
Ek Karod Ka Joota - -
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Ek Karod Ka Joota
मोती आवतरमानी को उसके पिता गोपाल यशवंतराय आवतरमानी ने बचपन में एक बेशकीमती सफ़ेद जूते के बारे में बताया था, जिसमें वे हीरे छुपा कर रखते थे। दिवाली की उस रात को जिस दिन उसके पिता उसे हमेशा के लिए छोड़ कर गए थे, उस दिन भी उन्होंने सफ़ेद जूते पहने हुए थे। कोई कहता था कि क्योंकि उसने गबन किया था, इसलिए वह कहीं छुपा हुआ है, तो कोई कहता था कि वह कब का मर-खप चुका है। आखिर गोपाल यशवंत अवतारमानी कहां गायब हो गया? वह जिंदा था या मर गया? ऐसे रहस्यमय प्रश्नों के उत्तर तो सुरेन्द्र मोहन पाठक का यह उपन्यास एक करोड़ का जूता ही दे सकता है।
| Weight | 250 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 17 × 2 cm |
| Format | पेपरबैक |
| Language | हिंदी |
| Number of Pages | 207 |
Ek Karod Ka Joota
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मोती आवतरमानी को उसके पिता गोपाल यशवंतराय आवतरमानी ने बचपन में एक बेशकीमती सफ़ेद जूते के बारे में बताया था, जिसमें वे हीरे छुपा कर रखते थे। दिवाली की उस रात को जिस दिन उसके पिता उसे हमेशा के लिए छोड़ कर गए थे, उस दिन भी उन्होंने सफ़ेद जूते पहने हुए थे। कोई कहता था कि क्योंकि उसने गबन किया था, इसलिए वह कहीं छुपा हुआ है, तो कोई कहता था कि वह कब का मर-खप चुका है। आखिर गोपाल यशवंत अवतारमानी कहां गायब हो गया? वह जिंदा था या मर गया? ऐसे रहस्यमय प्रश्नों के उत्तर तो सुरेन्द्र मोहन पाठक का यह उपन्यास एक करोड़ का जूता ही दे सकता है।
| Weight | 250 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 17 × 2 cm |
| Format | पेपरबैक |
| Language | हिंदी |
| Number of Pages | 207 |
Ek Karod Ka Joota
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