Gulra Ke Baba
गुलरा के बाबा | Gulra Ke Baba
मार्कण्डेय की प्रतिनिधि कहानियाँ
‘गुलरा के बाबा’ संग्रह की कहानियों का समय आज़ादी के ठीक बाद का है। सामाजिक सन्दर्भों का वास्तविक चित्रण कहानियों का प्रमुख तत्त्व है। जीवन का सुख-दु:ख ही कहानियों का विषय है। भारत के नए निर्माताओं के सामने देश की वास्तविक तस्वीर कहानियों में प्रस्तुत की गई है। कहानियों में कोमल संवेदनाएँ, लुभावनी भाषा के साथ आक्रोश से भरी तीखी सामाजिक दृष्टि भी है। गाँव के जीवन का नया धरातल इस संग्रह का प्राण है। यहाँ जीवन की वास्तविकता के साथ उसमें परिवर्तन की आकांक्षा साथ-साथ है।
| Weight | 150 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 15 × 2 cm |
| Format | पेपरबैक |
| Language | हिंदी |
| संस्करण | द्वितीय, 2024 |
| Number of Pages | 140 |
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गुलरा के बाबा | Gulra Ke Baba
मार्कण्डेय की प्रतिनिधि कहानियाँ
‘गुलरा के बाबा’ संग्रह की कहानियों का समय आज़ादी के ठीक बाद का है। सामाजिक सन्दर्भों का वास्तविक चित्रण कहानियों का प्रमुख तत्त्व है। जीवन का सुख-दु:ख ही कहानियों का विषय है। भारत के नए निर्माताओं के सामने देश की वास्तविक तस्वीर कहानियों में प्रस्तुत की गई है। कहानियों में कोमल संवेदनाएँ, लुभावनी भाषा के साथ आक्रोश से भरी तीखी सामाजिक दृष्टि भी है। गाँव के जीवन का नया धरातल इस संग्रह का प्राण है। यहाँ जीवन की वास्तविकता के साथ उसमें परिवर्तन की आकांक्षा साथ-साथ है।
Weight 150 g Dimensions 22 × 15 × 2 cm Format पेपरबैक
Language हिंदी
संस्करण द्वितीय, 2024
Number of Pages 140 Q & A
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