
Lakadbaggha - -
Original price was: ₹225.₹200Current price is: ₹200. (-11%)

₹225 Original price was: ₹225.₹200Current price is: ₹200. (-11%)
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Anurag Kumar
सत्या व्यास जी वैसे तो प्रेम, सामाजिक लेखन करते हैं पर पहली बार थ्रिलर उपन्यास लिखा और क्या खूब लिखा। एक लाइन में कहूं तो कमाल लिखा है। मुझ जैसे नए थ्रिलर लेखक को भी बहुत कुछ सीखने को मिला। सर को अनुराग कुमार जीनियस की ओर से बहुत बहुत शुभकामनाएं।

Shilpi rastogi
Suspense and thriller ka जबरदस्त काकटेल हैं लगड़बग्गा।


Sorry, no reviews match your current selections
Lakadbaggha
Lakadbaggha | लकड़बग्घा
“एक और कविता सुनोगी?” पीछे से ही उसने पुकारा।
लड़की पीछे नहीं मुड़ी। बस आगे जाते हुए ही उसने बीच की उँगली दिखा दी। वह अभी दो कदम ही आगे बढ़ी थी कि स्टील के चमचमाते हथौड़े का एक जोरदार वार उसकी दायीं कनपटी पर पड़ा और वह झूलकर बेजान पुतले की तरह बायीं ओर गिर गयी।
हत्यारे ने सुप्रिया के सिर से निकलने वाली खून की पतली धार को बहते हुए देखा और उससे अपना पैर बचाते हुए आगे बढ़ गया। उसने बहुत ही करीने से हथौड़ा अपने बैग में रखते हुए कहा –“डिसरिस्पेक्ट ऑफ़ आर्ट एंड पोएट्री इस द फर्स्ट साइन ऑफ़ अ डेड सोसाइटी। तुम्हें जो करना है करो! बट नेवर डिसरिस्पेक्ट एन आर्टिस्ट। कविता सुनने में क्या जाता है? छोटी-सी तो कविता थी।” कहते हुए फिर उसकी आवाज कठोर हुई। उसने लाश की तरफ एक आखिरी निगाह डाली,
आसपास की स्थिति जाँची और बुदबुदाया –
“तुम्हें यंत्रणा दिए बिना मारना
अपूर्ण कर देता मेरे हृदय के एक भाग को
बहुत बेला निंद्रा से उठ बैठता
कामना के ज्वर से तप्त
किसी ऊँचाई पर ले जाकर तुम्हें धक्का देना
कितना उत्तेजक होता
और जो कोलाहल होता पश्चात् उसके
उसमें कितना संगीत होता प्रेयसी”
| Weight | 200 g |
|---|---|
| Dimensions | 20 × 14 × 2 cm |
Lakadbaggha
Lakadbaggha
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Anurag Kumar
सत्या व्यास जी वैसे तो प्रेम, सामाजिक लेखन करते हैं पर पहली बार थ्रिलर उपन्यास लिखा और क्या खूब लिखा। एक लाइन में कहूं तो कमाल लिखा है। मुझ जैसे नए थ्रिलर लेखक को भी बहुत कुछ सीखने को मिला। सर को अनुराग कुमार जीनियस की ओर से बहुत बहुत शुभकामनाएं।

Shilpi rastogi
Suspense and thriller ka जबरदस्त काकटेल हैं लगड़बग्गा।


Verified review – view original![]()
Printing of novel so dim so difficult to reading
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Not on time. Lazy delivery, no as promised while pre book.
Sorry, no reviews match your current selections
Lakadbaggha | लकड़बग्घा
“एक और कविता सुनोगी?” पीछे से ही उसने पुकारा।
लड़की पीछे नहीं मुड़ी। बस आगे जाते हुए ही उसने बीच की उँगली दिखा दी। वह अभी दो कदम ही आगे बढ़ी थी कि स्टील के चमचमाते हथौड़े का एक जोरदार वार उसकी दायीं कनपटी पर पड़ा और वह झूलकर बेजान पुतले की तरह बायीं ओर गिर गयी।
हत्यारे ने सुप्रिया के सिर से निकलने वाली खून की पतली धार को बहते हुए देखा और उससे अपना पैर बचाते हुए आगे बढ़ गया। उसने बहुत ही करीने से हथौड़ा अपने बैग में रखते हुए कहा –“डिसरिस्पेक्ट ऑफ़ आर्ट एंड पोएट्री इस द फर्स्ट साइन ऑफ़ अ डेड सोसाइटी। तुम्हें जो करना है करो! बट नेवर डिसरिस्पेक्ट एन आर्टिस्ट। कविता सुनने में क्या जाता है? छोटी-सी तो कविता थी।” कहते हुए फिर उसकी आवाज कठोर हुई। उसने लाश की तरफ एक आखिरी निगाह डाली,
आसपास की स्थिति जाँची और बुदबुदाया –
“तुम्हें यंत्रणा दिए बिना मारना
अपूर्ण कर देता मेरे हृदय के एक भाग को
बहुत बेला निंद्रा से उठ बैठता
कामना के ज्वर से तप्त
किसी ऊँचाई पर ले जाकर तुम्हें धक्का देना
कितना उत्तेजक होता
और जो कोलाहल होता पश्चात् उसके
उसमें कितना संगीत होता प्रेयसी”
| Weight | 200 g |
|---|---|
| Dimensions | 20 × 14 × 2 cm |
Lakadbaggha
Designed and Managed by Sahaj Takneek
As a always I was fascinated by his work. I have read almost all of his works and love his creations. This novel adds a lot many stars to his already stellar reputation. Hats off.
सत्या व्यास जी वैसे तो प्रेम, सामाजिक लेखन करते हैं पर पहली बार थ्रिलर उपन्यास लिखा और क्या खूब लिखा। एक लाइन में कहूं तो कमाल लिखा है। मुझ जैसे नए थ्रिलर लेखक को भी बहुत कुछ सीखने को मिला। सर को अनुराग कुमार जीनियस की ओर से बहुत बहुत शुभकामनाएं।
Such a good book
Suspense and thriller ka जबरदस्त काकटेल हैं लगड़बग्गा।
I like to read thriller stories and lakadbaggha is a type of book. I liked it.