः एक जासूस निकलता है। रहस्य-रोमांच के बेहद चक्करदार रास्तों से होकर गुजरती इस कथा में भरपूर रोमांच और मनोरंजन तो है ही, देश की ऐतिहासिक और कलात्मक धरोहर के संरक्षण तथा उसके प्रति प्रेम का […] - [Akaran](https://kitablelo.com/akaran-alok-singh-khalauri/): यह कहानी है एक पर्यटन स्थल की , जो पहले अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर था , लेकिन अचानक एक रहस्यमय त्रासदी का शिकार हो गया। रात के अंधेरे में उस सड़क के एक ख़ास हिस्से पर वाहन दुर्घटनाओं का सिलसिला चल पड़ा , और समय के साथ ये हादसे महज़ एक अफ़वाह ही बनकर नहीं रह गए। चूँकि अभी तक की दुर्घटनाओं में कोई भी जीवित बचने वाला नहीं था इसलिए लोगो की बातें अब डरावनी कहानियों में तब्दील होने लगी। स्थानीय लोग अब रात को उस रास्ते पर जाने से कतराने लगे , लेकिन अनजान पर्यटक इस रहस्य से […] - [Yayawar](https://kitablelo.com/yayawar-alok-singh-khalauri/): भय और पारलौकिक विषय हमेशा से मानवता के लिए आकर्षण के केंद्र रहे हैं। भय में वह शक्ति होती हैं , जो हमारे भीतर छिपे ‘अज्ञात’ के डर को उजागर करती हैं। यह भय , जो अक्सर अंधेरे में छिपा रहता हैं , हमारे मन में गहरे जड़े जमा लेता हैं।पारलौकिक घटनाएं, जैसे भूतप्रेत , या रहस्यमयी शक्तियाँ, हमारे विश्वासों और तर्कशक्ति को चुनौती तो देती हैं , मगर इन कहानियों में छिपी अज्ञात की दहशत हमे कल्पना की असीमित दुनिया में भी ले जाती है , जहाँ वास्तविकता और फैंटेसी के बीच की दुनिया धुंधली हो जाती हैं। यही कारण […] - [Aparajita: Amrit Nikunj Ka Rahasya](https://kitablelo.com/aparajita-amrit-nikunj-ka-rahasya/): फैंटेसी और जादुई उपन्यास हमें एक ऐसे अद्भुत संसार में ले जाते हैं, जहाँ कल्पनाएँ हकीक़त का रूप ले लेती हैं और असंभव, संभव हो जाता है। इन उपन्यासों का जादू पाठकों के दिलो-दिमाग पर गहरा प्रभाव छोड़ता है। जादुई कहानियाँ पाठकों को रोज़मर्रा की दुनिया से परे ले जाती हैं और उन्हें न केवल मनोरंजन प्रदान करती हैं, बल्कि नई दृष्टि और आशाएँ भी देती हैं। फैंटेसी उपन्यासों में जादू, रोमांच, और रहस्य का अद्भुत मिश्रण होता है। ये कहानियाँ हमें उन संघर्षों और अदम्य साहस के बारे में बताती हैं, जो हमें अपनी कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा देते हैं। जादुई पात्र, रहस्यमयी वस्तुएँ, और गूढ़ वातावरण इन कहानियों को इतना आकर्षक बनाते हैं कि पाठक उस दुनिया से बाहर निकलने को तैयार नहीं होते। ‘अपराजिता शौर्य और अमृत निकुंज का रहस्य’ ऐसा ही एक अद्वितीय उपन्यास है, जो भारतीय जादुई सभ्यता की छिपी हुई परतों को खोलता है। यह कहानी पाठकों को एक अनूठे रोमांच और गहराई में डुबो देती है। इस उपन्यास में आप जानेंगे भारत में ऐंद्रजालिक सभ्यता के विकास और विनाश की कहानी। इस उपन्यास की नायिका अपराजिता, केवल नौ वर्ष की उम्र में, अपने साहस और बुद्धिमत्ता के बल पर अंधकाक्षों के शहंशाह को हराकर उसे भागने पर मजबूर कर देती है। कहानी की शुरुआत अपराजिता के आत्मज्ञान गुरुकुल में पढ़ाई से होती है, जहाँ उसे माया सम्मत विषयों की शिक्षा दी जाती है। वहाँ उसे कई अद्भुत तिलिस्म और सच्चे मित्र मिलते हैं। लेकिन, इसी गुरुकुल में एक षड्यंत्र भी पनप रहा है, जो आत्मज्ञान की सबसे पवित्र वस्तु, अमृत निकुंज, पर कब्जा करना चाहता है। रहस्यमयी घटनाओं के बीच, अपराजिता को अपने शत्रु और उसके अंधानुयायियों का सामना करना पड़ता है। क्या वह अपने साहस और बुद्धि के बल पर अपने समाज को अनिष्ट मायावी शहंशाह से मुक्ति दिला पाएगी? इन रहस्यमयी सवालों के जवाब पाने के लिए यह उपन्यास न केवल आपको रोमांचक सफ़र पर ले जाएगा, बल्कि आपकी कल्पनाओं को भी नई उड़ान देगा। - [Saat Khat](https://kitablelo.com/saat-khat/): Saat Khat | सात ख़त एक फौजी अफसर अपने फ्लैट में कत्ल हुआ पाया गया। दो जुदा शख्स दावेदार कि कत्ल उन्होंने किया और अभी तीसरा वही कहने को तैयार! एक युवती पके आम की तरह दसवीं मंजिल से टपकी और ठौर मारी गई। दुर्घटना घटी, खुद छलांग लगाई, या धकेली गई! ऐसी ही रहस्यपूर्ण घटनाओं से लबरेज कई वाकये। सात ख़त पुस्तकाकार में पहली बार प्रकाशित कहानी संग्रह टॉप मिस्ट्री राइटर सुरेन्द्र मोहन पाठक की विलक्षण लेखनी फिर जलाल पर साहित्य विमर्श प्रकाशन की गौरवशाली प्रस्तुति - [Rajmuni](https://kitablelo.com/rajmuni-alok-singh-khalauri/): वो कांच की तरह नाजुक थी ……….तोड़ दी गई वो फूलों की तरह कोमल थी………मसल दी गई वो जिस पर बेइंतिहा विश्वास करती थी…….उसी ने उसे धोखा दिया वो जो परम भाग्यशाली थी , उसका भाग्य ही उसका दुर्भाग्य बन गया। क्या हुआ जब वो सुबह की पहली किरण सी लड़की एक यौनकुंठित हत्यारे के हत्थे चढ़ गई । फिर जन्म लिया तो फिर वही हत्यारा उसकी प्रतीक्षा में था। जन्म दर जिसका भाग्य ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन था। दो जन्मों में फैली दहशत भरी प्रेमगाथा - [The Civil Serpents (Hindi)](https://kitablelo.com/the-civil-serpents-hindi/): The Civil Serpents | द सिविल सरपेंट्स श्री विनय प्रकाश तिर्की की यह कृति केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक तंत्र का आईना है, जिसकी आत्मा लालफीताशाही में उलझी हुई है और जिसकी रगों में विश्वासघात का ज़हर बहता है। यह कथा उन अदृश्य जालों को उजागर करती है, जहाँ सहयोग की आड़ में धोखे की साँसें चलती हैं और हर मुस्कान के पीछे छुपा होता है एक फनधारी इरादा। इस व्यवस्था में व्यक्ति कब अपने ही सहकर्मियों द्वारा छल लिया जाता है, उसे आभास तक नहीं होता। ऊँचे ओहदों पर बैठे अधिकारी, अपने नीचे काम करने वालों का शोषण ऐसे करते हैं जैसे वन का कोई विषधर अपने शिकार को निगलता है- धीरे, सधे हुए अंदाज़ में। लेखक स्वयं नागलोक कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के जशपुर अंचल से हैं—एक ऐसा क्षेत्र जहाँ साँपों की अनगिनत प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इन वनों में साँपों से हुई उनकी मुठभेड़ों ने उन्हें सिखाया कि असली विषधर केवल जंगलों में ही नहीं, बल्कि सभ्यता की चादर ओढ़े शहरों में भी पाए जाते हैं- कंक्रीट के इस जंगल में वे मनुष्य का मुखौटा पहन कर विचरण करते हैं। इच्छाधारी नाग या नागिन चाहे कल्पना मात्र हों, किंतु इस 'सिस्टम' के साँप उनसे कहीं अधिक चतुर, घातक और जीवित हैं। उनका धोखा, उनकी दोहरी ज़ुबान और विषैली चुप्पी, इस संघर्षशील प्रशासनिक जीवन की अनिवार्यता बन चुकी है। यह पुस्तक एक चेतावनी है, एक दर्शन है—'सिविल सर्पेंट सिस्टम' का। लेखक की विशिष्ट और व्यंग्यपूर्ण लेखन शैली इसे केवल पढ़ने योग्य नहीं, बल्कि महसूस करने योग्य बनाती है- मानव और नाग के बीच की पतली रेखा को पाठक स्वयं पहचानने लगते हैं। - [Safal Jeevan](https://kitablelo.com/safal-jeevan/): Safal Jeevan | सफल जीवन सफल जीवन ! सफल जीवन और जीवन में सफलता, दोनों ही भिन्न विषय हैं। जो जीवन में सफलता को प्राप्त कर लेते हैं, आवश्यक नहीं कि उसका जीवन भी सफल ही हो। राज ऋषि शर्मा द्वारा प्रेरक पुस्तकों की श्रृंखला में इस विषय विशेष पर लिखी हुई प्रथम पुस्तक। आज के व्यस्त जीवन में एक सफल जीवन यापन के लिए पाठकों को ऎसी ही उपयोगी पुस्तक की आवश्यकता है। - [Thakurbadi: Gurudev Ravindranath Tagore Ka Kutumb Vritant](https://kitablelo.com/thakurbadi-gurudev-ravindranath-tagore-ka-kutumb-vritant/): Thakurbadi | ठाकुरबाड़ी द्वारकानाथ टैगोर इतने बड़े ज़मींदार थे कि जब वे लंदन पहुँचे, तो महारानी विक्टोरिया ने उन्हें प्राइवेट डिनर पर बुलाया, इंग्लैंड का अगला प्रधानमंत्री उनका दोस्त बनना चाहता था। उन्हीं द्वारकानाथ को उनकी पत्नी ने ही घर में घुसने नहीं दिया और उनके पोते रबींद्रनाथ टैगोर ने तो अपने दादा के सारे दस्तावेज़ जलाकर ख़त्म कर दिए। इसी तरह, जिस समय टैगोर और गांधी में वैचारिक युद्ध चरम पर था, उसी समय गुरुदेव की भांजी सरला देवी ने गांधी के लिए खादी से बनी साड़ियों की मॉडलिंग शुरू की, जबकि बापू अपनी पत्नी कस्तूरबा तक को खादी की साड़ियाँ पहनने के लिए नहीं मना पाए थे। प्लासी का युद्ध हो या पृथ्वीराज कपूर को हिंदी सिनेमा में ब्रेक दिलवाना, औरतों का आधुनिक तरीके से साड़ी पहनना हो या बेझिझक बिकिनी पहनना, भारत के समाज को बदलने वाली तमाम घटनाओं में टैगोर परिवार किसी न किसी तरह से शामिल रहा है। अनिमेष मुखर्जी की यह किताब देश के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता रबींद्रनाथ टैगोर के कुटुंब को जोड़ते हुए इतिहास की कुछ ऐसी घटनाओं और कालजयी प्रेम कहानियों का दस्तावेज़ है, जहाँ क़िस्से हक़ीक़त से ज़्यादा दिलचस्प हैं। - [Mithakon Se Vigyan Tak](https://kitablelo.com/mithakon-se-vigyan-tak/): मिथकों से विज्ञान तक | Mithakon Se Vigyan Tak - ब्रह्मांड के विकास की बदलती कहानी क्या विज्ञान और धर्म एक-दूसरे के विरोधी हैं? या फिर दोनों इंसान की ज्ञान-यात्रा के दो अलग पड़ाव हैं? मिथकों से विज्ञान तक एक ऐसी सोच-उड़ान है जो हमें प्राचीन कथाओं से लेकर आज के वैज्ञानिक सिद्धांतों तक ले जाती है — एक सफ़र, जहाँ हर "क्यों" और "कैसे" से नया दरवाज़ा खुलता है। इस किताब में पाएँ: ब्रह्मांड की उत्पत्ति से लेकर जीवन के विकास तक की बदलती सोच और विज्ञान की कहानी धर्म, अध्यात्म, दर्शन और विज्ञान – इन सबकी जड़ों को समझने का भारतीय दृष्टिकोण "कैसे" और "क्यों" जैसे सवालों के जवाब जो हमें अलग रास्तों पर ले जाते हैं – एक विज्ञान की ओर, दूसरा आध्यात्मिकता की ओर इतिहास के उदाहरण जो बताते हैं कि कैसे पुरानी मान्यताओं को चुनौती देना ही विज्ञान का मूल है एक दृष्टिकोण जो विज्ञान और धार्मिक सोच को टकराव नहीं, बातचीत की प्रक्रिया मानता है यह किताब उनके लिए है: जो मिथकों और विज्ञान के बीच के रिश्ते को समझना चाहते हैं जिन्हें ब्रह्मांड और जीवन के रहस्य जानने की जिज्ञासा है जो आधुनिक और पारंपरिक सोच के बीच सेतु बनाना चाहते हैं "पुराने सत्यों को तोड़ना विज्ञान है। हमेशा के सत्य पर सवाल उठाना ही विकास है।" मिथकों से विज्ञान तक सिर्फ़ एक किताब नहीं, सोचने, सवाल करने और बदलने का निमंत्रण है। - [Begampul Se Daryaganj](https://kitablelo.com/begampul-se-daryaganj/): बेगमपुल से दरियागंज | Begampul Se Daryaganj हिंदी पल्प की दुनिया का एक ऐसा अध्ययन जिसमें अंतरराष्ट्रीय प्रेरणाओं और भारतीय भाषाओं के लोकप्रिय साहित्य का सही तरीके से लेखा-जोखा किया गया है। इसमें बातचीत, बैठकें, कहानियाँ, शोध और विश्लेषण शामिल हैं। बेगमपुल एक ऐसी जगह है जहाँ कई पल्प लेखक तब घूमते रहते थे जब मेरठ हिंदी पल्प का बाज़ार हुआ करता था। दिल्ली के दरीबा और खारी बावली से पहले मेरठ के शास्त्री नगर-ईश्वर नगर, वाराणसी और इलाहाबाद (अब प्रयागराज) का बोलबाला था। स्कूली किताबों में छिपकर इसे पढ़ने के लिए पागल पाठकों के लिए यह जादू कैसे पैदा हुआ? "बेगम पुल से दरियागंज―देसी पल्प की दिलचस्प दास्तान" हिंदी पल्प साहित्य के समृद्ध ताने-बाने की एक दिलचस्प खोज पेश करती है, इसकी जड़ों, विकास और इसे आकार देने वाले प्रतिष्ठित व्यक्तियों की खोज करती है। यह उन चहल-पहल भरी सड़कों, जीवंत कवर और आकर्षक कहानियों के प्रति श्रद्धांजलि है, जिन्होंने लाखों लोगों को आकर्षित किया। - [gaon-ki-mitti-ebook](https://kitablelo.com/gaon-ki-mitti-ebook/): Santa Mishra - [Poore Chand Ki Raat](https://kitablelo.com/poore-chand-ki-raat/): Poore Chand Ki Raat आदित्य नाथ बंकाला रुतबे और रसूख वाला शख्स था, साहबेजायदाद था । उसकी सितारों की गर्दिश में आस्था की वजह से कुछ स्वार्थी तत्त्व उसे एक ऐसे शख्स के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहे थे जिसका दिमागी तवाजन खराब था, जिस पर गम्भीर हत्यारी प्रवृत्ति हावी थी, जो कि पूरे चांद की रात को और प्रबल और बेकाबू हो उठती थी । - [Main Sadhu Nahin](https://kitablelo.com/main-sadhu-nahin/): Main Sadhu Nahin | मैं साधु नहीं साधु, सन्यासी, संत, महात्मा या ऋषि मुनियों के जीवन को समझने में तो सहायता मिलती ही है बल्कि पाठक को अपने जीवन के लिए भी प्रेरणा एवं उचित मार्गदर्शन की प्राप्ति होती है। जिससे पुस्तक में समय समय पर ज्ञान तथा अनुभव से अपने मतानुसार किसी भी विचारधारा का विश्लेषण, परिवर्तन तथा किसी निष्कर्ष पर पहुंचने का प्रयास एवं परिणाम अत्यंत रोचक है। पुस्तक में किसी मत विशेष पर प्रहार करना लेखक का उद्देश्य कदापि भी नहीं रहा है। जो सही नहीं है, वो कभी भी सही हो ही नहीं सकता। इसीलिए जो सही है सदैव उसी पर ही उचित मनन एवं विश्वास भी किया जाना चाहिए। उसी के अनुरूप ही अपना मत बनाइए तथा उसी को ही अपने जीवन में उतारने का प्रयास भी करें। फिर उसी प्रकार से समय अनुसार मनुष्य को अपने आप को परिवर्तित भी करना चाहिए। यह मनुष्य के जीवन का मूल उद्देश्य है तथा इसी से उसका जीवन भी वास्तव में सार्थक हो सकता है। यह ही इस पुस्तक का सार भी है एवं यह ही इस पुस्तक को लिखने का लेखक का मूल उद्देश्य भी। - [Shadi Vaali Raat](https://kitablelo.com/shadi-vaali-raat/): Shadi Vaali Raat | शादी वाली रात  विक्रम पंडित शुभांकर डी के साथ अपने बरसो पुराने कॉलेज टाइम के एक दोस्त की बहन की शादी में गोरखपुर आए थे। रात में सब कुछ ठीक था। चारों तरफ खुशियां ही खुशियां थी। उन दोनों ने भी खूब एन्जॉय किया। पर अगली सुबह दोस्त गायब! ढूंढा तो घर से एक डेढ़ किलोमीटर दूर जंगल में स्थित खंडहर में उसकी लाश मिली। कातिल ने बड़ी बेरहमी से कत्ल किया था। उसके हाथ पैर तक तोड़ डाले थे। सर पर इतने वार किए थे कि सर के आस पास ढेर सारा खून जमा था। ऐसा लगता था कि कातिल ने चैलेंज किया हो। वह चाहता तो लाश जला सकता था कहीं छुपा सकता था पर उसने ऐसा बिल्कुल नहीं किया था। अब विक्रम पंडित के कंधों पर अपने दोस्त के कातिल को पकड़ कर सजा दिलाने की भारी जिम्मेदारी आन पड़ी थी। ऐसी सिचुएशन में वह भाग नहीं सकता था क्योंकि उसका उसूल था जंग के मैदान में दुश्मन को और बुरे वक्त में दोस्त को कभी पीठ नहीं दिखाता। अंजाम चाहे कुछ भी हो। और सबसे बड़ी दिक्कत थी कि विक्रम पंडित के पास इस मिस्ट्री को हल करने के लिए सिर्फ चार दिन थे। और केस ऐसा जटिल कि उसे ईश्वर याद आ गए। - [Winner](https://kitablelo.com/winner/): Winner | विनर सुशील कुमार एक होनहार युवा गायक था जो पिछले साल ही इंडियन आइकॉन का विनर बना था। उसकी ख्वाहिश थी कि संगीत के क्षेत्र में कुमार शानू, सोनू निगम, अरिजीत सिंह की तरह नाम कमाए पर उसका करियर अचानक ही अर्श से फर्श पर आ गिरा। उसके लाख हाथ-पाँव मारने के बावजूद उसका कुछ न हो सका पर फिर अचानक ही उसे एक ऐसा ऑफर मिला जिसमें उसे भारी-भरकम रकम हासिल होने वाली थी। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। सुशील कुमार की लाश उसके ही बंगले के पीछे बने स्विमिंग पूल में तैरती पायी गयी और उसके कत्ल का इल्जाम ऑफर देने वाले के सर आन पड़ा। इस केस को हल करने की जिम्मेदारी होनहार, काबिल इंस्पेक्टर मनेंद्र त्रिपाठी और सब-इंस्पेक्टर मोइन कलाडिया को सौंपी गयी। दो नये-नवेले जासूस विशाल पूनावाला और अक्षय भी इस केस की जाँच-पड़ताल में शामिल हो हुए तो मामला और दिलचस्प हो गया क्योंकि पुलिस वालों और दोनों जासूसों के बीच छत्तीस का आंकड़ा था। - [6 Novels of Chandar - Set 44](https://kitablelo.com/6-novels-of-chandar-set-44/): 6 Novels of Chandar (Set 44) | चंदर के 6 उपन्यासों का सेट (सेट 44) सीक्रेट फाइल नंबर 420 - भोला शंकर सीरीज शनि की आँख - भोला शंकर सीरीज सोने की हथकड़ी - भोला शंकर सीरीज शह और मात - भोला शंकर सीरीज तू चल मैं आया - थ्रिलर ढोल की पोल  - थ्रिलर - [Janapriya](https://kitablelo.com/janapriya/): Janapriya | जनप्रिय जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा की जन्म शताब्दी वर्ष पर विशेष संस्करण - [Aasha](https://kitablelo.com/aasha/): Aasha | आशा वो एक मामूली कामकाजी लड़की थी हालात के हवाले जो एकाएक इतनी महत्वपूर्ण हो उठी थी कि हर कोई अपने किसी मिशन के तहत उसकी मदद का तालिब बन गया। हालात खुद ही ऐसे बनते चले गए कि उसकी कामयाबी का ग्राफ आसमान बस छूने ही वाला था। लेकिन जो हर किसी को लगा, वो उसे न लगा। उसका मुकाम वही रहा जो हमेशा था। आशा (Aasha) टॉप मिस्ट्री राइटर सुरेन्द्र मोहन पाठक का दुर्लभ सामाजिक उपन्यास साहित्य विमर्श प्रकाशन की गौरवशाली प्रस्तुति - [Hamshaql Tatha Anya Kahaniyan](https://kitablelo.com/hamshaql-tatha-anya-kahaniyan/): Hamshaql Tatha Anya Kahaniyan  शोभना पाटिल बांद्रा के एक रेस्टोरेंट में मौजूद थी जहाँ उसकी अपने पति मकरन्द से एक बजे की लंच अप्वायंटमेंट थी। दस मिनट पहले वो उसे रेस्टोरेंट में दाखिल होता और उसकी तरफ आता दिखाई दिया। लेकिन उसके आश्चर्य का पारावार न रहा जबकि वो बिना उस पर निगाह डाले उसके करीब से गुजर गया। क्या उससे मकरंद को पहचानने में गलती हुई थी? नामुमकिन! फिर आगामी घटनाक्रम से स्थापित हुआ कि वो मकरंद नहीं, उसका कोई हमशक्ल था! हमशक्ल एक अरसे से अप्रकाशित कहानियों का संग्रह सुरेन्द्र मोहन पाठक की चमत्कारी लेखनी की यादगार दस्तावेज साहित्य विमर्श प्रकाशन की गौरवशाली प्रस्तुति - [Matwali Duniya](https://kitablelo.com/matwali-duniya/): Matwali Duniya गौरतलब है अब किसी दोस्त से पीछा छुड़ाना पहले जैसा मुश्किल काम नहीं रहा । उसे ये पुस्तक भेंट कीजिए, वो तमाम जिंदगी के लिए आपका दुश्मन हो जाएगा। अगले जन्म की भी गारंटी चाहते हैं तो साथ में बहुरंगी दुनिया भी जोड़ दीजिए। मतवाली दुनिया सुरेन्द्र मोहन पाठक की नवीनतम जोक बुक - [Meena Mere Aage](https://kitablelo.com/meena-mere-aage/): Meena Mere Aage "समाज आज जिस बदलाव की ताकीद कर रहा है, जिन बेड़ियों को तोड़ कर आगे बढ़ रहा है मीना ने वो सलासिल, वो बेड़ियाँ आधी सदी से भी ज़्यादा पहले तोड़ दी थीं। इस लिहाज़ से वह एक मायने में पथ प्रदर्शक रही थीं। मीना के बारे में जितने हक़ीक़त बयान हैं उतने ही अफ़साने भी तैरते हैं। उनको लेकर हर इन्सान की अपनी ही कहानी है और हर कहानी का अपना ही अलग ज़ाविया है। कुछ का मक़सद महज़ सनसनी फैलाना था और कुछ ज़ाहिराना सच वयानी थी। क़ानून का विद्यार्थी, कहीं-न-कहीं कानून की भाषा बोलता ही है। मीना कुमारी यह दुनिया तव छोड़ गयीं जब मेरे इस दुनिया में आने का कोई इमकान भी आसपास न था। लिहाज़ा उन पर लिखने, उनको जानने और उन तक पहुँचने के लिए मुझे द्वितीयक साक्ष्यों से ही गुज़रना पड़ा। जीवन के कुछ दुखों में से एक दुख यह भी रह ही जायेगा कि काश उनके वक्त में पैदा होने की ख़ुशनसीवी अता होती.... । काश! इसलिए.... यहाँ दर्ज बातों की सच्चाई का दावा करूँ, यह ठीक नहीं होगा और तारीख़ इन बातों को एक सिरे से नकार दे, झुठला दे ऐसा भी नहीं। मैं ऐसा कुछ भी नहीं लिख सकता जिसकी बाबत कोई लिखित स्रोत नहीं हो। और महज़ सनसनी के लिए ऊलजलूल घटनाओं का समावेश कर लूँ इसके लिए मेरा मन गवाही नहीं देगा ।.... ....फ़िल्म वालों की बदनसीबी यह कि तारीख़ उन पर कभी भी मेहरबान नहीं रही। इस कारण उन पर कोई तारीख़ी किताब नहीं लिखी गयी। ना ही उन्हें तारीख़ में दर्ज होने लायक माना गया। फ़िल्मी अफ़राद की तारीख़ जो है वह अख़बार-ओ-रिसालात ही हैं जिनमें उनकी ज़िन्दगी के अहम पहलू नुमायाँ होते हैं । सो क्या ज़रूरी कि हम उन बातों, उन अख़बारों, उन मैगज़ीनों को सिरे से नकार दें। मसालाई रिसालों की बात दीगर है। और फिर, मीना कुमारी का पूरा सच सिर्फ़ और सिर्फ़ मीना कुमारी ही जानती थी। चाहे फ़िल्मकार, चाहे नातेदार, चाहे कोई किताब या कोई अदीब, कोई भी यह दावा करे कि वह उनकी कहानी मुकम्मल तौर पर जानता है तो यह झूठ होगा। लिहाज़ा यहाँ लिखी बातें भी फ़साना मान कर पढ़ा जाना ही सही होगा क्योंकि इस किताब में लिखी बातें उतनी ही सच्ची हैं जितनी मीना की बाबत फैले किस्से और उतना ही फ़साना है जितना मीना की बाबत फैले क़िस्से । -सत्य व्यास " - [Artist (English)](https://kitablelo.com/artist-english/): In a beautiful bungalow located in picturesque hills of Munnar, lived an “artist”. One day a murder happened in that bungalow. The way the murder was committed indicated that the murderer was an even bigger “artist”. After all, committing a murder in a foolproof manner is an art in itself. And this murder was such that it boggled the mind completely. Neither the killer’s identity was known nor was it clear whose murder had been committed. Doesn’t this feel like the game plan of an outstanding “artist”? So now the challenge for you is to enter this world of mystery and romance and find out who committed the murder? And an ever more astonishing secret- who was murdered? It is such a murder mystery that has never been seen before, even from the pen of ‘Amit Khan’. Solve this whirlwind of a murder mystery before the truth is revealed and you can prove that you are a bigger ‘artist’ than the killer. ARTIST A highly shocking and terrifying mystery, full of murders, murderers, victims, potential victims and perhaps even a wandering soul. - [Shaitan: Jurm Ke Khiladi](https://kitablelo.com/shaitan-jurm-ke-khiladi/): Shaitan: Jurm Ke khiladi - [Seven Point Six](https://kitablelo.com/seven-point-six/): Seven Point Six | सेवेन पॉइंट सिक्स दिल्ली - हिंदुस्तान का दिल और अनजाने खतरों का शहर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महानगरीय क्षेत्र, जहाँ हर कोना इतिहास, आस्था और अनदेखे खतरों से भरा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यहाँ कभी भी रिक्टर स्केल पर 8.0 तक का भूकंप आ सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो दिल्ली की जमीन ही नहीं, सदियों पुरानी मान्यताएँ भी हिल जाएँगी। क्या ये सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा होगी, या कोई दबी हुई शक्ति इतिहास के पन्ने पलटने वाली है? क्या हमारे मिथक दरअसल भूले-बिसरे सच हैं? क्या हम वाकई इस ब्रह्मांड में अकेले हैं? 'सेवेन पॉइंट सिक्स Seven Point Six' ... एक ऐसी कहानी जो विज्ञान, धर्म और इतिहास के बीच की धुँधली रेखाओं को मिटा देती है। तैयार हो जाइए, एक ऐसे सच से सामना करने के लिए, जो अब तक सिर्फ किस्सों में था। यह कहानी नहीं चेतावनी है। - [Apne Desh Ka Ajnabi](https://kitablelo.com/apne-desh-ka-ajnabi/): Apne Desh Ka Ajnabi "अपने देश का अजनबी" एक ऐसी कहानी है जो देशभक्ति, पहचान और सामाजिक सच्चाइयों के बीच झूलते एक व्यक्ति की आंतरिक और बाह्य यात्रा को दर्शाती है। यह उपन्यास नायक की उस पीड़ा और संघर्ष को सामने लाता है जब वह अपने ही देश में लौटकर खुद को बेगाना महसूस करता है। ओमप्रकाश शर्मा की यह कृति सिर्फ एक रहस्य या जासूसी उपन्यास नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और वैचारिक टकराव की मजबूत प्रस्तुति है। "अपने देश का अजनबी"एक आत्ममंथन है —जहां पाठक खुद से पूछता है कि“क्या हम अपने ही सच्चे नागरिकों को पहचान पाने में असफल हो रहे हैं?”   - [Abhineta Ka Khoon](https://kitablelo.com/abhineta-ka-khoon/) - [Shikari Ka Pret](https://kitablelo.com/shikari-ka-pret/): Shikari Ka Pret एक कुख्यात शिकारी…जो जंगलों में जानवरों की ही नहीं, इंसानों की भी जान लेता था…जिसे मारा गया था, पर अब उसकी आत्मा वापस लौट आई है।लोग कहते हैं—"अब शिकारी नहीं, उसका प्रेत शिकार करता है!" "शिकारी का प्रेत" एक रहस्य, डर और सस्पेंस से लबरेज़ थ्रिलर है। इसमें ओम प्रकाश शर्मा ने जंगल की भयावहता, अंधविश्वास और अपराध की परतों को बड़ी कुशलता से एकसाथ बुना है। "शिकारी का प्रेत" एक तेज़ रफ्तार जासूसी उपन्यास है, जिसमें जंगल, भय, छल और खून की गंध मिलती है। - [Farishte Ki Maut](https://kitablelo.com/farishte-ki-maut/) - [Khooni Tantrik](https://kitablelo.com/khooni-tantrik/) - [Ataichi Rahasya](https://kitablelo.com/ataichi-rahasya/): Ataichi Rahasya | अटैची रहस्य अन्तरराष्ट्रीय ख्याति के फिल्मकार तथा बांग्ला के श्रेष्ठ कथाकार सत्यजित राय के लोकप्रिय कथा-पात्र फेलूदा की जासूसी की बेहद रोमांचक कथा है—अटैची रहस्य। राजधानी एक्सप्रेस में सफर के दौरान एक व्यक्ति की अटैची चोरी हो जाती है, जिसमें एक बहुत पुरानी और कीमती पाण्डुलिपि थी। जाहिर है, उसे ढूँढ़ने के लिए फेलूदा को नियुक्त किया गया। मगर घटना की जाँच करते हुए पाण्डुलिपि से भी कीमती एक चीज मिल गयी। अटैची गायब करने वालों को तो इसका पता था पर उसके मालिक को नहीं। आखिर क्या थी वह चीज, जिसके कारण इस तरह एक मामूली-सी घटना अचानक रहस्यमय हो उठी! राय की प्रस्तुत कृति में रहस्य-सन्धान के प्रति कुतूहल शुरू से अन्त तक बना रहता है, जो उनके कथा-लेखन की चिर-परिचित विशेषता है। - [Kanyapaksh](https://kitablelo.com/kanyapaksh/): कन्यापक्ष | Kanyapaksh अतीत-काल में नारी-चरित्र का एक ही रूप था, जिससे सभी परिचित थे! वह रूप था, उर्वशी का उर्वशी एक सनातन चरित्र बनकर अमर हुई। जो किसी की माँ नहीं, बेटी नहीं, वधू नहीं—है सिर्फ़ उर्वशी। लेकिन कालान्तर में उर्वशी ने बहुत-बहुत रंग बदले, बहुत-बहुत रूप धरे। उर्वशी का एक-एक अंश कोटि-कोटि नारियों में फैलकर उन्हें विचित्र चरित्र का नमूना बना गया। ‘कन्यापक्ष’ के ये ही विभिन्न पहलू हैं। सुधा सेन, अलका पाल, मीठी दीदी, मिछरी भाभी, मिली मल्लिक और सोना दीदी। सभी मामूली लड़कियाँ पर एक-दूसरे से कितनी भिन्न, कितने विचित्र चरित्र। और उर्वशी के इन विभिन्न अंश-रूपों को ढूँढ़ निकालना और उन्हें सजीव चरित्र का रूप देकर कथा में गढ़कर ‘कन्यापक्ष’ प्रस्तुत करना ही तो बिमल मित्र की लेखनी का चमत्कार है। - [Kulta](https://kitablelo.com/kulta-novel-by-rajendra-yadav/): कुलटा | Kulta प्यार और मुक्ति इनसान की बुनियादी आकांक्षाएँ हैं। स्वाभाविक और दुर्निवार। लेकिन यही प्यार अगर उसे अपनी सहज गति को बाधित करने वाला बन्धन लगने लगे तो उसे तोड़कर आगे बढ़ने में भी वह एकपल की देरी नहीं करना चाहता।  स्वेच्छा से चुनी गई एक राह को छोड़कर किसी और रास्ते पर बढ़ने का यह निर्णय निर्द्वन्द्व नहीं होता लेकिन प्यार की तलाश में इनसान नए रास्ते पर बढ़ने का जोखिम उठा ही लेता है। ‘कुलटा’ प्यार के इसी प्रमेय को साबित करने वाली कहानी है। मिसेज तेजपाल अपने पति के अनुशासनबद्ध अभिजात परिवेश में खुद को बँधा महसूस करती है जबकि उसका व्यक्तित्व किसी निर्बन्ध झरने जैसा है। यौन सम्बन्धों के असन्तुलन और सैनिक जकड़बन्दी से मुक्ति के लिए वह अपने पवित्र प्यार की राह चुनती है। लेकिन एक स्त्री के अपने चुनाव को हमारा आधुनिक समाज कोई मान्यता नहीं देता। यदि वह अपनी राह स्वयं चुनती है तो उसके लिए कोई क्षमा नहीं है। इसे ही वह चुनौती देती है!... मिसेज तेजपाल पागल और कुलटा नहीं तो क्या है ? - [Gulra Ke Baba](https://kitablelo.com/gulra-ke-baba/): गुलरा के बाबा | Gulra Ke Baba मार्कण्डेय की प्रतिनिधि कहानियाँ  ‘गुलरा के बाबा’ संग्रह की कहानियों का समय आज़ादी के ठीक बाद का है। सामाजिक सन्दर्भों का वास्तविक चित्रण कहानियों का प्रमुख तत्त्व है। जीवन का सुख-दु:ख ही कहानियों का विषय है। भारत के नए निर्माताओं के सामने देश की वास्तविक तस्वीर कहानियों में प्रस्तुत की गई है। कहानियों में कोमल संवेदनाएँ, लुभावनी भाषा के साथ आक्रोश से भरी तीखी सामाजिक दृष्टि भी है। गाँव के जीवन का नया धरातल इस संग्रह का प्राण है। यहाँ जीवन की वास्तविकता के साथ उसमें परिवर्तन की आकांक्षा साथ-साथ है। - [Nithalle Bahut Busy Hain](https://kitablelo.com/nithalle-bahut-busy-hain/): निठल्ले बहुत बिजी हैं | Nithalle Bahut Busy Hain लोभ-लाभ के गणित में उलझे लोगों के बीच सच को बयान करना आसान नहीं होता, क्योंकि वहाँ सच लोगों के सामने किसी आईने की तरह खड़ा हो जाता है और उन्हें उनकी असल शक्ल दिखाने लगता है। लेकिन एक सजग रचनाकार यही काम करता है। उसके लिए अपने समय की सचाइयों से मुँह मोड़ पाना न तो सम्भव है न उचित। दरअसल एक रचनाकार के रूप में उसकी सफलता ही इससे तय होती है कि वह सच के साथ खड़ा है कि नहीं। जाहिर है व्यक्तिगत दायरों में महदूद, खौफ़ खाए अधिकतर लोगों के विपरीत उसे निडर होना पड़ता है। तभी उसका लिखा हलचल पैदा करता है। सुपरिचित व्यंग्यकार सम्पत सरल की इस किताब से गुज़रते हुए आप इस सचाई से इनकार नहीं कर पाएँगे। वे एक सजग रचनाकार की इस भूमिका को आगे बढ़कर स्वीकार करते हैं। आम बोलचाल की भाषा और भंगिमाओं से अपने इस समय पर सीधा प्रहार करते हैं। इस पुस्तक की भूमिका में विजय बहादुर सिंह ने ठीक ही कहा है—यह कला उनसे पहले हरिशंकर परसाई, शरद जोशी और श्रीलाल शुक्ल जैसे लेखकों में थी पर मंचों पर जाकर अपने पाठकों को श्रोताओं के रूप में सामने बिठाकर आँखों में आँखें डालकर कहने की कला का आविष्कार तो शरद जोशी का है। सम्पत सरल इसी कला के आगे के अध्याय हैं। - [Master Shot](https://kitablelo.com/master-shot/): मास्टर शॉट | Master Shot हिन्दी कहानी का संसार इन दिनों नए कथाकारों की उपस्थिति से स्पन्दित है। नए जीवनानुभवों ने कथा-परिदृश्य को विविधवर्णी बनाया है। ‘मास्टर शॉट’ कथा-संकलन में शामिल फ़रीद ख़ाँ की कहानियाँ इसका साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं। इन कहानियों में फ़िल्मों और मीडिया की चकाचौंध भरी दुनिया में ज़िन्दगी की लय तलाशते लोग शामिल हैं। कला और व्यवसाय के अन्तर्द्वंद्वों के अलावा तुरन्त सब कुछ पा लेने की आकुलता के बीच नष्ट होती मानवीय संवेदनाओं को बचाए रखने की अन्तिम कोशिशों के कई मार्मिक क्षण इन कहानियों में जीवन्तता के साथ दर्ज़ हैं। फ़रीद ख़ाँ ने ‘आलता’ कहानी में बलात्कार पीड़िता इरावती की कथा कहते हुए बाज़ार का गुलाम बन चुके मीडिया और मनोरंजन-जगत की नृशंसता को कलात्मकता के साथ रचा है। ‘वीणा के तार’ के रामनरेश भइया गोरखपुर जैसे क़स्बाई शहर से हिन्दी में एम.ए. करके अपने मध्यवर्गीय प्रपंचों के साथ मुम्बई पहुँचते हैं और बार-बार चकित होते हैं। मीनाक्षी और श्रीपद की कथा ‘मास्टर शॉट’ मायानगरी मुम्बई के बहाने स्त्री के प्रति समाज के भीतर पलते अविश्वास की कथा है। फ़रीद मूलतः कवि हैं। वे दृश्य माध्यमों के लिए भी कहानियाँ, पटकथा और संवाद लिखते रहे हैं। इस संकलन की कहानियों पर दृश्य माध्यमों के लिए लेखन के अनुभव का सकारात्मक प्रभाव देखा जा सकता है। अधिकांश यथार्थ दृश्यों में अभिव्यक्त होता है। संवाद भी अपना सघन प्रभाव रचते हैं। कविता और दृश्य रचने की कला से कथाकार ने इन कहानियों के लिए सान्द्रता अर्जित की है। मुझे उम्मीद है कि यथार्थ की अलग भूमि पर चित्रित ये कहानियाँ हिन्दी के विशाल पाठक-वर्ग का ध्यान आकर्षित करेंगी। —हृषीकेश सुलभ - [Borsi Bhar Aanch](https://kitablelo.com/borsi-bhar-aanch/): बोरसी भर आँच | Borsi Bhar Aanch एक बच्चा चालीस साल की दूरी से दुनिया को देखता है, उसकी हथेलियों में कसैला पानी-फल है। 2 एक आक्रान्त, अपने आप में डूबा अकेला बचपन और एक आशंकाओं में घिरा अनिर्णीत भविष्य, एक हताश और गहराता हुआ अन्धकार और एक मुक्ति का विश्वास दिलाता जगमग रौशन क्षितिज, एक भयग्रस्त पलायन और फिर पलटकर एक निर्भय प्रत्याघात। जीवन के अनगिन धुँधले सूर्यास्तों और फिर उजालों और उम्मीदों से भरे पुनर्जीवन की मिसाल या प्रतिमान बनते उत्कट जीवन-संग्राम की मार्मिक और रोमांचक कथा कहती, चर्चित युवा रचनाकार- लेखक यतीश कुमार की यह आत्मकथा इस नए वर्ष, सन् 2024 में स्वयं उनके लिए अतीत के बीहड़ यथार्थ में दुबारा लौटकर दाख़िल होने का एक नया, चुनौतियों से भरा सृजनात्मक प्रयास है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह साहित्यचिन्तन ही नहीं, मानविकी के समस्त अनुशासनों की मान्यता है कि कोई भी व्यक्ति अपने बचपन में दुबारा नहीं लौट सकता। इसके लिए किसी न किसी ऐसी युक्ति या डिवाइस के ईज़ाद की ज़रूरत होगी, जो स्मृतियों के धुँधलके में घिरीं तमाम सँकरी-उलझी पगडंडियों में उल्टी दिशा में रेंग सके। यतीश कुमार ने अपने बचपन और अतीत में जाने के लिए जिस ‘युक्ति’ का आविष्कार किया है, उसे वे ‘अतीत का सैरबीन’ का नाम देते हैं। यह कोई भौतिक गैजेट नहीं है, यह भाषा, शब्द और वाक्यार्थों में अवस्थित एक नितान्त निजी और सृजनात्मक माध्यम है, जिसके सहारे वे देश के सुदूर दक्षिण-पूर्व में अपनी ज़िन्दगी के लिए छटपटाती एक छोटी-सी नदी किऊल के तट पर बसे एक अर्द्ध-ग्रामीण क़स्बे के जीवन के बीस वर्षों (1980-2000) की स्मृतियों का मार्मिक, सम्मोहक, विकट, साहसिक और ईमानदार सार्वजनिक रचनात्मक रोजनामचा दर्ज करते हैं। स्मृतियों के पुनर्लेखन या उत्कीर्णन की यह श्रमसाध्य और कलात्मक कोशिश है। पूरी उम्मीद है समकालीन रचनात्मक परिदृश्य में ‘बोरसी भर आँच’ अपनी ख़ास जगह बनाएगी। —उदय प्रकाश - [Life Line](https://kitablelo.com/life-line/): लाइफ लाइन | Life Line सैनिकों की बात करते ही हमारे मन में उनकी वह छवि उभरती है जिसमें वह वर्दी पहने और हथियार लिये हुए सीमा पर मुस्तैदी से खड़े हैं। ये छवि उनकी बहादुरी और देश के प्रति अथाह निष्ठा के बारे में तो बताती है पर यह नहीं बताती कि वे भी उतने ही साधारण या असाधारण मनुष्य हैं जितना कि कोई दूसरा हो सकता है। सैनिकों के दुर्दम्य जीवन और उनके सुखों-दुखों पर केन्द्रित मुकुल जोशी के कहानी-संग्रह ‘लाइफ़-लाइन’ में कुल ग्यारह कहानियाँ हैं। ये कहानियाँ सैनिकों के जीवन की इस रूढ़ छवि को जितना पुष्ट करती हैं उतना ही ध्वस्त भी करती हैं। ऐसा करते हुए ये ऐसे सैनिकों को हमारे सामने ले आती हैं जिनके प्रति सिर्फ सम्मान ही नहीं जागता बल्कि उनसे हम कुछ उस तरह से भी प्रेम या लड़ाई कर सकते हैं जैसे अपने किसी भाई या दोस्त के साथ करते हैं। इन कहानियों में 'जैतूनी हरे रंग में डूबे हुए' सैनिकों का जीवन उनके सुख-दुख, स्वप्न-दुःस्वप्न इतने साफ और पारदर्शी रूप में सामने आए हैं कि इसे पढ़ते हुए हम उन्हें सैनिक के रूप में देखने के साथ-साथ मनुष्य के रूप में भी देख पाते हैं। इसे पढ़ते हुए हम बार-बार जानते हैं कि वे अपने पीछे एक गौरव के साथ-साथ बहुत सारा खालीपन छोड़ जाते हैं जिसे कभी भी नहीं भरा जा सकता। —मनोज कुमार पांडेय - [Dheemi Wali Fast Passenger](https://kitablelo.com/dheemi-wali-fast-passenger/): धीमी वाली फास्ट पैसेंजर | Dheemi Wali Fast Passenger पचास से अधिक वर्षों तक भारतीय राजनीति और समाज को बेहद क़रीब से देखने-समझने वाले यशस्वी पत्रकार मार्क टली की दूसरी कथाकृति है—धीमी वाली फ़ास्ट पैसेंजर। इस किताब की कहानियों के लिए वह एक बार फिर अपनी मशहूर बेस्टसेलर, द हार्ट ऑफ़ इंडिया के इलाक़े में लौटते हैं, और हमें बीती सदी के आठवें दशक के उस दौर में ले जाते हैं, जब भारत चौराहे पर था और आर्थिक उदारीकरण की बयार बहने वाली थी। पूर्वी उत्तर प्रदेश की ग्रामीण दुनिया को रेखांकित करती ये कहानियाँ तमाम अविस्मरणीय लोगों की ज़िन्दगी का ख़ाका हैं—ऐसे साधारण लोग जो ढुलमुल हुकूमत, बेईमानी, भ्रष्टाचार और समाज में ऊँच-नीच जैसी ख़ामियों से पार पाने के तरीक़े खोजते हैं। सन्त रविदास का मन्दिर बनाने के लिए एक दब्बू दलित बुज़ुर्ग परम्पराओं को चुनौती देता है; एक किसान की साफ़गो और चतुर पत्नी अपने परिवार को अपने पति की मूर्खताओं से बचाती है; एक ख़त्म हो रही रेलवे लाइन का वजूद बचाने के लिए एक पूर्व प्रधानाध्यापक आम लोगों की लड़ाई का नेतृत्व करती है; एक राजनेता का बेटा इस सच से वाकिफ होता है कि राजनीति कुल मिलाकर पारिवारिक पेशा नहीं है। एक शान्तिप्रिय और निरुत्साही पुलिस सब-इंस्पेक्टर हत्या के एक हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाकर सबको चौंका देता है; एक अनीश्वरवादी शख़्स भिक्षु बन जाता है। धीमी वाली फ़ास्ट पैसेंजर उत्तर भारत के गाँवों में लोगों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी की हलचलों के बारे में जोश और ज़हानत, संवेदना और करुणा के नज़रिये से दर्ज की गई कहानियों का बेहद दिलकश संग्रह है। - [Narivadi Nigah Se](https://kitablelo.com/narivadi-nigah-se/): नारीवादी निगाह से | Narivadi Nigah Se Seeing Like a Feminist का अनुवाद  इस किताब की बुनियादी दलील नारीवाद को पितृसत्ता पर अन्तिम विजय का जयघोष सिद्ध नहीं करती। इसके बजाय वह समाज के एक क्रमिक लेकिन निर्णायक रूपान्तरण पर ज़ोर देती है ताकि प्रदत्त अस्मिता के पुरातन चिह्नों की प्रासंगिकता हमेशा के लिए ख़त्म हो जाए। नारीवादी निगाह से देखने का आशय है मुख्यधारा तथा नारीवाद, दोनों की पेचीदगियों को लक्षित करना। यहाँ जैविक शरीर की निर्मिति, जाति-आधारित राजनीति द्वारा मुख्यधारा के नारीवाद की आलोचना, समान नागरिक संहिता, यौनिकता और यौनेच्छा, घरेलू श्रम के नारीवादीकरण तथा पितृसत्ता की छाया में पुरुषत्व के निर्माण जैसे मुद्दों की पड़ताल की गई है। एक तरह से यह किताब भारत की नारीवादी राजनीति में लम्बे समय से चली आ रही इस समझ को दोबारा केन्द्र में लाने का जतन करती है कि नारीवाद का सरोकार केवल ‘महिलाओं’ से नहीं है। इसके उलट, यह किताब बताती है कि नारीवादी राजनीति में कई प्रकार की सत्ता-संरचनाएँ सक्रिय हैं जो इस राजनीति का मुहावरा एक दूसरे से अलग-अलग बिन्दुओं पर अन्तःक्रिया करते हुए गढ़ती हैं। - [Adhoora - Alok Singh Khalauri](https://kitablelo.com/adhoora/): अधूरा | Adhoora भारत की साहित्यिक परंपरा में हॉरर और अलौकिक कहानियों का एक विशेष स्थान रहा है। पुरानी लोककथाओं, पौराणिक कथाओं और धार्मिक ग्रंथों में ऐसे अनेक पात्र और घटनायें मिलती हैं, जो आज भी लोगों के मन में डर और रहस्य का संचार करती हैं। समकालीन लेखन में भारतीय लेखक इस विधा को नई ऊँचाइयों पर ले जा रहे हैं, जिसमें भूत-प्रेत, आत्मायें और अदृश्य शक्तियाँ मुख्य भूमिकायें निभा रही हैं। इन कहानियों में समाज के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हुए, अक्सर इंसानी भावनाओं और मान्यताओं के साथ अलौकिक तत्वों को जोड़ा जाता है, जो पाठकों को अपनी ओर खींच लेता है। कभी-कभी, जाने-अनजाने कुछ ऐसा घटित हो जाता है, जो मृत्यु के बाद भी इंसान को मुक्त नहीं होने देता। यह प्रेम भी हो सकता है, ज़िम्मेदारी भी हो सकती है, बदला भी हो सकता है, लालच भी हो सकता है, या फिर कोई अधूरापन भी। कारण चाहे जो भी हो, परंतु यह इतना शक्तिशाली होता है कि मृत व्यक्ति को भी इस दुनिया से बांधे रखता है। ऐसा ही कुछ हुआ था उस रात, जब एक आत्मा अपनी अधूरी इच्छाओं और गहरी पीड़ा के कारण इस दुनिया में ही रुक गई थी। उसकी उपस्थिति ने हौलनाक हत्याओं के सिलसिले को जन्म दिया। जो भी उस अदृश्य शक्ति को रोकने की कोशिश करता, वही मारा जाता। आलोक सिंह खालौरी की यह कहानी है दृश्य और अदृश्य के बीच हुई एक भयावह जंग की। यह कहानी है अधूरा की, जिसमें एक आत्मा अपनी अधूरी इच्छाओं के साथ इस दुनिया में आतंक का पर्याय बन गई थी। - [But Ka Khoon](https://kitablelo.com/but-ka-khoon-chandar/): बुत का खून | But Ka Khoon भोलाशंकर सीरीज  सविता भोलाशंकर की प्रतीक्षा कर रही थी, पर भोलाशंकर की बजाय आया एक अजनबी जिसने सविता के घर में दम तोड़ दिया। कौन था वह? क्यों थी उसे भोलाशंकर की तलाश? क्या था पूरा मामला जिसमें चीनी जासूसों और हत्यारों की भी टाँगें फँसी थीं? जानने के लिए पढ़ें भोलाशंकर सीरीज का रोमांचकारी उपन्यास बुत का खून। - [Artist (Hindi)](https://kitablelo.com/artist-hindi/): आर्टिस्ट | Artist उस बंगले में एक ‘आर्टिस्ट’ रहती थी। लेकिन फिर उस बंगले में एक मर्डर हो गया। जिस तरह से मर्डर किया गया, उससे पता चलता था कि मर्डर करने वाला उससे भी बड़ा ‘आर्टिस्ट’ है। वैसे भी फुलप्रूफ़ तरह से मर्डर करना एक आर्ट ही है। और वह मर्डर तो ऐसा था, जो दिमाग को पूरी तरह घुमाकर रख दे। न किलर का पता था और न यह पता था, मर्डर किसका हुआ है? है न किसी ज़बरदस्त ‘आर्टिस्ट’ का गेम प्लान? तो चैलेंज अब आपके लिये है, रहस्य-रोमांच की इस दुनिया में दाखिल होइये और पता लगाइये, किसने मर्डर किया? और सबसे ज़बरदस्त बात, मर्डर किसका हुआ? एक ऐसी मर्डर मिस्ट्री, जो ‘अमित खान’ की कलम से भी पहले कभी नहीं निकली। साबित कीजिये- आप किलर से भी ज्यादा बड़े ‘आर्टिस्ट’ हैं और आप बड़ी-से-बड़ी मर्डर मिस्ट्री को चुटकियों में सॉल्व कर सकते हैं। आर्टिस्ट एक बेहद चौंका देने वाली खौफ़नाक मर्डर मिस्ट्री, जिसमें उस लड़की की आत्मा भी भटक रही है, जिसका मर्डर हुआ। - [Hum Nahin Change Bura Na Koy](https://kitablelo.com/hum-nahin-change-bura-na-koy/): हम नहीं चंगे बुरा न कोय | Hum Nahin Change Bura Na Koy आत्मकथा भाग-2  लोकप्रिय साहित्य हिन्दी अकादमिक जगत के लिए मूल्यांकन की चीज़ कभी नहीं रहा, लेकिन हिन्दी के शिक्षित समाज का बड़ा तबका उसके ही असर में रहता आया है। हमें लोकप्रिय साहित्य का बाज़ार तो दिखता है, उसकी आन्तरिक दुनिया की बनावट नहीं दिखती। ऐसे में लोकप्रिय लेखन के एक बड़े नाम सुरेन्द्र मोहन पाठक आत्मकथा लिखकर बहस और मूल्यांकन की एक नई ज़मीन तैयार कर रहे हैं। उनका अपना जीवन है भी ऐसा जिसके बारे में दूसरों को दिलचस्पी हो! कान में सुनने की मशीन, आँखों पर मोटे लेंस का चश्मा लगाए, नौकरी करते हुए, तीन सौ से अधिक सफल उपन्यास लिखने वाले पाठक जी अपने ही रचे किसी अमर किरदार जैसे आकर्षक व्यक्तित्व वाले हैं। लेखन के तौर-तरीक़े और ख़ुद के लिए तय किया हुआ अनुशासन अचरजकारी! लाखों पाठकों की रुचि को समझना, उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने के दबाव को धता बताते हुए उनके दिमाग़ पर क़ब्ज़ा जमाना—यह कोई मामूली बात नहीं है। इन सब बातों को समझने में एक औज़ार का काम कर सकती है यह आत्मकथा—हम नहीं चंगे बुरा न कोय। - [Nindak Niyare Rakhiye](https://kitablelo.com/nindak-niyare-rakhiye/): निंदक नियरे राखिए | Nindak Niyare Rakhiye आत्मकथा खंड-3  लोकप्रिय फिक्शन के जादूगर कथाकार सुरेन्द्र मोहन पाठक की आत्मकथा के इस खंड में उनके जीवन के उस दौर का वर्णन है, जब वे पाठकों में व्यापक स्वीकृति और प्रसिद्धि पा चुके थे। यह उनका लेखकीय जीवन है जिसमें प्रकाशकों से उनके रिश्ते और प्रशंसकों-पाठकों की बातें आई हैं। गम्भीर और साहित्यिक हिन्दी समाज, लेखकों और पाठकों के लिए इस आत्मकथा से गुजरना निश्चय ही एक समानान्तर संसार में जाना होगा, लेकिन यह यात्रा लगभग जरूरी है। खास तौर पर यह जानने के लिए कि लेखन की वह प्रक्रिया कैसे चलती है जिसमें पाठक की उपस्थिति बहुत ठोस होती है। अपने पाठकों के चहेते लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक की बढ़ती प्रसिद्धि के दिनों के खट्टे मीठे क़िस्से और उनकी दुनियादारी की सत्यकथा। प्रशंसकों की दीवानगी के हैरान कर देने वाले क़िस्सों को उतने ही दिलचस्प तरीके से बयान करती है आत्मकथा की यह तीसरी कड़ी। पाठकों की ही नहीं, प्रकाशकों से भी बनते-बिगड़ते रिश्तों की भी बेबाक यादें शामिल। लेखक कैसे अपने पाठकों के दिलों का बादशाह बन जाता है, एक लेखक के लिए उसके पाठक का क्या और कितना महत्त्व है-जानने के लिए एक रोचक किताब।. - [Dubai Gang (English)](https://kitablelo.com/dubai-gang-english/): FROM THE BADSHAH OF CRIME WRITING COMES ANOTHER PAGE-TURNER DUBAI GANG Bad luck is a regular companion of Jeet Singh, the cabbie. This time he picks a passenger with a large piece of luggage, takes him to his destination where the passenger vanishes leaving Jeet Singh stuck with the piece of luggage. He is forced to take it to the local police station where all hell breaks loose due to the piece of luggage left purposely behind by the passenger. An electrifying thriller impossible to put down SURENDRA MOHAN PATHAK is a time-tested mystery writer now proudly presented by SAHITYA VIMARSH PRAKASHAN - [Bibhutibhushan Ki Parlaukik Kathayein](https://kitablelo.com/bibhutibhushan-ki-parlaukik-kathayein/): Bibhutibhushan Ki Parlaukik Kathayein | बिभूतिभूषण की पारलौकिक कथायें बिभूतिभूषण की पारलौकिक कथायें खंड 1 में निम्न कहानियाँ संग्रहित हैं: 'तारानाथ तांत्रिक की कहानी', 'विरजा होम में बाधा', 'काशी कविराज की कहानी', 'भूत बसेरा', 'भुतहा पलंग', 'अभिशप्त पुकार', 'रंकिणी देवी का खड्ग', 'पुरातत्व', 'बोमाईबुरु का जंगल', 'प्रतिमा-रहस्य', 'वह काली लड़की', 'गोरे सैनिक का मेडल', 'आकाश-परी', 'बहू-चण्डी का मैदान', 'मेघ-मल्हार' उनके चारों तरफ बड़े मैदान में जिधर भी नजर जा रही थी, अनगिनत सफेद कंकाल खड़े थे— दूर में, पास में, दाहिनी ओर, बाँयी ओर। बहुत ही पुराने जमाने के जीर्ण कंकाल, बहुतों के हाथों की सारी उँगलियाँ नहीं थीं, बहुतों की हड्डियाँ धूप में जलकर चटक गयी थीं, किसी की खोपड़ी में छेद था, किसी के पैरों की हड्डी मुड़कर टेढ़ी-मेढ़ी हो रही थी। उनके चेहरे भी इधर-उधर थे। खड़े होने की उनकी भंगिमा से जान पड़ रहा था कि किसी ने बहुत सावधानी के साथ इन्हें खड़ा कर रखा है— जैसे ही वह इन्हें छोड़ेगा, हड्डियों के ये जीर्ण-शीर्ण, टेढ़े-मेढ़े, सीलनयुक्त ढाँचे भरभराकर गिरकर हड्डियों के स्तूप में बदल जाएँगे; जबकि वे सजीव भी जान पड़ रहे थे— सभी मानो मेरी पहरेदारी कर रहे थे कि मैं प्राणों के साथ इस श्मशान से न भाग सकूँ। अपने हाथों की हड्डियाँ बढ़ाकर सभी मानो मेरी गर्दन दबोचने की प्रतीक्षा में थे। -संग्रह में मौजूद कथा 'तारानाथ तांत्रिक की कहानी' से प्रसिद्ध बँगला लेखक बिभूतिभूषण बन्द्योपाध्याय की पंद्रह पारलौकिक कथाओं का संकलन, जिनमें मौजूद हैं शापित वस्तुएँ, भूतहा जगहें, भूत-प्रेत और इनसे जूझते कई किरदार - [Dhurandhar-Sanak Shiromani](https://kitablelo.com/dhurandhar-sanak-shiromani/): Dhurandhar - Sanak Shiromani | धुरंधर - सनक शिरोमणि इंस्पेक्टर गोकुल दुबे का जन्म ऐसे नक्षत्र हुआ था कि गोकुल और बवाल एक दूसरे के पर्याय बन गये। सनकी, उद्दंड किंतु गजब के मेधावी गोकुल ने जो भी सोचा उसे पाकर ही दम लिया। जिसके पीछे पड़ गया समझो उसका सर्वनाश हो ही गया। फिर कुछ ऐसा हुआ जिससे उसका सारा अहंकार और भौकाल चूर-चूर हो गया। सारी धुरंधरई हवा हो गई, जिंदगी एक झटके में बदल गई। वह ऐसे मोड़ पर आकर खड़ा हो गया जहां अचानक सैकड़ों दुश्मन उसकी जान के प्यासे थे। वह उस मुकाम पर खड़ा था जहाँ अनगिनत दुश्मन हर तरफ घात लगाए बैठे थे, और उसकी जान अब उनकी सबसे बड़ी चाहत बन चुकी थी। लेकिन अंडरवर्ल्ड यह नहीं जानता था उन्हें जिसकी तलाश है वह खुद उनके सामने आने के लिए बेचैन है। - [Peeley Kamre ka Rahasya](https://kitablelo.com/peeley-kamre-ka-rahasya/): Peeley Kamre Ka Rahasya | पीले कमरे का रहस्य The Mystery of the Yellow Room का अनुवाद फ्रांस के प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टैंगर्सन की लैबोरेटरी से अटैच्ड पीले कमरे में उनकी एकमात्र बेटी मैथिल्डा स्टैंगर्सन पर जानलेवा हमला होता है। हमले के समय मैथिल्डा पीले कमरे में अकेली थी और वह अंदर से पूरी तरह बंद था। कमरे की एकमात्र खिड़की पर ग्रिल लगा हुआ था और खिड़की के पल्ले भी अंदर से कुंडी से बंद किये हुए थे। किसी के लिए उस कमरे में प्रवेश करना या वहां से बाहर निकलना संभव नहीं था। जाँच के दौरान सबसे पहले मैथिल्डा के प्रेमी रॉबर्ट दारजाक के ऊपर शक जाता है। जबकि कुछ लोगों का ये मानना था कि यह काम ‘बेते द्यु बों दिउ’ कहे जाने वाले किसी राक्षस का था क्योंकि ऐसा काम किसी मानव के लिए संभव नहीं था। क्या पत्रकार जासूस जोसेफ रूलेटाबिल या जासूस फ्रेडरिक लार्सन इस रहस्य को सुलझा पाएंगे ? जानने के लिए पढ़ें सर्वकालिक महान लॉक्ड रूम मिस्ट्री में से एक "द मिस्ट्री ऑफ द येलो रूम" का हिंदी अनुवाद "पीले कमरे का रहस्य"। यह वही किताब है जिसे पढ़कर लॉक्ड रूम मिस्ट्री के जादूगर लेखक जॉन डिक्सन कार ने रहस्य कथाएँ लिखना शुरू की थीं। - [Akaal Mrityu](https://kitablelo.com/akaal-mrityu/): अकाल मृत्यु | Akaal Mrityu नीता अवस्थी एक भारतीय क्वांटम फिजिसिस्ट थी जिसका बचपन पारलौकिक घटनाओं के प्रभाव में बीता था। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में वैज्ञानिक के पद पर कार्य करते हुए उसे उल्कापिंड से मिले एक अनोखे पदार्थ पर रिसर्च करने का अवसर मिलता है जिसकी मदद से ऐसे अविष्कारों का निर्माण संभव था जिनकी अभी तक मात्र परिकल्पना ही की जा सकी थी। किंतु नीता के जीवन को एक बार फिर पारलौकिक घटनाएं पुरजोर से प्रभावित करना शुरू कर देती हैं जिनका सामना करने के लिए उसे अपने पिछले जन्म के बारे में जानना आवश्यक हो जाता है। तंत्र विद्या में कई सिद्धियां प्राप्त कर चुका नीता का मित्र शशांक उसका साथ देता है पर नीता को विश्वास था कि उसके उद्धार के लिए तंत्र के साथ क्वांटम फिजिक्स का एक अनोखा प्रयोग भी आवश्यक था। क्या था नीता और शशांक के पूर्वजन्म का रहस्य ? कैसे उनकी नियति आपस में जुड़ी हुई थी ? क्या नीता शैतानी शक्तियों से खुद को व अपने प्रियजनों को बचा पाएगी ? पारलौकिक घटनाओं पर आधारित एक अनोखी हॉरर-विज्ञान कथा जो मानव जीवन के जन्म जन्मांतर के कर्म, प्रायश्चित, और बलिदान के महत्व पर आधारित है। - [Dimple Lodge](https://kitablelo.com/dimple-lodge/): Dimple Lodge | डिंपल लॉज श्यामल बत्रा, एक नामचीन लेखक, जो अपनी शोहरत के शिखर पर था—लाखों दिलों की धड़कन, एक प्रेरणा। लेकिन एक रात सब कुछ बदल गया। उर्वशी सान्याल, एक ग्लैमरस सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर, के साथ डिंपल लॉज में बिताई गई एक शाम उसकी जिंदगी की सबसे भयानक सुबह में बदल गई क्योंकि अगली सुबह उर्वशी की लाश खुद उर्वशी के ही फ्लैट से बरामद हुई और शक की सूई घूमी सीधा श्यामल बत्रा की ओर। श्यामल बत्रा गिरफ्तार कर लिया गया। पर जल्द ही केस में कुछ ऐसे मोड़ आए जो सबको हैरान कर गए। बत्रा के अलावा बाकी के संभावित संदिग्धों की रहस्यमयी मौतें शुरू गई। क्या श्यामल बत्रा वाकई निर्दोष था? या सब कुछ उसकी ही एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था? इस कहानी में हर जवाब एक नई पहेली खड़ी करता है। यहाँ हर किरदार कुछ–न–कुछ रहस्य समेटे बैठा है। डिंपल लॉज—एक ऐसा सस्पेंस थ्रिलर जो आपको आखिरी पन्ने तक बाँधे रखेगा और अंत में चौंका देगा क्योंकि – “यहाँ हर मोड़ पर है एक अधूरी सच्चाई… और हर सच्चाई के पीछे है एक राज!” - [Jahangir Ki Swarnmudra](https://kitablelo.com/jahangir-ki-swarnmudra/): Jahangir Ki Swarnmudra | जहाँगीर की स्वर्णमुद्रा जहाँगीर की स्वर्णमुद्रा सुविख्यात फिल्म-निदेशक और बांग्ला लेखक सत्यजित राय की बारह कहानियों का महत्त्वपूर्ण संग्रह है। सत्यजित राय विरल कथा-स्थितियों और मानव-जीवन की विविधता के चितेरे हैं। देश-काल-परिवेश इस चित्रण में एक विराट फलक का कार्य करता है और उनकी अनुभव-सम्पन्न जीवन-दृष्टि विविध रंगों का। एक ऐसा समाज इन कहानियों में बराबर दिखाई देता है, जिसमें विभिन्न प्रकार की आशंकाएँ, कुंठाएँ और अन्तर्विरोध मानव-जीवन को प्रभावित-परिचालित करते हैं। फिर भी उनका मनुष्य कहीं हारता नहीं। ठगा जाकर भी ठगने की कोशिश नहीं करता और मानव-मूल्यों के प्रति एकनिष्ठ बना रहता है। यही कारण है कि वर्तमान व्यावसायिक सभ्यता से शोषित-प्रताड़ित होने के बावजूद कहीं-कहीं तो वह नैतिक प्रतिरोध की शक्ल अख्तियार करता दिखाई देता है। राय के कथा-लेखन की कुछ और विशेषताओं से भी ये कहानियाँ परिचित कराती हैं। मसलन, स्थितियों की निस्संग रहस्यात्मकता, व्यंग्य-विनोद का महीन पुट और शिल्पगत नाटकीयता। संक्षेप में कहा जाए तो हिन्दी पाठकों के लिए ये कहानियाँ एक अलग तरह का अनुभव-संसार सँजोए हुए हैं।. - [Dharamvir Bharati ki Shakhsiyat Aur Patrakarita](https://kitablelo.com/dharamvir-bharati-shakhsiyat-patrakarita/): संपादित पुस्तक : Dharamvir Bharati ki Shakhsiyat Aur Patrakarita (धर्मवीर भारती की शख्सियत और पत्रकारिता) संपादक: रवींद्र श्रीवास्तव, सुनील श्रीवास्तव और (स्व.) टिल्लन रिछारिया अनुक्रम  सृजनात्मक गर्मियाँ इलाहाबाद की / डॉ. धर्मवीर भारती अंतरंग धर्मयुग / पुष्पा भारती पत्रकारिता की कसौटी पर धर्मवीर भारती / अच्युतानन्द मिश्र भारती जी की कविताओं में भी पत्रकारिता की बू आती है / उषा किरण खान ‘अभ्युदय’ से पत्रकारिता का जीवन प्रारम्भ करने वाले भारती जी / डॉ. धनञ्जय चोपड़ा धर्मयुग: एक दीर्घ रचना-प्रक्रिया / प्रमोद जोशी लिखते समय पत्रकार अकेला नहीं होता: डॉ. धर्मवीर भारती / आलोक तोमर मेरी प्रतिबद्धता / उदयन शर्मा मैं निडर होकर ‘मुक्ति संग्राम’ के मोर्चे पर था: धर्मवीर भारती / रमेश निर्मल डॉ. धर्मवीर भारती: एक वार-रिपोर्टर / के. विक्रम राव हिंदी और धर्मवीर भारती की पत्रकारिता / शांता कुमार हिंदी लिटरेचर और जर्नलिज्म के सुपरस्टार भारती जी / विनोद तिवारी तो भारती जी इतने बड़े थे / अरविन्द मोहन ‘लीडिंग फ्रॉम द फ्रंट’ कप्तान थे भारती जी / विश्वनाथ सचदेव डॉक्टर सा’ब पत्रकारिता का ‘हेड मास्टर’! / रविन्द्र श्रीवास्तव धर्मयुग से नाता बचपन से ही जुड़ गया था / पुष्पेश पंत ‘गुनाहों का देवता’  ...यह थी डॉ. धर्मवीर भारती से मेरी पहली भेंट /  त्रिलोक  दीप उस गली से इस गली तक / चित्रा मुद्गल भारती जी हिंदी पत्रकारिता के सूर्य हैं / सुरेन्द्र शर्मा मेरे गुरुओं के गुरु डॉ. धर्मवीर भारती / संतोष भारतीय कठोर संपादक का स्नेहिल अवतार : धर्मवीर भारती / बुद्धिनाथ मिश्र सत्ताईस बरस अनवरत / महेश दर्पण वो दो चार महीने का वक्फा / दिनेश लखनपाल सर्जक धर्मवीर भारती / राजीव सक्सेना डेढ़ गो बोझा दीयर में खलिहान / चंद्रकिशोर जायसवाल ‘धर्मयुग’ भारती जी के समग्र व्यक्तित्व का प्रतिबिंब था / सविता मनचंदा डॉ भारती मेहनत करने और कराने वाले संपादक थे / अनुराग चतुर्वेदी मधुरिम रिश्तों के बीच डा. धर्मवीर भारती / प्रो. सुशील राकेश धर्मयुग का भारती कुलम् / टिल्लन रिछारिया रिश्ते बनाने और निभाने में बड़े माहिर रहे भारती जी / अनिता गोपेश अपना लोकनाथ किसी से उन्नीस नहीं पड़ना चाहिए / यश मालवीय धर्मयुग का शिखर काल और संपादक धर्मवीर भारती / डॉ. सीमान्त प्रियदर्शी संपादकों के संपादक धर्मवीर भारती / राजकुमार सिंह हमारी शरारतें और भारती जी की अन्तरंग पत्रकारिता / सुरेन्द्र सुकुमार धर्मयुग की पत्रकारिता, भारती जी और हम / सुनील श्रीवास्तव पत्र… ‘संपादक धर्मयुग’ के नाम / अरविन्द मालवीय - [Zahreele Panje](https://kitablelo.com/zahreele-panje/): Zahreele Panje "ज़हरीले पंजे" एक सनसनीखेज जासूसी उपन्यास हैजिसमें कातिल सिर्फ खंजर या गोली से नहीं मारता —वो छिपकर वार करता है, अपने ज़हरीले पंजों से। "ज़हरीले पंजे" सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसा खेल है —जहाँ इंसानियत की त्वचा के नीचे, हैवानियत के नाखून छुपे हैं। - [Nayan Bhar Nasha](https://kitablelo.com/nayan-bhar-nasha/) - [Roopghar Ki Roopasi](https://kitablelo.com/roopghar-ki-roopasi/): Roopghar Ki Roopasi रूप घर की रूपसी एक रहस्य और सौंदर्य से सजी कहानी है, जहाँ ग्लैमर, अपराध और साजिशों की दुनिया एक-दूसरे से टकराती है। कहानी की पृष्ठभूमि है—"रूप घर", एक हाई-फाई ब्यूटी इंस्टिट्यूट जहाँ शहर की अमीर औरतें सुंदर बनने आती हैं। लेकिन पर्दे के पीछे कुछ और ही चल रहा है। रूप, सुंदरता और त्वचा की देखभाल की आड़ में एक खौफनाक रैकेट पनप रहा है—जिसमें ब्लैकमेलिंग, धोखाधड़ी और यहां तक कि मर्डर तक शामिल है। - [Apsaraon Ka Apaharan](https://kitablelo.com/apsaraon-ka-apaharan/): "अप्सराओं का अपहरण" एक ऐसी रोमांचक कहानी हैजहाँ सुंदरियों की रहस्यमयी गुमशुदगी के पीछे छुपा हैएक ऐसा अंधेरा सच,जो समाज के सबसे ऊँचे और सबसे नीच स्तर — दोनों को बेनकाब करता है। ये केवल अपहरण नहीं, एक संगठित अपराध की परछाईं है… "अप्सराओं का अपहरण" एक ऐसी कहानी है जो बताती है: सुंदरता जब शक्ति बन जाए, तो अपराधियों की दुनिया थरथराने लगती है। - [Sakshatkar by Manav Kaul](https://kitablelo.com/sakshatkar-by-manav-kaul/): मानव का उपन्यास ‘साक्षात्कार’ लेखन एवं वास्तविकता के बीच बहुत दिलचस्प आवाजाही करता है और लेखक, लेखन तथा उसके जीवन के भेद को कथासूत्र में पिरोता है। इस उपन्यास के तीन मुख्य पात्रों की अपनी-अपनी कहानी हैं, तीनों एक ही कहानी के तीन संस्करण हैं, लेकिन किस तरह वे एक-दूसरे के वास्तविक जीवन और फ़िक्शनल ज़िंदगी को प्रभावित करते हैं- इस उपन्यास का बहुत ही उल्लेखनीय पक्ष है। एक मनुष्य का कितना जीवन वास्तविक है और उस वास्तविकता में कल्पना कहाँ से प्रवेश करती है और किस तरफ़ यात्रा करती है- इस उपन्यास के मूल में है। - [615 Poorvanchal Hostel](https://kitablelo.com/615-poorvanchal-hostel/): यह उपन्यास जेएनयू जीवन पर आधारित है। कहते हैं जो भी यहाँ कुछ साल रहकर पढ़ाई-लिखाई कर लेता है उसे प्रेम हो जाता है, यहाँ की हवा से, पहाड़ी से, यहाँ तक कि कैंटीन, रास्ते और वो सब कुछ से जिसे आँखों से देखा जा सके। जो यहाँ के हो गए वे फिर कहीं और के नहीं हो पाए। उपन्यास में तीन मुख्य पात्र हैं- शेखर, इवा और जेएनयू। शेखर नाम का एक युवा पूरब से जेएनयू में पढ़ाई के लिए आता है और फिर जेएनयू कैसे शेखर के जीवन को साँचे में ढालता है यही इस उपन्यास का विषय है। यहाँ प्रेम है तो छात्र राजनीति भी, लाइब्रेरी में पढ़ाई है तो लाइब्रेरी कैंटीन में दोस्तों के बीच डिस्कशन भी, द्वेष है और द्वंद्व भी, ऐकडेमिक करियर है तो जीवन के संघर्ष भी। छात्र जीवन के तमाम पहलुओं को आपस में समेटे यह उपन्यास आपको देश के सबसे प्रसिद्ध और सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय में आमंत्रित-सा करता प्रतीत होता है। तो आइए चलते हैं शेखर, इवा और उनके जेएनयू की दुनिया में… - [Mumbai Nights](https://kitablelo.com/mumbai-nights/): Mumbai Nights माया नगरी मुंबई में एक बड़े फिल्म स्टार रोहित शंकर सिंह की मौत। पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है, निशाने पर है रोहित की प्रेमिका अनामिका त्रिपाठी। कॉलेज में पढ़ने वाली एक लड़की रोहित की मौत की जांच के लिये दिल्ली के प्राइवेट डिटेक्टिव विशाल सारस्वत की सेवाएं लेती है। अनामिका भी खुद को बेदाग साबित करने के लिये मुंबई की एक डिटेक्टिव अमीना शेख को बुलाती है ... शक के दायरे में हैं फिल्म इंडस्ट्री की ताकतवर हस्तियां और फिर शुरू होती हैं सिलसिलेवार हत्याएं…। साज़िश का सिरा जुड़ता है 'मुंबई नाइट्स' क्लब से। यहां सब कुछ वैसा नहीं होता, जैसा दिखता है। ग्लैमर के पीछे छिपे हैं ऐसे गहरे राज़, जिन्हें उजागर करना मौत को न्यौता देना है। हर कदम पर धोखा, हर मोड़ पर खतरा। क्या विशाल और अमीना साजिशों के जाल से बचकर सच तक पहुंच पाएंगे? या ‘मुंबई नाइट्स’ की चमकीली पर रहस्यमयी रातें उन्हें भी निगल जाएंगी? क्या होगा, जब झूठ की परतों में छिपी कठपुतलियों के चेहरे से नकाब उतरेंगे? कौन है, जिसके हाथ में है इन कठपुतलियों की कमान? कौन है, जो विशाल और अमीना की जान के पीछे पड़ा है? - [Matlab Hindu](https://kitablelo.com/matlab-hindu/): अम्बर पाण्डेय का उपन्यास ‘मतलब हिन्दू’ एक अनोखा उपन्यास है। यह उपन्यास लिखे हुए शब्दों के भेष में बोले गये शब्दों में अपने नरेटिव की ऊँचाइयों को छू लेता है। मैंने इस रचनात्मक प्रयोग को हिन्दी फ़िक्शन में इतनी सुन्दरता और गहनता के साथ बरतते हुए आज तक नहीं देखा। महान चेक उपन्यासकार मिलान कुन्देरा का कहना है कि नॉवेल में अगर अस्तित्व के किसी छुपे हुए आयाम पर प्रकाश नहीं पड़ता, तो नॉवेल लिखना बेकार है। ‘मतलब हिन्दू’ में तो हर पन्ने पर ऐसी रौशनी बिखरी हुई है जो हमारे अन्धकार में छुपे गुनाहों को बहुत बेरहमी से रौशन कर देती है। ‘मतलब हिन्दू’ का बयानिया बहुत घना है और इस घनेपन के रेशों को मानवीय संवेदनाओं और इन्सान के दुखों से बुना गया है। यह उपन्यास हमें बताता है कि हमारी सारी axiology (मूल्यशास्त्र) पहले ही से शायद नकटी है और नक़ली नाकें उस पर कभी भी पूरी तरह फिट नहीं बैठती हैं। ये सब एक भयानक रूप से हास्यास्पद भी है। गांधी जी का चरित्र एक तरह से उपन्यास के बुनियादी चरित्र के लिए एक चैलेंज है जिससे वह जगह-जगह सहमा हुआ सा भी नज़र आता है। उसको यह भी शक होता है कि कहीं गांधी जी भी तो व्यभिचार या फिर अनैतिकता के दोषी थे कि नहीं थे। गांधी जी के चरित्र और उपन्यास में समाये हुए इतिहासबोध ने अविश्वसनीय को जिस तरह विश्वसनीय बना दिया है, वह भी अम्बर पाण्डेय की क़लम का एक करिश्मा ही कहा जायेगा। नॉवेल के अन्त में पहुँचकर मुझे यह भी महसूस हुआ कि जैसे मैंने किसी यूनानी ट्रेजेडी को पढ़कर ख़त्म किया हो। एक ऐसी ट्रेजेडी जो अपनी हास्यास्पदता की वजह से और भी ज़्यादा बड़ी बन गयी हो। यह काम आधुनिक समय में एक बड़ा नॉवेल ही कर सकता है। यह काम इस नॉवेल यानी ‘मतलब हिन्दू’ के ज़रिये अपने अंजाम को पहुँचा। - खालिद जावेद, उपन्यासकार - [Ludhaktey Patthar](https://kitablelo.com/ludhaktey-patthar/): Ludhaktey Patthar गुरुदत्त के ऐतिहासिक उपन्यासों का कथ्य प्राचीन होते हुए भी समकालीन जैसा ही दिखाई देने लगता है । प्रस्तुत खण्ड के उपन्यास ‘ लुढ़कते पत्थर ‘ के अशोक और ‘ पुष्यमित्र ‘ के बृहद्रथ के राज्यों की दुर्बल नीतियाँ , उनके विनाश , राज्यों के पतन और जनता के असन्तोष का कारण बनी थीं । क्या यही कुछ हम आज के राजनैतिक वातावरण में नहीं पाते ? इस दृष्टि से उनके ऐतिहासिक उपन्यासों में प्रस्तुत तथ्य उनके विशेष दृष्टिकोण का एक महत्त्वपूर्ण पहलू हैं । आज भी राज्याधिकारियों में व्याप्त भ्रष्टाचार , स्वार्थवश पारस्परिक हित – चिन्तन का अभाव , अनीति , अशान्ति और अस्थिरता का साम्राज्य व्याप्त दिखाई देता है । इस उपन्यास के वर्ण्यकाल में तो केवल राजप्रासादों तथा बौद्ध विहारों में ही षड्यन्त्रों की रचना का उल्लेख पाया जाता है , किन्तु आज के वातावरण में तो नगर – नगर में ही नहीं अपितु नगर की प्रत्येक वीथि तथा ग्राम ग्राम में अपने ही प्रकार के षड्यन्त्र रचे जा रहे हैं , कहीं राज्य के विरुद्ध तो कहीं प्रजा के विरुद्ध स्व ० श्री गुरुदत्त ने अपने उपन्यासों के माध्यम से युग के ऐतिहासिक कर्णधारों को अपने वर्ण्यविषय द्वारा प्रमाण – पुष्ट चेतावनी दी है , दुर्बलता की नीति के परित्याग का आह्वान किया है और उपन्यासों के नायकों के चरित्रों द्वारा उचित और उपयुक्त मार्ग को परिलक्षित किया है । उनका प्रत्येक उपन्यास अन्यतम है । समस्या चाहे ऐतिहासिक हो अथवा राजनैतिक या कुछ अन्य , उन सबका समाधान वे अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने में समर्थ रहे हैं । अपने विस्तृत ज्ञान के आधार पर वे विषय का सम्यक् मन्थन कर पाठक के लिए नवनीत प्रस्तुत कर देते हैं । रोचकता उनके उपन्यासों की अन्य विशेषता है - [44 SAAL KE BAAD](https://kitablelo.com/44-saal-ke-baad/): 44 Saal Ke Baad पढ़ने, संगीत, निजी संस्थान में नौकरी, पारिवारिक, सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने के पश्चात, बचे समय में कुछ लिखने वाले, मूल रूप से उत्तराखंड के, और पिछले ढाई दशकों से दिल्ली राजधानी क्षेत्र में रह रहे गाजियाबाद निवासी, पराग डिमरी की ये छठी पुस्तक है। डेढ़ साल से कुछ ही ज्यादा के अंतराल में, ये उनकी चौथी प्रकाशित रचना है। पूर्व प्रमुख प्रकाशित रचनाएं संगीतकार ओ पी नैय्यर की जीवन गाथा, छोटे से शहर कोटद्वार में गुजरे बचपन, लडकपन की कहानी, और महानगर की जीवन शैली का सुख, उसके साइड इफेक्टस भोगने, सहने के बाद‌, एक छोटी सी, अलग थलग जगह के वासी बन जाने की, कथाएं रही हैं। प्रस्तुत रचना “चवालीस साल के बाद” एक ऐसी प्रेम कहानी है, जो साढ़े चार दशकों के अलगाव के बाद भी खत्म, विलुप्त नहीं हो पाती, कुछ किंतु, परंतु के साथ, महक वाली ही बनी रहती है, जो इसके पाठकों को भी महकाती रहती है। - [Samar Shesh Hai](https://kitablelo.com/samar-shesh-hai/): Samar Shesh Hai (समर शेष है) अब्दुल बिस्मल्लाह का कथात्मक उपन्यास है। कथा नायक है, सात-आठ साल का मातृविहीन बच्चा, जो कि पिता के साथ-साथ स्वयं भी भारी विषमता से ग्रसित है, लेकिन पिता का असामयिक निधन उसे जैसे विकट जीवन-संग्राम में अकेला छोड़ जाता है। पिता के सहारे उसने जिस सभ्य और सुरक्षित जीवन के सपने देखे थे, वे उसे एकाएक ढहते हुए दिखाई दिए। फिर भी उसने साहस नहीं छोड़ा और पुरुषार्थ के बल पर अकेले ही अपने दुर्भाग्य से लड़ता रहा। इस दौरान उसे यदि तरह-तरह के अपमान झेलने पड़े तो किशोरावस्था से युवावस्था की ओर बढ़ते हुए एक युवती के प्रेम और उसके हृदय की समस्त कोमलता का भी अनुभव हुआ, लेकिन इस प्रक्रिया में न तो वह कभी टूटा या पराजित हुआ और न ही अपने लक्ष्य को कभी भूल पाया। कहने की आवश्यकता नहीं कि विपरीत स्थितियों के बावजूद संकल्प और संघर्ष के गहरे तालमेल से मनुष्य जिस जीवन का निर्माण करता है, यह कृति उसी की अभिव्यक्ति है। - [Andhere Mein Buddha](https://kitablelo.com/andhere-mein-buddha/): Andhere Mein Buddha | अँधेरे में बुद्ध उनींद, अवसाद, शोक, स्मृतियाँ, आत्मा के ख़ाली पात्र को भरता एकान्त और उसे वापस सोख लेता अकेलापन, मृत्यु, बिछोह और दुख, ‘अँधेरे में बुद्ध’ की कविताएँ ऐसे ही तत्वों से बनी हैं। ये कविताएँ जितनी अपने बारे में हैं उतनी ही दूसरों के बारे में, और उन चीज़ों के बारे में जो सबकी हैं, जैसे सपने, जैसे हताशाएँ, जैसे पीड़ा। ये कविताएँ अपने आधे सिर के दर्द के साथ कभी ईश्वर से संवाद करती हैं, कभी अपनी देह से, कभी-कभी उन लोगों से भी जो चले गए, लेकिन जो हमारी देह की किसी टीसती नस में अभी भी जीवित बहते हैं। ये कविताएँ उन ततैयों के बारे में भी हैं जो जीवन की दीप्ति में प्रकाशमान हमारे माथों के भीतर चुपचाप बैठे रहते हैं, और व्यर्थताबोध की किसी तीखी कौंध में अचानक भन्नाने लगते हैं, और बेशक उनके बारे में भी जो चुप बैठते ही नहीं, रात-दिन भन्नाते ही रहते हैं—हर साँस पर और तेज़। दुख के खोटे सिक्के को बचाने को व्याकुल इन कविताओं में प्रेम का दुख भी है, आत्मा और देह के दुख भी हैं, इतिहास के दुख भी हैं, जीवन की दैनिंदिनी की मशीन से झरते दुख भी हैं...और वह दुख भी है जो बस इसीलिए होता है, क्योंकि हम होते हैं, जिसे बुद्ध ने देखा। - [Metronama](https://kitablelo.com/metronama/): Metronama | मेट्रोनामा जैसा यह दिल्ली महानगर है, वैसी ही परतदार हैं मेट्रोनामा की ये कहानियाँ । देवेश की निगाहें इन परतों को प्यार, चुहल, हसरत और बारीकी से देखती हैं। किताब में बहुत कुछ निब्बा-निब्बी रंग का इश्क़, गाँव से आए देहाती परिवारों की ठसक, शहर में काम करने वाले मज़दूरों के सपने, रंग-बिरंगे गुन-गुन करते बच्चे, कुनमुनाते - झींखते अंकल-आंटियाँ, मेट्रो के दिलजले कमेंटबाज़, हक़ के लिए ज़िद ठाने लड़कियाँ और शाइस्ता बुजुर्ग वग़ैरह-वग़ैरह। इतने तरह के लोगों की इतनी जीवित कहानियों से गुज़रते हुए आप मुस्कराएँगे, हँसेंगे, उदास होंगे और कई बार आपकी आँखें भर आएँगी। मेट्रोनामा सिर्फ़ मेट्रो की कहानियों का गुलदस्ता नहीं है । यह मेट्रो के भीतर और बाहर बदलते शहर, रिश्तों और ज़िन्दगी का आईना है। यह किताब समग्रता में मेट्रो सिटी का एक नया ही नक़्शा खींचती है, जो आमतौर पर हमसे अनदेखा रह जाता है। इस नई नज़र की दिल्ली मेट्रो में आपका स्वागत है! - [Aghoshit Ulgulan](https://kitablelo.com/aghoshit-ulgulan/): Aghoshit Ulgulan | अघोषित उलगुलान सभ्यता के तथाकथित केन्द्रों से अपसरित आक्रामक विकास के विरुद्ध संघर्षरत नागरिकता के आत्मनिर्भर हाशियों के पक्ष में हिन्दी कविता को एक निर्णायक भंगिमा देने में अनुज लुगुन की कविता की अहम भूमिका रही है। आदिवासियत को जीवन-पद्धति के साथ-साथ एक वैचारिक अवधारणा के रूप में प्रतिष्ठित करते हुए उन्होंने प्रतिरोध की काव्य-चेतना को एक सशक्त मोर्चा देने का प्रयास निरंतर अपनी कविता में किया है। वे उस जीवन के बीचोबीच रहते आए हैं जो मुख्यधारा से दूर अपनी प्राकृतिक जिजीविषा और सम्पूर्णता के साथ पेड़ों, पहाड़ों, नदियों और पशु-पक्षियों से अपने आदिम रिश्ते निभाते हुए अपने अस्तित्व में सार्थक है और जिसे चाहें तो मुख्यधारा के विकल्प के रूप में भी देखा जा सकता है। लेकिन होता इसके विपरीत है। मुख्यधारा उस बहुरंगी जीवन को अपने जैसा कर लेना चाहती है, सो भी बिना उनकी मर्जी के। आदिवासियत का केन्द्रीय सरोकार इसी अनचाहे आप्लावन से बचे रहना है। यही उसका संघर्ष है और अनुज की कविताएँ लगातार इस संघर्ष के साथ चलती हैं। अघोषित उलगुलान में इस सफर की हर छवि अपने मूल मानवीय तर्क के साथ उपस्थित है। ये कविताएं आदिवासी जीवन के खूबसूरत बिम्ब हम तक पहुँचाती हैं तो आक्रान्ताओं के विरुद्ध तनी मुट्ठियों को भी स्वर देती हैं। देशों, भाषाओं और संस्कृतियों के पार जाते हुए वे हर उस असहाय के साथ खड़ी होती हैं जो परभक्षी सभ्यता के निशाने पर है, जिसे सत्ता और शक्ति की विभिन्न संरचनाओं ने गैरजरूरी के खाते में डाल दिया है। नींद के बारे में सबसे मीठे गीत गाने वाले तोतों और सहजीवी भाव से अपनी दैनंदिन मुश्किलों को आसान करते ग्रामीण जनों से लेकर क्यूबा और फिलिस्तीन तक फैले यातना और प्रतिरोध के चित्रों को वे सहज ही हमारे स्थानीय बोध का हिस्सा बना देते हैं—“टूटे पुल के उस पार/फेंकता हूँ एक डोरी/आदमीयत की टोली में/आदमीयत के लिए संघर्ष कर रहे टोलों की ओर से”—आह्वान है पृथ्वी के किसी भी कोने में संघर्षरत आदमीयत को एक साथ होकर लड़ने का जिसे अनुज की कविता अनुभूति की प्रामाणिक छवियों के साथ हम तक पहुँचाती है। - [Om Prakash Valmiki - Pratinidhi Kavitayein](https://kitablelo.com/om-prakash-valmiki-pratinidhi-kavitayein/): Om Prakash Valmiki : Pratinidhi Kavitayein ओमप्रकाश वाल्मीकि ने कविता, कहानी और आत्मकथा के साथ आलोचना भी लिखी है। लेकिन मूल रूप से वे कवि ही हैं। उनके रचनाकार व्यक्तित्व को अभिव्यक्ति सबसे पहले कविता में ही मिली। वे मानते थे कि दलित कविता में जो नकार है वह अतीत से चली आ रही मान्यताओं से है, वर्तमान के छद्म से है, लेकिन उसका मुख्य उद्देश्य जीवन में घृणा के स्थान पर प्रेम, समता और बन्धुता का संचार करना ही है। उनकी प्रतिनिधि कविताओं के इस संकलन में शामिल कविताएँ भी यही सिद्ध करती हैं। वे सवाल उठाते हैं, दलितों के यथार्थ को सामने रखते हैं, लेकिन प्रतिशोध की भावना से नहीं, न्याय की चेतना से प्रेरित होकर। ये कविताएँ एकदम सीधी और सरल शब्दावली में ऐसे कितने ही प्रश्न उठाती हैं जिनके सामने सवर्ण हिन्दू समाज को अपनी तमाम ताकत के बावजूद मौन रह जाना पड़ता है। - [Suno Kabir](https://kitablelo.com/suno-kabir/): Suno Kabir | सुनो कबीर Suno Kabir (सुनो कबीर) युवा कथाकार सोनी पांडेय का पहला उपन्यास है। इसमें वे आज़मगढ़ के एक गाँव इब्राहिमपुर की कथा कह रही हैं। उपन्यास इस बात का जीवन्त दस्तावेज है कि एक साझी विरासत और सपने साझा करते हुए लोग राजनीतिक साजिशों का शिकार होकर कैसे एक दूसरे को शक की नजर से देखने लगते हैं। असल में इनके साझेपन के बीच एक दरार है जिस पर सवार होकर बाँटने वाली तमाम ताकतें बार-बार इन तक आती हैं। ये दरार है जाति और धर्म की चौहद्दी को बनाए रखते हुए एकता बनाए रखने की कोशिश करना। जाति या धर्म के बाहर घटित हुआ एक प्रेम भी इस कथित एकता को ध्वस्त कर देता है और उस्मान की मुहब्बत भरी दुनिया उजड़ जाती है। लेकिन यहीं से उपन्यास नई उठान लेता है जहाँ उस्मान अपने निजी जीवन में त्रासदी का शिकार होकर भी इस दुनिया में मुहब्बत बचाए रखते हैं। सोनी अपनी कहानियों में कस्बाई जीवन का खदबदाता हुआ यथार्थ रचती रही हैं। सुनो कबीर में वे अपनी इस चिर-परिचित जमीन में और गहरे धँसी हैं। यहाँ पर उस्मान, फेकू, मोनिका, मनोहर या पिंकी जैसे एकदम साधारण चरित्रों की स्वप्नशील पर यथार्थपरक दुनिया है। यहाँ पर मोनिका या पिंकी जैसी स्त्रियाँ हर व्यूह को तोड़ते हुए आगे बढ़ रही हैं। ये बराबर मनुष्य होना अपना हक मानते हुए एक सपना देखती हैं और इन्हें ऐसे साथी मिलते हैं जो इन सपनों के सहयात्री बनते हैं। मंच पर स्त्री भूमिकाएँ करने वाला फेकू अपने जीवन में एक खास तरह का पुरुष होने के स्टीरियोटाइप से दूर हो रहा है। ये एक ऐसी स्थिति है जिसकी वजह से उसका दाम्पत्य जीवन कुछ समय के लिए खतरे में जरूर आता है पर एक दिन उसकी पत्नी भी जानती है कि फेकू इस दुनिया के पुरुषों की तुलना में कितना ज्यादा मनुष्य और साथी है। एक पठनीय और जरूरी उपन्यास। - [Puddan Katha](https://kitablelo.com/puddan-katha/): Puddan Katha | पुद्दन कथा एक रहे पुद्दन। गाँव रहा नरहरपुर। वे चले ससुराल–नौशादपुर। ब्याह था साली का। दौर था कोरोना का। वायरस की थी उत्सवों और मेलजोल से यारी। फैलाने लगा अपना पंजा। लोगों ने जिसे लिया हल्के में, वही पड़ा भारी। और उनकी बिंदास जिंदगी पर डाल दिया डर और आशंकाओं का जाल। फिर क्या हुआ? क्या हो सकी पुद्दन की साली की शादी? कथा बीच नउनिया की कथा क्या है? क्या होता है उसकी जिंदगी में? जयनाथ का आइसोलेशन गाँव में कौतूहल क्यों है? मखंचू शहर से लौटकर गाँव में क्या पाता है? किरदारों की ठेलमठेल भीड़ नहीं है। जो हैं उनका असर गहरा होता है कथा पढ़ते हुए। अपनी-अपनी अच्छाई और बुराई के साथ जिंदादिल लोग हैं। धोखे और विश्वास, प्रपंच और लगाव से भरे हुए। सारी मुसीबतों के बीच वे रोते-रोते हँसी-ठट्ठा भी कर लेते हैं। गीत भी गा लेते हैं। पुद्दन कथा गाँव-गिराँव की कोरोनाकालीन ऐसी कथात्मक रपट है जिसे पढ़ते हुए आँखें भर आती हैं। गुदगुदी उठती है। मुस्कान चुहल करती है। एक प्राणवान देशज कथा! - [Pachees Saal Ki Ladki](https://kitablelo.com/pachees-saal-ki-ladki/): पचीस साल की लड़की | Pachees Saal Ki Ladki हिन्दी कथाकारों में ममता कालिया अपनी पैनी दृष्टि, जीवन्तता और साफगोई के लिए, अलग से पहचानी जाती हैं। उनकी रचनाओं की विशेषता है कि वे अपने लेखन में रोजमर्रा के संघर्ष में युद्धरत स्त्री का व्यक्तित्व बड़ी संवेदना से उभारती हैं, साथ ही जीवन की जटिलताओं के बीच जी रही हाड़-मांस की स्त्री के जीवन के उन पहलुओं पर पाठकों की दृष्टि आकर्षित करती हैं, जिन्हें लोग प्रायः नजरअन्दाज करते रहे हैं। यों तो लड़कियों के जीवन में उम्र का सोलहवाँ साल बहुत नाजुक होता है पर पचीस साल की उम्र भी खास मायने रखती है। आधुनिक युग की देन है- लड़कियों की उम्र का पचीसवाँ साल, जिसे ममता जी ने इस संग्रह की कहानियों में रेखांकित किया है। इन कहानियों में उस उम्र की युवतियों की मानसिकता, उनके जीवन-संघर्ष, राग-विराग को कहीं चटक तो कहीं उदास रंगों में प्रस्तुत किया गया है। अलग तेवर लिये इन कहानियों को पढ़ने का आनन्द ही कुछ और है। - [Gandi Baat](https://kitablelo.com/gandi-baat-kshitij-roy-novel/): Gandi Baat | गंदी बात एक लड़का था— कुछ लोफर, लफुआ, दीवाना-सा! जिसका दिल था नए रैपर में वही पुराना— शहीदाना। शहर पटना पूरा अपना लगे उसे! लड़की थी अलबेली-सी, सोचने का कारखाना, हिम्मत की एनीटाइम लोडेड गन जैसी, पुरानी जीन्स और एकदम नया गाना! दिल्ली शहर में मौसम था अन्ना आन्दोलन का, चुनाव के घुमड़ रहे थे बादल। डेजी आई पढऩे एलएसआर में। बन गई ड्रमर। गोल्डन आया डेजी के पीछे बावला। बन गया ड्राइवर। दोनों थे खालिस गैर राजनीतिक युवा। पढि़ए उन्हीं के घोर राजनीतिक रोमांस की दिलचस्प दास्तां, जिसमें उनकी निजता में शहर, समाज और परिस्थितियाँ दे रही हैं बराबरी से दखल... जहाँ कुछ भी नहीं है निश्चित और अनिश्चित ही है उनका सबसे बड़ा रोमांस... जिसे कहते हैं सब गंदी बात, क्या होती है वाकई वह गंदी-सी कोई बात! - [Do Kadam Door The](https://kitablelo.com/do-kadam-door-the/): Do Kadam Door The 'लाहौल स्पीति' की खूबसूरत वादियों में उभरी हुई एक हृदयस्पर्शी प्रेम कथा। यहां बर्फ से आच्छादित पहाड़ियों के सौंदर्य में प्यार का प्रतीक नीलम है तो वहाँ उसका पुजारी रानू है। रानू की मां ने कभी नहीं चाहा कि रानू वहाँ शादी करे यहां वह चाहता है। तब रानू का क्या हुआ जब उसे पता चला कि उसकी प्रेमिका पहाड़ी पर से स्पीति नदी में छलांग लगा कर मर गई है। क्या उसे काठमांडू के आध्यात्मिक वातावरण में अपने मन की शान्ति मिल सकी ? उन दोनों के प्यार का क्या अंजाम हुआ ? इस अनूठी प्रेम कहानी का अंत निश्चित ही पाठकों की क्षुधा को शांत कर देगा। यह राज ऋषि शर्मा द्वारा लिखित एक ऐसा प्यार भरा मर्मस्पर्शी उपन्यास है जिसे एक बार पढ़ना आरंभ करने पर पूरा पढ़े बिना रहा ही नहीं जा सकता। - [Suchhanda De's Novels Combo](https://kitablelo.com/suchhanda-des-novels-combo/): ‘रूम नम्बर 1504’ रहस्य, हत्या, अतीत और प्रेम की परतों में लिपटी एक रोमांचक कहानी है, जहाँ हर नया सुराग एक नए सच तक ले जाता है। वहीं ‘ऐ ज़िंदगी’ तनु की जुबानी कही गई प्यार और ज़िंदगी की एक हल्की-फुल्की, ताज़गी भरी और अनोखी कहानी है। एक तरफ कत्ल की गुत्थी और रहस्य का रोमांच, दूसरी तरफ मुस्कुराहटों से भरा अनोखा प्यार—सुछन्दा डे की दो बिल्कुल अलग कहानियों का बेहतरीन कॉम्बो। - [Room Number 1504](https://kitablelo.com/room-number-1504/): दिल्ली के एक आलीशान होटल में एक अजीबोगरीब हत्या... और उसके सबूत इशारा करते हैं रूम नम्बर 1504 की ओर। मामले की जाँच की जिम्मेदारी है आईपीएस अधिकारी सिद्धांत ठाकुर पर, एक बेहद कड़क, कर्तव्यनिष्ठ और सिद्धांतों पर अडिग पुलिस अधिकारी। लेकिन हत्या के सुरागों के साथ-साथ उसके सामने यह कौन है , जो अनजाने ही उसके अतीत के बंद दरवाज़ों को फिर से खोल रहा है। जैसे-जैसे हत्या की गुत्थियाँ सुलझती जाती हैं, वैसे-वैसे सिद्धांत के अपने जीवन की उलझी हुई गाँठें भी खुलने लगती हैं। अतीत और वर्तमान की परतें एक-एक कर हटती हैं, और हर नया सच उसे एक ऐसी हकीकत के सामने खड़ा कर देता है, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। क्या यह रहस्य और रोमांच की चादर में लिपटी एक प्रेम कहानी है... या प्रेम की चाशनी में छिपी एक कत्ल की साज़िश? - [Ujle Coat Ke Peechhe](https://kitablelo.com/ujle-coat-ke-peechhe/): उजले कोट के पीछे : कुछ अनकहे सच डॉ. अमरेन्द्र नाथ त्रिवेदी के जीवन-संस्मरणों की आत्मीय यात्रा है। ग्रामीण बिहार में बीते बचपन से लेकर भारत, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में एक चिकित्सक, शिक्षक और स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में उनके लंबे सफर तक, यह पुस्तक जीवन के अनुभवों, संघर्षों, उपलब्धियों, परिवार, चिकित्सा-जगत और बदलते समय के अनेक अनकहे पहलुओं को सामने लाती है। - [Chandar Set : 54-59](https://kitablelo.com/chandar-set-54-59/) - [Col Ranjeet Set 56-63](https://kitablelo.com/col-ranjeet-set-56-63/): मेजर बलवंत सीरीज — रहस्य, रोमांच और अपराध की एक शानदार दुनिया जहाँ हर अपराध के पीछे छिपा है एक रहस्य… और हर रहस्य के पीछे किसी अनदेखे चेहरे की साजिश। मेजर बलवंत सीरीज की ये रोमांचक जासूसी कहानियाँ पाठक को हत्या, रहस्यमयी घटनाओं, षड्यंत्रों और अप्रत्याशित मोड़ों की ऐसी दुनिया में ले जाती हैं, जहाँ सच और झूठ के बीच की सीमा लगातार धुंधली होती जाती है। कहीं एक रेलवे होटल के कमरे में हुई हत्या के बाद हत्यारा कोई निशान छोड़े बिना गायब हो जाता है, तो कहीं पर्दे के पीछे छिपा दुश्मन हर कदम पर अपने शिकार से एक कदम आगे रहता है। किसी कहानी में रहस्यमयी फोन कॉल मौत का बुलावा बन जाती है, तो किसी में वर्षों पुराना राज अचानक खून के नए निशान के साथ सामने आता है। ‘खाली सूटकेस’, ‘पर्दे के पीछे’, ‘रेत की दीवार’, ‘मौत का बुलावा’, ‘नकली चेहरे’, ‘सिले हुए होंठ’, ‘वैज्ञानिक की हत्या’ और ‘यूनानी कटार’ जैसी कहानियों में मेजर बलवंत को ऐसे मामलों का सामना करना पड़ता है, जिनमें अपराधी सिर्फ सबूत ही नहीं मिटाता, बल्कि सच्चाई तक पहुँचने का रास्ता भी उलझा देता है। हर कहानी में एक नया रहस्य, एक नया अपराध और एक ऐसी चुनौती है, जिसका समाधान आसान नहीं। कौन है असली अपराधी?किस पर भरोसा किया जाए?और क्या मेजर बलवंत समय रहते उस रहस्य की आखिरी कड़ी तक पहुँच पाएँगे? तेज रफ्तार घटनाक्रम, रहस्य, रोमांच, हत्या, षड्यंत्र और अप्रत्याशित खुलासों से भरपूर मेजर बलवंत सीरीज उन पाठकों के लिए है, जिन्हें ऐसी जासूसी कहानियाँ पसंद हैं जो अंतिम पृष्ठ तक अपने रहस्य को सुरक्षित रखती हैं। - [Parde Ke Peechhe](https://kitablelo.com/parde-ke-peechhe/): Parde Ke Peechhe | पर्दे के पीछे रात का सन्नाटा… एक चीख… एक अनजान नकाबपोश युवक… और एक ऐसी घटना, जिसकी असली शुरुआत अभी हुई भी नहीं है। एक असहाय महिला की इज्जत बचाने वाला वह रहस्यमयी युवक अचानक गायब हो जाता है। लेकिन इसके बाद शुरू होता है वर्षों पुरानी दुश्मनी, प्रतिशोध, रहस्यमयी फोन कॉल और अपहरण की साजिशों का खतरनाक खेल। शालिनी और उसका परिवार लगातार मौत के साये में घिरता जाता है। हर मोड़ पर एक नया चेहरा सामने आता है, लेकिन असली खिलाड़ी पर्दे के पीछे ही रहता है। कौन है वह रहस्यमयी दुश्मन?कौन चला रहा है इस पूरे खेल की डोर?और आखिर किस राज को छिपाने के लिए इतने लोग अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं? मेजर बलवंत की तेज-तर्रार जासूसी और लगातार बदलते घटनाक्रम से भरपूर ‘पर्दे के पीछे’ आपको आखिरी पन्ने तक रहस्य में उलझाए रखेगा।   - [Khali Suitcase](https://kitablelo.com/khali-suitcase/): Khali Suitcase | खाली सूटकेस रेलवे होटल के एक कमरे में हुई हत्या… लेकिन हत्यारा कोई निशान छोड़े बिना गायब हो चुका है। मेजर बलवंत के सामने है एक खाली सूटकेस, घड़ी की टूटी हुई चेन, सूटकेस का गायब ट्रैप और 99 पेवों वाली रहस्यमयी गुत्थी। हर सुराग किसी नई पहेली की ओर इशारा करता है और हर संदिग्ध के पीछे छिपा है एक ऐसा रहस्य, जो मामले को और उलझा देता है। जैसे-जैसे मेजर बलवंत इस रहस्य की परतें खोलते हैं, उन्हें महसूस होता है कि कोई अदृश्य खिलाड़ी लगातार उनसे एक कदम आगे चल रहा है। क्या हत्या के पीछे छिपे रहस्य तक मेजर बलवंत पहुँच पाएँगे? या यह मामला हमेशा के लिए उस खाली सूटकेस में दफन हो जाएगा? रहस्य, रोमांच और अप्रत्याशित खुलासों से भरपूर यह कहानी आपको अंतिम पृष्ठ तक बाँधे रखेगी। - [Ret Ki Diwar](https://kitablelo.com/ret-ki-diwar/): Ret Ki Diwar | रेत की दीवार एक रहस्यमयी सुराग… एक ऐसा दुश्मन जिसका कोई चेहरा नहीं… और मौत की ओर बढ़ता हुआ एक खतरनाक जाल। मेजर बलवंत के सामने एक ऐसी गुत्थी है, जिसमें हर कदम के साथ रहस्य और गहरा होता जाता है। अपराधी अपने पीछे कोई स्पष्ट निशान नहीं छोड़ता, लेकिन हर घटना किसी बड़े षड्यंत्र की ओर संकेत करती है। मौत से बचने की हर कोशिश नायक को उसी जाल में और उलझाती जाती है। जिस रहस्य को सुलझाने की कोशिश की जा रही है, उसकी नींव ही इतनी कमजोर दिखाई देती है जैसे रेत की दीवार—एक ऐसा सहारा, जो कभी भी ढह सकता है। क्या मेजर बलवंत इस रहस्यमयी साजिश का पर्दाफाश कर पाएँगे?क्या सच सामने आने से पहले एक और मौत होगी? रहस्य, रोमांच, षड्यंत्र और लगातार बदलते घटनाक्रम से भरपूर ‘रेत की दीवार’ जासूसी साहित्य के प्रेमियों के लिए एक रोमांचक पाठ है। - [Maut Ka Bulava](https://kitablelo.com/maut-ka-bulava/): Maut Ka Bulava | मौत का बुलावा एक मासूम-सी मुलाकात… एक रहस्यमयी युवती… और ऐसा संदेश, जो सीधे मौत का बुलावा बन जाता है। स्वतंत्रता सेनानी रघुनाथ शास्त्री की ट्रेन में राजश्री नाम की एक युवती से अचानक मुलाकात होती है। वह उनसे सिर्फ एक मदद माँगती है—एक नारी को उसके कैद से मुक्त कराने की। लेकिन अगले ही दिन राजश्री शास्त्री जी के घर मृत पाई जाती है। मरने से पहले वह केवल दो शब्द छोड़ जाती है—“नरेन्द्र का ख्याल रखिए…” अब सवालों की एक लंबी कतार है। राजश्री कौन थी?नरेन्द्र कौन है?उसका हत्यारा कौन था?और क्यों हर सुराग मेजर बलवंत को मौत की ओर ले जा रहा है? मेजर बलवंत जब इस रहस्यमयी हत्या की तह तक पहुँचते हैं, तो उन्हें एक ऐसी साजिश का सामना करना पड़ता है, जिसमें सच और झूठ की सीमाएँ मिट जाती हैं। ‘मौत का बुलावा’ रहस्य, रोमांच और अप्रत्याशित मोड़ों से भरपूर एक ऐसी कहानी है, जिसका असली रहस्य आखिरी पन्नों तक छिपा रहता है। - [Nakli Chehre](https://kitablelo.com/nakli-chehre/): Nakli Chehre | नकली चेहरे एक पुरानी हवेली… जहाँ कभी प्रेम की हत्या हुई थी।वर्षों बाद उसी जगह फिर बहा खून। प्रसिद्ध अभिनेत्री रोमा चौहान की निर्मम हत्या ने पूरे ग्वालियर को हिला दिया है। लेकिन मेजर बलवंत के लिए यह सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं है। जाँच आगे बढ़ती है तो सामने आते हैं कई ऐसे चेहरे, जिनके पीछे छिपी सच्चाई उनके असली चेहरों से बिल्कुल अलग है। कुछ चेहरे मुस्कुरा रहे हैं।कुछ चेहरे रो रहे हैं।और कुछ चेहरे… असल में उनके हैं ही नहीं। हर किरदार एक रहस्य है, हर गवाही में एक झूठ छिपा है और हर चेहरा किसी न किसी नकाब के पीछे है। मेजर बलवंत जैसे-जैसे इस जाल की तह तक पहुँचते हैं, उन्हें एहसास होता है कि इस खेल का सबसे बड़ा हथियार बंदूक नहीं, बल्कि नकली चेहरे हैं। आखिर असली अपराधी कौन है? और किस चेहरे के पीछे छिपा है हत्यारा? रहस्य, रोमांच और अप्रत्याशित खुलासों से भरपूर यह कहानी आपको अंतिम पृष्ठ तक उलझाए रखेगी। - [Sile Huye Honth](https://kitablelo.com/sile-huye-honth/): Sile Huye Honth | सिले हुए होंठ एक रहस्यमयी आवाज… दो वीभत्स हत्याएँ… और ऐसा कातिल, जो अपने पीछे कोई निशान नहीं छोड़ता। बीजापुर के एक प्रिंटिंग प्रेस से शुरू हुई चोरी देखते ही देखते खौफनाक हत्याओं की श्रृंखला में बदल जाती है। दूसरी ओर अजयदुर्ग की महारानी कई दिनों से रात में सुनाई देने वाली एक रहस्यमयी आवाज से आतंकित हैं। क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है?कौन है रहस्यमयी नरोत्तम नागर?और क्यों हर सुराग मौत की ओर बढ़ता जा रहा है? मेजर बलवंत जब इस उलझी हुई गुत्थी को सुलझाने मैदान में उतरते हैं, तो हर कदम पर एक नया रहस्य सामने आता है। लेकिन इस मामले में सबसे बड़ा सवाल है—आखिर किसका मुँह सिला हुआ है और कौन सच बोलने से डर रहा है? ‘सिले हुए होंठ’ रहस्य, रोमांच, साजिश और अप्रत्याशित खुलासों से भरपूर एक तेज-रफ्तार जासूसी उपन्यास है, जो अंत तक पाठक के अनुमान को चुनौती देता है। - [Vaigyanik Ki Hatya](https://kitablelo.com/vaigyanik-ki-hatya/): Vaigyanik Ki Hatya | वैज्ञानिक की हत्या एक ऐसा आविष्कार, जो करोड़ों लोगों का भविष्य बदल सकता है।एक ईमानदार वैज्ञानिक, जो धन के बजाय मानवता को चुनता है।और फिर… एक रहस्यमयी हत्या। डॉ. दिलीप कोटनीस की खोज ने अपराध जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। करोड़ों रुपये के लालच, रहस्यमयी फोन कॉल, नकाबपोश दुश्मन और लगातार बढ़ते खतरे इस मामले को एक बेहद खतरनाक मोड़ दे देते हैं। लेकिन असली सवाल यह है—आखिर कौन चाहता है कि यह महान वैज्ञानिक रास्ते से हट जाए? मेजर बलवंत जब मामले की जाँच शुरू करते हैं, तो उन्हें सिर्फ एक हत्यारे की तलाश नहीं करनी, बल्कि उस रहस्यमयी साजिश का पर्दाफाश करना है जिसकी जड़ें कहीं ज्यादा गहरी हैं। क्या वैज्ञानिक की खोज का रहस्य हत्या की वजह है?और क्या सच सामने आने से पहले एक और जान जाएगी? विज्ञान, अपराध, रहस्य और तेज-रफ्तार घटनाओं से भरपूर ‘वैज्ञानिक की हत्या’ रोमांचक जासूसी साहित्य के पाठकों के लिए एक शानदार कहानी है। - [Unani Katar](https://kitablelo.com/unani-katar/): Unani Katar | यूनानी कटार वाराणसी की पावन धरती… एक ऐतिहासिक रहस्य… और एक ऐसी यूनानी कटार, जिसके पीछे छिपी है सदियों पुरानी कहानी। एक शहर में अचानक गोलियों की आवाज गूँजती है और शुरू हो जाता है मौत, विश्वासघात और पुराने रहस्यों का खेल। मेजर बलवंत के सामने है एक ऐसी यूनानी कटार, जिसका इतिहास दो हजार वर्षों से भी पुराना बताया जाता है। लेकिन यह सिर्फ एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं है। इसके पीछे छिपे खजाने और रहस्य के लिए लोग हत्या तक करने को तैयार हैं। एक के बाद एक घटनाएँ घटती हैं—रहस्यमयी हत्याएँ, परिवार के भीतर संघर्ष, अनजान फोन कॉल और मेजर बलवंत पर जानलेवा हमला। आखिर इस कटार में ऐसा क्या छिपा है जिसके लिए लोग अपनी जान तक जोखिम में डाल रहे हैं? यूनानी कटार किसके हाथ लगेगी?और कौन चुकाएगा इसकी कीमत? इतिहास, रहस्य, हत्या, रोमांच और साजिश का बेहतरीन मेल—यह उपन्यास आपको आखिरी पन्ने तक बाँधे रखेगा। - [Maut Ghar](https://kitablelo.com/maut-ghar/): Maut Ghar | मौत घर चार दिन से सविता लापता है... न कोई फोन, न कोई संदेश, न कोई सुराग। उसे खोजते-खोजते भारत का सबसे निर्भीक जासूस भोलाशंकर एक ऐसे रहस्य से टकराता है, जहाँ हर चेहरा असली भी है... और नकली भी। एक रहस्यमयी महिला, जो बिल्कुल मेनका जैसी दिखती है... एक गुप्त संस्था, जो इंसानी अंगों और मौत के बीच खतरनाक खेल खेल रही है... और एक ऐसा अड्डा, जहाँ से लौटकर शायद ही कोई जिंदा आया हो। अब भोलाशंकर के सामने सिर्फ एक सवाल है- क्या वह मौत के इस घर में घुसकर सच को बाहर ला पाएगा... या खुद उसी का हिस्सा बन जाएगा? रहस्य, जासूसी, विज्ञान और सांसें रोक देने वाले एक्शन से भरपूर चंदर का यह क्लासिक स्पाई थ्रिलर आपको आख़िरी पन्ने तक अपनी गिरफ्त में रखेगा। एक बार पढ़ना शुरू किया... तो लौटना आसान नहीं होगा। - [Rasili](https://kitablelo.com/rasili/): Rasili | रसीली वह सिर्फ खूबसूरत नहीं, बल्कि साहस, आत्मसम्मान और बेखौफ़ इरादों की मिसाल थी। पूरे गाँव में अपनी शरारतों और निडर स्वभाव के लिए मशहूर रसीली किसी भी अन्याय के सामने झुकना नहीं जानती। जो भी उसकी अस्मिता पर हाथ डालने की कोशिश करता है, वह उसे ऐसा सबक सिखाती है जिसे वह जीवन भर नहीं भूलता। लेकिन जब उसके अपने ही उसके खिलाफ खड़े हो जाते हैं, पिता का साया सिर से उठ जाता है और एक मजबूर करने वाला फैसला उसकी जिंदगी बदलने पर आमादा हो जाता है, तब शुरू होती है संघर्ष, रोमांच और रहस्यों से भरी एक ऐसी यात्रा, जहाँ हर मोड़ पर खतरा है और हर कदम पर नई चुनौती। क्या रसीली अपनी आजादी, अपने सम्मान और अपने सपनों को बचा पाएगी? जानिए चंदर की कालजयी रोमांचक कृति "रसीली" में। - [Maut Ke Dalal](https://kitablelo.com/maut-ke-dalal/): Maut Ke Dalal | मौत के दलाल एक साधारण कॉलेज छात्र...एक ऐसा सपना, जो दुनिया बदल सकता है। और एक खोई हुई नोटबुक, जिसकी तलाश में निकल पड़ते हैं मौत के दलाल... राजन ने एक ऐसी वैज्ञानिक खोज पर काम शुरू किया है, जो जेब में समा जाने वाले परमाणु बम की कल्पना को हकीकत बना सकती है। लेकिन उसके शोध के नोट्स अचानक गायब हो जाते हैं... और देखते ही देखते उन कागजों पर देश-विदेश की खुफिया एजेंसियों, अपराधियों और सत्ता के भूखे लोगों की नजरें टिक जाती हैं। अब शुरू होती है एक ऐसी जानलेवा दौड़... जहाँ हर दोस्त दुश्मन हो सकता है, क्या भोलाशंकर उन रहस्यमय कागजों को गलत हाथों में जाने से रोक पाएगा? या दुनिया पर टूट पड़ेगी वह तबाही, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की ? विज्ञान, जासूसी, अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र और रोंगटे खड़े कर देने वाले रोमांच से भरपूर - चंदर का एक और अविस्मरणीय स्पाई थ्रिलर। - [Maut Ke Panje](https://kitablelo.com/maut-ke-panje/): Maut Ke Panje | मौत के पंजे स्पेन के खचाखच भरे बुलफाइट स्टेडियम में हजारों दर्शकों की निगाहें एक भारतीय हीरो पर टिकी हैं... अगले ही पल वह अजेय योद्धा मौत के मुंह में समा जाता है। लेकिन भोलाशंकर की तेज़ नजरें एक ऐसी बात पकड़ लेती हैं, जिसे कोई और नहीं देख पाता... क्या यह सिर्फ एक हादसा था... या दुनिया की सबसे खतरनाक साजिश की शुरुआत ? जब घायल विजयपाल सिंह रहस्यमय ढंग से गायब हो जाता है, उसके कमरे में सिर्फ एक नकली शव छोड़ दिया जाता है, और हर सुराग किसी अदृश्य दुश्मन की ओर इशारा करता है... तब भोलाशंकर समझ जाता है कि वह मौत के नहीं, बल्कि "मौत के पंजों" में प्रवेश कर चुका है। अब हर कदम पर धोखा है... हर चेहरा संदिग्ध है... और हर पल मौत उसका पीछा कर रही है। क्या भोलाशंकर इस रहस्य का पर्दाफाश कर पाएगा... या खुद भी उसी साजिश का शिकार बन जाएगा ? रोमांच, जासूसी, अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र और सांसें थाम देने वाले एक्शन से भरपूर-चंदर का एक और अविस्मरणीय स्पाई थ्रिलर - [Nath Ka Moti](https://kitablelo.com/nath-ka-moti/): Nath Ka Moti | नथ का मोती एक बेटी... जिसने अपने पिता की जान बचाने के लिए अपना जीवन दाँव पर लगा दिया। एक निर्दयी सौदागर... जिसने इंसानियत की कीमत लगा दी। और एक ऐसा युवक... जो इस सौदे को अपनी आख़िरी साँस तक स्वीकार करने को तैयार नहीं। क्या एक बेटी की सबसे बड़ी कुर्बानी उसकी सबसे बड़ी सजा बन जाएगी ? क्या 'नथ का मोती' केवल एक आभूषण है, या एक स्त्री के सम्मान, प्रेम और आत्मबल का प्रतीक ? त्याग, प्रेम, लालच और साहस से बुना यह मार्मिक थ्रिलर आपको उस दुनिया में ले जाता है जहाँ हर फैसला जिंदगी बदल देता है। जैसे-जैसे रहस्य खुलते हैं, दाँव ऊँचे होते जाते हैं और हर मोड़ पर दिल धड़कने लगता है। 'नथ का मोती'- एक ऐसा उपन्यास, जो केवल रोमांच नहीं, बल्कि इंसानियत, बलिदान और सच्चे प्रेम की अमिट कहानी भी है। - [Rahasya Chakra](https://kitablelo.com/rahasya-chakra/): Rahasya Chakra|रहस्य चक्र एक आलीशान होटल... एक रहस्यमयी युवती... दो निडर सीक्रेट एजेंट... और एक ऐसा षड्यंत्र, जिसकी हर परत के पीछे छिपा है नया रहस्य। जब राम और श्याम एक साधारण-सी घटना में हस्तक्षेप करते हैं, तो उनके सामने खुलता है 'रहस्य-चक्र' - ऐसा मायाजाल, जहाँ भरोसा भी धोखा बन सकता है और हर सुराग एक नए खतरे की ओर ले जाता है। आखिर कौन है इस खेल का असली सूत्रधार? क्या वे समय रहते इस रहस्य का पर्दाफाश कर पाएँगे, या खुद उसी चक्रव्यूह का हिस्सा बन जाएँगे? रहस्य-चक्र-एक ऐसा जासूसी रोमांच, जिसे पढ़ना शुरू करेंगे तो अंतिम पृष्ठ तक छोड़ नहीं पाएँगे। - [Rasili Duniya](https://kitablelo.com/rasili-duniya/) - [Antim Hatya](https://kitablelo.com/antim-hatya/): Antim Hatya दिल्ली की भीड़भाड़ भरी ज़िंदगी के बीच एक दिन अचानक प्रसिद्ध विज्ञान लेखिका भारती पर हत्या का आरोप लग जाता है। परिस्थितियाँ, सबूत और गवाह—सब उसके विरुद्ध खड़े दिखाई देते हैं। कानून की नज़र में वह अपराधी है, जबकि वह स्वयं दावा करती है कि वह एक गहरे षड्यंत्र का शिकार है। लेकिन सच क्या है? यही प्रश्न इस रहस्यमयी कहानी की नींव बनता है। मामला तब और उलझ जाता है जब भारती का एक घनिष्ठ मित्र रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो जाता है। उसके बाद एक नहीं, बल्कि दो सनसनीखेज हत्याएँ पूरे शहर को दहला देती हैं। हर नई घटना पिछले रहस्य को सुलझाने के बजाय और अधिक उलझा देती है। जाँच एजेंसियाँ भ्रमित हैं, मीडिया अपने निष्कर्ष सुना चुका है और भारती का हर कदम उसे अपराध के और करीब ले जाता प्रतीत होता है। ऐसे समय में मैदान में उतरते हैं मेजर बलवन्त—अपनी तीक्ष्ण बुद्धि, साहस और असाधारण जाँच-पड़ताल के लिए प्रसिद्ध जासूस। वे जल्द ही समझ जाते हैं कि यह कोई साधारण हत्या का मामला नहीं, बल्कि छल, विश्वासघात और सुनियोजित षड्यंत्र की ऐसी भूलभुलैया है जहाँ हर व्यक्ति कुछ न कुछ छिपा रहा है। जो सच दिखाई देता है, वह शायद सच है ही नहीं, और जो झूठ प्रतीत होता है, वही किसी बड़े रहस्य की कुंजी हो सकता है। जाँच के दौरान मेजर बलवन्त को ऐसे सुराग मिलते हैं जो उन्हें लगातार नए मोड़ों तक ले जाते हैं। हर खुलासा एक नई पहेली खड़ी करता है और हर संदिग्ध का चेहरा बदलता हुआ नज़र आता है। क्या भारती वास्तव में एक निर्मम हत्यारी है, या किसी ऐसे शातिर अपराधी की मोहरा जिसे परदे के पीछे रहकर खेल खेलने की आदत है? क्या लापता मित्र का इस पूरे घटनाक्रम से कोई संबंध है? और आखिर वह कौन-सी सच्चाई है, जिसके सामने आते ही पूरी कहानी का अर्थ बदल जाएगा? "अंतिम हत्या" केवल अपराध की गुत्थी सुलझाने वाला उपन्यास नहीं, बल्कि मानव स्वभाव, विश्वास, छल और न्याय की जटिलताओं को भी रोमांचक ढंग से प्रस्तुत करता है। तेज़ रफ्तार घटनाक्रम, अप्रत्याशित मोड़, सशक्त पात्र और अंत तक रहस्य बनाए रखने वाली शैली इसे एक ऐसा जासूसी उपन्यास बनाती है जिसे पाठक एक बार शुरू करने के बाद समाप्त किए बिना छोड़ नहीं पाएगा। यदि आपको रहस्य, सस्पेंस, अपराध और बुद्धिमत्ता से भरी जासूसी कहानियाँ पसंद हैं, तो "अंतिम हत्या" मेजर बलवन्त श्रृंखला का एक ऐसा रोमांचकारी उपन्यास है जो आपको अंतिम पृष्ठ तक बाँधे रखेगा—और अंतिम खुलासा आपकी सारी धारणाएँ बदल देगा। - [Dulhan Ki Cheekh](https://kitablelo.com/dulhan-ki-cheekh/): Dulhan Ki Cheekh एक बैंक डकैती, नई नवेली दुल्हन सरोज का रहस्यमय अपहरण और उसके बाद होने वाली सिलसिलेवार हत्याएँ पूरे शहर को दहला देती हैं। हर सुराग किसी नए षड्यंत्र, विश्वासघात और खौफनाक रहस्य की ओर इशारा करता है। दोस्ती, लालच, प्रेम और बदले के जाल में फँसे कई चेहरे एक-एक कर बेनकाब होने लगते हैं। क्या सरोज ज़िंदा है? असली मास्टरमाइंड कौन है? रहस्य, रोमांच, साज़िश और साँसें थाम देने वाले सस्पेंस से भरपूर "दुल्हन की चीख" मेजर बलवंत की सबसे रोमांचक जासूसी कथाओं में से एक है। - [Maut Ka Jaal](https://kitablelo.com/maut-ka-jaal/): Maut Ka Jaal पुस्तक परिचय एक खूबसूरत युवती की निर्मम हत्या... एक प्रतिष्ठित उद्योगपति की रहस्यमयी मौत... और हर नया सुराग पुलिस को सच्चाई से दूर ले जाता हुआ एक और खतरनाक रहस्य की ओर। मेजर बलवन्त, अपनी तेज़ बुद्धि, अद्भुत निरीक्षण क्षमता और अटूट साहस के लिए प्रसिद्ध जासूस, एक ऐसे मामले की जाँच अपने हाथ में लेता है जो पहली नज़र में साधारण हत्या प्रतीत होता है। लेकिन जैसे-जैसे वह परतें हटाता है, उसके सामने झूठ, लालच, विश्वासघात और खूनी षड्यंत्रों का ऐसा जाल खुलता है, जहाँ हर व्यक्ति संदेह के घेरे में है और हर चेहरा किसी न किसी राज़ को छिपाए बैठा है। जाँच आगे बढ़ती है तो हर गवाह का बयान नए सवाल खड़े करता है। हर सबूत किसी दूसरे सबूत का विरोध करता है। दोस्त दुश्मन बनते दिखाई देते हैं, और दुश्मन कभी-कभी निर्दोष प्रतीत होने लगते हैं। ऐसे में सच्चाई तक पहुँचना केवल बुद्धिमत्ता का नहीं, बल्कि साहस और धैर्य की भी परीक्षा बन जाता है। क्या इन दोनों घटनाओं के बीच कोई गहरा संबंध है? क्या यह केवल संयोग है, या किसी बेहद शातिर अपराधी की सोची-समझी योजना? क्या मेजर बलवन्त समय रहते उस अदृश्य दुश्मन तक पहुँच पाएगा, जो हर कदम पर उससे एक चाल आगे दिखाई देता है? या फिर इस बार शिकारी स्वयं शिकार बन जाएगा? "मौत का जाल" एक ऐसी रोमांचक जासूसी कथा है जो आरंभ से अंत तक पाठक को अपनी गिरफ्त में बाँधे रखती है। तेज़ रफ्तार घटनाक्रम, अप्रत्याशित मोड़, रहस्य से भरे पात्र और अंत तक सस्पेंस बनाए रखने वाली कहानी इसे जासूसी साहित्य के प्रेमियों के लिए एक उत्कृष्ट पाठ बनाती है। यदि आपको रहस्य, अपराध, मनोवैज्ञानिक खेल, चौंकाने वाले खुलासे और बुद्धिमत्ता से सुलझाए जाने वाले अपराध पसंद हैं, तो "मौत का जाल" आपके लिए एक ऐसा उपन्यास है जिसे एक बार पढ़ना शुरू करने के बाद बीच में छोड़ पाना मुश्किल होगा। हर अध्याय आपको सच्चाई के थोड़ा और करीब ले जाएगा, लेकिन अंतिम रहस्योद्घाटन तक आपको लगातार अनुमान लगाने पर मजबूर करता रहेगा। - [Hatyari Kathputli](https://kitablelo.com/hatyari-kathputli/): Hatyari Kathputli एक रहस्यमयी फोन कॉल से शुरू होता है ऐसा खूनी खेल, जिसमें हर किरदार किसी अदृश्य हाथ की कठपुतली बन जाता है। डॉक्टर अनिल रस्तोगी पर हत्या का आरोप, रहस्यमयी स्त्रियाँ, नकली पहचान, गायब होती लड़कियाँ और एक के बाद एक सनसनीखेज हत्याएँ पूरे शहर को दहला देती हैं। हर सुराग नई साज़िश की ओर ले जाता है और हर चेहरा अपने भीतर एक खतरनाक रहस्य छिपाए है। क्या मेजर बलवंत इस मौत के जाल के पीछे छिपे असली सूत्रधार का पर्दाफाश कर पाएगा, या सब उसकी हत्यारी कठपुतली बन जाएँगे? - [Teen Bahurupiye](https://kitablelo.com/teen-bahurupiye/): Teen Bahurupiye मेजर बलवंत सीरीज - तीन बहरूपिए : दिल्ली की चमकती सड़कों पर शुरू होती है एक ऐसी रहस्यगाथा, जहाँ हर चेहरा नकली हो सकता है... एक ही नाम की दो चेतनाएँ... एक ही समय में मौजूद दो सेठ कनोडिया... एक विमान दुर्घटना, जिसमें मरे हुए लोग अचानक फिर दिखाई देने लगते हैं... और हर मोड़ पर बदलते हुए चेहरे, झूठी पहचानें और खतरनाक षड्यंत्र। मेजर बलवंत के सामने है ऐसा रहस्य, जिसमें असली कौन है और नकली कौन- यह पहचानना ही सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। क्या चेतना सचमुच प्रेम में है, या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा ? क्या विमान दुर्घटना एक हादसा थी या सुनियोजित हत्या ? और आखिर कौन हैं वे "तीन बहरूपिए", जो अपने चेहरों के पीछे मौत और धोखे का खेल खेल रहे हैं? रहस्य, रोमांच, छल, प्रेम और खतरनाक भेष बदलने की कला से भरपूर -पढ़िए कर्नल रंजीत का सनसनीखेज उपन्यास "तीन बहरूपिए"। - [Filon Ke Neeche Daba Satya](https://kitablelo.com/filon-ke-neeche-daba-satya/): Filon Ke Neeche Daba Satya | फाइलों के नीचे दबा सत्य फाइलें जो दिखती तो काग़ज़ की हैं, पर असल में वे जीवन, संघर्ष और सच्चाइयों की कब्रगाह भी हो सकती हैं। 'फाइलों के नीचे दबा सत्य' उस दुनिया का पर्दाफाश करती है जहाँ न्याय का रास्ता काग़ज़ों के वजन से मापा जाता है, और एक साधारण मनुष्य की आवाज़ 'अभी विचाराधीन', 'अगली कार्यवाही अपेक्षित', जैसे शब्दों में गुम हो जाती है। यह पुस्तक सिर्फ़ प्रशासनिक ढाँचे की कहानी नहीं है, बल्कि यह मनुष्यों की चुप्पियों, डर, प्रतिशोध, टूटे हुए विश्वासों और कभी न हार मानने वाले संघर्ष की दास्तान है। लेखक ने उन सच्चाइयों को सामने रखा है जिन्हें अक्सर दफ़्तर की अलमारियों और फाइलों की धूल के नीचे जानबूझकर छिपा दिया जाता है। यह किताब पढ़ते हुए पाठक महसूस करता है कि कभी-कभी सबसे बड़ा अपराध सत्य को न बताना नहीं, बल्कि उसे दबा देना होता है। - [Kahira Connection](https://kitablelo.com/kahira-connection/): Kahira Connection वेराइटी इज़ दि स्पाइस ऑफ लाइफ अरब देशों में गोरी चमड़ी का क्रेज़ जगविदित था जिसके तहत हजारों नौजवान योरोपियन लड़कियां फुसलाई जाती थीं, ललचाई जाती थीं, भगाई जाती थीं। लेकिन अब अरब शेखों के मिजाज में तब्दीली आई थी और वो साउथ एशियन लड़कियों को गोरियों पर तरजीह देने लगे थे। इस घिनौने व्यापार को लगाम लगना जरूरी था और लगाम लगाने के लिए चुना गया हरि अनंत काहिरा कनेक्शन नई सीरीज़, नया हीरो, नया धमाका टॉप मिस्ट्री राइटर सुरेन्द्र मोहन पाठक का नवीनतम इंटरनेशनल थ्रिलर साहित्य विमर्श प्रकाशन की विशिष्ट प्रस्तुति - [Ek Sees Ka Manava](https://kitablelo.com/ek-sees-ka-manava/): Ek Sees Ka Manava   बाग-ए-बहिश्त से हुक्म-ए-सफर दिया था क्यों, कार-ए-जहाँ दराज है, अब मेरा इंतजार कर; रोज-ए-हिसाब जब मेरा पेश हो दफ़्तर-ए-अलम, आप भी शर्मसार हो, मुझ को भी शर्मसार कर। एक सीस का मानवा टॉप मिस्ट्री राइटर सुरेन्द्र मोहन पाठक की आत्मकथा का पांचवाँ और अंतिम खंड। लेखक की आत्मकथा के पूर्वप्रकाशित चार खंडों की जो पठनीयता स्थापित है, वो अब अपने चरम पर। साहित्य विमर्श प्रकाशन की संग्रहणीय प्रस्तुति - [Chhoti Begham- Chhupa Rustam (2-in-1)](https://kitablelo.com/chhoti-begham-chhupa-rustam-2-in-1/): Chhoti Begham | Chhupa Rustam ‘छोटी बेगम’ ओमप्रकाश शर्मा का एक रहस्य और रोमांच से भरा हुआ जासूसी उपन्यास है, जिसमें शाही खानदान, नवाबी रिवायतें, और खूनी साजिशों की गूँज है। यह कहानी है एक नवाब के घर की — जहाँ रहस्य दबी ज़ुबानों और झूठी परंपराओं की परतों में छुपा है। ‘छोटी बेगम’ एक सवाल छोड़ती है:👉 क्या सच्ची मासूमियत भी शक के धुएँ में खो सकती है? - [Adamkhor Janwar](https://kitablelo.com/adamkhor-janwar/): Adamkhor Janwar | आदमखोर जानवर कलकत्ता की भीड़, रहस्यमय हत्याएँ और एक ऐसा अपराधी जो इंसान होते हुए भी जानवर से ज़्यादा खतरनाक है। आदमखोर जानवर में जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा जासूस जगत को एक ऐसे मामले में उलझा देते हैं, जहाँ लालच, विश्वासघात और अंधी आस्था मिलकर मौत का खेल रचते हैं। एक योगी की हत्या की साज़िश, अदृश्य शत्रु और हर कदम पर मंडराता खतरा—यह उपन्यास केवल रहस्य नहीं, बल्कि मानव स्वभाव के उस अंधेरे चेहरे की पड़ताल है, जहाँ आदमी खुद ही आदमी का सबसे बड़ा शिकारी बन जाता है। - [Hatyare Ka Hatyara](https://kitablelo.com/hatyare-ka-hatyara/): Hatyare Ka Hatyara | हत्यारे का हत्यारा अंधेरे जंगल सन्नाटे को चीरती गोलियों की आवाज और अचानक सामने आती दो लाशें ! मेजर बलवंत का एक साधारण शिकार का सफर बदल जाता है खौफनाक रहस्य में, जब हर सुराग एक नई साजिश की ओर इशारा करता है। एक मौत, फिर दूसरी और अब कोई ऐसा है जो हर सच बोलने वाले को हमेशा के लिए खामोश कर देता है। क्या ये सिर्फ हत्या है या किसी खतरनाक खेल की शुरुआत ? कौन है वो अदृश्य दुश्मन, जो हर कदम पर मौत बिछा रहा है? हत्यारे का हत्यारा - एक ऐसा रहस्य, जहाँ हर मोड़ पर जहर है और हर सच जानलेवा ! रोमाँच, रहस्य और तेज रफ्तार घटनाओं से भरपूर यह जासूसी उपन्यास आपको आखिरी पन्ने तक बाँधे रखेगा। - [Zahar Ke Ghoont](https://kitablelo.com/zahar-ke-ghoont/): Zahar Ke Ghoont | जहर के घूँट ज़हर के घूंट अंधेरा... सन्नाटा... और मौत की आहट जवाहरनगर की शांत जिंदगी अचानक दहशत में बदल जाती है जब एक के बाद एक रहस्यमयी घटनाएं सामने आने लगती हैं एक खूबसूरत लड़की जिसकी मुस्कान में छिपा है जहर एक प्रेमी जो मोहब्बत और मौत के बीच फँस चुका है और एक नाम जो हर सच को झुठला देता है-मृदुला या रागिनी ? क्या ये सिर्फ इत्तेफाक है या एक खतरनाक साजिश ? एक ऐसी औरत-जो प्यार करने वालों को ही मौत का तोहफा देती है और अब उसकी अगली मंजिल कौन है? मेजर बलवंत तैयार हैं-एक ऐसे खेल को खत्म करने के लिए जहाँ हर चाल के पीछे छिपा है-ज़हर का घूँट सच सामने आएगा...या फिर कोई और पी जाएगा - [Peele Bichhoo](https://kitablelo.com/peele-bichhoo/): Peele Bichhoo | पीले बिच्छू एक मिशन, जो सरकार का नहीं बल्कि देशभक्ति और मौत के बीच का खेल है एक रहस्यमयी अपहरण एक राजनीतिक साजिश और दुश्मन देश की धरती पर छुपा हुआ खौफनाक सच मेजर बलवंत को मिला है ऐसा काम -जहाँ हर कदम पर है धोखा हर चेहरा हो सकता है गद्दार एक नेता जिसकी जिंदगी दांव पर है एक लड़की जो दुश्मनों के चंगुल में तड़प रही है और एक ऐसा कैम्प जहाँ पनप रही है बगावत की आग क्या मेजर बलवंत दुश्मन की धरती में घुसकर सच को बाहर ला पाएगा? या खुद बन जाएगा एक और "गायब" नाम ? साजिश जासूसी एक्शन और मौत का खेल आ रहा है - पीले बिच्छू जहाँ हर वार छुपा है जहर बनकर ! - [Tedha Makan](https://kitablelo.com/tedha-makan/): Tedha Makan | टेढ़ा मकान अंधेरी रात... नदी किनारे गूंजती कदमों की आहट और नकाबपोश साजिश की शुरुआत एक टेढ़ा मकान जिसके बारे में कहा जाता है- वहाँ रहता है भूत या मौत ? एक कंजूस बूढ़ा... जिसकी रहस्यमयी मौत एक औरत... जो बंद कमरे में जिंदा जल गई लेकिन बिस्तर तक नहीं जला और फिर... हर रात सुनाई देती है-चीखें सिसकियाँ बदले की आवाजें क्या सच में कोई भूत है? या छुपा है इंसानों से भी खतरनाक खेल ? जब केस आता है मेजर बलवंत के हाथ तो खुलते हैं तहखाने जहाँ मिलती हैं- हड्डियाँ खून और खौफनाक प्रयोग यह सिर्फ एक हत्या नहीं, यह है एक ऐसा रहस्य, जहाँ हर सच जानलेवा है "टेढ़ा मकान" जहाँ दीवारें भी छुपाती हैं राज... और हर दरवाजे के पीछे है मौत ! - [Major Balwant Bangladesh Mein](https://kitablelo.com/major-balwant-bangladesh-mein/): Major Balwant Bangladesh Mein | मेजर बलवंत बांग्लादेश में अंधेरे जंगल के सन्नाटे को चीरती गोलियों की आवाज और मौत के बीच खड़ा एक नाम मेजर बलवन्त ! एक साधारण मिशन बन जाता है खौफनाक साजिश का जाल, जहाँ हर सुराग मौत की तरफ ले जाता है और हर सच - किसी की आख़िरी साँस बन जाता है। बांग्लादेश की जंग के बीच एक रहस्यमयी हत्या दो लापता लड़कियाँ और एक ऐसा दुश्मन - जो दिखाई नहीं देता पर हर जगह मौजूद है। कौन है वो कातिल, जो बिना हथियार के इत्या करता है? कहाँ छुपी हैं वो चीखें जो अब तक किर्स ने नहीं सुनी ? और क्या मेजर बलवन्त इस खेल को ख म कर पाएगा या खुद बन जाएगा अगला निशाना ? रहस्य, रोमाँच और खतरनाक मिशनों से भरी यह कहानी आपको पहले पन्ने से आख़िरी तक बाँधे रखेगी ! - [Bhayanak Baune](https://kitablelo.com/bhayanak-baune/): Bhayanak Baune | भयानक बौने अंधेरे जंगल सन्नाटे को चीरती गोलियों की आवाज और फिर खामोशी में छिपी मौत ! एक के बाद एक रहस्यमयी हत्याएँ ऐसे चूहे, जो चूहे नहीं कुछ और हैं ! क्या यह सिर्फ एक अपराध है या किसी भयानक साज़िश की शुरुआत ? जब सच सामने आएगा -तो इंसान ही इंसान का दुश्मन निकलेगा या फिर कोई ऐसी ताकत, जो इंसान नहीं? "भयानक बौने" जहाँ हर कदम पर मौत है और हर सच जानलेवा! - [Hatyara Kaun](https://kitablelo.com/hatyara-kaun/): Hatyara Kaun | हत्यारा कौन गोलियों की गूंज और अचानक सामने आती दो लाशें एक लड़की जिसका पीछा करते हैं चार अनजान साये पर सच ये है-हर साया दुश्मन नहीं होता एक नौजवान जो दिखता था खतरा-लेकिन बन जाता है अपनी जान देकर रखवाला कौन चला रहा है ये खतरनाक खेल ? कौन है वो जो परछाइयों में छिपकर हर गवाह को मौत के हवाले कर देता है? हर सुराग एक नई साजिश हर चेहरा एक नया शक रहस्य हत्या धोखा और मौत का साया मेजर बलवंत लौट आए हैं, इस बार एक ऐसे केस में-जहाँ सवाल सिर्फ एक है- "हत्यारा कौन?" - [Maut Ki Bhool](https://kitablelo.com/maut-ki-bhool/): Maut Ki Bhool | मौत की भूल अंधेरे जंगल सन्नाटे को चीरती गोलियों की आवाज और अचानक सामने आती दो लाशें ! मेजर बलवंत का एक साधारण शिकार का सफर बदल जाता है खौफनाक रहस्य में, जब हर सुराग एक नई साजिश की ओर इशारा करता है। एक मौत, फिर दूसरी और अब कोई ऐसा है जो हर सच बोलने वाले को हमेशा के लिए खामोश कर देता है। क्या ये सिर्फ हत्या है या किसी खतरनाक खेल की शुरुआत ? कौन है वो अदृश्य दुश्मन, जो हर कदम पर मौत बिछा रहा है? मौत की भूल - एक ऐसा रहस्य, जहाँ हर मोड़ पर जहर है और हर सच जानलेवा ! रोमाँच, रहस्य और तेज रफ्तार घटनाओं से भरपूर यह जासूसी उपन्यास आपको आख़िरी पन्ने तक बाँधे रखेगा। - [Mrityujaal](https://kitablelo.com/mrityujaal/): Mrityujaal मृत्युजाल आसमान में उड़ते विमान एक-एक कर रहस्यमयी दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। हर हादसे के पीछे छिपा है एक ऐसा अदृश्य षड्यंत्र, जो केवल यात्रियों की नहीं, पूरे देश की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। इस रहस्य की तह तक पहुँचने के लिए भारत की गुप्त जासूसी संस्था “स्वाप” का सबसे साहसी एजेंट उतरता है एक ऐसे मिशन पर, जहाँ हर सुराग मौत की ओर ले जाता है और हर कदम पर बिछा है विश्वासघात का जाल। कौन रच रहा है यह अदृश्य मृत्युजाल? क्या यह महज़ दुर्घटनाओं की श्रृंखला है, या देश को अस्थिर करने की सुनियोजित साजिश? रहस्य, रोमांच, जासूसी और थ्रिल से भरपूर यह उपन्यास पाठकों को आरंभ से अंत तक बांधे रखता है। जब दांव पर हो राष्ट्र की सुरक्षा, तब एक गलती भी जानलेवा साबित हो सकती है। - [Narak Ka Kotwal](https://kitablelo.com/narak-ka-kotwal/): Narak Ka Kotwal नरक का कोतवाल एक साधारण-सा फाउंटेन पेन... लेकिन उसके भीतर छिपा है मौत का ऐसा रहस्य, जो देश की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। जब सैन्य अधिकारियों की रहस्यमयी हत्याएँ एक-एक कर होने लगती हैं, कोई सुराग नहीं मिलता और हर गवाह मौत के साये में जीने लगता है, तब यह मामला बन जाता है भारत की सबसे कठिन जासूसी चुनौती। इस खतरनाक खेल में उतरता है भोलाशंकर—भारत का तेज़तर्रार जासूस। उसका सामना है अंडरवर्ल्ड के उस खूंखार अपराधी से, जिसे लोग “नरक का कोतवाल” कहते हैं। चीनी षड्यंत्र, साइलेन्सर से लैस हत्यारे, रहस्यमयी हथियार और हर कदम पर बिछा मौत का जाल—यह उपन्यास रहस्य, रोमांच, एक्शन और जासूसी का ऐसा संगम है जो पाठकों को अंत तक बांधे रखता है। क्या भोलाशंकर मौत के इस खेल का पर्दाफाश कर पाएगा, या स्वयं उसका अगला शिकार बन जाएगा? - [Naqli Nawab](https://kitablelo.com/naqli-nawab/): Naqli Nawab नकली नवाब चौपाटी के समुद्र तट पर चल रही एक फिल्म की शूटिंग को बार-बार बाधित करती रहस्यमयी घटनाएँ एक ऐसे रहस्य का द्वार खोलती हैं, जिसके केंद्र में है करोड़ों के खजाने का दावा करने वाला एक अजीब नवाब। लेकिन क्या वह सचमुच नवाब है, या किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा? अंतरराष्ट्रीय जासूसों, खूंखार हत्यारों, विदेशी साजिशकर्ताओं और छल-कपट के जाल के बीच भोलाशंकर को सुलझानी है एक ऐसी पहेली, जहाँ हर चेहरा संदिग्ध है और हर सुराग धोखा भी हो सकता है। रोमांच, रहस्य और तेज़ रफ्तार घटनाओं से भरपूर यह जासूसी उपन्यास पाठकों को अंत तक बांधे रखता है। खजाना नकली हो सकता है, लेकिन उसे पाने के लिए बहाया जाने वाला खून बिल्कुल असली है। - [Jane Bond](https://kitablelo.com/jane-bond/): Jane Bond राष्ट्र संकट में हो... तो एक जासूस ही काफी होता है। भारत की सबसे गोपनीय फाइल दुश्मनों के हाथ लग जाती है। एक साहसी सैन्य अधिकारी की रहस्यमय आत्महत्या देश की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर देती है। अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र, खूबसूरत जाल, हिप्नोटिज्म और मौत से भी तेज़ रफ्तार पीछा—सब मिलकर रचते हैं एक ऐसे रहस्य का जाल, जिसमें दांव पर लगा है पूरे देश का भविष्य। ऐसे समय में मैदान में उतरता है भोलाशंकर—वह जासूस जिसे उसके दुश्मन देख नहीं पाते, लेकिन जिसका नाम सुनकर कांप उठते हैं। रोमांच, जासूसी और राष्ट्रभक्ति से भरपूर यह उपन्यास पाठकों को अंतिम पृष्ठ तक बांधे रखेगा। क्या भोलाशंकर भारत का सबसे बड़ा रहस्य बचा पाएगा? या इतिहास हमेशा के लिए बदल जाएगा? - [Khoon Ke Daag](https://kitablelo.com/khoon-ke-daag/): Khoon Ke Daag खून के दाग एक रहस्यमयी गुफा, एक योगाश्रम, तीन लापता किशोर और खून से सने ऐसे सुराग जो किसी भयावह रहस्य की ओर संकेत करते हैं। हर नया दाग एक नई पहेली खड़ी करता है और सच को और उलझा देता है। क्या इन घटनाओं के पीछे कोई साधारण अपराध है, या कोई गहरी साजिश? रहस्य, रोमांच और जासूसी से भरपूर यह उपन्यास पाठकों को अंतिम पृष्ठ तक बांधे रखता है। हर दाग एक रहस्य छुपाए बैठा है—क्या आप उसे सुलझा पाएंगे? - [Lohe Ke Kangan](https://kitablelo.com/lohe-ke-kangan/): Lohe Ke Kangan लोहे के कंगनएक शांत से दिखने वाले गाँव में अचानक गोलियों की गूँज, डकैतों का आतंक और रहस्यमयी घटनाओं की श्रृंखला शुरू हो जाती है। एक मासूम बच्चे की चीख, भय से जकड़े लोग और कानून को चुनौती देती ताकतें—इन सबके बीच उभरता है रोमांच, रहस्य और जासूसी का विस्फोटक संगम। क्या "लोहे के कंगन" केवल एक गहना हैं, या मौत की ऐसी जंजीर जिनसे बच निकलना असंभव है?चंदर का एक रोमांचक जासूसी उपन्यास, जो पाठकों को अंतिम पृष्ठ तक बाँधे रखेगी। - [Khoon Ka Jaal](https://kitablelo.com/khoon-ka-jaal/): Khoon Ka Jaal खून का जाल एक शहर... जहाँ हर कुछ दिनों में मिलती है एक नई लाश। कभी सुनसान सड़क पर, कभी कूड़े के ढेर में, तो कभी अंधे कुएँ की गहराइयों में। न कोई गवाह... न कोई स्पष्ट सुराग... सिर्फ मौत का बढ़ता हुआ सिलसिला और उसके पीछे छिपा एक रहस्यमय जाल। जांच के दौरान एक अजीब तथ्य सामने आता है—हर हत्या का संबंध कुछ रहस्यमय विज्ञापनों से जुड़ा है। आकर्षक शब्दों और सुनहरे वादों से भरे ये विज्ञापन शहर के प्रभावशाली और धनवान लोगों को अपनी ओर खींचते हैं, लेकिन जो उनके संपर्क में आते हैं, वे धीरे-धीरे मौत के शिकंजे में फँसते चले जाते हैं। क्या यह किसी खूबसूरत चेहरे के पीछे छिपा अपराध साम्राज्य है? क्या इन विज्ञापनों का उद्देश्य केवल शिकार ढूँढ़ना है? और वह कौन-सा मास्टरमाइंड है, जो इंसानी कमजोरियों का फायदा उठाकर मौत का यह जाल बुन रहा है? जैसे-जैसे मेजर बलवंत इस रहस्य की तह तक पहुँचते हैं, सामने आता है छल, लालच, ब्लैकमेल और हत्या का ऐसा संगठित खेल, जिसकी जड़ें शहर के ऊँचे तबकों तक फैली हुई हैं। हर नया सुराग उन्हें और बड़े खतरे की ओर ले जाता है, जहाँ शिकारी और शिकार के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है। अब यह केवल एक हत्यारे को पकड़ने का मामला नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने की लड़ाई है, जो मासूम इच्छाओं और गुप्त लालसाओं को मौत के कारोबार में बदल चुका है। रहस्य, साजिश, अपराध, रोमांच और चौंका देने वाले खुलासों से भरपूर "खून का जाल" मेजर बलवंत सीरीज का एक विस्फोटक जासूसी उपन्यास है, जहाँ हर कदम पर धोखा है, हर मुस्कान के पीछे खतरा है और हर सच एक नई मौत का दरवाज़ा खोल देता है। - [Khooni Khanzar](https://kitablelo.com/khooni-khanzar/): Khooni Khanzar खूनी खंजर एक साधारण-सा शिकार... जो अचानक मौत और रहस्य के खतरनाक खेल में बदल जाता है। घने सन्नाटे को चीरती एक औरत की चीख, जंगल में छिपी एक रहस्यमयी गुमशुदगी और खून से लिखा गया एक संदेश—ये सब किसी ऐसे रहस्य की ओर इशारा करते हैं, जिसका हर सिरा मौत पर जाकर खत्म होता है। घटनास्थल पर बार-बार मिलते हैं लंबे काले बालों के गुच्छे और एक खूनी खंजर का निशान। ऐसा लगता है मानो कोई अदृश्य दुश्मन हर कदम पर मौजूद है—नज़र नहीं आता, लेकिन हर वार उसी का होता है। जो भी सच के करीब पहुँचने की कोशिश करता है, वह या तो गायब हो जाता है या हमेशा के लिए खामोश कर दिया जाता है। क्या यह केवल एक हत्या का मामला है? या फिर किसी बड़े षड्यंत्र का पहला अध्याय? खून से लिखे संदेश किसे चेतावनी दे रहे हैं? और वह कौन है, जो परछाइयों में छिपकर अपने दुश्मनों का शिकार कर रहा है? जब पुलिस के सारे सुराग उलझ जाते हैं और हर गवाह डर के साये में जीने लगता है, तब मैदान में उतरते हैं मेजर बलवंत। लेकिन इस बार उनका सामना ऐसे अपराधी से है, जो न केवल चालाक है बल्कि अपने पीछे ऐसा भ्रम छोड़ता है कि सच और झूठ में फर्क करना लगभग असंभव हो जाता है। रहस्य, रोमांच, खतरनाक पीछा, चौंकाने वाले मोड़ और सांसें थाम देने वाले सस्पेंस से भरपूर "खूनी खंजर" मेजर बलवंत सीरीज का एक दमदार जासूसी उपन्यास है, जहाँ हर सुराग मौत की ओर ले जाता है और हर सच जानलेवा साबित हो सकता है। अंतिम पृष्ठ तक पाठक यह सोचने पर मजबूर रहता है कि आखिर वह अदृश्य दुश्मन कौन है, जो हर जगह मौजूद होकर भी कहीं दिखाई नहीं देता। - [Bahan Ki Aabroo](https://kitablelo.com/bahan-ki-aabroo/): Bahan Ki Aabroo बहन की आबरू एक बहन की चीख... एक भाई की कसम... और इंसाफ की तलाश में शुरू हुआ ऐसा खूनी सफर, जिसने पूरे शहर को दहला दिया। जब कुछ रसूखदार दरिंदे एक मासूम लड़की की इज्जत और जिंदगी को रौंद डालते हैं, तब कानून, समाज और व्यवस्था सब मौन दिखाई देते हैं। लेकिन एक भाई उस अपमान को भूलने और अपराधियों को बच निकलने देने के लिए तैयार नहीं होता। उसकी आंखों में केवल एक लक्ष्य है—अपनी बहन के साथ हुए अन्याय का बदला। धीरे-धीरे वे लोग रहस्यमय परिस्थितियों में मौत का शिकार होने लगते हैं, जो कभी अपने प्रभाव और ताकत के घमंड में चूर थे। हर हत्या के बाद पुलिस के सामने नए सवाल खड़े हो जाते हैं। क्या यह एक आहत भाई का प्रतिशोध है, या कोई और व्यक्ति इस दर्दनाक घटना का फायदा उठाकर अपना खेल खेल रहा है? मेजर बलवंत जब मामले की जांच शुरू करते हैं, तो उन्हें केवल हत्या की गुत्थी ही नहीं, बल्कि समाज के उस काले चेहरे का भी सामना करना पड़ता है, जहाँ पैसे और शक्ति के दम पर अपराधों को दबा दिया जाता है। हर सुराग उन्हें एक ऐसे सच की ओर ले जाता है, जो किसी भी अदालत के फैसले से अधिक भयावह है। क्या बदले की आग में जलता भाई सचमुच अपराधियों तक पहुँच चुका है? क्या कानून और न्याय आमने-सामने खड़े होने वाले हैं? और क्या मेजर बलवंत इस रहस्य को सुलझाकर असली अपराधी तक पहुँच पाएंगे? भावनाओं, रहस्य, रोमांच और न्याय की तीव्र आकांक्षा से भरपूर "बहन की आबरू" मेजर बलवंत सीरीज का एक प्रभावशाली उपन्यास है, जो पाठकों को केवल सस्पेंस ही नहीं, बल्कि समाज की कठोर सच्चाइयों से भी रूबरू कराता है। - [Jaali Hatyara](https://kitablelo.com/jaali-hatyara/): Jaali Hatyara जाली हत्यारा अंधेरे जंगल में मिली एक लाश... और उसी रात, शहर के बीचों-बीच हुई एक और रहस्यमय हत्या। दोनों अपराधों के बीच कोई स्पष्ट संबंध दिखाई नहीं देता, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, सामने आता है एक ऐसा जाल जिसमें हर सुराग झूठा है, हर गवाह संदिग्ध है और हर सच किसी नए धोखे का रूप ले लेता है। क्या ये अलग-अलग हत्याएँ हैं, या किसी शातिर दिमाग द्वारा रची गई एक ही भयावह योजना का हिस्सा? कौन है वह अदृश्य हत्यारा जो अपने पीछे ऐसे सबूत छोड़ता है, जो जांच को सही दिशा देने के बजाय और भटका देते हैं? और क्यों हर व्यक्ति, जो सच के करीब पहुँचता है, मौत के साये में घिर जाता है? मेजर बलवंत जब इस रहस्य की तह तक पहुँचने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि उनका सामना किसी साधारण अपराधी से नहीं, बल्कि ऐसे मास्टरमाइंड से है जो नकली पहचान, झूठे सबूत और भ्रम के जाल बुनने में माहिर है। उसकी हर चाल कानून को चुनौती देती है और हर योजना महीनों पहले तैयार की गई प्रतीत होती है। अब यह केवल हत्यारे को पकड़ने की लड़ाई नहीं, बल्कि सच और छल के बीच की जंग बन चुकी है। एक ऐसी जंग, जहाँ गलत व्यक्ति पर विश्वास करना मौत को दावत देने के बराबर है। रहस्य, रोमांच, तेज़ रफ्तार घटनाओं और चौंका देने वाले मोड़ों से भरपूर "जाली हत्यारा" मेजर बलवंत सीरीज का एक शानदार सस्पेंस थ्रिलर है, जहाँ हर कदम पर धोखा है, हर चेहरे के पीछे एक रहस्य है और हर खुलासा पाठक को हैरान कर देता है। - [Manhoos Heere](https://kitablelo.com/manhoos-heere/): Manhoos heere मनहूस हीरे एक करोड़ की रहस्यमयी चोरी... एक गुप्त गैंगस्टर का खेल... और मौत की परछाई, जो हर उस व्यक्ति का पीछा करती है जिसने उन अभिशप्त हीरों को छूने की कोशिश की। एक बेशकीमती हीरों का संग्रह अचानक गायब हो जाता है। लेकिन यह कोई साधारण चोरी नहीं। जो भी उन हीरों तक पहुँचने की कोशिश करता है, वह रहस्यमय परिस्थितियों में मौत का शिकार बनने लगता है। धीरे-धीरे यह अफवाह फैल जाती है कि ये हीरे मनहूस हैं—और अपने साथ केवल विनाश लाते हैं। क्या यह सचमुच किसी पुराने श्राप का असर है? या फिर इस अंधविश्वास के पीछे छिपा है किसी अंतरराष्ट्रीय अपराधी गिरोह का खतरनाक षड्यंत्र? कौन है वह रहस्यमय व्यक्ति जो परदे के पीछे रहकर हर चाल चल रहा है और पुलिस को बार-बार चकमा दे रहा है? जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, सामने आते हैं लालच, विश्वासघात, तस्करी और हत्या के ऐसे जाल, जिनमें फँसकर कई जिंदगियाँ तबाह हो चुकी हैं। हर सुराग मेजर बलवंत को एक नई पहेली की ओर ले जाता है, और हर पहेली के पीछे छिपा होता है मौत का खतरा। अब मेजर बलवंत के सामने चुनौती केवल चोर को पकड़ने की नहीं, बल्कि उस रहस्य से पर्दा उठाने की है जिसने इन हीरों को "मनहूस" बना दिया है। क्या वह समय रहते सच तक पहुँच पाएगा, या फिर अगला शिकार कोई और होगा? रहस्य, रोमांच, अपराध, तेज़ रफ्तार घटनाओं और चौंका देने वाले खुलासों से भरपूर "मनहूस हीरे" मेजर बलवंत सीरीज का एक शानदार जासूसी उपन्यास है, जहाँ चमकते हीरों के पीछे छिपा है मौत, लालच और धोखे का अंधेरा संसार। - [Bolte Sikke](https://kitablelo.com/bolte-sikke/): Bolte Sikke बोलते सिक्के एक तूफानी रात... सड़क किनारे खड़ी एक रहस्यमयी कार... बेहोश ड्राइवर... और गायब सवार! इसी बीच चलती ट्रेन से एक युवक रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो जाता है, जबकि दूसरी ट्रेन में एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक की हत्या पूरे देश को हिला देती है। देखने में अलग-अलग लगने वाली ये घटनाएँ क्या वास्तव में एक ही खतरनाक रहस्य की कड़ियाँ हैं? जांच शुरू होती है तो सामने आते हैं ऐसे सुराग, जिनका कोई सिर-पैर नहीं दिखता। घटनास्थलों पर बार-बार मिलते हैं कुछ पुराने सिक्के—ऐसे सिक्के, जो मानो किसी गुप्त संदेश को अपने भीतर छिपाए हुए हों। हर नया सुराग एक नए सवाल को जन्म देता है, और हर जवाब रहस्य को और गहरा कर देता है। जब पुलिस और खुफिया एजेंसियाँ अंधेरे में टटोल रही होती हैं, तब इस पेचीदा पहेली को सुलझाने के लिए मैदान में उतरते हैं मेजर बलवंत। लेकिन इस बार उनका मुकाबला केवल एक अपराधी से नहीं, बल्कि ऐसे दिमाग से है जो अपनी हर चाल महीनों पहले सोच चुका है। क्या गायब युवक और मृत वैज्ञानिक के बीच कोई संबंध है? क्यों हर घटना के पीछे वही रहस्यमयी सिक्के दिखाई देते हैं? और उन सिक्कों में आखिर ऐसा कौन-सा राज छिपा है, जिसके लिए लोग जान लेने और जान देने पर उतारू हैं? रहस्य, रोमांच, जासूसी कौशल और चौंका देने वाले मोड़ों से भरपूर "बोलते सिक्के" मेजर बलवंत सीरीज का एक रोमांचकारी उपन्यास है, जहाँ हर सिक्का एक सुराग है और हर सुराग मौत के करीब ले जाता है। अंतिम पृष्ठ तक पाठक यह अनुमान लगाने की कोशिश करता रहता है कि आखिर उन "बोलते सिक्कों" की असली कहानी क्या है। - [Bejaan Aadmi](https://kitablelo.com/bejaan-aadmi/): Bejaan Aadmi बेजान आदमी एक रहस्यमयी अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र... दुनिया के नामचीन वैज्ञानिक और विशेषज्ञ एक-एक कर रहस्यमय मौत का शिकार हो रहे हैं। कोई स्पष्ट हत्यारा नहीं, कोई प्रत्यक्ष सुराग नहीं—लेकिन हर मौत के पीछे छिपा है एक ऐसा रहस्य, जो मानव सभ्यता के भविष्य को बदल सकता है। बैंकॉक में दुनिया के तीन सबसे तेज़ दिमाग वाले जासूस एकत्र होते हैं। उनका सामना किसी साधारण अपराधी से नहीं, बल्कि ऐसी अदृश्य शक्ति से है जो विज्ञान को हथियार बनाकर इंसानों को मौत की ओर धकेल रही है। क्या यह किसी गुप्त संगठन की साजिश है, या विज्ञान की प्रयोगशाला से निकला कोई भयावह रहस्य, जो अब नियंत्रण से बाहर हो चुका है? जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, सामने आती हैं ऐसी घटनाएँ जो तर्क और कल्पना की सीमाओं को चुनौती देती हैं। मुर्दे चलते दिखाई देते हैं, बेजान पुतले हत्याएँ करते हैं और जीवित इंसान किसी अदृश्य शक्ति के नियंत्रण में मशीनों की तरह व्यवहार करने लगते हैं। हर नया सुराग रहस्य को सुलझाने के बजाय और उलझा देता है। इस खतरनाक खेल में मेजर बलवंत को केवल एक अपराधी को नहीं, बल्कि उस भयावह सच को बेनकाब करना है जो दुनिया भर में फैलती तबाही का कारण बन सकता है। समय कम है, दुश्मन अदृश्य है और एक गलत कदम पूरी मानवता के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। विज्ञान, रहस्य, अंतरराष्ट्रीय साजिश, रोमांच और तेज़ रफ्तार घटनाओं से भरपूर "बेजान आदमी" मेजर बलवंत सीरीज का एक रोमांचकारी थ्रिलर है, जो पाठकों को शुरुआत से अंत तक रोमांच और कौतूहल के जाल में बांधे रखता है। - [11 Bajkar 12 Minute](https://kitablelo.com/11-bajkar-12-minute/): 11 Bajkar 12 Minute 11 बजकर 12 मिनट रात के सन्नाटे को चीरती एक रहस्यमयी चेतावनी— "ग्यारह बजकर बारह मिनट पर एक खून होगा!" लोगों ने इसे किसी सनकी की शरारत समझकर नजरअंदाज कर दिया। लेकिन ठीक 11:12 पर देश के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रोफेसर शंकरदयाल अपने बंद कमरे में मृत पाए गए। न कोई प्रत्यक्ष गवाह, न कोई स्पष्ट सुराग, और न ही ऐसा कोई रास्ता जिससे हत्यारा अंदर आया या बाहर गया हो। घटनास्थल पर केवल एक रहस्यमय संदेश मिलता है— "नंबर 1... आपको श्यामा का प्रणाम!" क्या यह एक साधारण हत्या है या किसी लंबे समय से चल रहे प्रतिशोध की शुरुआत? कौन है श्यामा, जिसका नाम हर सुराग के साथ और अधिक रहस्यमय होता जाता है? और क्यों लगता है कि हत्यारा अपनी हर चाल पहले से घोषित करके भी पुलिस को चुनौती दे रहा है? जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, शहर के प्रतिष्ठित लोगों पर खतरे के बादल मंडराने लगते हैं। हर नई घटना एक बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा करती है, जिसमें अतीत के दबे हुए राज, विश्वासघात और वर्षों पुरानी नफरतें जुड़ी हुई हैं। समय तेजी से बीत रहा है, और अगली चेतावनी किसी भी क्षण सामने आ सकती है। रहस्य, रोमांच, बौद्धिक चुनौती और सांसें थाम देने वाले सस्पेंस से भरपूर "11 बजकर 12 मिनट" मेजर बलवंत सीरीज का एक ऐसा जासूसी उपन्यास है, जिसमें हर अध्याय के साथ पहेली और उलझती जाती है और अंतिम खुलासा पाठकों को चौंका देता है। - [Kala Shawl](https://kitablelo.com/kala-shawl/): Kala Shawl काला शाल एक पुरानी हवेली... एक जन्मदिन की रात... और बारह वर्षों से दफन एक ऐसा रहस्य, जो अचानक फिर से जाग उठता है। जिस रात मशहूर अभिनेत्री की रहस्यमय मृत्यु हुई थी, उसी तारीख को हवेली में फिर खून बहता है। हर हत्या के साथ उभरते हैं नए सवाल—चेहरे पर काला नकाब, सीने में धंसी छुरी और दीवारों पर बिखरे ऐसे संकेत, जो किसी भयावह अतीत की ओर इशारा करते हैं। क्या यह सचमुच सदियों पुरानी आम्रपाली की आत्मा का प्रतिशोध है? या फिर कोई शातिर अपराधी अंधविश्वास की आड़ में अपना खूनी खेल खेल रहा है? जब हवेली का हर निवासी शक के घेरे में हो, हर मुस्कान के पीछे छल छिपा हो और हर चेहरा किसी न किसी रहस्य को ढके बैठा हो, तब सच और भ्रम के बीच की रेखा धुंधली होने लगती है। रहस्य की परतें खुलने लगती हैं तो सामने आते हैं विश्वासघात, लालच, अधूरी महत्वाकांक्षाएँ और ऐसे रिश्ते, जिनकी सच्चाई किसी भी हत्या से अधिक खतरनाक है। इस जटिल पहेली को सुलझाने के लिए मैदान में उतरते हैं मेजर बलवंत, जिन्हें न केवल एक खूनी का सामना करना है, बल्कि उन डरावनी कहानियों का भी, जिन पर लोग वर्षों से विश्वास करते आए हैं। रहस्य, रोमांच, मनोवैज्ञानिक सस्पेंस और अप्रत्याशित मोड़ों से भरपूर "काला शाल" मेजर बलवंत सीरीज का एक ऐसा रोमांचक उपन्यास है, जो पाठकों को अंतिम खुलासे तक अनुमान लगाते रहने पर मजबूर कर देता है। - [Khoon Ki Bauchhar](https://kitablelo.com/khoon-ki-bauchhar/): Khoon Ki Bauchhar खून की बौछार एक तूफानी रात... मूसलाधार बारिश... और शहर के अलग-अलग कोनों में होने लगती हैं ऐसी रहस्यमयी हत्याएँ, जिनका कोई सिरा पुलिस के हाथ नहीं लगता। हर अपराध के बाद बचता है केवल खून, खामोशी और अनगिनत सवाल। एक आदमी मौत से बचने के लिए भाग रहा है, लेकिन उसे नहीं मालूम कि मौत उससे कहीं ज्यादा तेज़ है। एक बंगले में मिलती है भीगी हुई लाश, दूसरे में खून से सना शव, और हर नई वारदात के साथ रहस्य और गहराता चला जाता है। ऐसा लगता है मानो कोई अदृश्य हाथ पूरे शहर को अपने खूनी खेल का मैदान बना चुका हो। पुलिस की जांच बार-बार बंद गलियों में पहुंच जाती है। गवाह गायब हो जाते हैं, सबूत मिट जाते हैं और कातिल हर बार कानून से एक कदम आगे निकल जाता है। तभी इस खतरनाक पहेली को सुलझाने के लिए मैदान में उतरते हैं मेजर बलवंत और उनके जांबाज साथी। लेकिन असली सवाल अब भी बाकी है— कौन है वह रहस्यमय हत्यारा जो हर वारदात के बाद अपने निशान मिटा देता है? क्या लापता आशा भटनागर इस रहस्य की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है? या फिर वह स्वयं उस खूनी खेल का अगला शिकार बन चुकी है? रहस्य, रोमांच, तेज़ रफ्तार घटनाओं और सांसें थाम देने वाले सस्पेंस से भरपूर "खून की बौछार" मेजर बलवंत सीरीज का एक ऐसा धमाकेदार उपन्यास है, जो पाठकों को पहले पन्ने से आखिरी खुलासे तक अपनी गिरफ्त में बांधे रखता है। - [Khooni Badla](https://kitablelo.com/khooni-badla/): Khooni Badla खूनी बदला एक पुरानी हत्या, एक अधूरी मोहब्बत और बदले की ऐसी आग, जो वर्षों बाद भी ठंडी नहीं हुई। जब रहस्यमय परिस्थितियों में लोग एक-एक कर मौत के घाट उतरने लगते हैं, तो हर सुराग किसी भूले-बिसरे अतीत की ओर इशारा करता है। एक युवती का गायब होना, गोलियों से दहला शहर और हर वारदात के पीछे छिपा एक अनसुलझा राज—क्या यह केवल अपराधों की श्रृंखला है या किसी दर्दनाक कहानी का खूनी अंजाम? रहस्य, रोमांच और तेज़ रफ्तार घटनाओं से भरपूर यह मेजर बलवंत सीरीज का ऐसा उपन्यास है, जो पाठकों को अंत तक बांधे रखता है। - [Khooni Sangeet](https://kitablelo.com/khooni-sangeet/): Khooni Sangeet खूनी संगीत बारिश की बूंदों के साथ गूंजता है मौत का एक रहस्यमय संगीत। एक अज्ञात चेतावनी, एक के बाद एक होती रहस्यमयी हत्याएँ, और हर वारदात से पहले सुनाई देने वाली अनोखी धुन—क्या यह किसी अलौकिक शक्ति का खेल है या किसी शातिर अपराधी की सोची-समझी साजिश? जब बड़े-बड़े उद्योगपति रहस्यमय परिस्थितियों में मरने लगते हैं, तब सच की तलाश में मैदान में उतरते हैं मेजर बलवंत। रोमांच, रहस्य और सस्पेंस से भरपूर यह उपन्यास आपको अंतिम पृष्ठ तक बांधे रखेगा। - [Cobra-Shikari Kutta- 2-in-1](https://kitablelo.com/cobra-shikari-kutta-2-in-1/): Cobra-Shikari Kutta - 2 in 1 Novel कोबरा एक तूफ़ानी रात में एक रहस्यमयी युवती से हुई मुलाकात कर्नल सचिन सान्याल को ऐसे खतरनाक षड्यंत्र में धकेल देती है, जहाँ हर कदम पर मौत घात लगाए बैठी है। एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक की रहस्यमय हत्या, करोड़ों की गुप्त ज़मीन का खेल और हर अपराध स्थल पर छोड़ा गया एक भयावह संकेत—“कोबरा”। आखिर कौन है यह खूबसूरत लेकिन जानलेवा लड़की, और क्या संबंध है उसका उस रहस्यमय संगठन से, जिसका नाम सुनकर बड़े-बड़े लोग काँप उठते हैं? रहस्य, रोमांच और सस्पेंस से भरपूर यह उपन्यास पाठक को अंतिम पृष्ठ तक बाँधे रखता है। शिकारी कुत्ता  एक के बाद एक मिलने वाली रहस्यमय धमकियाँ, अजीब संकेत और वर्षों पुराने रहस्यों की परतें मेजर बलवंत को ऐसे मामले में उलझा देती हैं, जहाँ हर सुराग किसी नए भ्रम की ओर ले जाता है। एक प्रसिद्ध इतिहासकार, दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह, अनसुलझे अपराध और एक रहस्यमय शिकारी कुत्ते की छाया—इन सबके बीच छिपा है ऐसा सच, जिसे उजागर करने की कीमत जान भी हो सकती है। जैसे-जैसे मेजर बलवंत जाँच में आगे बढ़ते हैं, उन्हें पता चलता है कि घटनाएँ उतनी सीधी नहीं हैं जितनी दिखाई देती हैं। पुराने संबंध, छिपी हुई महत्वाकांक्षाएँ और धोखे की कई परतें इस रहस्य को और उलझा देती हैं। आखिर इन धमकियों के पीछे कौन है? और क्यों हर सुराग किसी अदृश्य शिकारी की मौजूदगी का अहसास कराता है? रोमांच, रहस्य और अप्रत्याशित मोड़ों से भरपूर "शिकारी कुत्ता" मेजर बलवंत श्रृंखला का एक ऐसा उपन्यास है जो पाठक को अंतिम पृष्ठ तक अनुमान लगाते रहने पर मजबूर कर देता है। - [Rahasyamaya Ramani](https://kitablelo.com/rahasyamaya-ramani/): Rahasyamaya Ramani मेजर बलवंत सीरीज रहस्यमय रमणी मेजर बलवंत का एक साधारण दिन तब खौफनाक मोड़ ले लेता है, जब एक मामूली-सी घटना - एक पुस्तक प्रदर्शनी-उसे धोखे, ब्लैकमेल और खून की दुनिया में खींच लाती है। एक के बाद एक रहस्यमयी घटनाएँ चोरी, हत्या और गायब होते सबूत हर सुराग किसी बड़े गिरोह की ओर इशारा करता है। लेकिन इस पूरे खेल के पीछे है एक चेहरा-एक खूबसूरत, खतरनाक और रहस्यमयी औरत राजेश्वरी - जिसके करीब जाना मतलब मौत को दावत देना ! क्या यह सब एक संगठित साजिश है? क्या हर मोहरा किसी अदृश्य खिलाड़ी के इशारों पर चल रहा है? और आखिर कौन है वह "रहस्यमय रमणी" जिसके इर्द-गिर्द घूम रही है हर हत्या और हर रहस्य? हर कदम पर खतरा हर रिश्ते में धोखा और हर सच जानलेवा ! - [Double Murder](https://kitablelo.com/double-murder/): Double Murder मेजर बलवंत सीरीज डबल मर्डर अंधेरी रात सन्नाटे को चीरती गोलियों की आवाज और एक नहीं दो-दो हत्याएँ ! एक लाश जिस पर गोलियों के निशान हैं-लेकिन मौत गोली से नहीं हुई ! दूसरी मौत जो सच को छिपाने के लिए की गई ! कौन है वो रहस्यमयी काला साया, जो जहर भरे हाथों से मौत बाँट रहा है? और क्यों हर सुराग मौत की ओर ही ले जाता है? जब मैदान में उतरते हैं मेजर बलवंत और उनका वफादार क्रोकोडाइल, तो खुलने लगती है एक ऐसी साजिश -जिसका हर सच जानलेवा है ! डबल मर्डर एक ऐसा रहस्य जहाँ कातिल दो हैं, लेकिन चेहरा किसी का भी नहीं! - [Andha Hatyara](https://kitablelo.com/andha-hatyara/): Andha Hatyara मेजर बलवंत सीरीज अंधा हत्यारा "एक कैदी जिसे सुबह फाँसी होने वाली है और आधी रात को उससे शादी करने पहुँचती है करोड़ों की वारिस लड़की!" घोर अंधेरी रात, वीरान जेल और मौत के साये में जन्म लेता एक ऐसा रिश्ता, जो खोलने वाला है खून, साजिश और धोखे का सबसे खतरनाक रहस्य ! क्या राजीव सचमुच हत्यारा है? या उसे किसी शैतानी खेल में फँसाया गया है? कौन है वो अदृश्य दुश्मन जो हर गवाह को मौत के घाट उतार रहा है? और क्यों हर सुराग जाकर रुकता है एक ऐसे रहस्य पर जिसे जानना भी जानलेवा है! अब मैदान में उतर चुका है भारत का सबसे तेज दिमाग मेजर बलवंत ! "अंधा हत्यारा" एक ऐसा जासूसी तूफ़ान जहाँ हर पन्ने पर है मौत, रहस्य और सनसनी ! - [Khoon Ki Lakeer](https://kitablelo.com/khoon-ki-lakeer/): Khoon Ki Lakeer मेजर बलवंत सीरीज खून की लकीर "एक हत्या जो बन गई खून की एक रहस्यमयी लकीर!" इलाहाबाद एक शांत सुबह और अचानक अपने ही बेडरूम में गर्दन कटी हालत में मिलता है- जगदीप ! लेकिन उसकी पत्नी संगीता गायब ! क्या वही है हत्यारिन ? या कोई और खेल रहा है मौत का खेल ? फिर एक और हत्या ! प्रोफेसर सत्यनारायण का गला घोंट दिया जाता है मरने से कुछ सेकंड पहले फोन पर सुनाई देती है एक औरत की दर्दनाक चीख ! कौन हैं वे दो रहस्यमयी नौजवान ? क्यों हर सुराग जाकर रुकता है दीनाजपुर के खजाने और पैंतालीस लाख के गहनों पर ? हर कदम पर मौत, हर चेहरे के पीछे साजिश और हर रहस्य के बीच खिंचती जा रही है "खून की लकीर"! अब इस खूनी पहेली को सुलझाने मैदान में उतर चुका है भारत का महान जासूस मेजर बलवंत ! रहस्य रोमांच खूबसूरत हसीनाएं और सांसे रोक देने वाला सस्पेंस ! - [Bhayankar Moorti](https://kitablelo.com/bhayankar-moorti/): Bhayankar Moorti मेजर बलवंत सीरीज भयंकर मूर्ति अंधेरा खामोश शहर और एक ऐसा डर जो हर घर की दीवारों में कैद हो चुका है। एक बच्ची का अपहरण... कोई सुराग नहीं और हर खिड़की पर लोहे की सलाखें- क्योंकि अब कोई भी सुरक्षित नहीं! लेकिन ये तो बस शुरुआत है एक रहस्यमयी म्यूजियम, प्राचीन मूर्तियाँ और अचानक-एक लाश ! क्या ये महज हादसा है या किसी शैतानी योजना का हिस्सा ? एक ऐसी मूर्ति... जो सिर्फ पत्थर नहीं- बल्कि प्रतिशोध की निशानी है! हर चेहरा छुपा रहा है सच हर रिश्ता बन सकता है धोखा और हर कदम पर मौत आपका इंतज़ार कर रही है। मेजर बलवंत के सामने है एक ऐसा रहस्य-जहाँ इंसान और अंधविश्वास के बीच की रेखा मिट चुकी है। भयंकर मूर्ति जहाँ हर मोड़ पर जहर है.... और हर सच जानलेवा ! - [Khushkhat](https://kitablelo.com/khushkhat-sushobhit-hindyugm/): Khushkhat | ख़ुशख़त ख़ुशख़त के माने होते हैं- अच्छी लिखत। हाथ जमाकर काग़ज़ पर टाँके गए मोती। इस किताब में जितने भी क़िस्से, वाक़िये, यादें और बातें हैं, वो ऊपर से भले भिन्न लगें, लेकिन ‘सुलेख’ की एक ही अविच्छिन्न धारा से प्रकाशित हैं। वो सभी ‘ख़ुशख़त’ हैं! - [Tum Bin](https://kitablelo.com/tum-bin-novel-kanjiv-lochan-hindyugm/): Tum Bin ‘तुम बिन’ एक मार्मिक मनोवैज्ञानिक उपन्यास है, जिसमें छोटे शहर के मध्यवर्गीय संस्कारों से लेकर दिल्ली के विश्वविद्यालयी जीवन तक का विस्तृत संसार खुलता है। सुदामा की स्मृतियों, प्रेम, अपमान और आत्म-संघर्ष से गुजरती यह कथा उमा के साथ बिताए उन क्षणों तक पहुँचती है, जो उसके भीतर वर्षों से दबे उद्दत भावों को उजागर कर देते हैं। इन भावों में करुणा है, संकोच है, आकर्षण है, सामाजिक भय है और गहरा द्वंद्व भी। यह केवल एक असफल प्रेम-कथा नहीं, बल्कि मित्रता, विश्वास, नैतिकता और पुरुष-मन की जटिल परतों का संवेदनशील आख्यान है। साहित्यिक संवेदनाओं और स्मृति की चमक से भरपूर यह उपन्यास प्रेम के ओझल हो जाने के बाद भी उसके बचे रहने की कथा है। - [Vimal Combo- Cooper Compound & Super Don](https://kitablelo.com/vimal-combo-cooper-compound-super-don/) - [Stop Press](https://kitablelo.com/stop-press/): एक जिद्दी पत्रकार! एक संदिग्ध वारिस! एक पूर्वाग्रहग्रस्त बिचौलिया! और करोड़ों के विरसे की दौलत का खेल। इस जुगलबंदी से जन्मी एक परफेक्ट कहानी। लेकिन हर परफेक्ट कहानी पर पड़ा होता है, झूठ का घना पर्दा! 'ब्लास्ट' के चीफ रिपोर्टर सुनील चक्रवर्त्ती ने जब पर्दा फ़ाश शुरू किया तो खेल खतरनाक हो गया - कत्ल तक पहुँचा स्टॉप प्रेस (Stop Press) बेमिसाल मर्डर मिस्ट्री साहित्य विमर्श प्रकाशन की गौरवशाली प्रस्तुति - [Atirikt Nahin](https://kitablelo.com/atirikt-nahin/): पिछले चार दशकों से कविता लिखते हुए तथा उम्र के उस पड़ाव पर पहुँचे हुए जिसमें अधिकांश कवि-लेखक अपनी पिछली कमाई की जुगाली करते नज़र आते हैं, विनोद कुमार शुक्ल अपनी सृजनशीलता से इस नए संग्रह 'अतिरिक्त नहीं' (Atirikt Nahin) में भी हमें अवाक् और हतप्रभ कर देते हैं। कुछ मतिमंद जो उन पर भाषाई खिलवाड़, चमत्कार, वक्रोक्ति, उलटबाँसी, शिल्पातिरेक या कलावादिता का आरोप लगाते हैं वे ज़रा इस संग्रह की हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था और तथा जैसी कविताएँ देखें जिनमें कवि की अपनी शैली की सारी ज़िदों का निर्वाह भी हुआ है और भारतीय समाज तथा मानवमात्र को लेकर पूरी सहानुभूति, करुणा और प्रतिबद्धता भी असंदिग्ध रूप से उजागर हैं। यह विनोद कुमार शुक्ल ही कह सकते हैं कि आदमी को जानना ज़रूरी नहीं है, उसकी हताशा को और उसके साथ चलने को जानना बहुत है। जो यह कहते हैं कि कवि हमारे यथार्थ का कोमलीकरण करता है वे देखें कि उसके कान दुकानदार द्वारा राशन लेनेवालों को धीरे से दी गई माँ-बहन की गाली सुन सकते हैं और फिर उसकी आँखें उस गाली से जन्मे उस लड़के को भी देख सकती हैं जो जुलूसवालों को ठीक वही गाली देता है। -विष्णु खरे - [God Gift](https://kitablelo.com/god-gift/): कई बार मौत के मुँह से बचकर भागते हुए अर्जुन को आखिरकार यह समझ आ जाता है कि अब उसके पास एक ही रास्ता बचा है - पलटवार करने का! एक ओर है एजेंसी, जो चक्रधर के नेतृत्व में दुनिया भर में अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहती है, और दूसरी ओर है अर्जुन, जो अपने कुछ चंद साथियों के साथ मिलकर एजेंसी को रोकना चाहता है। क्या होगा जब दोनों ताकतें आपस में टकराएँगी? पढ़ें आकाश पाठक की अर्जुन शृंखला की किताब गॉड गिफ्ट (God Gift) - [Sanyam](https://kitablelo.com/sanyam/): ‘हर पेंटिंग अपने भीतर एक चुप्पी छुपाए रखती है — और हर कलाकार, एक छुपी हुई कथा।‘ संयम (Sanyam) एक ऐसे पेंटर की कहानी है, जो जीवन की भीड़ में भीतर से बिल्कुल अकेला है। वह रंगों से अपनी दुनिया बनाता है, लेकिन जब वे भी चुप हो जाते हैं, तो उसे शब्दों का सहारा लेना पड़ता है। उसकी एक दोस्त उसे कहती है—"लिखो। जो तुमने महसूस किया, जो कह नहीं पाए—उसे लिखो।" यह उपन्यास उसी आत्म-संवाद की यात्रा है। यह केवल एक कहानी नहीं है, बल्कि एक चित्रकार के भीतर की वह आवाज़ है, जो कभी पेंटिंग के ज़रिए नहीं निकल पाई। यह उस गहरी खामोशी की भाषा है, जिसे हम सब कभी न कभी महसूस करते हैं—चाहे हम कलाकार हों या नहीं। क्या एक लेखक एक पेंटर को समझ सकता है? क्या हम कभी किसी के रंगों की भाषा पढ़ सकते हैं? यही प्रश्न इस किताब के हर पन्ने में झलकता है। संयम (Sanyam) मानव कौल का सबसे आत्मिक और अंतरंग उपन्यास है—जहाँ कैनवास शब्द बन जाता है, और अकेलापन कहानी। - [Ek Poorv Mein Bahut Se Poorv](https://kitablelo.com/ek-poorv-mein-bahut-se-poorv/): भारतीय साहित्य संसार में किंवदंती की हैसियत पा चुके विनोद कुमार शुक्ल की कविता से परिचय 'मनुष्य होने के अकेलेपन में मनुष्य की प्रजाति' से परिचय है। इस काव्य-संसार से गुज़रना अपेक्षा से कुछ अधिक और अनिर्वचनीय पा लेने के सुख सरीखा है। यह आस्वाद आस्वादक को बहुत वक़्त तक विकल, चुप और प्रतिबद्ध रखता है। इससे गुज़रकर पृथ्वी में सहयोग और सहवास के अर्थ खुलते हैं और एकांत और सार्वभौमिकता के भी। इस काव्य-संसार में अपने आरंभ से ही कुछ संसार स्पर्श कर बहुत संसार स्पर्श कर लेने की चाह का वरण है और घर और संसार को अलग-अलग नहीं देख पाने की दृष्टि। पहाड़ों, जंगलों, पेड़ों, वनस्पतियों, तितलियों, पक्षियों, जीव-जंतुओं, समुद्र, नक्षत्रों और भाषाओं से उस परिचय के लिए जिसमें अपरिचित भी उतने ही आत्मीय हैं, जितने कि परिचित : विनोद कुमार शुक्ल के इस नवीनतम कविता-संग्रह 'एक पूर्व में बहुत से पूर्व' (Ek poorv mein Bahaut Se Poorv) का पाठ एक अनिवार्य और समयानुकूल पाठ है। - [Khoon Ke Khiladi](https://kitablelo.com/khoon-ke-khiladi/): Khoon Ke Khiladi प्यार, लालच और अपराध की दुनिया में फँसी एक रोमांचक कहानी - "खून के खिलाड़ी"। मीना की शादी के बाद उसकी नई जिंदगी शुरू ही हुई थी कि एक खतरनाक साजिश जन्म लेती है। सोने के गहनों के लिए शहर गया हुकुमसिंह अचानक अपराधियों के जाल में फँस जाता है, जहाँ धोखा, लूट और मौत हर कदम पर उसका इंतजार कर रहे हैं। निर्दयी बदमाशों और चालाक खिलाड़ियों के बीच छिड़ जाती है एक खूनी टक्कर। आखिर इस खतरनाक खेल में कौन बचेगा और कौन बनेगा खून का असली खिलाड़ी ? - [Sara Shahar Juari](https://kitablelo.com/sara-shahar-juari/) - [Maut Ki Awaaj](https://kitablelo.com/maut-ki-awaaj/): MAUT KI AWAAJ एक ऐसी आवाज जो सुनाई तो देती है, लेकिन दिखाई नहीं देती - और जो भी उसे सुनता है, उसकी जिंदगी मौत के मुहाने पर जा खड़ी होती है! गुप्त जासूसी संस्था 'स्वीप' के बहादुर एजेंट भोलाशंकर एक ऐसे रहस्यमय मामले में उलझ जाते हैं, जहाँ हर सुराग मौत की ओर इशारा करता है। एक मामूली-सी घटना से शुरू हुआ खेल धीरे-धीरे एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय साजिश का रूप ले लेता है। रहस्यमयी लड़की, अजीबोगरीब हादसे और छिपे हुए दुश्मन-हर मोड़ पर खतरा उनका इंतजार कर रहा है। क्या भोलाशंकर इस "मौत की आवाज" के पीछे छिपे रहस्य को उजागर कर पाएंगे? या यह आवाज उन्हें भी हमेशा के लिए खामोश कर देगी ? रोमांच, सस्पेंस और खतरनाक मोड़ों से भरपूर यह उपन्यास आपको आखिरी पन्ने तक बांधे रखेगा ! - [Surangama](https://kitablelo.com/surangama/): “छोट्टो घर खानी मौने की पौड़े सुरंगमा? मौने की पौड़े, मौने की पौड़े?...” एक प्राणों से प्रिय व्यक्ति तीन-चार मधुर पंक्तियों से सुरंगमा के जीवन को संझा के वेग से हिलाकर रख देता है। बार-बार। शराबी, उन्मादी पति से छूटभागी लक्ष्मी को जीवनदाता मिला अँधेरे भरे रेलवे स्टेशन में। रॉबर्ट और वैरोनिका के स्नेहसिक्त स्पर्श में पनपने लगी थी उसकी नवजात बेटी सुरंगमा, लेकिन तभी विधि के विधान ने दुर्भाग्य का भूकम्पी झटका दिया और उस मलबे से निकली सरल निर्दोष पाँच साल की सुरंगमा कुछ ही महीनों में संसारी पुरखिन बन गई थी, फिर शिक्षिका सुरंगमा के जीवन में अंधड़ की तरह घुसता है, एक राजनेता और सुरंगमा उसकी प्रतिरक्षिता बन बैठती है। क्या वह इस मोहपाश को तोड़कर इस दोहरे जीवन से छूट पाएगी? मौने की पौड़े सुरंगमा? एक एकाकी युवती की आन्तरिक और बाहरी संघर्षों की मार्मिक कथा। - [Vipralabdha](https://kitablelo.com/vipralabdha/): महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं। अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़नेवाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ। इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे। प्रस्तुत संग्रह में ‘दो स्मृति-चिह्न’, ‘विप्रलब्धा’, ‘शायद’, ‘ज्येष्ठा’, ‘शपथ’, ‘घंटा’, ‘के’ एवं ’पुष्पहार’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है। कलात्मक कौशल के साथ रची गई ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी। - [Apradhi Kaun](https://kitablelo.com/apradhi-kaun/): महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक भी होती हैं और मर्मस्पर्शी भी। अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़ने वाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ। इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही नहीं पाते। प्रस्तुत संग्रह में ‘अपराधी कौन’, ‘जा रे एकाकी’; ‘छिः, मम्मी, तुम गन्दी हो’; ‘साधो’, ‘ई मुर्दन कै गाँव’; ‘अलख माई’ एवं ‘चाँद’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है। कलात्मक कौशल के साथ रची गई ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं, जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी। - [Gaon Ki Mitti Mitne Nahin Deti](https://kitablelo.com/gaon-ki-mitti-mitne-nahin-deti/): Gaon Ki Mitti Mitne Nahin Deti गाँव की पगडंडियों से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुँचने की यह यात्रा केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि जड़ों से जुड़े रहने की गहरी चेतना है। गाँव की मिट्टी मिटने नहीं देती एक संवेदनशील संस्मरण है, जिसमें लेखक सांता नंद मिश्रा अपने बचपन, संघर्ष, शिक्षा, विदेश प्रवास और जीवन मूल्यों को आत्मीयता के साथ साझा करते हैं। यह पुस्तक बताती है कि आधुनिकता की तेज़ रफ्तार के बीच भी अपनी मिट्टी की खुशबू इंसान को बार-बार पुकारती है। परिवार के संस्कार, गुरुजन का मार्गदर्शन और गाँव की सामूहिकता किस तरह एक साधारण बालक को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की शक्ति देती है—यह कथा उसी का जीवंत प्रमाण है। प्रेरणा, स्मृति और आत्मचिंतन से भरी यह कृति पाठकों को अपनी जड़ों, मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़ने का संदेश देती है। यह उन सभी के लिए है जो जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं, पर अपनी पहचान को खोना नहीं चाहते। - [Markhandi](https://kitablelo.com/markhandi/): बाढ़, गरीबी और सामाजिक उपेक्षा से जूझते एक छोटे से गाँव की पृष्ठभूमि में बुनी गई यह कहानी है मनु की—एक साधारण स्त्री, जिसकी असाधारण हिम्मत हालात से टकराना सीख जाती है। जीवन की कठोर परिस्थितियाँ, टूटते रिश्ते, व्यवस्था की विडंबनाएँ और भीतर पलती उम्मीद… सब मिलकर रचते हैं संघर्ष और साहस की मार्मिक दास्तान। गंडक की धारा की तरह कभी शांत, कभी उफनती यह कथा पाठक को उस दुनिया में ले जाती है जहाँ दर्द भी है, प्रेम भी है और जीते रहने की जिद भी। यह सिर्फ मनु की कहानी नहीं, बल्कि उन अनगिनत आवाज़ों की कहानी है जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार मानना नहीं जानतीं। - [Pret Ki Parchhai](https://kitablelo.com/pret-ki-parchhai/): Pret Ki Parchhai भोलाशंकर बांग्लादेश में रात के सन्नाटे में उड़ता एक रहस्यमयी विमान परमाणु षड्यंत्र, धोखे और मौत का खेल ! जब जासूस भोलाशंकर इस खतरनाक मिशन में कदम रखता है, तो सामने आता है एक ऐसा सच जो दुनिया को तबाह कर सकता है। दुश्मनों की साजिश, "चीनी प्रेत" जैसा रहस्यमयी वैज्ञानिक, और हर मोड़ पर छिपा खतरा-क्या भोलाशंकर इस भयावह खेल को रोक पाएगा? या फिर यह परछाईं पूरे देश को निगल जाएगी? रोमांच, रहस्य और एक्शन से भरपूर यह कथा आपको अंत तक बांधे रखेगी। - [Kaarsaaz: The Silent Difference Maker](https://kitablelo.com/kaarsaaz-the-silent-difference-maker/): भ्रष्टाचार वह दीमक है जिसने भारतीय सरकारी, ग़ैरसरकारी व सामाजिक व्यवस्था को खोखला करने का बीड़ा उठाया हुआ है। जहाँ सरकारी तंत्र में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार फ़ैला हुआ है वहीं इस तंत्र में चंद कारसाज़, यानी कुछ अधिकारी और कर्मचारी, ऐसे भी हैं जो चुपचाप स्वयं मिट जाने की सीमा तक अपनी ईमानदारी की तलवार से दीमक को साफ़ करते रहने के लिए कमर कसे हुए हैं। हमारी व्यवस्था जो कुछ मंथर गति से आगे बढ़ रही है उसके पीछे घर परिवार, साथी अधिकारी, कर्मचारी, राजनीतिक पक्ष विपक्ष सभी का विरोध व ठोकरे सहते यह कारसाज़ (Kaarsaaz) ही हैं। पढ़ें निर्भीक लेखक संजय अग्निहोत्री की बेबाक कलम से निकली ऐसे ही एक कारसाज़ (Kaarsaaz) की दास्तां कारसाज़: द साइलेंट डिफरेंस मेकर (Kaarsaaz: The Silent Difference Maker) - [Jeete Jee Allahabad](https://kitablelo.com/jeete-jee-allahabad/): Jeete Jee Allahabad एक ऐसा शहर जहाँ बकौल ममता कालिया पैदल चलना किसी निरुपायता का पर्याय नहीं था। साहित्य की वह उर्वर भूमि जिसकी नमी किसी भी कलम को ऊर्जा से भर देती थी, जहाँ का सामाजिक ताना-बाना ही लेखकों-बुद्धिजीवियों से बना था। रचनात्मकता, प्रतिरोध और गंगा-जमुनी अपनेपन में रसा-पगा यह शहर, इलाहाबाद कभी देश की हिन्दी मनीषा को दिशा देता था। आन्‍दोलनों को जन्म देता था और राजधानियों से चले आन्‍दोलनों को उनकी औकात भी बताता था। ममता जी बताती हैं कि मुम्बई जैसे महानगर को छोड़कर यहाँ आते समय उन्हें बहुत अफसोस हो रहा था लेकिन इस छोटे शहर के बड़प्पन ने बाद में उन्हें हमेशा के लिए अपना कर लिया। इस किताब में उन्होंने उसी इलाहाबाद को साकार किया है। वह इलाहाबाद जहाँ 'विपन्नता का वैभव और गरीबी का गौरव' धन और सत्ता के दम्भ में झूमते महानगरों की आँखों में आँखें डाल कर देखा करता था। यह सिर्फ संस्मरण नहीं है, एक यात्रा है जिसमें हमें अनेक उन लोगों के शब्दचित्र मिलते हैं जिनके बिना आधुनिक हिंदी साहित्य का इतिहास नहीं लिखा जा सकता और जो उस समय के इलाहाबाद के मन-प्राण होते थे। उपेंद्रनाथ अश्क, शैलेश मटियानी, नरेश मेहता, भैरव प्रसाद गुप्त, मार्कण्डेय, शेखर जोशी, अमरकांत, ज्ञानरंजन, दूधनाथ सिंह, रवींद्र कालिया, उस समय के साहित्यिक इलाहाबाद की धुरी लोकभारती प्रकाशन और उसके कर्ता-धर्ता दिनेश जी, जलेस-प्रलेस और परिमल से जुड़े लेखक, गरज कि इतिहास का एक पूरा अध्याय अपने नायकों और उनकी खूबियों-खामियों के साथ यहाँ पूरी संवेदना और जीवन्तता के साथ अंकित है। साहित्य की आभासी राजधानियों के आत्मग्रस्त स्तूपों पर बैठे हम लोगों के लिए यह वृत्तान्त बहुत ईर्ष्याजनक भी है। दिल की तरह धड़कते हुए एक शहर में फैला हुआ हमारा यह सांवला सा कल सोशल मीडिया के असंख्य मंचों पर छितराए हमारे चमचमाते आज को बहुत कुछ सिखा सकता है। नए साहित्यिकों को इसे अवश्य ही पढ़ना चाहिए और जहाँ भी वे हैं, वहीं एक ऐसा इलाहाबाद बनाना चाहिए। - [Aparajita](https://kitablelo.com/aparajita/): महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं। अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़ने वाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ। इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे। प्रस्तुत संग्रह में ‘दंड’, ‘मन का प्रहारी’, ‘श्राप’, ‘लिखूँ...’, ‘मेरा भाई’, ‘अपराजिता’, ‘निर्वाण’, ‘सौत’, ‘तीन कन्या’, ‘चन्नी’ एवं ‘धुआँ’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है। कलात्मक कौशल के साथ रची गई ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी। - [Atithi](https://kitablelo.com/atithi/): “आज तक उनके किस पूर्वज मुख्यमंत्री ने अपनी जाति को प्रश्रय नहीं दिया? कौन से मुख्य सचिव ने अपनी बिरादरी को महत्त्वपूर्ण पद नहीं सौंपे? कभी-कभी माधव बाबू का चित्त खिन्न हो उठता। क्या इसी स्वतंत्रता के स्वप्न उन्होंने देखे थे?...” भ्रष्टाचार और जातिवाद से महमह महकती राजनीति में मुख्यमंत्री माधव बाबू अपने बिगड़ैल पुत्र कार्तिक को साधने के लिए पारम्परिक भारतीय ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करते हैं, उसकी गाँठ अपने शिक्षक मित्र श्यामाचरण की बेटी जया से बाँधकर। लेकिन सरल, बुद्धिमती और स्वाभिमानी जया पति और मंत्रीपत्नी तथा उनकी नशेड़ी बेटी की समवेत बेहूदगियों से क्षुब्ध। आई.ए.एस. परीक्षा की तैयारी के दौरान एक बड़े उद्योगपति के पुत्र शेखर से उनकी भेंट के बाद उसके जीवन में नया मोड़ आने ही वाला था कि नियति उसके अतीत के पन्ने फरफरा कर फिर उसके आगे खोल देती है। शहर की कुटिल राजनीति, सम्पन्न राजनैतिक घरानों के दुस्सह पारिवारिक दुश्चक्र और पारम्परिक ग्रामीण समाज की कहीं सरल और कहीं कुटिल काकदृष्टि-युक्त टिप्पणियों के ताने-बाने से बुना यह उपन्यास अन्त तक पाठकों की जिज्ञासा का तार टूटने नहीं देता। - [Heroine Ki Hatya](https://kitablelo.com/heroine-ki-hatya/): यश खांडेकर की जिंदगी की नई सुबह में आ जाता है एक भूचाल... उसपर लगा है फिल्मी दुनिया की सुपरस्टार हीरोइन की हत्या का इल्ज़ाम... लेकिन अतीत के सभी दृश्य यश के जेहन से मिट से गये हैं... उसके पीछे पुलिस की तेज तर्रार टीम के अलावा पड़ा है एक प्रोफेशनल किलर भी... आखिर वो यश की जान क्यों लेना चाहता है!? सुपरस्टार हीरोइन की हत्या किसने की!? यश खुद कातिल है या किसी खौफनाक साजिश का शिकार है!? याददाश्त के दगा देने के बाद क्या यश खुद को बेगुनाह साबित कर सकता है!? या उसे मिलेगा फांसी का फंदा!? फिल्मी दुनिया की चकाचौंध और उसके पीछे छिपे काले राज उजागर करता थ्रिल और सस्पेंस का नायाब कॉकटेल हीरोइन की हत्या (Heroine Ki Hatya) - [Sone Ka Kila](https://kitablelo.com/sone-ka-kila/): Sone Ka Kila | सोने का किला सत्यजित राय ने सोने का किला उपन्यास में अपने किशोर पाठकों को बंगाल से राजस्थान तक की यात्रा कराई है—कलकत्ता से जैसलमेर तक की यात्रा। यह उपन्यास एक ऐसे किशोर बालक मुकुल की कथा है जिसे पूर्व जन्म की बातें याद रहती हैं। साथ ही यह एक ऐसे जासूस की कथा है जिसे इस प्रकार के सारे रहस्य खोज निकालने का शौक़ है। अपनी इस विद्या में वह पूरी तरह निपुण है। ये जासूस फेलूदा हैं जिनका पूरा नाम है प्रदोष मित्तिर। मुकुल के पूर्व जन्म की बातों की खोज करने निकले फेलूदा। मुकुल के पूर्व जन्म में एक सोने का क़िला था, एक जगह कहीं गड़ा ख़ज़ाना और उसके घर के पास ही कहीं लड़ाई चल रही थी। फेलूदा यह सब खोजते-खोजते कलकत्ता से जैसलमेर पहुँच गए। सोने का क़िला व गड़ा ख़ज़ाना कइयों को ललचा गया था। गड़ा ख़ज़ाना कौन खोज निकाले और कौन उस पर क़ब्ज़ा करे, इस पर दूसरी दौड़ भी शुरू हो गई थी। फेलूदा जानते थे कि लोग उनका पीछा करेंगे। वे सतर्क थे। पीछा करनेवाले बदमाशों ने बड़ा जाल रचा, मगर फेलूदा मात खानेवाले नहीं थे। पक्के जासूस थे। सत्यजित राय का यह किशोर उपन्यास पाठकों को ख़ूब मज़े से राजस्थान के कई शहर किसनगढ़, बीकानेर, जोधपुर, पोखरण, रामदेवरा और फिर जैसलमेर दिखाता है। ‘सोने का क़िला’ सत्यजित राय के चार किशोर उपन्यासों में से एक है। इस उपन्यास के चित्र भी उन्होंने स्वयं बनाए हैं। - [Katha Kilkari](https://kitablelo.com/katha-kilkari/): कथा किलकारी मनोहर चमोली की 15 बाल कहानियों का संग्रह है। कहानियाँ अलग-अलग परिवेश को दर्शाती हैं । कहानियाँ सीधी, सरल और रोचक भाषा में लिखी गई हैं। इन्हें आसानी से बाँचा भी जा सकता है । बच्चों का जीवन और उनकी आवाजें ही कहानियों में हैं। कहानियाँ बाल पाठकों का भरपूर मनोरंजन करती हैं। कहानियों में जीवन से जुड़े अनुभव भी हैं। - [Saharanpur Ke Khoji Dal](https://kitablelo.com/saharanpur-ke-khoji-dal/): छह माह पहले महादूत के कॉमिक्स का नया सेट आया था। पाँच कॉमिक्सों वाला यह सेट बच्चों के बीच काफी प्रसिद्ध रहा था, पर दिप्पा, चित्तू, पल्लू, डब्बू और टीनू उन्हें अब तक नहीं पढ़ पाए थे। इसका उन्हें पछतावा था। इसलिए गर्मियों की छुट्टियाँ पड़ते ही इस मित्र मंडली ने फैसला कर लिया था कि वह कॉमिक बुक्स के इस सेट को पढ़कर अपनी छुट्टियों को धन्य कर देंगे। पर कर देना सोच लेने जितना आसान न था। वो कॉमिक बुक्स मिलने हँसी खेल थोड़े न थे। दुकानों से तो वह अन्य बच्चों द्वारा कबके लपके जा चुके थे। अब उन्हें खोज-खोज कर इस सेट के प्रत्येक कॉमिक को ढूँढना था। यह ऐसी राह थी जिसमें ढेरों मुसीबतें उनकी प्रतीक्षा कर रही थीं। लेकिन कॉमिक बुक्स को प्राप्त करने का सहारनपुर के इस खोजी दल का यह फैसला भी अटल था, फिर चाहे उन्हें कितनी ही मुसीबतों से क्यों न जूझना पड़े। क्या सहारनपुर का ये खोजी दल अपनी पसंदीदा कॉमिक बुक्स को पाने में सफल हुआ? - [Akhyan Aur Nayi Kavita](https://kitablelo.com/akhyan-aur-nayi-kavita/): आख्यान और नयी कविता | Akhyan Aur Nayi Kavita ‘आख्यान और नयी कविता’ आधुनिक हिंदी कविता में आख्यान की अर्थपूर्ण उपस्थिति और उसके बदलते रूपों की पड़ताल करने वाली महत्त्वपूर्ण आलोचनात्मक कृति है। ‘नयी कविता’ से लेकर ‘समकालीन कविता’ तक बौद्धिक एवं वैचारिक विमर्शों के साथ बदलते आ रहे सामाजिक-सांस्कृतिक-राजनैतिक यथार्थ को कविता में किस तरह कथा, वृत्तांत और इतिहास के रूप में रूपायित किया गया है? स्मृति , मिथक, विस्थापन और वैश्वीकरण की जटिलताओं से उलझती यह पुस्तक इसी प्रश्न का उत्तर खोजते हुए आधुनिक हिंदी कविता को आख्यानपरक दृष्टि से समझने का अवसर देती है। दिलीप शाक्य कवि, आलोचक और सिनेमा-विशेषज्ञ के रूप में हिंदी साहित्य-जगत में पहचाने जाते हैं I उनकी पूर्व प्रकाशित कृतियाँ उन्हें नयी और समकालीन कविता का विश्वसनीय अध्येता बनाती हैं । - [Ek Karod Ka Joota](https://kitablelo.com/ek-karod-ka-joota/): Ek Karod Ka Joota/एक करोड़ का जूता मोती आवतरमानी को उसके पिता गोपाल यशवंतराय आवतरमानी ने बचपन में एक बेशकीमती सफ़ेद जूते के बारे में बताया था, जिसमें वे हीरे छुपा कर रखते थे। दिवाली की उस रात को जिस दिन उसके पिता उसे हमेशा के लिए छोड़ कर गए थे, उस दिन भी उन्होंने सफ़ेद जूते पहने हुए थे। कोई कहता था कि क्योंकि उसने गबन किया था, इसलिए वह कहीं छुपा हुआ है, तो कोई कहता था कि वह कब का मर-खप चुका है। आखिर गोपाल यशवंत अवतारमानी कहां गायब हो गया? वह जिंदा था या मर गया? ऐसे रहस्यमय प्रश्नों के उत्तर तो सुरेन्द्र मोहन पाठक का यह उपन्यास एक करोड़ का जूता ही दे सकता है। - [Itihas Ki Thali](https://kitablelo.com/itihas-ki-thali/): Itihas Ki Thali / इतिहास की थाली कोलंबस भारत नहीं आ सका, लेकिन उसके चक्कर में आलू आ गया और उस आलू ने हमारी आबादी को जिस रफ़्तार से बढ़ाया कि दुनिया देखती रह गई। ईसाई पादरी ‘क्रिसमस नहीं मनाएँगे’, कहते रह गए मगर बाज़ार ने उसे दुनिया का त्योहार बना डाला। कभी हीर और रांझे की प्रेम कहानी ने बासमती को अमेरिका की संपत्ति बनने से बचा लिया, तो कहीं परंपरा के नाम पर महिलाओं का पोषण ही रोक दिया गया। कभी एक फ़ास्टफ़ूड कंपनी ने कहा कि फ़ेमिनिस्ट होने का मतलब है खाना न पकाना, तो कभी केलों के व्यापार ने सरकारों को तानाशाह बना दिया। अगर अब्राहम लिंकन की वजह से बंबई को उसकी पावभाजी मिली, तो कोला कंपनियों ने खेल को धर्म और खिलाड़ियों को भगवान बनाया। रोटियों से क्रांति करने और नमक से सत्ता गिराने वाले देश में इतिहास की थाली इन तमाम घटनाओं के साथ-साथ, बिरयानी से लेकर 1947 के बँटवारे तक को एक नई नज़र से देखने की क्षमता देती है। क्योंकि हमारे हर निवाले में स्वाद के साथ-साथ इतिहास, व्यापार, संस्कृति, पहचान और साज़िशों की पूरी दुनिया छिपी होती होती है। - [Hriday Deep](https://kitablelo.com/hriday-deep/): Heart Lamp | हृदय दीप  (Hriday Deep) बानू की ये कहानियाँ उनकी सामाजिक सक्रियता से जुड़ी हैं और कर्नाटक की मुस्लिम महिलाओं के दैनिक संघर्षों को बयां करती हैं। 1970 और 1980 के दशक में देखे गए दलित आंदोलन, किसान प्रदर्शन, भाषा आंदोलन और पर्यावरण की लड़ाई ने उन्हें सजग लेखन के लिए प्रेरित किया। बानू की ये कहानियाँ आत्मकथात्मक हैं, जहाँ हकीकत और कल्पना का संगम है। वह कहती हैं, 'मेरा दिल ही मेरा अध्ययन क्षेत्र है।' उनकी कहानियाँ उन महिलाओं की आवाज़ बनती हैं, जो धर्म, समाज और राजनीति की बेड़ियों में जकड़ी हैं, लेकिन अपनी गरिमा और आज़ादी की खोज में हैं। - [Ek Gulabi Bhainsa Alag Sa](https://kitablelo.com/ek-gulabi-bhainsa-alag-sa/): Ek Gulabi Bhainsa Alag Sa कद में छोटा, रंग में खोटा, शक्ति से हीन फिर भी वो था निराला, सब के दिल में जगह बनाने वाला हर हाल में खुश रहने वाला किसी से भी नहीं डरता था और सबसे प्यार करता था तन-मन से था वो खुशबूदार ये कहानी है एक गुलाबी भैंसे की... उसकी एक अनोखी यात्रा की जिसमें वो चला था अपनी ज़िन्दगी का मकसद खोजने इस यात्रा में उसने ज़िन्दगी के बारे में बहुत कुछ जाना इस दुनिया को थोड़ा और बेहतर बनाने का तरीका पहचाना! गुलाबी भैंसे की यह कहानी उन सभी के लिए है जो हर हाल में खुशी चाहते हैं, अपने लिए... दुनिया के लिए! - [Main Hoon Chhutku](https://kitablelo.com/main-hoon-chhutku/):  Main Hoon Chhutku मैं हूँ छुटकू और ये मेरी कहानी है! मैं आजकल के नए ज़माने का कुत्ता हूँ, तब भी इन लोगों ने मेरा नाम ‘सैंडी’, ‘चार्ली’ या ‘जैकी’ न रखकर ‘छुटकू’ रख दिया। इस घर के लोगों को नाम रखने का बिलकुल सेंस नहीं है। बड़कऊ-छुटकऊ, बड़ू-छोटू, बड़ेवाले-छोटेवाले, लम्बेवाले-नाटेवाले, ये सभी नाम इस ख़ानदान में मिल जाएँगे इसलिए इनसे और किसी नाम की आशा करना भी बेकार है। ख़ैर, आइये इन सब बातों से दूर, चलते हैं मेरी एक रोमांचक यात्रा पर... - [Vishwaguru](https://kitablelo.com/vishwaguru/): विश्वगुरु (Vishwaguru) हमारे समय की महागाथा है, जिसमें प्रतिभा से भरे युवा, उनके सपने, अवसरों की सीमा, अपने धागों में उलझा हुआ समाजशास्त्र और सत्ता से जकड़ा हुआ राजनीतिशास्त्र आमने–सामने खड़े दिखाई देते हैं। ये उपन्यास किसी एक नायक या खलनायक की कहानी नहीं बल्कि उस पीढ़ी का आख्यान है जो शिक्षा, रोज़गार, आंदोलन, समाज और सत्ता के बीच धप्पा–धप्पी खेल रही है। कभी अवसर प्रतिभा को धप्पा देता है, कभी प्रतिभा उपलब्धियों को। चिन्मय, दर्पण, अंगद, कृपालु, लावण्या जैसे पात्र ग्रामीण और क़स्बाई भारत के उस यथार्थ से निकले हैं जहाँ एक वर्ग के लिए सरकारी नौकरी इंद्रासन पाने की राह है तो दूसरा वर्ग वह है जिसके लिए निजी क्षेत्र कुबेर के खजाने तक जाने का रास्ता। इन सबके सामने सत्ता की स्वाभाविक राजनीति है जिसके सुरंग का आकार इन सबसे बड़ा है। लखी बैरागी सूखी हुई नदी के किनारे बाउल गीत गा रहा है और नदी के उस पार अवध बिहारी, बोगो महतो, विलायती सिंह जैसे चरित्र हैं जो सत्ता, हिंसा और धन के त्रिकोण से निकले हैं और इसके तीनों कोण अंततः आम आदमी को ही चुभते हैं। विश्वगुरु बेरोजगारी, दहेज, पारिवारिक संकट, जाति, धर्म, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के नैतिक संकट को बिना किसी उपदेश या उलाहना के यथार्थ की जमीन पर ईमानदारी और साहस के रेशे से बुनता है। ये उपन्यास न किसी विचारधारा का घोषणापत्र है और न किसी दल का समर्थन-पत्र। ये अपने समय का सच्चा बयान है। ये उपन्यास उन पाठकों के लिए है जो अपनी मेज पर समकालीन भारत का नक्शा रखकर उसे विचारधाराओं की गिरह से मुक्त होकर समझना चाहते हैं। जय हो।   - [Rakttrishna](https://kitablelo.com/rakttrishna/): वह लोगों के लिए एक पहेली थी। कोई नहीं जानता था कि वह कहाँ रहती थी और कैसे जीवन-यापन करती थी। न तो वह दिन के उजाले में दिखती थी और न ही रात के अँधेरे में। उसके दिखने का जो वक्त मुक़र्रर था, वह पूर्णमासी की रात थी और जो स्थान मुक़र्रर था, वह यक्षिणी-मंदिर का तालाब था। उस रहस्यमयी औरत की हैरतअंगेज दास्तान, जिसकी निगाहों का मारा मौत का मुसाफ़िर बन जाता था। - [Gullu Bhayankar](https://kitablelo.com/gullu-bhayankar/): ‘गुल्लू भयंकर’ (Gullu Bhayankar) नब्बे के दशक के एक छोटे से क़स्बे की रंगीन, मनोरंजक और टकरावों से भरी कहानी है, जहाँ के युवा फ़िल्मी अभिनेताओं से गहरे प्रभावित हैं। क़स्बे के लड़के अपने पसंदीदा हीरो की तरह दिखने, पहनने और बोलने की होड़ में लगे रहते हैं ताकि उन्हें उनके असली नाम की जगह उनके पसंदीदा हीरो के नाम से पहचाना जाए। इसी चाहत में मिथुन क़स्बे का पहला हीरो बनता है और उसके फ़ॉलोवर्स ‘डिस्को डांसर्स’ कहलाते हैं। बाद में अजय के आने के बाद क़स्बे में ‘दिलवाले’ नाम का दूसरा ग्रुप बनता है और क़स्बा दो धड़ों में बँट जाता है। तभी गुल्लू की वापसी होती है—रहस्यमयी, स्टाइलिश और खुले हाथ से पैसे उड़ाने वाला गुल्लू भयंकर, जो दोनों ग्रुप्स को अपनी ओर खींच लेता है। कहानी दोस्ती, टकराव, सपनों और एक फ़िल्म बनाने की जद्दोजहद के बीच उतार-चढ़ाव भरे सफ़र से गुज़रते हुए अपने मुक़ाम तक पहुँचती है। एक रोलर-कोस्टर राइड की तरह, इस कहानी में भी कई उतार-चढ़ाव हैं—लेकिन आप बेफ़िक्र होकर इसमें सवार हो सकते हैं, क्योंकि गुल्लू भयंकर और उसके किरदार आपको अंत तक बाँधे रखेंगे। - [Tension Mat Le Yaar](https://kitablelo.com/tension-mat-le-yaar/): “हर इंसान दो लड़ाइयाँ लड़ रहा है—एक दुनिया से, और एक ख़ुद से। बस इतना जान लो, तुम अकेले नहीं हो।” यह किताब मोटिवेशन नहीं देती—यह आपको गले लगाती है। टेंशन मत ले (Tension Mat Le Yaar) यार उन लोगों के लिए है जो सफल दिखते हुए भी भीतर से थके हुए हैं। जो सही रास्ते पर होने के बावजूद खोया हुआ महसूस करते हैं। जो बार-बार खुद से पूछते हैं— मैं कौन हूँ? मैं क्यों हूँ? दिव्य प्रकाश दुबे इस किताब में न गुरु बनते हैं, न कोई लाइफ़ हैक बताते हैं, और न ही कोई रेडीमेड समाधान बेचते हैं। वे अपने असमंजस, असफलताओं, अकेलेपन, करियर की भटकन और जीवन के कठिन सवालों को उसी ईमानदारी से रखते हैं, जैसे कोई दोस्त देर रात 2 बजे चाय के साथ बात करता है— बिना जज किए, बिना उपदेश दिए। अगर आप इस समय जीवन के किसी मोड़ पर अटके हुए हैं— अगर सवाल ज़्यादा हैं और जवाब कम— तो यह किताब आपको जवाब नहीं देगी, बस इतना याद दिलाएगी कि आप अकेले नहीं हैं। यह किताब उन बातों की जगह बनती है जो माँ-पिता अपने बेटे-बेटी से, दोस्त अपने दोस्त से, छोटा भाई-बहन अपने किसी अपने से कहना चाहते हैं—पर कह नहीं पाते। इसीलिए यह अपनों को देने के लिए एक ख़ूबसूरत तोहफ़ा बन जाती है। यह किताब आपको ‘परफेक्ट’ बनने का दबाव नहीं देती। यह बस आपके कंधे पर हाथ रखकर कहती है— टेंशन मत ले यार (Tension Mat Le Yaar)। - [Sugar Daddy](https://kitablelo.com/sugar-daddy/): हर क़त्ल के पीछे एक मंशा होती है, पैसा, नाकामयाब इश्क़, बदला, शोहरत या सत्ता का लालच। यूँ ही कोई उठ कर किसी का क़त्ल नहीं कर देता। क़त्ल एक कॉम्पलेक्स्ड खेल है। दिल्ली के अधेड़ करोड़पति बिजनेसमैन श्याम का क़त्ल हो गया है। एक हिल स्टेशन के रेजॉर्ट में, जहाँ वह कल अपने से तीस साल छोटी लड़की मायरा के साथ आया था। मायरा सोचती है कि श्याम उसका शुगर डैडी है, उसे चाहता है, उससे शादी करना चाहता है। पर उस भटकी हुई और टूटे परिवार से निकली लड़की को यह नहीं पता कि उसी रेजॉर्ट में उसकी फ़िरंगी पहली दिवंगत पत्नी की बेटी, पैसे की लालची दूसरी पत्नी अपने बेटे के साथ और होने वाली रहस्ममई तीसरी पत्नी भी मौजूद हैं। और सबके पास है श्याम का क़त्ल करने की तगड़ी वजहें। कौन सुलझाएगा यह मिस्ट्री? आप? तो शामिल हो जाइए इस रोमांचक और पल-पल बदलते समीकरणों को सुलझाने की दौड़ में… शुगर डैडी (Sugar Daddy) जयंती रंगनाथन का नवीनतम् उपन्यास... - [Scout Camp Mein Hungama](https://kitablelo.com/scout-camp-mein-hungama-om-prakash-sharma/): क्या साहस सिर्फ़ ताक़त से आता है—या समझदारी और सूझ-बूझ से भी? हिमाचल की ऊँची पहाड़ियों में लगे एक रोमांचक स्काउट कैम्प के दौरान अचानक ऐसा तूफान आता है, जो सब कुछ बदल देता है। टूटता हुआ पुल, भयानक बारिश और अंधेरी रात—इसी अफ़रा-तफ़री में दो साहसी भाई-बहन, रमेश और मीना, अपने दल से बिछुड़ जाते हैं। जंगल की गुफ़ा में शरण लेते हुए वे सिर्फ़ प्रकृति की चुनौती से ही नहीं, बल्कि रहस्यमय शिकारी, जंगली जानवरों और छिपे हुए अपराधियों के ख़तरे से भी दो-चार होते हैं। हालात तब और गंभीर हो जाते हैं जब केंद्रीय खुफ़िया विभाग के जासूस इस रहस्य में शामिल हो जाते हैं। क्या रमेश की स्काउट-बुद्धि और मीना की गाइड-सूझबूझ उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल पाएगी? क्या निडरता और सही निर्णय संकट को मात दे सकते हैं? “स्काउट कैम्प में हंगामा” साहस, भाई-बहन के भरोसे, देशभक्ति और नैतिक मूल्यों से भरी एक तेज़-तर्रार बाल साहसिक कथा है—जो बच्चों को डर के सामने डटे रहना सिखाती है। जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा (Om Prakash Sharma) की कलम से निकला एक रोमांचक बाल उपन्यास। - [Baba Willaim aur Teen ladkiyan](https://kitablelo.com/baba-willaim-aur-teen-ladkiyan-om-prakash-sharma/): “बाबा विलियम और तीन लड़कियां” एक रोमांचक बाल-उपन्यास है, जिसमें साहस, कल्पना और विज्ञान एक-दूसरे से हाथ मिलाते हैं। आरती, पूनम और रचना अम्बादीप की सैर पर जाती हैं, लेकिन एक भयानक तूफान उन्हें अजगर द्वीप तक पहुँचा देता है—जहाँ राक्षस राघ का आतंक है। क्या तीन छोटी बच्चियाँ और एक समझदार वैज्ञानिक बुराई के सामने टिक पाएँगे? क्या विज्ञान विनाश का औज़ार बनेगा या मानवता की ढाल? यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि ज्ञान, करुणा और साहस—सबसे बड़ी शक्ति हैं। एक प्रेरक, रोमांचक और शिक्षाप्रद बाल-कहानी। जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा (Janpriya Lekhak Om Prakash Sharma) का लिखा बाल उपन्यास। ## Optional - [Agent (MCP protocol)](websites-agents.hostinger.com/kitablelo.com/mcp) [comment]: # (Generated by Hostinger Tools Plugin)