
Kotdwar : Dil Likhta Bhi Hai - Parag Dimri-
Original price was: ₹199.00.₹179.00Current price is: ₹179.00. (-10%)

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Sorry, no reviews match your current selections
Kotdwar : Dil Likhta Bhi Hai
कोटद्वार पर लिखना कोटद्वार के अलावा, उस दौर पर लिखना भी था, जब ज़िंदा लोगों से ही नहीं निर्जीवों से भी गहरा रिश्ता हुआ करता था।
जब सादगी थी,
सड़कों के किनारे पेड़ हुआ करते थे।
फल खरीदकर ही नहीं, पेड़ पर चोरी से चढ़ कर, पत्थर मारकर भी खा लिए जाते थे।
रोज काफी लोगों से मिलना होता था।
लोगों से उनके घर के अंदर घंटों बातें हुआ करती थी, फिर घर की चौखट, ड्योढ़ी पर भी आधे घंटे और बातें हो जाया करती थीं।
लड़कपन घर के बाहर ही बीतता था।
गर्मियों की छुट्टियाँ रिश्तेदारों के यहाँ कटती थीं, किसी हिल स्टेशन के होटल, रिसोर्ट में नहीं।
फोटो खिंचवाते वक्त चेहरे पर असली भाव ही कायम रखते थे।
न तो ज़िन्दगी में फ़िल्टर किया जाता था, और न ही फोटूओं में।
| Weight | 200 g |
|---|---|
| Dimensions | 21 × 17 × 2 cm |
Kotdwar : Dil Likhta Bhi Hai
Kotdwar : Dil Likhta Bhi Hai
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It was great experience buying the book from this site and the customer service is also great. What impressed me the most was that you personal interest to ensure that my product was delivered to me. when it became apparent that my product won’t be delivered on time due to the laziness of the delivery service then you ensured delivery of another copy to me within two days. I would definitely recommend it to others. Thank-you.
सत्या व्यास जी वैसे तो प्रेम, सामाजिक लेखन करते हैं पर पहली बार थ्रिलर उपन्यास लिखा और क्या खूब लिखा। एक लाइन में कहूं तो कमाल लिखा है। मुझ जैसे नए थ्रिलर लेखक को भी बहुत कुछ सीखने को मिला। सर को अनुराग कुमार जीनियस की ओर से बहुत बहुत शुभकामनाएं।
Customer service and delivery both are good
बढ़िया है वैसे, बस अगर किसी का नम्बर ना लगे तो whatsapp पर भी काल कर लें एक बार …
As it was my first order from the site so obviously I was expecting a early or on time delivery but the product delivered late, yes but it’s a good thing that I got notified via mail. Will shop more . Thanks
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कोटद्वार पर लिखना कोटद्वार के अलावा, उस दौर पर लिखना भी था, जब ज़िंदा लोगों से ही नहीं निर्जीवों से भी गहरा रिश्ता हुआ करता था।
जब सादगी थी,
सड़कों के किनारे पेड़ हुआ करते थे।
फल खरीदकर ही नहीं, पेड़ पर चोरी से चढ़ कर, पत्थर मारकर भी खा लिए जाते थे।
रोज काफी लोगों से मिलना होता था।
लोगों से उनके घर के अंदर घंटों बातें हुआ करती थी, फिर घर की चौखट, ड्योढ़ी पर भी आधे घंटे और बातें हो जाया करती थीं।
लड़कपन घर के बाहर ही बीतता था।
गर्मियों की छुट्टियाँ रिश्तेदारों के यहाँ कटती थीं, किसी हिल स्टेशन के होटल, रिसोर्ट में नहीं।
फोटो खिंचवाते वक्त चेहरे पर असली भाव ही कायम रखते थे।
न तो ज़िन्दगी में फ़िल्टर किया जाता था, और न ही फोटूओं में।
| Weight | 200 g |
|---|---|
| Dimensions | 21 × 17 × 2 cm |
Kotdwar : Dil Likhta Bhi Hai
कोटद्वार वर्तमान में उत्तराखंड राज्य के पौड़ी गढ़वाल जनपद का मैदानी क्षेत्र का एकमात्र व जनपद का सबसे बड़ा नगर है। कोटद्वार एक प्रमुख औद्योगिक व व्यवसायिक नगर होने के साथ गढ़देश (गढ़वाल) का बिजनौर जनपद की ओर से प्रवेशद्वार भी है। 2014 के सामान्य चुनावों में लोकसभा क्षेत्र का व्यय प्रेक्षक रहते दो-तीन बार और पश्चात में एक सहकर्मी की बारात में सम्मिलित होकर कोटद्वार जाना हुआ था। सामान्य रूप से देखने में व्यवस्थित, साफसुथरा नगर प्रतीत हुआ था। कोटद्वार से इतना ही परिचय था।
पुस्तक के लेखक प्रिय पराग डिमरी जी के माध्यम से फेसबुक पर कोटद्वार को जितना पढ़ते थे पुस्तक उसका ही विस्तार है। कोटद्वार नगर और 90 के दशक से पूर्व के किसी भी उत्तर भारतीय नगर से किसी भी प्रकार जुड़ाव रखने वाले तथा और ऐसे नगरों व तत्कालीन समय मे ऐसे नगरों को समझने का प्रयास करने वाले लोगों के लिये पठनीय व सङ्ग्रहणीय पुस्तक के रूप में मैं “कोटद्वार, दिल लिखता भी है” को क्रय करने, पढ़ने व सङ्ग्रह करने व अन्य लोगों को प्रोत्साहित करने की अनुशंसा करता हूँ।
कोटद्वार वर्तमान में उत्तराखंड राज्य के पौड़ी गढ़वाल जनपद का मैदानी क्षेत्र का एकमात्र व जनपद का सबसे बड़ा नगर है। कोटद्वार एक प्रमुख औद्योगिक व व्यवसायिक नगर होने के साथ गढ़देश (गढ़वाल) का बिजनौर जनपद की ओर से प्रवेशद्वार भी है। 2014 के सामान्य चुनावों में लोकसभा क्षेत्र का व्यय प्रेक्षक रहते दो-तीन बार और पश्चात में एक सहकर्मी की बारात में सम्मिलित होकर कोटद्वार जाना हुआ था। सामान्य रूप से देखने में व्यवस्थित, साफसुथरा नगर प्रतीत हुआ था। कोटद्वार से इतना ही परिचय था।
पुस्तक के लेखक प्रिय पराग डिमरी जी के माध्यम से फेसबुक पर कोटद्वार को जितना पढ़ते थे पुस्तक उसका ही विस्तार है। कोटद्वार नगर और 90 के दशक से पूर्व के किसी भी उत्तर भारतीय नगर से किसी भी प्रकार जुड़ाव रखने वाले तथा और ऐसे नगरों व तत्कालीन समय मे ऐसे नगरों को समझने का प्रयास करने वाले लोगों के लिये पठनीय व सङ्ग्रहणीय पुस्तक के रूप में मैं “कोटद्वार, दिल लिखता भी है” को क्रय करने, पढ़ने व सङ्ग्रह करने व अन्य लोगों को प्रोत्साहित करने की अनुशंसा करता हूँ।
कोटद्वार के बारे में शानदार लिखा है पढ़कर ऐसा लगता है कि आप भी लेखक कि साथ कोटद्वार यात्रा पर है । बधाई पराग जी इतनी शानदार किताब लिखने के लिये।इसको पढ़कर ऐसा लगा कि हम भी कहीं न कहीं इससे जुड़े हुए हैं
Good book
समय पर डिलिवरी, और अच्छी पैकेजिंग के साथ पुस्तक प्राप्त हुई