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दोस्ती, प्रेम, धोखा, राजनीतिक दाँव-पेंच के किस्से कहती जनता स्टोर एक शिक्षण-संस्थान के नए युवा की नई ज़ुबान और नई रफ़्तार में लिखी कहानी है। बड़े स्तर की राजनीति द्वारा छात्रशक्ति का दुरुपयोग, छात्रों के अपने जातिगत अहंकारों की लड़ाई, प्रेम त्रिकोण, छात्र-चुनाव, हिंसा, साज़िशें, हत्याएँ, बलात्कार जैसे इन सभी कहानियों के स्थायी चित्र बन गए हैं, वह सब इस उपन्यास में भी है और उसे इतने प्रामाणिक ढंग से चित्रित किया गया है कि ख़ुद ही हम यह सोचने पर बाध्य हो जाते हैं कि कहीं अस्मिताओं की पहचान और विचार के विकेन्द्रीकरण को हमने सोवियत संघ के विघटन के बाद जितनी उम्मीद से देखा था, कहीं वह कोई बहुत बड़ा भटकाव तो नहीं था?
ते हैं।
| Weight | 250 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 17 × 2 cm |
| Format | पेपरबैक |
| Language | हिंदी |
| Number of Pages | 207 |
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दोस्ती, प्रेम, धोखा, राजनीतिक दाँव-पेंच के किस्से कहती जनता स्टोर एक शिक्षण-संस्थान के नए युवा की नई ज़ुबान और नई रफ़्तार में लिखी कहानी है। बड़े स्तर की राजनीति द्वारा छात्रशक्ति का दुरुपयोग, छात्रों के अपने जातिगत अहंकारों की लड़ाई, प्रेम त्रिकोण, छात्र-चुनाव, हिंसा, साज़िशें, हत्याएँ, बलात्कार जैसे इन सभी कहानियों के स्थायी चित्र बन गए हैं, वह सब इस उपन्यास में भी है और उसे इतने प्रामाणिक ढंग से चित्रित किया गया है कि ख़ुद ही हम यह सोचने पर बाध्य हो जाते हैं कि कहीं अस्मिताओं की पहचान और विचार के विकेन्द्रीकरण को हमने सोवियत संघ के विघटन के बाद जितनी उम्मीद से देखा था, कहीं वह कोई बहुत बड़ा भटकाव तो नहीं था?
ते हैं।
| Weight | 250 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 17 × 2 cm |
| Format | पेपरबैक |
| Language | हिंदी |
| Number of Pages | 207 |
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Nice
Satisfied
Printing of novel so dim so difficult to reading
Excellent experience
Not on time. Lazy delivery, no as promised while pre book.