Additional information
| Weight | 400 g |
|---|---|
| Dimensions | 24 × 20 × 5 cm |
| Format | पेपरबैक |
| Language | हिंदी |
| संस्करण | प्रथम, 2019 |
| Number of Pages | 399 |

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Hum Nahin Change Bura Na Koy
आत्मकथा भाग-2
लोकप्रिय साहित्य हिन्दी अकादमिक जगत के लिए मूल्यांकन की चीज़ कभी नहीं रहा, लेकिन हिन्दी के शिक्षित समाज का बड़ा तबका उसके ही असर में रहता आया है। हमें लोकप्रिय साहित्य का बाज़ार तो दिखता है, उसकी आन्तरिक दुनिया की बनावट नहीं दिखती। ऐसे में लोकप्रिय लेखन के एक बड़े नाम सुरेन्द्र मोहन पाठक आत्मकथा लिखकर बहस और मूल्यांकन की एक नई ज़मीन तैयार कर रहे हैं। उनका अपना जीवन है भी ऐसा जिसके बारे में दूसरों को दिलचस्पी हो! कान में सुनने की मशीन, आँखों पर मोटे लेंस का चश्मा लगाए, नौकरी करते हुए, तीन सौ से अधिक सफल उपन्यास लिखने वाले पाठक जी अपने ही रचे किसी अमर किरदार जैसे आकर्षक व्यक्तित्व वाले हैं। लेखन के तौर-तरीक़े और ख़ुद के लिए तय किया हुआ अनुशासन अचरजकारी! लाखों पाठकों की रुचि को समझना, उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने के दबाव को धता बताते हुए उनके दिमाग़ पर क़ब्ज़ा जमाना—यह कोई मामूली बात नहीं है। इन सब बातों को समझने में एक औज़ार का काम कर सकती है यह आत्मकथा—हम नहीं चंगे बुरा न कोय।
| Weight | 400 g |
|---|---|
| Dimensions | 24 × 20 × 5 cm |
| Format | पेपरबैक |
| Language | हिंदी |
| संस्करण | प्रथम, 2019 |
| Number of Pages | 399 |
| Weight | 400 g |
|---|---|
| Dimensions | 24 × 20 × 5 cm |
| Format | पेपरबैक |
| Language | हिंदी |
| संस्करण | प्रथम, 2019 |
| Number of Pages | 399 |
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