एक तूफानी रात…
सड़क किनारे खड़ी एक रहस्यमयी कार…
बेहोश ड्राइवर… और गायब सवार!
इसी बीच चलती ट्रेन से एक युवक रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो जाता है, जबकि दूसरी ट्रेन में एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक की हत्या पूरे देश को हिला देती है। देखने में अलग-अलग लगने वाली ये घटनाएँ क्या वास्तव में एक ही खतरनाक रहस्य की कड़ियाँ हैं?
जांच शुरू होती है तो सामने आते हैं ऐसे सुराग, जिनका कोई सिर-पैर नहीं दिखता। घटनास्थलों पर बार-बार मिलते हैं कुछ पुराने सिक्के—ऐसे सिक्के, जो मानो किसी गुप्त संदेश को अपने भीतर छिपाए हुए हों। हर नया सुराग एक नए सवाल को जन्म देता है, और हर जवाब रहस्य को और गहरा कर देता है।
जब पुलिस और खुफिया एजेंसियाँ अंधेरे में टटोल रही होती हैं, तब इस पेचीदा पहेली को सुलझाने के लिए मैदान में उतरते हैं मेजर बलवंत। लेकिन इस बार उनका मुकाबला केवल एक अपराधी से नहीं, बल्कि ऐसे दिमाग से है जो अपनी हर चाल महीनों पहले सोच चुका है।
क्या गायब युवक और मृत वैज्ञानिक के बीच कोई संबंध है?
क्यों हर घटना के पीछे वही रहस्यमयी सिक्के दिखाई देते हैं?
और उन सिक्कों में आखिर ऐसा कौन-सा राज छिपा है, जिसके लिए लोग जान लेने और जान देने पर उतारू हैं?
रहस्य, रोमांच, जासूसी कौशल और चौंका देने वाले मोड़ों से भरपूर “बोलते सिक्के” मेजर बलवंत सीरीज का एक रोमांचकारी उपन्यास है, जहाँ हर सिक्का एक सुराग है और हर सुराग मौत के करीब ले जाता है। अंतिम पृष्ठ तक पाठक यह अनुमान लगाने की कोशिश करता रहता है कि आखिर उन “बोलते सिक्कों” की असली कहानी क्या है।
एक तूफानी रात…
सड़क किनारे खड़ी एक रहस्यमयी कार…
बेहोश ड्राइवर… और गायब सवार!
इसी बीच चलती ट्रेन से एक युवक रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो जाता है, जबकि दूसरी ट्रेन में एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक की हत्या पूरे देश को हिला देती है। देखने में अलग-अलग लगने वाली ये घटनाएँ क्या वास्तव में एक ही खतरनाक रहस्य की कड़ियाँ हैं?
जांच शुरू होती है तो सामने आते हैं ऐसे सुराग, जिनका कोई सिर-पैर नहीं दिखता। घटनास्थलों पर बार-बार मिलते हैं कुछ पुराने सिक्के—ऐसे सिक्के, जो मानो किसी गुप्त संदेश को अपने भीतर छिपाए हुए हों। हर नया सुराग एक नए सवाल को जन्म देता है, और हर जवाब रहस्य को और गहरा कर देता है।
जब पुलिस और खुफिया एजेंसियाँ अंधेरे में टटोल रही होती हैं, तब इस पेचीदा पहेली को सुलझाने के लिए मैदान में उतरते हैं मेजर बलवंत। लेकिन इस बार उनका मुकाबला केवल एक अपराधी से नहीं, बल्कि ऐसे दिमाग से है जो अपनी हर चाल महीनों पहले सोच चुका है।
क्या गायब युवक और मृत वैज्ञानिक के बीच कोई संबंध है?
क्यों हर घटना के पीछे वही रहस्यमयी सिक्के दिखाई देते हैं?
और उन सिक्कों में आखिर ऐसा कौन-सा राज छिपा है, जिसके लिए लोग जान लेने और जान देने पर उतारू हैं?
रहस्य, रोमांच, जासूसी कौशल और चौंका देने वाले मोड़ों से भरपूर “बोलते सिक्के” मेजर बलवंत सीरीज का एक रोमांचकारी उपन्यास है, जहाँ हर सिक्का एक सुराग है और हर सुराग मौत के करीब ले जाता है। अंतिम पृष्ठ तक पाठक यह अनुमान लगाने की कोशिश करता रहता है कि आखिर उन “बोलते सिक्कों” की असली कहानी क्या है।
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