कलकत्ता की भीड़, रहस्यमय हत्याएँ और एक ऐसा अपराधी जो इंसान होते हुए भी जानवर से ज़्यादा खतरनाक है। आदमखोर जानवर में जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा जासूस जगत को एक ऐसे मामले में उलझा देते हैं, जहाँ लालच, विश्वासघात और अंधी आस्था मिलकर मौत का खेल रचते हैं। एक योगी की हत्या की साज़िश, अदृश्य शत्रु और हर कदम पर मंडराता खतरा—यह उपन्यास केवल रहस्य नहीं, बल्कि मानव स्वभाव के उस अंधेरे चेहरे की पड़ताल है, जहाँ आदमी खुद ही आदमी का सबसे बड़ा शिकारी बन जाता है।
कलकत्ता की भीड़, रहस्यमय हत्याएँ और एक ऐसा अपराधी जो इंसान होते हुए भी जानवर से ज़्यादा खतरनाक है। आदमखोर जानवर में जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा जासूस जगत को एक ऐसे मामले में उलझा देते हैं, जहाँ लालच, विश्वासघात और अंधी आस्था मिलकर मौत का खेल रचते हैं। एक योगी की हत्या की साज़िश, अदृश्य शत्रु और हर कदम पर मंडराता खतरा—यह उपन्यास केवल रहस्य नहीं, बल्कि मानव स्वभाव के उस अंधेरे चेहरे की पड़ताल है, जहाँ आदमी खुद ही आदमी का सबसे बड़ा शिकारी बन जाता है।
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