
Khoon Ka Jaal - -
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Khoon Ka Jaal
खून का जाल
एक शहर…
जहाँ हर कुछ दिनों में मिलती है एक नई लाश।
कभी सुनसान सड़क पर, कभी कूड़े के ढेर में, तो कभी अंधे कुएँ की गहराइयों में।
न कोई गवाह…
न कोई स्पष्ट सुराग…
सिर्फ मौत का बढ़ता हुआ सिलसिला और उसके पीछे छिपा एक रहस्यमय जाल।
जांच के दौरान एक अजीब तथ्य सामने आता है—हर हत्या का संबंध कुछ रहस्यमय विज्ञापनों से जुड़ा है। आकर्षक शब्दों और सुनहरे वादों से भरे ये विज्ञापन शहर के प्रभावशाली और धनवान लोगों को अपनी ओर खींचते हैं, लेकिन जो उनके संपर्क में आते हैं, वे धीरे-धीरे मौत के शिकंजे में फँसते चले जाते हैं।
क्या यह किसी खूबसूरत चेहरे के पीछे छिपा अपराध साम्राज्य है?
क्या इन विज्ञापनों का उद्देश्य केवल शिकार ढूँढ़ना है?
और वह कौन-सा मास्टरमाइंड है, जो इंसानी कमजोरियों का फायदा उठाकर मौत का यह जाल बुन रहा है?
जैसे-जैसे मेजर बलवंत इस रहस्य की तह तक पहुँचते हैं, सामने आता है छल, लालच, ब्लैकमेल और हत्या का ऐसा संगठित खेल, जिसकी जड़ें शहर के ऊँचे तबकों तक फैली हुई हैं। हर नया सुराग उन्हें और बड़े खतरे की ओर ले जाता है, जहाँ शिकारी और शिकार के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।
अब यह केवल एक हत्यारे को पकड़ने का मामला नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने की लड़ाई है, जो मासूम इच्छाओं और गुप्त लालसाओं को मौत के कारोबार में बदल चुका है।
रहस्य, साजिश, अपराध, रोमांच और चौंका देने वाले खुलासों से भरपूर “खून का जाल” मेजर बलवंत सीरीज का एक विस्फोटक जासूसी उपन्यास है, जहाँ हर कदम पर धोखा है, हर मुस्कान के पीछे खतरा है और हर सच एक नई मौत का दरवाज़ा खोल देता है।
| Weight | 250 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 15 × 2 cm |
| Condition | |
| Language | हिंदी |
| Format | पेपरबैक |
| Number of Pages | 187 |
Khoon Ka Jaal
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खून का जाल
एक शहर…
जहाँ हर कुछ दिनों में मिलती है एक नई लाश।
कभी सुनसान सड़क पर, कभी कूड़े के ढेर में, तो कभी अंधे कुएँ की गहराइयों में।
न कोई गवाह…
न कोई स्पष्ट सुराग…
सिर्फ मौत का बढ़ता हुआ सिलसिला और उसके पीछे छिपा एक रहस्यमय जाल।
जांच के दौरान एक अजीब तथ्य सामने आता है—हर हत्या का संबंध कुछ रहस्यमय विज्ञापनों से जुड़ा है। आकर्षक शब्दों और सुनहरे वादों से भरे ये विज्ञापन शहर के प्रभावशाली और धनवान लोगों को अपनी ओर खींचते हैं, लेकिन जो उनके संपर्क में आते हैं, वे धीरे-धीरे मौत के शिकंजे में फँसते चले जाते हैं।
क्या यह किसी खूबसूरत चेहरे के पीछे छिपा अपराध साम्राज्य है?
क्या इन विज्ञापनों का उद्देश्य केवल शिकार ढूँढ़ना है?
और वह कौन-सा मास्टरमाइंड है, जो इंसानी कमजोरियों का फायदा उठाकर मौत का यह जाल बुन रहा है?
जैसे-जैसे मेजर बलवंत इस रहस्य की तह तक पहुँचते हैं, सामने आता है छल, लालच, ब्लैकमेल और हत्या का ऐसा संगठित खेल, जिसकी जड़ें शहर के ऊँचे तबकों तक फैली हुई हैं। हर नया सुराग उन्हें और बड़े खतरे की ओर ले जाता है, जहाँ शिकारी और शिकार के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।
अब यह केवल एक हत्यारे को पकड़ने का मामला नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने की लड़ाई है, जो मासूम इच्छाओं और गुप्त लालसाओं को मौत के कारोबार में बदल चुका है।
रहस्य, साजिश, अपराध, रोमांच और चौंका देने वाले खुलासों से भरपूर “खून का जाल” मेजर बलवंत सीरीज का एक विस्फोटक जासूसी उपन्यास है, जहाँ हर कदम पर धोखा है, हर मुस्कान के पीछे खतरा है और हर सच एक नई मौत का दरवाज़ा खोल देता है।
| Weight | 250 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 15 × 2 cm |
| Condition | |
| Language | हिंदी |
| Format | पेपरबैक |
| Number of Pages | 187 |
Khoon Ka Jaal
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