Description
भ्रष्टाचार वह दीमक है जिसने भारतीय सरकारी, ग़ैरसरकारी व सामाजिक व्यवस्था को खोखला करने का बीड़ा उठाया हुआ है। जहाँ सरकारी तंत्र में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार फ़ैला हुआ है वहीं इस तंत्र में चंद कारसाज़, यानी कुछ अधिकारी और कर्मचारी, ऐसे भी हैं जो चुपचाप स्वयं मिट जाने की सीमा तक अपनी ईमानदारी की तलवार से दीमक को साफ़ करते रहने के लिए कमर कसे हुए हैं। हमारी व्यवस्था जो कुछ मंथर गति से आगे बढ़ रही है उसके पीछे घर परिवार, साथी अधिकारी, कर्मचारी, राजनीतिक पक्ष विपक्ष सभी का विरोध व ठोकरे सहते यह कारसाज़ (Kaarsaaz) ही हैं।
पढ़ें निर्भीक लेखक संजय अग्निहोत्री की बेबाक कलम से निकली ऐसे ही एक कारसाज़ (Kaarsaaz) की दास्तां
कारसाज़: द साइलेंट डिफरेंस मेकर (Kaarsaaz: The Silent Difference Maker)

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