
Dubai Gang-Hard Bound - Surender Mohan Pathak-
Original price was: ₹399.00.₹359.00Current price is: ₹359.00. (-10%)

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| 5 star | 66 | 66% |
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Dubai Gang-Hard Bound
Dubai Gang | दुबई गैंग
हालात की गर्दिश
ने जीत सिंह का कभी पीछा न छोड़ा।
इस बार बमय सामान एक पैसेंजर पकड़ा
तो मंजिल पर पहुँचकर पैसेंजर गायब हो गया।
सामान की वजह से थाने में हाजिरी भरनी पड़ी।
वहाँ सामान का भेद खुला तो प्राण कांप गए।
फिर उसके साथ बद् से बद्तर हुआ, बद्तरीन हुआ।
ऐसा ही था जीत सिंह उर्फ जीता
जो कभी कुछ न जीता फिर भी नाम जीता
दुबई गैंग
टॉप मिस्ट्री राइटर
सुरेन्द्र मोहन पाठक
का नवीनतम उपन्यास
साहित्य विमर्श प्रकाशन
की गौरवशाली प्रस्तुति
| Weight | 450 g |
|---|---|
| Dimensions | 23 × 18 × 5 cm |
| Format | हार्ड बाउन्ड |
| Language | हिंदी |
| Number of Pages | 272 |
Dubai Gang-Hard Bound
Dubai Gang-Hard Bound
| 5 star | 67 | 67% |
| 4 star | 20 | 20% |
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It was great experience buying the book from this site and the customer service is also great. What impressed me the most was that you personal interest to ensure that my product was delivered to me. when it became apparent that my product won’t be delivered on time due to the laziness of the delivery service then you ensured delivery of another copy to me within two days. I would definitely recommend it to others. Thank-you.
सत्या व्यास जी वैसे तो प्रेम, सामाजिक लेखन करते हैं पर पहली बार थ्रिलर उपन्यास लिखा और क्या खूब लिखा। एक लाइन में कहूं तो कमाल लिखा है। मुझ जैसे नए थ्रिलर लेखक को भी बहुत कुछ सीखने को मिला। सर को अनुराग कुमार जीनियस की ओर से बहुत बहुत शुभकामनाएं।
Customer service and delivery both are good
बढ़िया है वैसे, बस अगर किसी का नम्बर ना लगे तो whatsapp पर भी काल कर लें एक बार …
As it was my first order from the site so obviously I was expecting a early or on time delivery but the product delivered late, yes but it’s a good thing that I got notified via mail. Will shop more . Thanks
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Dubai Gang | दुबई गैंग
हालात की गर्दिश
ने जीत सिंह का कभी पीछा न छोड़ा।
इस बार बमय सामान एक पैसेंजर पकड़ा
तो मंजिल पर पहुँचकर पैसेंजर गायब हो गया।
सामान की वजह से थाने में हाजिरी भरनी पड़ी।
वहाँ सामान का भेद खुला तो प्राण कांप गए।
फिर उसके साथ बद् से बद्तर हुआ, बद्तरीन हुआ।
ऐसा ही था जीत सिंह उर्फ जीता
जो कभी कुछ न जीता फिर भी नाम जीता
दुबई गैंग
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सुरेन्द्र मोहन पाठक
का नवीनतम उपन्यास
साहित्य विमर्श प्रकाशन
की गौरवशाली प्रस्तुति
| Weight | 450 g |
|---|---|
| Dimensions | 23 × 18 × 5 cm |
| Format | हार्ड बाउन्ड |
| Language | हिंदी |
| Number of Pages | 272 |
Dubai Gang-Hard Bound

Bore. Repetitive. Same old plot. Nothing new.
बहुत अच्छी किताब, हार्ड बाउंड कमालका। साहित्य विमर्श को अभिनंदन. प्रिय पाठक साहब ने बाकमाल लिखा है। कमाल की लेखनी. शीर्ष पर जीता.दो भाग में उपन्यास होता तो ओरभी मजा आता।pathak sir का ’10 लाख’ रिप्रिंट हार्ड बाउंड होजाये…….
आवरण पे अमीर सिंह के द्वारा लिखा अच्छा लगा।
Abhi padhna shuru kiya hai, maloom hai ki maja hi aana hai
शानदार