Description
Khatre Ki Ghanti | खतरे की घंटी
“वो आदमी जिस जंजाल में फंसा हुआ है” – मेरी सेक्रेटरी रजनी बोली – “आप खबरदार नहीं होंगे तो वह उसे आपके सिर लाद के मानेगा। वो एक झूठा और फरेबी आदमी है और जो कहानी आपको सुना रहा है, उसमें जरूर कोई भेद हैं? वैसे तो सलाह आजकल कौन मानता है, लेकिन फिर भी सलाह दे रही हूँ कि इस केस को जाने दीजिए। जब से इस आदमी ने ऑफिस में कदम रखा है, मेरे कानों में खतरे की घंटी बज रही है।”
“वो तो मेरे कानों में भी बज रही है, लेकिन” – मैं बोला – “मैं फीस के तौर पर उससे किसी ऐसी गैर मुनासिब रकम की मांग करता हूँ जो उसे हरगिज कबूल नहीं होगी। फिर वो खुद ही दफा हो जाएगा।“
लेकिन क्लाइंट दफा न हुआ।
न चाहते हुए भी एक फसादी केस मेरे पल्ले पड़ गया।
सुधीर सीरीज का सनसनीखेज उपन्यास

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