‘आख्यान और नयी कविता’ आधुनिक हिंदी कविता में आख्यान की अर्थपूर्ण उपस्थिति और उसके बदलते रूपों की पड़ताल करने वाली महत्त्वपूर्ण आलोचनात्मक कृति है। ‘नयी कविता’ से लेकर ‘समकालीन कविता’ तक बौद्धिक एवं वैचारिक विमर्शों के साथ बदलते आ रहे सामाजिक-सांस्कृतिक-राजनैतिक यथार्थ को कविता में किस तरह कथा, वृत्तांत और इतिहास के रूप में रूपायित किया गया है? स्मृति , मिथक, विस्थापन और वैश्वीकरण की जटिलताओं से उलझती यह पुस्तक इसी प्रश्न का उत्तर खोजते हुए आधुनिक हिंदी कविता को आख्यानपरक दृष्टि से समझने का अवसर देती है। दिलीप शाक्य कवि, आलोचक और सिनेमा-विशेषज्ञ के रूप में हिंदी साहित्य-जगत में पहचाने जाते हैं I उनकी पूर्व प्रकाशित कृतियाँ उन्हें नयी और समकालीन कविता का विश्वसनीय अध्येता बनाती हैं ।
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