Himmat Jaunpuri
Himmat Jaunpuri | हिम्मत जौनपुरी
हिम्मत जौनपुरी एक ऐसे निहत्थे किरदार की कहानी है जो जीवन-भर जीने का हक़ माँगता रहा, सपने बुनता रहा लेकिन आत्मा की बेचैनी और सपनों के संघर्ष में उलझकर रह गया। यह बम्बई के उस फ़िल्मी माहौल की कहानी भी है जिसकी भूल-भुलैया और चमक-दमक आदमी को भटका देती है और वह कहीं का नहीं रह जाता।
राही मासूम रज़ा की सिद्ध शैली का ही कमाल है कि इसमें केवल सपनों या भूल-भुलैया का तिलस्म ही नहीं बल्कि उस समाज की भी कहानी कही गई है, जिसमें जमुना चाहकर भी अपनी असली ज़िन्दगी बसर नहीं कर पाती। एक तरफ़ इसमें व्यंग्यात्मक शैली में सामाजिक खोखलेपन को उजागर किया गया है तो दूसरी तरफ़ भावनाओं की उत्ताल लहरों की नक़्क़ाशी भी की गई है।
राही मासूम रज़ा साहब ने हिम्मत जौनपुरी को माध्यम बनाकर एक सामान्य व्यक्ति के टूटने और बिखरने को जिस नए अन्दाज़ और तेवर के साथ लिखा है वह उनके अन्य उपन्यासों से बिल्कुल अलग है।
| Weight | 200 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 15 × 2 cm |
| Format | पेपरबैक |
| Language | हिंदी |
| संस्करण | 2023 |
| Number of Pages | 143 |
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Himmat Jaunpuri | हिम्मत जौनपुरी
हिम्मत जौनपुरी एक ऐसे निहत्थे किरदार की कहानी है जो जीवन-भर जीने का हक़ माँगता रहा, सपने बुनता रहा लेकिन आत्मा की बेचैनी और सपनों के संघर्ष में उलझकर रह गया। यह बम्बई के उस फ़िल्मी माहौल की कहानी भी है जिसकी भूल-भुलैया और चमक-दमक आदमी को भटका देती है और वह कहीं का नहीं रह जाता।
राही मासूम रज़ा की सिद्ध शैली का ही कमाल है कि इसमें केवल सपनों या भूल-भुलैया का तिलस्म ही नहीं बल्कि उस समाज की भी कहानी कही गई है, जिसमें जमुना चाहकर भी अपनी असली ज़िन्दगी बसर नहीं कर पाती। एक तरफ़ इसमें व्यंग्यात्मक शैली में सामाजिक खोखलेपन को उजागर किया गया है तो दूसरी तरफ़ भावनाओं की उत्ताल लहरों की नक़्क़ाशी भी की गई है।
राही मासूम रज़ा साहब ने हिम्मत जौनपुरी को माध्यम बनाकर एक सामान्य व्यक्ति के टूटने और बिखरने को जिस नए अन्दाज़ और तेवर के साथ लिखा है वह उनके अन्य उपन्यासों से बिल्कुल अलग है।
Weight 200 g Dimensions 22 × 15 × 2 cm Format पेपरबैक
Language हिंदी
संस्करण 2023
Number of Pages 143 Q & A
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