Description
प्रसिद्ध व्यक्तियों के शब्दों में अक्सर इतिहास की गूँज, बुद्धिमत्ता की चमक और प्रेरणा की रोशनी होती है। लेकिन कभी-कभी, ये ही शब्द शरारत, नटखटपन और बड़बोलेपन की दिलचस्प झलक भी दिखाते हैं। यह पुस्तक उन्हीं चुटीले, तीखे और कभी-कभी हैरान कर देने वाले बयानों का संकलन है, जो महान नेताओं, कलाकारों, लेखकों, वैज्ञानिकों और अन्य प्रतिष्ठित हस्तियों के मुख से अनायास ही फूट पड़े। इन बड़बोले-बिगड़े बोलों (Bigde Bol) को संकलित कर पुस्तक का रूप देने का काम किया है, सुप्रसिद्ध और बहुपठित लेखक ‘सुरेन्द्र मोहन पाठक’ साहब ने!
कुछ कथन हास्य से भरपूर हैं, तो कुछ व्यंग्य का तीखा पुट लिए हुए हैं। कहीं कोई खुलकर सच कहने की जिद पर अड़ा है, तो कहीं कोई शब्दों के खेल से चमत्कृत कर रहा है। इस संकलन में आप पाएँगे कि कैसे बुद्धिमान और प्रभावशाली लोग भी कभी-कभी अपने शब्दों से मज़ाकिया, उद्दंड या अजीबोगरीब छवि बना लेते हैं।
तो तैयार हो जाइए, उन बयानों के सफर पर जाने के लिए, जो न केवल मुस्कान लाएँगे, बल्कि आपको सोचने पर भी मजबूर कर देंगे!

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