एक पुरानी हवेली…
एक जन्मदिन की रात…
और बारह वर्षों से दफन एक ऐसा रहस्य, जो अचानक फिर से जाग उठता है।
जिस रात मशहूर अभिनेत्री की रहस्यमय मृत्यु हुई थी, उसी तारीख को हवेली में फिर खून बहता है। हर हत्या के साथ उभरते हैं नए सवाल—चेहरे पर काला नकाब, सीने में धंसी छुरी और दीवारों पर बिखरे ऐसे संकेत, जो किसी भयावह अतीत की ओर इशारा करते हैं।
क्या यह सचमुच सदियों पुरानी आम्रपाली की आत्मा का प्रतिशोध है?
या फिर कोई शातिर अपराधी अंधविश्वास की आड़ में अपना खूनी खेल खेल रहा है?
जब हवेली का हर निवासी शक के घेरे में हो, हर मुस्कान के पीछे छल छिपा हो और हर चेहरा किसी न किसी रहस्य को ढके बैठा हो, तब सच और भ्रम के बीच की रेखा धुंधली होने लगती है।
रहस्य की परतें खुलने लगती हैं तो सामने आते हैं विश्वासघात, लालच, अधूरी महत्वाकांक्षाएँ और ऐसे रिश्ते, जिनकी सच्चाई किसी भी हत्या से अधिक खतरनाक है। इस जटिल पहेली को सुलझाने के लिए मैदान में उतरते हैं मेजर बलवंत, जिन्हें न केवल एक खूनी का सामना करना है, बल्कि उन डरावनी कहानियों का भी, जिन पर लोग वर्षों से विश्वास करते आए हैं।
रहस्य, रोमांच, मनोवैज्ञानिक सस्पेंस और अप्रत्याशित मोड़ों से भरपूर “काला शाल” मेजर बलवंत सीरीज का एक ऐसा रोमांचक उपन्यास है, जो पाठकों को अंतिम खुलासे तक अनुमान लगाते रहने पर मजबूर कर देता है।
एक पुरानी हवेली…
एक जन्मदिन की रात…
और बारह वर्षों से दफन एक ऐसा रहस्य, जो अचानक फिर से जाग उठता है।
जिस रात मशहूर अभिनेत्री की रहस्यमय मृत्यु हुई थी, उसी तारीख को हवेली में फिर खून बहता है। हर हत्या के साथ उभरते हैं नए सवाल—चेहरे पर काला नकाब, सीने में धंसी छुरी और दीवारों पर बिखरे ऐसे संकेत, जो किसी भयावह अतीत की ओर इशारा करते हैं।
क्या यह सचमुच सदियों पुरानी आम्रपाली की आत्मा का प्रतिशोध है?
या फिर कोई शातिर अपराधी अंधविश्वास की आड़ में अपना खूनी खेल खेल रहा है?
जब हवेली का हर निवासी शक के घेरे में हो, हर मुस्कान के पीछे छल छिपा हो और हर चेहरा किसी न किसी रहस्य को ढके बैठा हो, तब सच और भ्रम के बीच की रेखा धुंधली होने लगती है।
रहस्य की परतें खुलने लगती हैं तो सामने आते हैं विश्वासघात, लालच, अधूरी महत्वाकांक्षाएँ और ऐसे रिश्ते, जिनकी सच्चाई किसी भी हत्या से अधिक खतरनाक है। इस जटिल पहेली को सुलझाने के लिए मैदान में उतरते हैं मेजर बलवंत, जिन्हें न केवल एक खूनी का सामना करना है, बल्कि उन डरावनी कहानियों का भी, जिन पर लोग वर्षों से विश्वास करते आए हैं।
रहस्य, रोमांच, मनोवैज्ञानिक सस्पेंस और अप्रत्याशित मोड़ों से भरपूर “काला शाल” मेजर बलवंत सीरीज का एक ऐसा रोमांचक उपन्यास है, जो पाठकों को अंतिम खुलासे तक अनुमान लगाते रहने पर मजबूर कर देता है।
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